जन्म की जानकारी
आपकी जानकारी इसी ब्राउज़र में रहती है; कहीं भेजी या सहेजी नहीं जाती। समय भारतीय मानक समय में।
जन्म पंचांग जन्म के क्षण का पंचांग है: उस समय कौन सी तिथि, कौन सा नक्षत्र और उसका कौन सा चरण, कौन सा योग और करण था, और चंद्रमा किस राशि में था। साथ में लग्न कुंडली है: उस क्षण पूर्व में उदय हो रही राशि (लग्न) और नौ ग्रह किस राशि और भाव में थे। परंपरा में नक्षत्र के चरण से नाम का पहला अक्षर लिया जाता है, और कई परिवार जन्मदिन जन्म तिथि से मनाते हैं। नीचे जन्म की जानकारी डालें; गणना इसी ब्राउज़र में होती है।
नक्षत्र के अनुसार नाम अक्षर
हर नक्षत्र के चार चरण के चार अक्षर, अवकहड़ा चक्र के शतपद चक्र के अनुसार। जन्म के नक्षत्र-चरण का अक्षर नाम के आरंभ के लिए लिया जाता है; उसी अक्षर के दूसरे स्वर-रूप भी (जैसे “वी” के लिए “वि”) प्रचलित हैं।
| नक्षत्र | राशि | 1 | 2 | 3 | 4 |
|---|---|---|---|---|---|
| अश्विनी | मेष | चूChu | चेChe | चोCho | लाLa |
| भरणी | मेष | लीLi | लूLu | लेLe | लोLo |
| कृत्तिका | मेष / वृषभ | अA | ईI | उU | एE |
| रोहिणी | वृषभ | ओO | वाVa | वीVi | वूVu |
| मृगशिरा | वृषभ / मिथुन | वेVe | वोVo | काKa | कीKi |
| आर्द्रा | मिथुन | कूKu | घGha | ङNga | छChha |
| पुनर्वसु | मिथुन / कर्क | केKe | कोKo | हाHa | हीHi |
| पुष्य | कर्क | हूHu | हेHe | होHo | डाḌa |
| आश्लेषा | कर्क | डीḌi | डूḌu | डेḌe | डोḌo |
| मघा | सिंह | माMa | मीMi | मूMu | मेMe |
| पूर्वा फाल्गुनी | सिंह | मोMo | टाṬa | टीṬi | टूṬu |
| उत्तरा फाल्गुनी | सिंह / कन्या | टेṬe | टोṬo | पाPa | पीPi |
| हस्त | कन्या | पूPu | षSha | णṆa | ठṬha |
| चित्रा | कन्या / तुला | पेPe | पोPo | राRa | रीRi |
| स्वाति | तुला | रूRu | रेRe | रोRo | ताTa |
| विशाखा | तुला / वृश्चिक | तीTi | तूTu | तेTe | तोTo |
| अनुराधा | वृश्चिक | नाNa | नीNi | नूNu | नेNe |
| ज्येष्ठा | वृश्चिक | नोNo | याYa | यीYi | यूYu |
| मूल | धनु | येYe | योYo | भाBha | भीBhi |
| पूर्वाषाढ़ा | धनु | भूBhu | धाDha | फाPha | ढाḌha |
| उत्तराषाढ़ा | धनु / मकर | भेBhe | भोBho | जाJa | जीJi |
| श्रवण | मकर | खीKhi | खूKhu | खेKhe | खोKho |
| धनिष्ठा | मकर / कुंभ | गाGa | गीGi | गूGu | गेGe |
| शतभिषा | कुंभ | गोGo | साSa | सीSi | सूSu |
| पूर्वा भाद्रपद | कुंभ / मीन | सेSe | सोSo | दाDa | दीDi |
| उत्तरा भाद्रपद | मीन | दूDu | थTha | झJha | ञNya |
| रेवती | मीन | देDe | दोDo | चाCha | चीChi |
- ङ, ण और ञ से नाम शुरू नहीं होते; परंपरा में इनकी जगह ग, ड और ज लिए जाते हैं, जैसे आर्द्रा के तीसरे चरण के लिए गदाधर या गजानन (बृहदवकहडाचक्रम् की टीका)। पं. सीताराम शर्मा (अति बृहत् अवकहड़ा चक्रम्, पृ. 24) इसे भ्रम मानते हैं, क्योंकि ग, ड और ज दूसरे चरणों के अक्षर हैं।
- कृत्तिका के तीसरे चरण के लिए कुछ पुरानी पुस्तकें “ऊ” छापती हैं; Drik Panchang और अधिकतर सूचियाँ “उ” देती हैं। रोहिणी और मृगशिरा के “व” वाले अक्षर कहीं “ब” से लिखे मिलते हैं।
- दक्षिण भारत की कई सूचियों में श्रवण के अक्षर जू, जे, जो, खा हैं। उत्तर भारत की सूचियों और अवकहड़ा चक्र में ये अभिजित नक्षत्र के अक्षर हैं, और 27 नक्षत्रों में श्रवण के खी, खू, खे, खो।
