श्रवण नक्षत्र के चार चरणों के नाम अक्षर हैं: पहले चरण का खी, दूसरे का खू, तीसरे का खे और चौथे का खो। चारों चरण मकर राशि में हैं, इसलिए इन अक्षरों से शुरू होने वाले नाम की नाम राशि मकर है। श्रवण राशिचक्र में मकर 10° से 23°20′ तक है; विंशोत्तरी दशा के क्रम में इसका स्वामी ग्रह चंद्र है और इसके देवता विष्णु हैं।
श्रवण नक्षत्र के 4 चरण, नाम अक्षर और राशि
| चरण | नाम अक्षर | राशि | राशि में अंश |
|---|---|---|---|
| 1 | खीKhi | मकर | 10°–13°20′ |
| 2 | खूKhu | मकर | 13°20′–16°40′ |
| 3 | खेKhe | मकर | 16°40′–20° |
| 4 | खोKho | मकर | 20°–23°20′ |
हर नक्षत्र 13°20′ का है और उसके चार चरण 3°20′ के। नाम राशि जानने के लिए किसी भी नाम का पहला अक्षर देखें: नाम से राशि
पिछला नक्षत्र: उत्तराषाढ़ाअगला नक्षत्र: धनिष्ठासभी 27 नक्षत्र
- क्रम
- 27 में 22वाँ (22)
- राशिचक्र में
- मकर 10° से 23°20′ तकमेष के आरंभ से 280°–293°20′
- राशि
- मकर: चारों चरण
- देवता
- विष्णु
चंद्रमा अगली बार श्रवण नक्षत्र में
- सोमवार, 19 अक्टूबर 2026, 3:39 PM से मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026, 6:03 PM तक
- रविवार, 15 नवंबर 2026, 11:30 PM से मंगलवार, 17 नवंबर 2026, 2:18 AM तक
- रविवार, 13 दिसंबर 2026, 6:13 AM से सोमवार, 14 दिसंबर 2026, 9:13 AM तक
- शनिवार, 9 जनवरी 2027, 12:17 PM से रविवार, 10 जनवरी 2027, 3:12 PM तक
- शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2027, 6:33 PM से शनिवार, 6 फ़रवरी 2027, 9:20 PM तक
- शुक्रवार, 5 मार्च 2027, 1:36 AM से शनिवार, 6 मार्च 2027, 4:21 AM तक
समय भारतीय मानक समय में; चंद्रमा का नक्षत्र में आना-जाना पूरे भारत में एक ही क्षण पर होता है। Drik Panchang से 2 मिनट के भीतर मिलता है। आज का पंचांग
सूचियों में अंतर
- दक्षिण भारत की कई सूचियों में श्रवण के अक्षर जू, जे, जो, खा हैं। उत्तर भारत की सूचियों और अवकहड़ा चक्र की पुस्तकों में ये अभिजित के अक्षर हैं, और 27 नक्षत्रों में श्रवण के अक्षर खी, खू, खे, खो।
- पुस्तकों और सूचियों में कई अक्षरों की मात्रा छोटी-बड़ी लिखी मिलती है (जैसे वू/वु, चू/चु)। अवकहड़ा चक्र में अ-आ, इ-ई, उ-ऊ, ए-ऐ और ओ-औ एक ही माने जाते हैं, इसलिए चरण वही रहता है।
श्रवण नक्षत्र: सवाल-जवाब
श्रवण नक्षत्र में किस अक्षर से नाम रखें?
परंपरा में जन्म के समय चंद्रमा श्रवण के जिस चरण में हो, उसी चरण का अक्षर नाम के आरंभ के लिए लिया जाता है: पहले चरण में खी, दूसरे में खू, तीसरे में खे और चौथे में खो। चरण जन्म की तारीख, समय और स्थान से निकलता है; इसके लिए SanatanBodh का जन्म पंचांग देखें।
श्रवण नक्षत्र के 4 चरण कौन से हैं?
