SanatanBodh का पंचांग हम ख़ुद गणना करते हैं। सूर्य और चंद्रमा की स्थिति astronomy-engine से निकलती है, नक्षत्र, योग और राशि के लिए लाहिड़ी अयनांश लगता है, और दिन की तिथि वही मानी जाती है जो उस शहर में सूर्योदय के समय चल रही हो। तारीख़ें और समय Drik Panchang से मिलाए जाते हैं; तारीख़ अलग निकले या समय में 5 मिनट से ज़्यादा अंतर हो, तो वह हिस्सा प्रकाशित नहीं होता।
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
पंचांग के पाँचों अंग सूर्य और चंद्रमा की आकाश में स्थिति से बनते हैं। यह स्थिति हम astronomy-engine नाम की ओपन-सोर्स (MIT लाइसेंस) खगोल-गणना लाइब्रेरी से निकालते हैं। इसके लेखक के अनुसार इसकी गणनाएँ ±1 कला (arcminute) तक सटीक हैं और NOVAS तथा NASA-JPL Horizons जैसे मानक स्रोतों से जाँची गई हैं।
चंद्रमा सूर्य से एक कला आगे बढ़ने में लगभग दो मिनट लेता है, इसलिए स्थिति में एक कला का अंतर भी तिथि के अंत-समय में लगभग दो मिनट का अंतर बन जाता है। यही गणना आपके ब्राउज़र में भी चलती है, इसलिए शहर बदलते ही समय वहीं बदल जाते हैं।
अयनांश: सायन से निरयण
आधुनिक खगोल-गणना राशियों को वसंत-विषुव से मापती है (सायन), जबकि भारतीय पंचांग तारों पर टिकी राशियाँ लेते हैं (निरयण)। दोनों का अंतर अयनांश कहलाता है; पृथ्वी की धुरी के धीमे घूमने (अयन-चलन) से यह हर साल लगभग 50 विकला बढ़ता है।
हम लाहिड़ी (चित्रापक्ष) अयनांश लेते हैं, जो भारत में सबसे अधिक प्रचलित है। इसका नाम खगोलशास्त्री निर्मल चंद्र लाहिड़ी पर है, जो भारत सरकार (CSIR) की कैलेंडर सुधार समिति (1952–55, अध्यक्ष मेघनाद साहा) के सदस्य थे। वर्ष 2000 में इसका मान लगभग 23°51′50″ था। हम ठीक वही मान लेते हैं जो Drik Panchang अपने दैनिक पंचांग पर छापता है (30 सितंबर 2026 को 24.2374°)।
तिथि और करण सूर्य-चंद्र के बीच की दूरी से बनते हैं, इसलिए उन पर अयनांश का असर नहीं पड़ता। नक्षत्र, योग, राशि और संक्रांति (और इसलिए मास का नाम) अयनांश पर निर्भर हैं।
पंचांग के पाँच अंग
| अंग | कैसे निकलता है | कुल |
|---|---|---|
| तिथि | चंद्रमा सूर्य से जितना आगे है, उसका हर 12° एक तिथि | 30 (15 शुक्ल, 15 कृष्ण) |
| नक्षत्र | चंद्रमा की निरयण स्थिति का हर 13°20′ | 27 |
| योग | सूर्य और चंद्रमा की निरयण स्थितियों का जोड़, हर 13°20′ | 27 |
| करण | आधी तिथि (6°); सात चर करण बारी-बारी से, चार स्थिर करण अमावस्या के आसपास | 60 खाने, 11 करण |
| वार | सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक का दिन | 7 |
उदय तिथि: किसी दिन की तिथि, नक्षत्र, योग और करण वे माने जाते हैं जो उस शहर में सूर्योदय के समय चल रहे हों। उनके ख़त्म होने का समय भी दिया जाता है, क्योंकि कई बार एक ही दिन में दो तिथियाँ पड़ती हैं।
व्रत और त्योहार के नियम अलग हो सकते हैं। जैसे श्राद्ध उस दिन होता है जिस दिन अपराह्न में वह तिथि हो, और दिवाली की लक्ष्मी पूजा उस शाम होती है जब प्रदोष काल में अमावस्या हो। हर त्योहार का नियम उसके पन्ने पर स्रोत सहित दिया है।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय
सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखता है; वायुमंडल में किरणों के मुड़ने (अपवर्तन) का मानक सुधार, 34 कला, जोड़ा जाता है। गणना शहर के केंद्र के अक्षांश-देशांतर पर, समुद्र-तल की ऊँचाई मानकर होती है। चंद्रोदय और चंद्रास्त में चंद्रमा का केंद्र क्षितिज पर लिया जाता है, बिना अपवर्तन के; इस रीति से हमारे चंद्रोदय Drik Panchang से एक मिनट के भीतर मिलते हैं।
शहर का बड़ा असर होता है: 28 सितंबर 2026 को गुवाहाटी में सूर्योदय 5:13 बजे और अहमदाबाद में 6:30 बजे है। पहाड़, ऊँची इमारतें, आपकी ऊँचाई और मौसम से असली सूर्योदय एक-दो मिनट आगे-पीछे दिख सकता है।
मास: अमांत और पूर्णिमांत
चंद्र मास अमावस्या से अमावस्या तक गिना जाता है (अमांत)। मास का नाम उस राशि से तय होता है जिसमें सूर्य उस मास के दौरान प्रवेश करता है (संक्रांति); जैसे जिस मास में सूर्य मेष में जाता है, वह चैत्र है। जिस चंद्र मास में कोई संक्रांति न हो, वह अधिक मास होता है।
उत्तर भारत में मास पूर्णिमा पर बदलता है (पूर्णिमांत), इसलिए वहाँ कृष्ण पक्ष का नाम अमांत से एक मास आगे होता है। महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में अमांत चलता है। हमारे पंचांग पन्ने दोनों नाम देते हैं।
