गंड मूल नक्षत्र: छह नक्षत्रों के नाम और समय

गंड मूल (गण्डमूल) के छह नक्षत्र कौन से हैं, ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं, और अक्टूबर 2026 से दिसंबर 2027 तक चंद्रमा हर बार इनमें कब से कब तक है। समय पूरे भारत के लिए एक ही है।

सांझ के आकाश में हँसिए जैसा पतला चाँद और एक चमकता ग्रह, नीचे दीयों से जगमगाता पत्थर का प्राचीन मंदिर
चित्र: AI से बनाया गया
संक्षेप में

गंड मूल नक्षत्र छह हैं: अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती। ये तीन जोड़ों में आते हैं, जहाँ एक नक्षत्र और एक राशि साथ-साथ खत्म होते हैं: आश्लेषा-मघा (कर्क से सिंह), ज्येष्ठा-मूल (वृश्चिक से धनु) और रेवती-अश्विनी (मीन से मेष)। चंद्रमा लगभग 27 दिन में तीनों जोड़ों से गुजरता है, इसलिए गंड मूल महीने में 3 या 4 बार आता है और हर बार लगभग दो दिन (42 से 54 घंटे) रहता है। अक्टूबर 2026 में गंड मूल: 5–7 अक्टूबर, 15–17 अक्टूबर और 24–26 अक्टूबर।

अभी गंड मूल चल रहा है

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026, 11:10 PM से बुधवार, 7 अक्टूबर 2026, 9:41 PM तक

आश्लेषा → मघा · 47 घंटे

गंड मूल के 6 नक्षत्र

ये छह नक्षत्र तीन जोड़ों में हैं। हर जोड़े में पहला नक्षत्र एक राशि के अंत में है और दूसरा अगली राशि के आरंभ में:

  • आश्लेषा → मघा

    कर्क राशि और आश्लेषा नक्षत्र यहीं खत्म होते हैं; सिंह राशि और मघा नक्षत्र यहीं से शुरू होते हैं।

    राशिचक्र में 120°, मेष के आरंभ से · कर्क → सिंह

    आश्लेषा नक्षत्र · मघा नक्षत्र

  • ज्येष्ठा → मूल

    वृश्चिक राशि और ज्येष्ठा नक्षत्र यहीं खत्म होते हैं; धनु राशि और मूल नक्षत्र यहीं से शुरू होते हैं।

    राशिचक्र में 240°, मेष के आरंभ से · वृश्चिक → धनु

    ज्येष्ठा नक्षत्र · मूल नक्षत्र

  • रेवती → अश्विनी

    मीन राशि और रेवती नक्षत्र यहीं खत्म होते हैं; मेष राशि और अश्विनी नक्षत्र यहीं से शुरू होते हैं।

    राशिचक्र में 0° (360°), मेष के आरंभ से · मीन → मेष

    रेवती नक्षत्र · अश्विनी नक्षत्र

नक्षत्र 13°20′ के और राशियाँ 30° की हैं, इसलिए दोनों की सीमाएँ हर 120° पर ही एक साथ पड़ती हैं (9 नक्षत्र = 4 राशियाँ): मेष के आरंभ पर, सिंह के आरंभ पर और धनु के आरंभ पर। Drik Panchang इन्हें जल तत्व की राशि (कर्क, वृश्चिक, मीन) और अग्नि तत्व की राशि (सिंह, धनु, मेष) की संधि कहता है।

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 4 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ

गंड मूल कब-कब है: अक्टूबर 2026 से दिसंबर 2027

हर पंक्ति में चंद्रमा के पहले नक्षत्र में आने से दूसरे नक्षत्र से निकलने तक का समय है, और बीच में संधि का क्षण। जो गंड मूल एक महीने से अगले में जाता है, वह दोनों महीनों में है।