श्रवण के चार चरण 3°20′ के हैं: पहला चरण मकर राशि में 10° से 13°20′ तक, अक्षर खी; दूसरा चरण मकर राशि में 13°20′ से 16°40′ तक, अक्षर खू; तीसरा चरण मकर राशि में 16°40′ से 20° तक, अक्षर खे; चौथा चरण मकर राशि में 20° से 23°20′ तक, अक्षर खो।
श्रवण नक्षत्र के बाद कौन सा नक्षत्र आता है?
27 नक्षत्रों के क्रम में श्रवण (22) के बाद धनिष्ठा (23) आता है, और श्रवण से पहले उत्तराषाढ़ा (21) है। चंद्रमा इसी क्रम में एक के बाद एक नक्षत्र से गुजरता है।
श्रवण नक्षत्र की राशि कौन सी है?
श्रवण राशिचक्र में मकर 10° से 23°20′ तक है (मेष के आरंभ से गिनें तो 280°–293°20′)। चारों चरण मकर राशि में हैं, इसलिए इन अक्षरों से शुरू होने वाले नाम की नाम राशि मकर है। हर राशि में नौ नक्षत्र-चरण आते हैं: 27 नक्षत्रों के 108 चरण, 12 राशियों में।
श्रवण नक्षत्र का स्वामी ग्रह और देवता कौन हैं?
विंशोत्तरी दशा के क्रम में श्रवण का स्वामी चंद्र है; यही ग्रह रोहिणी और हस्त का भी स्वामी है (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 46)। बृहत्संहिता (अध्याय 98) में श्रवण के देवता विष्णु हैं।
चंद्रमा श्रवण नक्षत्र में कितने समय रहता है?
लगभग एक दिन। चंद्रमा की चाल घटती-बढ़ती है, इसलिए 13°20′ पार करने में उसे लगभग 21 से 27 घंटे लगते हैं, और लगभग 27 दिन बाद वह फिर श्रवण में आता है (हमारी गणना, 2026–27)। यह समय पूरे भारत में एक ही है।
स्रोत
- नाम अक्षर: बृहदवकहडाचक्रम्, नक्षत्र प्रकरण, शतपदचक्र श्लोक 9–15 (archive.org); पं. सीताराम शर्मा, अति बृहत् अवकहड़ा चक्रम् (1932), पृ. 22–24; Drik Panchang, नक्षत्र पद स्वर सिद्धांत
- एक राशि में नौ नक्षत्र-चरण: पं. सीताराम शर्मा, अति बृहत् अवकहड़ा चक्रम् (1932), पृ. 26; हर नक्षत्र का विस्तार: Drik Panchang के नक्षत्र पृष्ठ (drikpanchang.com/tutorials/nakshatra/)
- स्वामी ग्रह: बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 46, श्लोक 12–14 (कृत्तिका से गिनती: सूर्य, चंद्र, मंगल, राहु, गुरु, शनि, बुध, केतु, शुक्र), R. Santhanam का अंग्रेज़ी अनुवाद, खंड 2, पृ. 507–508; Drik Panchang के नक्षत्र और नवग्रह पृष्ठ
- देवता: वराहमिहिर, बृहत्संहिता, अध्याय 98, श्लोक 4–5, V. Subrahmanya Sastri और M. Ramakrishna Bhat का अंग्रेज़ी अनुवाद (बंगलौर, 1946), पृ. 742; Drik Panchang की नक्षत्र सूचियाँ (स्वामी) और नक्षत्र पृष्ठ
- चंद्रमा का नक्षत्र में आना-जाना: SanatanBodh पंचांग गणना (astronomy-engine, लाहिड़ी अयनांश); Drik Panchang की 2026 और 2027 की नक्षत्र सूचियों (नई दिल्ली) से मिलान, सभी समय 2 मिनट के भीतर (4 अक्टूबर 2026)
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