जन्म की जानकारी
आपकी जानकारी इसी ब्राउज़र में रहती है; कहीं भेजी या सहेजी नहीं जाती। समय भारतीय मानक समय में।
जन्म कुंडली जन्म के क्षण पर आकाश का नक्शा है: उस समय जन्म-स्थान के पूर्वी क्षितिज पर कौन सी राशि उदय हो रही थी (लग्न), और सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु किस राशि में और लग्न से गिनकर किस भाव में थे। यह पन्ना जन्म की तारीख, समय और शहर से लग्न कुंडली (D1) और नवांश (D9) चार्ट उत्तर या दक्षिण भारतीय शैली में बनाता है, साथ में हर ग्रह का अंश, नक्षत्र-चरण, भाव और वक्री स्थिति। गणना इसी ब्राउज़र में होती है; यह भविष्यफल नहीं देता।
उत्तर और दक्षिण भारतीय चार्ट कैसे पढ़ें
दोनों शैलियों में ग्रहों की स्थिति एक ही है, बस खाने अलग ढंग से बने हैं। उत्तर भारतीय चार्ट में भाव अपनी जगह तय हैं: पहला भाव ऊपर बीच का हीरे जैसा खाना है और बाकी भाव उससे घड़ी की उल्टी दिशा में चलते हैं; हर खाने का छोटा अंक उसमें पड़ी राशि बताता है (1 मेष … 12 मीन)। दक्षिण भारतीय चार्ट में राशियाँ अपनी जगह तय हैं, जैसा नीचे के चित्र में है; परिणाम में लग्न का खाना रंगा होता है और उसके कोने में तिरछी रेखा होती है, और भाव उसी खाने से घड़ी की दिशा में गिने जाते हैं।
परिणाम में ग्रह छोटे नामों से लिखे हैं: सू सूर्य, चं चंद्र, मं मंगल, बु बुध, गु गुरु, शु शुक्र, श शनि, रा राहु, के केतु; (व) का अर्थ वक्री है। लग्न केसरिया रंग में “लग्न” लिखा है।
गणना कैसे होती है
जन्म के क्षण पर नौ ग्रहों की निरयण स्थिति (लाहिड़ी अयनांश) निकाली जाती है: सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि astronomy-engine से, राहु मध्यम चंद्र-पात (Meeus का सूत्र) से और केतु उससे ठीक सामने। जिस ग्रह का निरयण भोगांश उस समय घट रहा हो, वह वक्री लिखा जाता है। लग्न शहर के अक्षांश-देशांतर और उस क्षण के स्थानीय नाक्षत्र काल से निकलता है। भाव पूरी राशियों के हैं: लग्न की राशि पहला भाव, अगली राशि दूसरा, और इसी तरह। नवांश नीचे सवाल-जवाब में बताए पाराशरी नियम से निकलता है।
नौ ग्रहों को पाँच जन्म-समयों (1950 से 2075; नई दिल्ली, कोलकाता, मुंबई) पर Drik Panchang की निरयण ग्रह-स्थिति से मिलाया गया: हर ग्रह 35 विकला (35″) के भीतर मिला, इसलिए राशि, नक्षत्र-चरण, भाव और वक्री स्थिति सब एक रहे। लग्न में एक तय अंतर है: सात नमूनों में Drik Panchang का लग्न हमारी गणना से 11 से 18 कला आगे आया, जो जन्म समय के लगभग 50 सेकंड के बराबर है। हम खगोलीय नियम वाला लग्न रखते हैं, जो पूर्वी क्षितिज पर उदय हो रहे बिंदु की सीधी खोज से भी मिलता है। जन्म का समय लग्न बदलने के 5 मिनट या नवांश लग्न बदलने के 2 मिनट के भीतर हो तो परिणाम में चेतावनी दी जाती है। नवांश का Drik Panchang से अलग मिलान नहीं किया गया।
जन्म के समय का पूरा पंचांग (तिथि, वार, योग, करण, तिथि-जन्मदिन): जन्म पंचांग · पंचांग की पूरी विधि: पंचांग की गणना कैसे होती है
जन्म कुंडली: सवाल-जवाब
लग्न कुंडली क्या है?
लग्न कुंडली (D1, जिसे जन्म कुंडली या राशि चार्ट भी कहते हैं) जन्म के क्षण पर आकाश का नक्शा है। उस समय जन्म-स्थान के पूर्वी क्षितिज पर उदय हो रही राशि लग्न है; वही पहला भाव बनती है, अगली राशि दूसरा भाव, और इसी तरह बारह भाव। हर ग्रह उस राशि के भाव में लिखा जाता है जिसमें वह उस क्षण था। पृथ्वी के घूमने से लग्न लगभग हर दो घंटे में बदलता है, इसलिए इसके लिए जन्म का सही समय और शहर, दोनों चाहिए।
नवांश कुंडली (D9) क्या है?
हर राशि के 3°20′ के नौ बराबर भाग नवांश कहलाते हैं; बारह राशियों में कुल 108 नवांश। नवांश कुंडली में हर ग्रह उस नवांश की राशि में लिखा जाता है जिसमें वह हो। पाराशरी परंपरा में गिनती चर राशि (मेष, कर्क, तुला, मकर) में उसी राशि से, स्थिर राशि (वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुंभ) में उससे नौवीं राशि से और द्विस्वभाव राशि (मिथुन, कन्या, धनु, मीन) में पाँचवीं राशि से शुरू होती है। नवांश लग्न लगभग हर 13 मिनट में बदलता है, इसलिए यह जन्म समय पर और भी अधिक निर्भर है।
उत्तर भारतीय और दक्षिण भारतीय कुंडली में क्या अंतर है?