अक्टूबर 2026 में गंड मूल

नक्षत्रशुरूखत्म
आश्लेषा → मघासंधि: 6 अक्टूबर, 10:18 PM5 अक्टूबरसोमवार11:10 PM7 अक्टूबरबुधवार9:41 PM
ज्येष्ठा → मूलसंधि: 16 अक्टूबर, 6:48 AM15 अक्टूबरगुरुवार4:04 AM17 अक्टूबरशनिवार9:48 AM
रेवती → अश्विनीसंधि: 25 अक्टूबर, 7:23 PM24 अक्टूबरशनिवार8:33 PM26 अक्टूबरसोमवार5:42 PM

नवंबर 2026 में गंड मूल

नक्षत्रशुरूखत्म
आश्लेषा → मघासंधि: 3 नवंबर, 3:47 AM2 नवंबरसोमवार4:31 AM4 नवंबरबुधवार3:27 AM
ज्येष्ठा → मूलसंधि: 12 नवंबर, 2:20 PM11 नवंबरबुधवार11:39 AM13 नवंबरशुक्रवार5:18 PM
रेवती → अश्विनीसंधि: 22 नवंबर, 5:55 AM21 नवंबरशनिवार6:51 AM23 नवंबरसोमवार4:16 AM
आश्लेषा → मघासंधि: 30 नवंबर, 9:43 AM29 नवंबररविवार11:00 AM1 दिसंबरमंगलवार9:01 AM

दिसंबर 2026 में गंड मूल

नक्षत्रशुरूखत्म
आश्लेषा → मघासंधि: 30 नवंबर, 9:43 AM29 नवंबररविवार11:00 AM1 दिसंबरमंगलवार9:01 AM
ज्येष्ठा → मूलसंधि: 9 दिसंबर, 9:01 PM8 दिसंबरमंगलवार6:17 PM10 दिसंबरगुरुवार11:59 PM
रेवती → अश्विनीसंधि: 19 दिसंबर, 3:59 PM18 दिसंबरशुक्रवार4:11 PM20 दिसंबररविवार2:56 PM
आश्लेषा → मघासंधि: 27 दिसंबर, 6:05 PM26 दिसंबरशनिवार8:13 PM28 दिसंबरसोमवार4:34 PM

जनवरी 2027 में गंड मूल

नक्षत्रशुरूखत्म
ज्येष्ठा → मूलसंधि: 6 जनवरी, 3:08 AM5 जनवरीमंगलवार12:15 AM7 जनवरीगुरुवार6:09 AM
रेवती → अश्विनीसंधि: 15 जनवरी, 11:52 PM14 जनवरीगुरुवार11:19 PM16 जनवरीशनिवार11:39 PM
आश्लेषा → मघासंधि: 24 जनवरी, 4:54 AM23 जनवरीशनिवार7:32 AM25 जनवरीसोमवार2:42 AM

फ़रवरी 2027 में गंड मूल

नक्षत्रशुरूखत्म
ज्येष्ठा → मूलसंधि: 2 फ़रवरी, 9:22 AM1 फ़रवरीसोमवार6:28 AM3 फ़रवरीबुधवार12:27 PM
रेवती → अश्विनीसंधि: 12 फ़रवरी, 5:43 AM11 फ़रवरीगुरुवार4:57 AM13 फ़रवरीशनिवार5:57 AM
आश्लेषा → मघासंधि: 20 फ़रवरी, 4:08 PM19 फ़रवरीशुक्रवार6:36 PM21 फ़रवरीरविवार1:51 PM
ज्येष्ठा → मूलसंधि: 1 मार्च, 4:28 PM28 फ़रवरीरविवार1:48 PM2 मार्चमंगलवार7:28 PM

मार्च 2027 में गंड मूल

नक्षत्रशुरूखत्म
ज्येष्ठा → मूलसंधि: 1 मार्च, 4:28 PM28 फ़रवरीरविवार1:48 PM2 मार्चमंगलवार7:28 PM
रेवती → अश्विनीसंधि: 11 मार्च, 11:20 AM10 मार्चबुधवार10:53 AM12 मार्चशुक्रवार11:23 AM
आश्लेषा → मघासंधि: 20 मार्च, 1:32 AM19 मार्चशुक्रवार3:22 AM20 मार्चशनिवार11:45 PM
ज्येष्ठा → मूलसंधि: 29 मार्च, 12:32 AM27 मार्चशनिवार10:15 PM30 मार्चमंगलवार3:19 AM