हर नक्षत्र के चरण, राशि, स्वामी और देवता: 27 नक्षत्र · किसी नाम के पहले अक्षर से राशि: नाम से राशि
गणना कैसे होती है
जन्म के क्षण पर सूर्य और चंद्रमा की स्थिति (लाहिड़ी अयनांश के साथ निरयण) से तिथि, नक्षत्र और उसका चरण, योग और करण निकाले जाते हैं; सूर्योदय शहर के अक्षांश-देशांतर से। चंद्र मास का नाम उस अमावस्या पर सूर्य की राशि से तय होता है जिससे मास शुरू हुआ। विक्रम और शक संवत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से बदलते हैं। ये सब समय Drik Panchang से एक मिनट के भीतर मिलते हैं; तिथि या नक्षत्र बदलने के कुछ मिनट के भीतर हुए जन्म के लिए परिणाम में चेतावनी दी जाती है।
लग्न कुंडली के लिए जन्म के क्षण पर नौ ग्रहों की निरयण (लाहिड़ी) स्थिति निकाली जाती है: सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि astronomy-engine से, राहु मध्यम चंद्र-पात (Meeus का सूत्र) से और केतु उससे ठीक सामने। लग्न शहर के अक्षांश-देशांतर और उस क्षण के स्थानीय नाक्षत्र काल से निकलता है। भाव पूरी राशियों के हैं: लग्न की राशि पहला भाव, अगली राशि दूसरा, और इसी तरह। ग्रह पाँच तारीखों (1950 से 2075) पर Drik Panchang की निरयण ग्रह-स्थिति से 1 कला के भीतर मिले।
जन्म पंचांग: सवाल-जवाब
जन्म तिथि कैसे पता करें?
ऊपर जन्म की तारीख, समय और शहर डालें। जन्म के क्षण पर चल रही तिथि आपकी जन्म तिथि है, जैसे “भाद्रपद कृष्ण दशमी”। माह का नाम पूर्णिमांत (उत्तर भारत) और अमांत (महाराष्ट्र, गुजरात, दक्षिण भारत) दोनों तरह से दिया गया है; कृष्ण पक्ष में दोनों में एक महीने का अंतर होता है।
जन्म नक्षत्र कैसे पता करें?
जन्म के क्षण पर चंद्रमा जिस नक्षत्र में हो, वही जन्म नक्षत्र है; 27 नक्षत्रों में से हर एक 13°20′ का है और उसके चार चरण 3°20′ के। ऊपर जन्म की तारीख, समय और शहर डालें: नक्षत्र, उसका चरण और वह कब तक रहा, तीनों मिलेंगे। चंद्रमा लगभग एक दिन में एक नक्षत्र पार करता है, इसलिए जन्म का समय जितना सही हो, उतना अच्छा।
नक्षत्र से नाम का पहला अक्षर कैसे निकालें?
हर नक्षत्र के चार चरण (पद) होते हैं और परंपरा में हर चरण का एक अक्षर तय है, जैसे रोहिणी के ओ, वा, वी, वू। जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र-चरण में हो, उसका अक्षर नाम के आरंभ के लिए लिया जाता है। पूरी तालिका नीचे है।
लग्न कैसे निकलता है? मेरी लग्न राशि क्या है?
जन्म के क्षण पर जन्म-स्थान के पूर्वी क्षितिज पर उदय हो रही राशि लग्न है। पृथ्वी के घूमने से हर राशि कुछ समय उदय में रहती है: हमारी गणना में दिल्ली में लगभग 1 घंटा 25 मिनट (मीन) से 2 घंटे 20 मिनट (कर्क) तक। इसलिए लग्न के लिए जन्म का सही समय और शहर दोनों चाहिए। ऊपर जानकारी डालने पर लग्न, लग्न कुंडली और हर ग्रह का भाव मिलता है।
नवांश कुंडली क्या है?
हर राशि को 3°20′ के नौ भागों में बाँटने पर एक भाग नवांश है। ग्रह जिस नवांश में हो, नवांश (D9) कुंडली में उस नवांश की राशि में लिखा जाता है। पाराशरी परंपरा में गिनती चर राशि (मेष, कर्क, तुला, मकर) में उसी राशि से, स्थिर राशि (वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुंभ) में उससे नौवीं राशि से और द्विस्वभाव राशि (मिथुन, कन्या, धनु, मीन) में पाँचवीं राशि से शुरू होती है। नवांश लग्न लगभग हर 13 मिनट में बदलता है, इसलिए यह जन्म समय पर और भी निर्भर है।
जन्म का ठीक समय न पता हो तो?
