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परंपरा में नाम का पहला अक्षर जिस नक्षत्र-चरण का अक्षर हो, वही नाम का नक्षत्र माना जाता है, और उस चरण की राशि नाम राशि (अवकहड़ा चक्र)। जैसे “राम” का पहला अक्षर रा चित्रा नक्षत्र के तीसरे चरण का है, इसलिए नाम राशि तुला। जन्म राशि अलग है: वह जन्म के समय चंद्रमा की राशि है, जो जन्म की तारीख, समय और स्थान से निकलती है। नाम जन्म-नक्षत्र के चरण के अक्षर से रखा गया हो, तभी दोनों एक होती हैं।
पहला अक्षर कैसे लिया जाता है
- नाम का पहला अक्षर (व्यंजन और उसकी मात्रा) अवकहड़ा चक्र की तालिका में देखा जाता है; वह जिस नक्षत्र-चरण का अक्षर है, वही नाम का नक्षत्र है और उस चरण की राशि नाम राशि। उदाहरण: “गजानन” का ग धनिष्ठा के पहले चरण का है।
- संयुक्ताक्षर से शुरू हो तो उसका पहला वर्ण लिया जाता है: प्रिया का प, श्रेया का श, क्षितिज का क (क्ष = क् + ष), त्रिलोक का त, ज्ञान का ज (ज्ञ = ज् + ञ)। पुस्तक का उदाहरण “श्रीपति” मात्रा के बिना श लेता है; मात्रा के साथ लेने से चरण बदले तो वह पढ़ाई भी दिखाई जाती है।
- अ-आ, इ-ई, उ-ऊ, ए-ऐ, ओ-औ एक ही हैं; ब और व एक, श और स एक। ऋ की जगह र लिया जाता है। ॐ को ओ पढ़ा जाता है।
- जिस मात्रा वाला अक्षर तालिका में न हो (जैसे धी, जू, खा), उसके वर्ण वाले चरण दिखाए जाते हैं। जू, जे, जो, खा अवकहड़ा चक्र की पुस्तकों में अभिजित के अक्षर हैं; 27 नक्षत्रों की तालिका में वे नहीं हैं।
राशि के अनुसार नाम अक्षर
हर राशि के नौ अक्षर, उनके नक्षत्र और चरण के साथ।
| राशि | नाम अक्षर (नक्षत्र, चरण) |
|---|---|
| मेष | |
| वृषभ | |
| मिथुन | |
| कर्क | |
| सिंह |
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| कन्या |
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| तुला | |
| वृश्चिक | |
| धनु |
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| मकर |
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| कुंभ |
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| मीन |
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ङ, ञ और ण से नाम शुरू नहीं होते (नीचे सवाल-जवाब देखें)। कृत्तिका के तीसरे चरण के लिए कुछ पुरानी पुस्तकें “ऊ” छापती हैं; दक्षिण भारत की कई सूचियों में श्रवण के अक्षर जू, जे, जो, खा हैं। सभी 27 नक्षत्र
नाम से राशि: सवाल-जवाब
नाम राशि और जन्म राशि में क्या अंतर है?
नाम राशि नाम के पहले अक्षर से निकलती है: वह अक्षर अवकहड़ा चक्र में जिस नक्षत्र-चरण का है, उसकी राशि। जन्म राशि (चंद्र राशि) जन्म के समय चंद्रमा की राशि है; उसके लिए जन्म की तारीख, समय और स्थान चाहिए, जो SanatanBodh का जन्म पंचांग निकालता है। जिसका नाम जन्म-नक्षत्र के चरण के अक्षर से रखा गया हो, उसकी दोनों राशियाँ एक होती हैं।
नाम संयुक्ताक्षर से शुरू हो तो कौन सा अक्षर लें (प्रिया, श्रेया, क्षितिज, ज्ञान)?
संयुक्ताक्षर का पहला वर्ण। पं. सीताराम शर्मा की “अति बृहत् अवकहड़ा चक्रम्” (पृ. 25) ब्रह्मयामल के वचन से यही नियम देती है, और उदाहरण में “श्रीपति” का अक्षर श लेकर उसे शतभिषा के दूसरे चरण (सा) में रखती है। इस तरह प्रिया का प, श्रेया का श, क्षितिज (क्ष = क् + ष) का क और ज्ञान (ज्ञ = ज् + ञ) का ज। कुछ लोग पहले वर्ण के साथ अक्षर की मात्रा भी लेते हैं (प्रि → पि); इससे चरण बदले तो यह पन्ना वह पढ़ाई भी दिखाता है। प्रिया, श्रेया और क्षितिज में दोनों तरह राशि एक ही रहती है।
“श” और “स”, “ब” और “व”, छोटी और बड़ी मात्रा: क्या ये अलग हैं?
नहीं। उसी पुस्तक (पृ. 26) के अनुसार अवकहड़ा चक्र में अ-आ, इ-ई, उ-ऊ, ए-ऐ और ओ-औ एक ही माने जाते हैं, और ब-व तथा श-स भी। इसलिए “शक्तिनाथ” और “सन्तलाल” दोनों शतभिषा के दूसरे चरण के हैं। ऋ तालिका में नहीं है; उसकी जगह र लिया जाता है (पृ. 25)।
नाम अंग्रेज़ी में लिखें तो दो राशियाँ क्यों दिखती हैं?
रोमन अक्षरों में कुछ हिंदी अक्षर अलग नहीं दिखते: T से त या ट, D से द या ड, Th से थ या ठ, Dh से ध या ढ, Sh से श या ष, Ch से च या छ। ये अलग-अलग चरणों के अक्षर हैं, इसलिए पन्ना हर पढ़ाई का परिणाम दिखाता है। नाम हिंदी (देवनागरी) में लिखें तो एक ही उत्तर मिलेगा।
ङ, ञ और ण वाले चरणों के नाम का क्या?
आर्द्रा के तीसरे (ङ), हस्त के तीसरे (ण) और उत्तरा भाद्रपद के चौथे चरण (ञ) के अक्षरों से नाम शुरू नहीं होते। “बृहदवकहडाचक्रम्” की टीका इनके लिए ग, ड और ज से नाम रखने को कहती है। पं. सीताराम शर्मा (पृ. 24) इसे भ्रम मानते हैं, क्योंकि ग, ड और ज दूसरे चरणों के अक्षर हैं। इसलिए ग, ज या ड से शुरू होने वाले नाम के परिणाम के साथ यह बात भी लिखी जाती है।
स्रोत
- नाम से नक्षत्र, संयुक्ताक्षर का पहला वर्ण (ब्रह्मयामल के वचन से), ऋ की जगह र: पं. सीताराम शर्मा, अति बृहत् अवकहड़ा चक्रम् / ज्योतिःशास्त्रसोपानम् (दूसरा संस्करण, 1932), पृ. 25; मात्राएँ, ब-व और श-स एक: पृ. 26; ङ, ञ, ण: पृ. 24 (archive.org)
- नाम अक्षर: बृहदवकहडाचक्रम्, नक्षत्र प्रकरण, शतपदचक्र श्लोक 9–15 और टीका (archive.org); पं. सीताराम शर्मा, वही, पृ. 22–23; Drik Panchang, नक्षत्र पद स्वर सिद्धांत
- एक राशि में नौ नक्षत्र-चरण: पं. सीताराम शर्मा, वही, पृ. 26
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