अप्रैल 2027 में गंड मूल

नक्षत्रशुरूखत्म
रेवती → अश्विनीसंधि: 7 अप्रैल, 6:26 PM6 अप्रैलमंगलवार6:24 PM8 अप्रैलगुरुवार6:00 PM
आश्लेषा → मघासंधि: 16 अप्रैल, 8:19 AM15 अप्रैलगुरुवार9:34 AM17 अप्रैलशनिवार7:09 AM
ज्येष्ठा → मूलसंधि: 25 अप्रैल, 8:58 AM24 अप्रैलशनिवार6:58 AM26 अप्रैलसोमवार11:30 AM

मई 2027 में गंड मूल

नक्षत्रशुरूखत्म
रेवती → अश्विनीसंधि: 5 मई, 3:15 AM4 मईमंगलवार3:20 AM6 मईगुरुवार2:32 AM
आश्लेषा → मघासंधि: 13 मई, 1:41 PM12 मईबुधवार2:56 PM14 मईशुक्रवार12:43 PM
ज्येष्ठा → मूलसंधि: 22 मई, 4:51 PM21 मईशुक्रवार2:52 PM23 मईरविवार7:18 PM
रेवती → अश्विनीसंधि: 1 जून, 12:50 PM31 मईसोमवार12:36 PM2 जूनबुधवार12:17 PM

जून 2027 में गंड मूल

नक्षत्रशुरूखत्म
रेवती → अश्विनीसंधि: 1 जून, 12:50 PM31 मईसोमवार12:36 PM2 जूनबुधवार12:17 PM
आश्लेषा → मघासंधि: 9 जून, 7:49 PM8 जूनमंगलवार9:37 PM10 जूनगुरुवार6:25 PM
ज्येष्ठा → मूलसंधि: 18 जून, 11:41 PM17 जूनगुरुवार9:31 PM20 जूनरविवार2:13 AM
रेवती → अश्विनीसंधि: 28 जून, 9:49 PM27 जूनरविवार8:59 PM29 जूनमंगलवार9:49 PM

जुलाई 2027 में गंड मूल

नक्षत्रशुरूखत्म
आश्लेषा → मघासंधि: 7 जुलाई, 4:04 AM6 जुलाईमंगलवार6:34 AM8 जुलाईगुरुवार1:56 AM
ज्येष्ठा → मूलसंधि: 16 जुलाई, 5:40 AM15 जुलाईगुरुवार3:19 AM17 जुलाईशनिवार8:22 AM
रेवती → अश्विनीसंधि: 26 जुलाई, 5:14 AM25 जुलाईरविवार3:53 AM27 जुलाईमंगलवार5:54 AM

अगस्त 2027 में गंड मूल

नक्षत्रशुरूखत्म
आश्लेषा → मघासंधि: 3 अगस्त, 2:17 PM2 अगस्तसोमवार5:10 PM4 अगस्तबुधवार11:37 AM
ज्येष्ठा → मूलसंधि: 12 अगस्त, 11:35 AM11 अगस्तबुधवार9:14 AM13 अगस्तशुक्रवार2:20 PM
रेवती → अश्विनीसंधि: 22 अगस्त, 11:12 AM21 अगस्तशनिवार9:40 AM23 अगस्तसोमवार12:12 PM
आश्लेषा → मघासंधि: 31 अगस्त, 1:03 AM30 अगस्तसोमवार3:45 AM31 अगस्तमंगलवार10:21 PM

सितंबर 2027 में गंड मूल

नक्षत्रशुरूखत्म
ज्येष्ठा → मूलसंधि: 8 सितंबर, 6:17 PM7 सितंबरमंगलवार4:17 PM9 सितंबरगुरुवार8:53 PM
रेवती → अश्विनीसंधि: 18 सितंबर, 4:48 PM17 सितंबरशुक्रवार3:29 PM19 सितंबररविवार5:41 PM
आश्लेषा → मघासंधि: 27 सितंबर, 10:34 AM26 सितंबररविवार12:38 PM28 सितंबरमंगलवार8:21 AM