मुहूर्त के नियम
दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक और रात सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक मानी जाती है; दोनों को 15-15 मुहूर्तों में बाँटा जाता है।
- राहु काल, यमगण्ड, गुलिक
- दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) के आठ बराबर भागों में से वार के अनुसार तय एक भाग
- चौघड़िया
- दिन और रात के आठ-आठ भाग; दिन का पहला चौघड़िया वार के स्वामी का
- अभिजित और विजय मुहूर्त
- दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ और ग्यारहवाँ
- ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले वाली रात के 15 मुहूर्तों में चौदहवाँ
- कुतुप, रौहिण, अपराह्न
- दिन का आठवाँ और नौवाँ मुहूर्त; अपराह्न दिन के पाँच भागों में चौथा
- प्रदोष और निशीथ काल
- प्रदोष सूर्यास्त के बाद रात का पहला पाँचवाँ भाग; निशीथ रात के 15 मुहूर्तों में आठवाँ
Drik Panchang से मिलान
हर नए त्योहार-पन्ने और मुहूर्त के नियम को नई दिल्ली के लिए Drik Panchang से मिलाया जाता है, और कुछ त्योहारों को मुंबई और वाराणसी के लिए भी। अब तक के मिलान में सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय एक मिनट के भीतर मिलते हैं; तिथि के अंत-समय हमारे यहाँ लगभग 2 मिनट बाद आते हैं।
त्योहार की तारीख़ Drik से अलग निकले, या कोई समय 5 मिनट से ज़्यादा अलग हो, तो वह हिस्सा प्रकाशित नहीं होता; पहले कारण ढूँढा जाता है।
पंचांगों में अंतर क्यों होता है
- गणना की पद्धति: पारंपरिक सूत्रों (वाक्य या पुराने सिद्धांत-ग्रंथों) से बने पंचांगों के समय आधुनिक खगोलीय स्थिति पर बने (दृक्) पंचांगों से अलग हो सकते हैं।
- अयनांश: दूसरा अयनांश लेने से नक्षत्र, योग और संक्रांति के समय बदल जाते हैं।
- सूर्योदय की परिभाषा: कुछ पंचांग सूर्य का केंद्र लेते हैं, कुछ ऊपरी किनारा; कुछ अपवर्तन नहीं जोड़ते।
- स्थान: हर समय शहर के हिसाब से बदलता है।
- सम्प्रदाय और क्षेत्र: स्मार्त और वैष्णव एकादशी कभी-कभी अलग दिन पड़ती है, और क्षेत्रीय रीतियाँ अलग हो सकती हैं, जैसे तमिलनाडु में दीपावली नरक चतुर्दशी की सुबह मनाई जाती है।
व्रत, संकल्प और संस्कार के लिए अपने परिवार के पुरोहित या स्थानीय पंचांग की बात मानें। हम कुंडली, राशिफल या भविष्यवाणी नहीं देते; पंचांग यहाँ केवल तिथि और समय की जानकारी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
SanatanBodh का पंचांग किस अयनांश पर आधारित है?
लाहिड़ी (चित्रापक्ष) अयनांश पर, जो भारत में सबसे अधिक प्रचलित है। इससे नक्षत्र, योग, राशि और संक्रांति तय होते हैं; तिथि और करण पर इसका असर नहीं पड़ता।
आज की तिथि कैसे तय होती है?
आपके शहर में सूर्योदय के समय जो तिथि चल रही हो, वही उस दिन की तिथि है (उदय तिथि)। उसके ख़त्म होने का समय भी दिया जाता है, क्योंकि अक्सर दिन में ही दूसरी तिथि शुरू हो जाती है।
SanatanBodh और Drik Panchang के समय में एक-दो मिनट का अंतर क्यों होता है?
सूर्य-चंद्र की गणना के मॉडल और अयनांश लगाने के तरीके़ में छोटे अंतर से। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय एक मिनट के भीतर मिलते हैं; तिथि के अंत-समय हमारे यहाँ लगभग 2 मिनट बाद आते हैं। 5 मिनट से ज़्यादा अंतर वाला समय हम प्रकाशित नहीं करते।
क्या हर शहर का पंचांग अलग होता है?
हाँ। सूर्योदय, सूर्यास्त और हर मुहूर्त शहर के अक्षांश-देशांतर पर निर्भर है, और सूर्योदय बदलने से दिन की तिथि भी बदल सकती है। साइट पर 66 शहरों के पंचांग पन्ने हैं; समय भारतीय मानक समय में है।
स्रोत
- astronomy-engine (Don Cross), github.com/cosinekitty/astronomy: MIT लाइसेंस; ±1 कला तक सटीक, NOVAS और JPL Horizons से जाँचा गया
- Report of the Calendar Reform Committee (भारत सरकार, CSIR, 1955), archive.org
- CSIR: “Saga of Indian Calendar and IST”, csir.res.in (समिति के सदस्य, जिनमें एन. सी. लाहिड़ी)
- Drik Panchang (drikpanchang.com): नई दिल्ली, मुंबई और वाराणसी के लिए तिथि, सूर्योदय, चंद्रोदय और त्योहार-मुहूर्त का मिलान, 2026–27
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