उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के 4 चरण, नाम अक्षर और राशि

उत्तराषाढ़ा 27 नक्षत्रों में 21वाँ नक्षत्र है। इसके चार चरणों के अक्षर, हर चरण की राशि, स्वामी ग्रह और देवता, और चंद्रमा अगली बार इसमें कब आएगा।

संक्षेप में

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के चार चरणों के नाम अक्षर हैं: पहले चरण का भे, दूसरे का भो, तीसरे का जा और चौथे का जी। चरण 1 धनु राशि में और चरण 2–4 मकर राशि में हैं, इसलिए नाम राशि अक्षर के चरण से तय होती है: भे से धनु; भो, जा, जी से मकर। उत्तराषाढ़ा राशिचक्र में धनु 26°40′ से मकर 10° तक है; विंशोत्तरी दशा के क्रम में इसका स्वामी ग्रह सूर्य है और इसके देवता विश्वेदेव हैं।

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के 4 चरण, नाम अक्षर और राशि

चरणनाम अक्षरराशिराशि में अंश
1भेBheधनु26°40′–30°
2भोBhoमकर0°–3°20′
3जाJaमकर3°20′–6°40′
4जीJiमकर6°40′–10°

हर नक्षत्र 13°20′ का है और उसके चार चरण 3°20′ के। नाम राशि जानने के लिए किसी भी नाम का पहला अक्षर देखें: नाम से राशि

पिछला नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ाअगला नक्षत्र: श्रवणसभी 27 नक्षत्र

क्रम
27 में 21वाँ (21)
राशिचक्र में
धनु 26°40′ से मकर 10° तकमेष के आरंभ से 266°40′–280°
राशि
धनु: चरण 1; मकर: चरण 2–4
स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी)
सूर्यइसी ग्रह के नक्षत्र: कृत्तिका, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा
देवता
विश्वेदेव

चंद्रमा अगली बार उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में

  • रविवार, 18 अक्टूबर 2026, 12:50 PM से सोमवार, 19 अक्टूबर 2026, 3:39 PM तक
  • शनिवार, 14 नवंबर 2026, 8:25 PM से रविवार, 15 नवंबर 2026, 11:30 PM तक
  • शनिवार, 12 दिसंबर 2026, 3:05 AM से रविवार, 13 दिसंबर 2026, 6:13 AM तक
  • शुक्रवार, 8 जनवरी 2027, 9:14 AM से शनिवार, 9 जनवरी 2027, 12:17 PM तक

समय भारतीय मानक समय में; चंद्रमा का नक्षत्र में आना-जाना पूरे भारत में एक ही क्षण पर होता है। Drik Panchang से 2 मिनट के भीतर मिलता है। आज का पंचांग

सूचियों में अंतर

  • पुस्तकों और सूचियों में कई अक्षरों की मात्रा छोटी-बड़ी लिखी मिलती है (जैसे वू/वु, चू/चु)। अवकहड़ा चक्र में अ-आ, इ-ई, उ-ऊ, ए-ऐ और ओ-औ एक ही माने जाते हैं, इसलिए चरण वही रहता है।
संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 5 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र: सवाल-जवाब

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में किस अक्षर से नाम रखें?

परंपरा में जन्म के समय चंद्रमा उत्तराषाढ़ा के जिस चरण में हो, उसी चरण का अक्षर नाम के आरंभ के लिए लिया जाता है: पहले चरण में भे, दूसरे में भो, तीसरे में जा और चौथे में जी। चरण जन्म की तारीख, समय और स्थान से निकलता है; इसके लिए SanatanBodh का जन्म पंचांग देखें।

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के 4 चरण कौन से हैं?

उत्तराषाढ़ा के चार चरण 3°20′ के हैं: पहला चरण धनु राशि में 26°40′ से 30° तक, अक्षर भे; दूसरा चरण मकर राशि में 0° से 3°20′ तक, अक्षर भो; तीसरा चरण मकर राशि में 3°20′ से 6°40′ तक, अक्षर जा; चौथा चरण मकर राशि में 6°40′ से 10° तक, अक्षर जी।

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के बाद कौन सा नक्षत्र आता है?

27 नक्षत्रों के क्रम में उत्तराषाढ़ा (21) के बाद श्रवण (22) आता है, और उत्तराषाढ़ा से पहले पूर्वाषाढ़ा (20) है। चंद्रमा इसी क्रम में एक के बाद एक नक्षत्र से गुजरता है।

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र की राशि कौन सी है?

उत्तराषाढ़ा राशिचक्र में धनु 26°40′ से मकर 10° तक है (मेष के आरंभ से गिनें तो 266°40′–280°)। चरण 1 धनु राशि में और चरण 2–4 मकर राशि में हैं, इसलिए नाम राशि अक्षर के चरण से तय होती है: भे से धनु; भो, जा, जी से मकर। हर राशि में नौ नक्षत्र-चरण आते हैं: 27 नक्षत्रों के 108 चरण, 12 राशियों में।

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी ग्रह और देवता कौन हैं?

विंशोत्तरी दशा के क्रम में उत्तराषाढ़ा का स्वामी सूर्य है; यही ग्रह कृत्तिका और उत्तरा फाल्गुनी का भी स्वामी है (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 46)। बृहत्संहिता (अध्याय 98) में उत्तराषाढ़ा के देवता विश्वेदेव हैं।

चंद्रमा उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में कितने समय रहता है?

लगभग एक दिन। चंद्रमा की चाल घटती-बढ़ती है, इसलिए 13°20′ पार करने में उसे लगभग 21 से 27 घंटे लगते हैं, और लगभग 27 दिन बाद वह फिर उत्तराषाढ़ा में आता है (हमारी गणना, 2026–27)। यह समय पूरे भारत में एक ही है।

स्रोत

  1. नाम अक्षर: बृहदवकहडाचक्रम्, नक्षत्र प्रकरण, शतपदचक्र श्लोक 9–15 (archive.org); पं. सीताराम शर्मा, अति बृहत् अवकहड़ा चक्रम् (1932), पृ. 22–24; Drik Panchang, नक्षत्र पद स्वर सिद्धांत
  2. एक राशि में नौ नक्षत्र-चरण: पं. सीताराम शर्मा, अति बृहत् अवकहड़ा चक्रम् (1932), पृ. 26; हर नक्षत्र का विस्तार: Drik Panchang के नक्षत्र पृष्ठ (drikpanchang.com/tutorials/nakshatra/)
  3. स्वामी ग्रह: बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 46, श्लोक 12–14 (कृत्तिका से गिनती: सूर्य, चंद्र, मंगल, राहु, गुरु, शनि, बुध, केतु, शुक्र), R. Santhanam का अंग्रेज़ी अनुवाद, खंड 2, पृ. 507–508; Drik Panchang के नक्षत्र और नवग्रह पृष्ठ
  4. देवता: वराहमिहिर, बृहत्संहिता, अध्याय 98, श्लोक 4–5, V. Subrahmanya Sastri और M. Ramakrishna Bhat का अंग्रेज़ी अनुवाद (बंगलौर, 1946), पृ. 742; Drik Panchang की नक्षत्र सूचियाँ (स्वामी) और नक्षत्र पृष्ठ
  5. चंद्रमा का नक्षत्र में आना-जाना: SanatanBodh पंचांग गणना (astronomy-engine, लाहिड़ी अयनांश); Drik Panchang की 2026 और 2027 की नक्षत्र सूचियों (नई दिल्ली) से मिलान, सभी समय 2 मिनट के भीतर (4 अक्टूबर 2026)

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