ग्रहों की स्थिति दोनों में एक ही है; केवल चित्र का ढंग अलग है। उत्तर भारतीय चार्ट में भाव अपनी जगह तय हैं: पहला भाव ऊपर बीच का हीरे जैसा खाना है, बाकी भाव उससे घड़ी की उल्टी दिशा में चलते हैं, और हर खाने का अंक उसमें पड़ी राशि बताता है। दक्षिण भारतीय चार्ट में राशियाँ तय हैं: ऊपर बाएँ से मीन, मेष, वृषभ, मिथुन, फिर घड़ी की दिशा में बाकी राशियाँ; लग्न का खाना तिरछी रेखा या “लग्न” लिखकर पहचाना जाता है और भाव उसी से घड़ी की दिशा में गिने जाते हैं। परिणाम में “उत्तर भारतीय / दक्षिण भारतीय” बटन से शैली बदलें।
यह कुंडली किसी दूसरे सॉफ़्टवेयर या पंचांग से अलग क्यों हो सकती है?
ग्रहों की स्थिति Drik Panchang से 1 कला (1′) के भीतर मिलती है। अंतर आम तौर पर चार बातों से आता है: अयनांश (हम लाहिड़ी लेते हैं; कुछ सॉफ़्टवेयर रमन या कृष्णमूर्ति अयनांश लेते हैं), राहु-केतु मध्यम या स्पष्ट (हम Drik की तरह मध्यम लेते हैं), भाव की पद्धति (यहाँ भाव पूरी राशियों के हैं; भाव चलित जैसी दूसरी पद्धति में कोई ग्रह पड़ोसी भाव में दिख सकता है), और लग्न: Drik Panchang का लग्न हमारी गणना से लगभग 11 से 18 कला आगे आता है, जो जन्म समय के लगभग 50 सेकंड के बराबर है। इसलिए लग्न बदलने के एक-दो मिनट के भीतर हुए जन्म में लग्न राशि अलग आ सकती है; ऐसे में परिणाम में चेतावनी दी जाती है।
जन्म का ठीक समय पता न हो तो?
तब लग्न कुंडली नहीं बनती: लग्न लगभग हर दो घंटे में और नवांश लग्न लगभग हर 13 मिनट में बदलता है। “समय पता नहीं” चुनने पर यह पन्ना दोपहर 12 बजे की ग्रह-स्थिति (राशि, अंश, नक्षत्र-चरण) बिना भाव के देता है, और बताता है कि उस दिन किस ग्रह की राशि बदली। चंद्रमा लगभग एक दिन में एक नक्षत्र पार करता है, इसलिए उसका नक्षत्र-चरण (और नाम अक्षर) दिन में बदल सकता है।
क्या यह निःशुल्क है? मेरी जानकारी कहाँ जाती है?
हाँ, यह निःशुल्क है और इसके लिए कोई खाता नहीं बनाना पड़ता। पूरी गणना इसी ब्राउज़र में होती है: जन्म की तारीख, समय और शहर न कहीं भेजे जाते हैं, न सहेजे जाते हैं। केवल चुनी हुई चार्ट शैली (उत्तर या दक्षिण भारतीय) इस ब्राउज़र में याद रखी जाती है। कुंडली अपने पास रखनी हो तो “PDF सेव करें / प्रिंट करें” से सेव कर लें।
क्या इसमें भविष्यफल, दोष या दशा है?
नहीं। यह पन्ना केवल गणना देता है: जन्म के क्षण पर लग्न और ग्रहों की स्थिति, खगोलीय गणित से। इसमें भविष्यफल, मांगलिक या कोई दूसरा दोष, दशा या उपाय नहीं हैं। कुंडली का विचार जानना हो तो यह PDF अपने पुरोहित या ज्योतिषी को दिखाएँ।
स्रोत
- Drik Panchang, निरयण ग्रह-स्थिति (Planetary Positions, Sidereal): नई दिल्ली 15 अगस्त 1990 और 1 जनवरी 1950, कोलकाता 26 जनवरी 2000, मुंबई 2 अक्टूबर 2026 और 20 मार्च 2075 के नौ ग्रहों, वक्री और लग्न से मिलान
- Drik Panchang, दैनिक पंचांग: नई दिल्ली 15 अगस्त 1990, कोलकाता 26 जनवरी 2000 और मुंबई 2 अक्टूबर 2026 के तिथि, नक्षत्र-पद और चंद्र राशि से मिलान
- Jean Meeus, Astronomical Algorithms (2nd ed.), अध्याय 47: चंद्रमा का मध्यम पात (राहु)
- Wikipedia, Kundali (astrology): उत्तर और दक्षिण भारतीय चार्ट का ढाँचा और दक्षिण भारतीय चार्ट में लग्न का चिह्न (तिरछी रेखा या “लग्न”)
- IANA समय क्षेत्र डेटाबेस (Asia/Kolkata): 1941–1945 का “वॉर टाइम”; Wikipedia, Indian Standard Time: बॉम्बे टाइम (1955 तक) और कलकत्ता टाइम (1948 तक)
- नाम अक्षर: बृहदवकहडाचक्रम्, नक्षत्र प्रकरण, शतपदचक्र श्लोक 9–15 (archive.org); पं. सीताराम शर्मा, अति बृहत् अवकहड़ा चक्रम् (1932), पृ. 22–24
- SanatanBodh पंचांग गणना (astronomy-engine, लाहिड़ी अयनांश); विधि: sanatanbodh.in/panchang/ganana-vidhi/
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