अक्टूबर 2027 में गंड मूल

नक्षत्रशुरूखत्म
ज्येष्ठा → मूलसंधि: 6 अक्टूबर, 2:16 AM5 अक्टूबरमंगलवार12:45 AM7 अक्टूबरगुरुवार4:29 AM
रेवती → अश्विनीसंधि: 15 अक्टूबर, 11:30 PM14 अक्टूबरगुरुवार10:31 PM16 अक्टूबरशनिवार11:59 PM
आश्लेषा → मघासंधि: 24 अक्टूबर, 5:42 PM23 अक्टूबरशनिवार7:08 PM25 अक्टूबरसोमवार4:10 PM

नवंबर 2027 में गंड मूल

नक्षत्रशुरूखत्म
ज्येष्ठा → मूलसंधि: 2 नवंबर, 11:07 AM1 नवंबरसोमवार9:58 AM3 नवंबरबुधवार12:58 PM
रेवती → अश्विनीसंधि: 12 नवंबर, 7:56 AM11 नवंबरगुरुवार7:02 AM13 नवंबरशनिवार8:11 AM
आश्लेषा → मघासंधि: 20 नवंबर, 11:08 PM20 नवंबरशनिवार12:28 AM21 नवंबररविवार9:52 PM
ज्येष्ठा → मूलसंधि: 29 नवंबर, 7:48 PM28 नवंबररविवार6:41 PM30 नवंबरमंगलवार9:30 PM

दिसंबर 2027 में गंड मूल

नक्षत्रशुरूखत्म
रेवती → अश्विनीसंधि: 9 दिसंबर, 5:27 PM8 दिसंबरबुधवार4:13 PM10 दिसंबरशुक्रवार5:55 PM
आश्लेषा → मघासंधि: 18 दिसंबर, 5:12 AM17 दिसंबरशुक्रवार7:08 AM19 दिसंबररविवार3:30 AM
ज्येष्ठा → मूलसंधि: 27 दिसंबर, 3:15 AM26 दिसंबररविवार1:50 AM28 दिसंबरमंगलवार5:07 AM

सभी समय भारतीय मानक समय में हैं और पूरे भारत के लिए एक ही हैं। अलग-अलग पंचांगों में 1–2 मिनट का अंतर सामान्य है। गणना कैसे होती है

ग्रंथों में गंड मूल

मुहूर्त चिंतामणि (दैवज्ञ राम) के विवाह प्रकरण के श्लोक 43 में ज्येष्ठा, रेवती और आश्लेषा की अंतिम दो घटी और मूल, अश्विनी और मघा की पहली दो घटी को नक्षत्र गंडांत कहा गया है (एक घटी 24 मिनट की होती है)। बृहत् पाराशर होरा शास्त्र (R. Santhanam का अंग्रेज़ी अनुवाद, अध्याय 92, श्लोक 3) भी रेवती-अश्विनी, आश्लेषा-मघा और ज्येष्ठा-मूल की संधि की दो-दो घटी को नक्षत्र गंडांत बताता है। मुहूर्त चिंतामणि की पीयूषधारा टीका दूसरे ग्रंथों और आचार्यों (रत्नमाला, वसिष्ठ, नारद) के वचन भी देती है, जिनमें संधि की अवधि अलग-अलग बताई गई है, और यह ग्रंथ नक्षत्र गंडांत को विवाह के मुहूर्त में दोष मानता है।

मुहूर्त चिंतामणि की केदारदत्त जोशी की हिंदी व्याख्या (नक्षत्र प्रकरण) लिखती है कि इन छह नक्षत्रों को लोक व्यवहार में ‘मूल’ भी कहा जाता है। इसीलिए ‘मूल नक्षत्र’ कहने पर कई लोग इन छह को समझते हैं, जबकि 27 नक्षत्रों में मूल 19वाँ नक्षत्र भी है।