तारीख और शहर डालकर “समय पता नहीं” चुनें; तब दोपहर 12 बजे के समय से गणना होगी। तिथि और राशि अक्सर पूरे दिन एक रहती हैं, पर नक्षत्र का चरण, और कभी नक्षत्र या तिथि भी, दिन में बदल सकते हैं। ऐसा हो तो परिणाम में लिखा मिलेगा।
सूर्योदय से पहले जन्म हो तो वार कौन सा माना जाता है?
पंचांग में दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है। इसलिए आधी रात के बाद पर सूर्योदय से पहले हुए जन्म का वार पिछले दिन का माना जाता है, जैसे शुक्रवार सुबह 4 बजे का जन्म पंचांग में गुरुवार की रात का है। परिणाम में यह अलग से लिखा जाता है।
तिथि-जन्मदिन हर साल अलग तारीख को क्यों आता है?
चंद्र मास के बारह महीने सौर वर्ष से लगभग 11 दिन छोटे होते हैं, इसलिए वही माह और तिथि अंग्रेज़ी कैलेंडर में हर साल आगे-पीछे पड़ती है। जिस दिन सूर्योदय के समय आपकी जन्म तिथि हो, वही दिन लिया जाता है; तिथि किसी सूर्योदय पर न पड़े (क्षय तिथि) तो जिस दिन वह शुरू होती है। अधिक मास वाले वर्ष में सामान्य (निज) मास लिया जाता है।
क्या इसमें कुंडली का फल भी है?
नहीं। यहाँ जन्म के समय का पंचांग और लग्न कुंडली व नवांश चार्ट, यानी उस क्षण ग्रहों की स्थिति, खगोलीय गणना से दिए गए हैं। इसमें भविष्यफल, दोष, दशा या उपाय नहीं हैं। कुंडली का विचार जानना हो तो यह PDF अपने पुरोहित या ज्योतिषी को दिखाएँ।
यह कुंडली किसी दूसरे पंचांग या सॉफ़्टवेयर से अलग क्यों हो सकती है?
ग्रहों की स्थिति Drik Panchang से 1 कला (1′) के भीतर मिलती है। अंतर आम तौर पर तीन बातों से आता है: अयनांश (हम लाहिड़ी लेते हैं; कुछ सॉफ़्टवेयर रमन या कृष्णमूर्ति अयनांश लेते हैं), राहु-केतु मध्यम या स्पष्ट (हम Drik की तरह मध्यम लेते हैं), और लग्न: Drik Panchang का लग्न हमारी गणना से लगभग 11 से 18 कला आगे आता है, जो जन्म समय के लगभग 50 सेकंड के बराबर है। इसलिए लग्न बदलने के एक-दो मिनट के भीतर हुए जन्म में लग्न राशि अलग आ सकती है; ऐसे में परिणाम में चेतावनी दी जाती है।
स्रोत
- Drik Panchang, दैनिक पंचांग: नई दिल्ली 15 अगस्त 1990, कोलकाता 26 जनवरी 2000 और मुंबई 2 अक्टूबर 2026 के तिथि, नक्षत्र-पद, योग, करण, चंद्र राशि, चंद्र मास और संवत से मिलान (समय 1 मिनट के भीतर)
- Drik Panchang, निरयण ग्रह-स्थिति (Planetary Positions, Sidereal): नई दिल्ली 15 अगस्त 1990 और 1 जनवरी 1950, कोलकाता 26 जनवरी 2000, मुंबई 2 अक्टूबर 2026 और 20 मार्च 2075 के नौ ग्रहों, वक्री और लग्न से मिलान
- Jean Meeus, Astronomical Algorithms (2nd ed.), अध्याय 47: चंद्रमा का मध्यम पात (राहु)
- IANA समय क्षेत्र डेटाबेस (Asia/Kolkata): 1941–1945 का “वॉर टाइम”; Wikipedia, Indian Standard Time: बॉम्बे टाइम (1955 तक) और कलकत्ता टाइम (1948 तक)
- SanatanBodh पंचांग गणना (astronomy-engine, लाहिड़ी अयनांश); विधि: sanatanbodh.in/panchang/ganana-vidhi/
- नाम अक्षर: बृहदवकहडाचक्रम्, नक्षत्र प्रकरण, शतपदचक्र श्लोक 9–15 (archive.org); पं. सीताराम शर्मा, अति बृहत् अवकहड़ा चक्रम् (1932), पृ. 22–24; Drik Panchang, नक्षत्र पद स्वर सिद्धांत
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