पंचांग पूरा समय, जब तक चंद्रमा इन छह नक्षत्रों में से किसी में हो, गंड मूल के रूप में देते हैं: Drik Panchang की गंड मूल सूची में हर अवधि आश्लेषा, ज्येष्ठा या रेवती के शुरू होने से अगले नक्षत्र (मघा, मूल या अश्विनी) के खत्म होने तक है। नीचे की सूची भी इसी तरह है, और संधि का क्षण, यानी पहला नक्षत्र खत्म होकर दूसरा शुरू होने का समय, अलग से लिखा है। Drik Panchang की सूची में आश्लेषा, ज्येष्ठा और रेवती ‘गंड’ और अश्विनी, मघा और मूल ‘मूल’ प्रकार के गिने गए हैं।

जन्म गंड मूल में हो तो

परंपरा के अनुसार गंड मूल में जन्म होने पर कई परिवार शांति पूजा (मूल शांति) कराते हैं। इसका दिन ग्रंथों में एक नहीं मिलता: मुहूर्त चिंतामणि की पीयूषधारा टीका शौनक का वचन देती है कि शांति जन्म के बारहवें दिन या जन्म-नक्षत्र के दिन हो, और लिखती है कि शिष्ट लोग शांति जन्म-नक्षत्र में ही करते हैं। Drik Panchang इसे जन्म के 27वें दिन या उसी नक्षत्र के फिर आने पर बताता है; चंद्रमा लगभग 27 दिन बाद उसी नक्षत्र में लौटता है। पूजा कब और कैसे हो, यह परिवार की परंपरा से तय होता है: अपने पुरोहित से पूछें।

जन्म का नक्षत्र और चरण जन्म की तारीख, समय और स्थान से निकलते हैं; SanatanBodh का जन्म पंचांग यह बताता है। हम किसी के जन्म-नक्षत्र से कोई फल या भविष्यवाणी नहीं बताते। जन्म नक्षत्र और चरण निकालें

हमने समय कैसे जाँचा

हमने हर गंड मूल का आरंभ, संधि और अंत अपनी पंचांग गणना से निकालकर Drik Panchang की नई दिल्ली की गंड मूल सूची और नक्षत्र सूचियों से मिलाया। अक्टूबर 2026 से दिसंबर 2027 के सभी 50 गंड मूल की तारीखें मिलीं, और हर समय Drik Panchang से 2 मिनट के भीतर है (हमारा समय लगभग 1 मिनट बाद आता है)। जो तारीख या समय मेल न खाए, उसे हम नहीं छापते।

गंड मूल: सवाल-जवाब

आज गंड मूल है क्या?

इस पन्ने का “अभी / अगला गंड मूल” बक्सा आपके फ़ोन या कंप्यूटर की घड़ी से बताता है कि अभी गंड मूल चल रहा है या अगला कब शुरू होगा, और नीचे की सूची में अक्टूबर 2026 से दिसंबर 2027 तक हर गंड मूल के शुरू और खत्म होने की तारीख और समय है। आज का नक्षत्र और वह कब तक है, आज के पंचांग में भी देखें।

गंड मूल में कौन से 6 नक्षत्र आते हैं?

अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती। ये तीन संधियों पर हैं: आश्लेषा-मघा (कर्क और सिंह राशि की संधि), ज्येष्ठा-मूल (वृश्चिक और धनु) और रेवती-अश्विनी (मीन और मेष)। मुहूर्त चिंतामणि (विवाह प्रकरण, श्लोक 43) और बृहत् पाराशर होरा शास्त्र (अध्याय 92) इन्हीं संधियों को नक्षत्र गंडांत कहते हैं, और Drik Panchang इन्हीं छह को गंड मूल गिनता है।

मूल नक्षत्र के नाम क्या हैं?

बोलचाल में ‘मूल नक्षत्र’ से प्रायः गंड मूल के छह नक्षत्र समझे जाते हैं: अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती। मुहूर्त चिंतामणि की केदारदत्त जोशी की हिंदी व्याख्या लिखती है कि इन छह को लोक व्यवहार में ‘मूल’ भी कहा जाता है। 27 नक्षत्रों में अकेला मूल 19वाँ नक्षत्र है, जो पूरा धनु राशि में है।

गंड मूल कितनी बार और कितने समय के लिए आता है?

चंद्रमा लगभग 27 दिन में सभी नक्षत्रों से गुजरता है और रास्ते में तीनों जोड़ों से, इसलिए गंड मूल महीने में 3 या 4 बार आता है। हर बार चंद्रमा दो नक्षत्रों (26°40′) से गुजरता है, जिसमें लगभग दो दिन लगते हैं: अक्टूबर 2026 से दिसंबर 2027 के 50 गंड मूल 42 से 54 घंटे के हैं।

क्या गंड मूल का समय हर शहर में एक ही है?

हाँ। गंड मूल का आरंभ और अंत केवल चंद्रमा की स्थिति से तय होता है, सूर्योदय से नहीं, इसलिए यह क्षण पूरे भारत में एक ही है: दिल्ली, मुंबई, कोलकाता या चेन्नई, सब जगह वही समय (भारतीय मानक समय)। विदेश में रहने वाले इसे अपने स्थानीय समय में बदल लें।

गंड मूल में जन्म हो तो क्या करें?

परंपरा के अनुसार गंड मूल में जन्म होने पर कई परिवार शांति पूजा (मूल शांति) कराते हैं। इसका दिन ग्रंथों में एक नहीं मिलता: मुहूर्त चिंतामणि की पीयूषधारा टीका शौनक का वचन देती है कि शांति जन्म के बारहवें दिन या जन्म-नक्षत्र के दिन हो, और लिखती है कि शिष्ट लोग शांति जन्म-नक्षत्र में ही करते हैं। Drik Panchang इसे जन्म के 27वें दिन या उसी नक्षत्र के फिर आने पर बताता है; चंद्रमा लगभग 27 दिन बाद उसी नक्षत्र में लौटता है। पूजा कब और कैसे हो, यह परिवार की परंपरा से तय होता है: अपने पुरोहित से पूछें। जन्म का नक्षत्र और चरण जन्म की तारीख, समय और स्थान से निकलते हैं; SanatanBodh का जन्म पंचांग यह बताता है। हम किसी के जन्म-नक्षत्र से कोई फल या भविष्यवाणी नहीं बताते।

स्रोत

  1. मुहूर्त चिंतामणि (दैवज्ञ राम), गोविन्द की पीयूषधारा टीका और केदारदत्त जोशी की पीताम्बरा हिंदी व्याख्या (द्वितीय सं., वाराणसी 1979; archive.org): विवाह प्रकरण श्लोक 43, पृ. 363–364 (नक्षत्र गंडांत); नक्षत्र प्रकरण श्लोक 57 और टीका, पृ. 125–130 और 145–146 (छह नक्षत्र ‘मूल’ नाम से, शांति का समय)
  2. बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, R. Santhanam का अंग्रेज़ी अनुवाद, खंड 2, अध्याय 92 “Remedies from Birth in Gandanta”, श्लोक 1–5, पृ. 1026–1027 (archive.org)
  3. Drik Panchang: गण्ड मूल नक्षत्र (हिंदी और अंग्रेज़ी), नई दिल्ली, अक्टूबर 2026 से दिसंबर 2027 की मासिक सूचियाँ (drikpanchang.com/panchang/gandamool-dates-timings.html), और आश्लेषा, ज्येष्ठा और रेवती की 2026-27 की नक्षत्र सूचियाँ; हर समय का मिलान 7 अक्टूबर 2026
  4. SanatanBodh पंचांग गणना (astronomy-engine, लाहिड़ी अयनांश): sanatanbodh.in/panchang/ganana-vidhi/

कुछ गलत लगा? गलती बताएँ