स्वाति नक्षत्र के 4 चरण, नाम अक्षर और राशि

स्वाति 27 नक्षत्रों में 15वाँ नक्षत्र है। इसके चार चरणों के अक्षर, हर चरण की राशि, स्वामी ग्रह और देवता, और चंद्रमा अगली बार इसमें कब आएगा।

संक्षेप में

स्वाति नक्षत्र के चार चरणों के नाम अक्षर हैं: पहले चरण का रू, दूसरे का रे, तीसरे का रो और चौथे का ता। चारों चरण तुला राशि में हैं, इसलिए इन अक्षरों से शुरू होने वाले नाम की नाम राशि तुला है। स्वाति राशिचक्र में तुला 6°40′ से 20° तक है; विंशोत्तरी दशा के क्रम में इसका स्वामी ग्रह राहु है और इसके देवता वायु हैं।

स्वाति नक्षत्र के 4 चरण, नाम अक्षर और राशि

चरणनाम अक्षरराशिराशि में अंश
1रूRuतुला6°40′–10°
2रेReतुला10°–13°20′
3रोRoतुला13°20′–16°40′
4ताTaतुला16°40′–20°

हर नक्षत्र 13°20′ का है और उसके चार चरण 3°20′ के। नाम राशि जानने के लिए किसी भी नाम का पहला अक्षर देखें: नाम से राशि

पिछला नक्षत्र: चित्राअगला नक्षत्र: विशाखासभी 27 नक्षत्र

क्रम
27 में 15वाँ (15)
राशिचक्र में
तुला 6°40′ से 20° तकमेष के आरंभ से 186°40′–200°
राशि
तुला: चारों चरण
स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी)
राहुइसी ग्रह के नक्षत्र: आर्द्रा, स्वाति, शतभिषा
देवता
वायु

चंद्रमा अगली बार स्वाति नक्षत्र में

  • रविवार, 11 अक्टूबर 2026, 10:33 PM से सोमवार, 12 अक्टूबर 2026, 11:53 PM तक
  • रविवार, 8 नवंबर 2026, 5:53 AM से सोमवार, 9 नवंबर 2026, 7:25 AM तक
  • शनिवार, 5 दिसंबर 2026, 11:49 AM से रविवार, 6 दिसंबर 2026, 1:39 PM तक
  • शुक्रवार, 1 जनवरी 2027, 5:30 PM से शनिवार, 2 जनवरी 2027, 7:20 PM तक

समय भारतीय मानक समय में; चंद्रमा का नक्षत्र में आना-जाना पूरे भारत में एक ही क्षण पर होता है। Drik Panchang से 2 मिनट के भीतर मिलता है। आज का पंचांग

सूचियों में अंतर

  • पुस्तकों और सूचियों में कई अक्षरों की मात्रा छोटी-बड़ी लिखी मिलती है (जैसे वू/वु, चू/चु)। अवकहड़ा चक्र में अ-आ, इ-ई, उ-ऊ, ए-ऐ और ओ-औ एक ही माने जाते हैं, इसलिए चरण वही रहता है।
संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 5 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ

स्वाति नक्षत्र: सवाल-जवाब

स्वाति नक्षत्र में किस अक्षर से नाम रखें?

परंपरा में जन्म के समय चंद्रमा स्वाति के जिस चरण में हो, उसी चरण का अक्षर नाम के आरंभ के लिए लिया जाता है: पहले चरण में रू, दूसरे में रे, तीसरे में रो और चौथे में ता। चरण जन्म की तारीख, समय और स्थान से निकलता है; इसके लिए SanatanBodh का जन्म पंचांग देखें।

स्वाति नक्षत्र के 4 चरण कौन से हैं?

स्वाति के चार चरण 3°20′ के हैं: पहला चरण तुला राशि में 6°40′ से 10° तक, अक्षर रू; दूसरा चरण तुला राशि में 10° से 13°20′ तक, अक्षर रे; तीसरा चरण तुला राशि में 13°20′ से 16°40′ तक, अक्षर रो; चौथा चरण तुला राशि में 16°40′ से 20° तक, अक्षर ता।

स्वाति नक्षत्र के बाद कौन सा नक्षत्र आता है?

27 नक्षत्रों के क्रम में स्वाति (15) के बाद विशाखा (16) आता है, और स्वाति से पहले चित्रा (14) है। चंद्रमा इसी क्रम में एक के बाद एक नक्षत्र से गुजरता है।

स्वाति नक्षत्र की राशि कौन सी है?

स्वाति राशिचक्र में तुला 6°40′ से 20° तक है (मेष के आरंभ से गिनें तो 186°40′–200°)। चारों चरण तुला राशि में हैं, इसलिए इन अक्षरों से शुरू होने वाले नाम की नाम राशि तुला है। हर राशि में नौ नक्षत्र-चरण आते हैं: 27 नक्षत्रों के 108 चरण, 12 राशियों में।

स्वाति नक्षत्र का स्वामी ग्रह और देवता कौन हैं?

विंशोत्तरी दशा के क्रम में स्वाति का स्वामी राहु है; यही ग्रह आर्द्रा और शतभिषा का भी स्वामी है (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 46)। बृहत्संहिता (अध्याय 98) में स्वाति के देवता वायु हैं।

चंद्रमा स्वाति नक्षत्र में कितने समय रहता है?

लगभग एक दिन। चंद्रमा की चाल घटती-बढ़ती है, इसलिए 13°20′ पार करने में उसे लगभग 21 से 27 घंटे लगते हैं, और लगभग 27 दिन बाद वह फिर स्वाति में आता है (हमारी गणना, 2026–27)। यह समय पूरे भारत में एक ही है।

स्रोत

  1. नाम अक्षर: बृहदवकहडाचक्रम्, नक्षत्र प्रकरण, शतपदचक्र श्लोक 9–15 (archive.org); पं. सीताराम शर्मा, अति बृहत् अवकहड़ा चक्रम् (1932), पृ. 22–24; Drik Panchang, नक्षत्र पद स्वर सिद्धांत
  2. एक राशि में नौ नक्षत्र-चरण: पं. सीताराम शर्मा, अति बृहत् अवकहड़ा चक्रम् (1932), पृ. 26; हर नक्षत्र का विस्तार: Drik Panchang के नक्षत्र पृष्ठ (drikpanchang.com/tutorials/nakshatra/)
  3. स्वामी ग्रह: बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 46, श्लोक 12–14 (कृत्तिका से गिनती: सूर्य, चंद्र, मंगल, राहु, गुरु, शनि, बुध, केतु, शुक्र), R. Santhanam का अंग्रेज़ी अनुवाद, खंड 2, पृ. 507–508; Drik Panchang के नक्षत्र और नवग्रह पृष्ठ
  4. देवता: वराहमिहिर, बृहत्संहिता, अध्याय 98, श्लोक 4–5, V. Subrahmanya Sastri और M. Ramakrishna Bhat का अंग्रेज़ी अनुवाद (बंगलौर, 1946), पृ. 742; Drik Panchang की नक्षत्र सूचियाँ (स्वामी) और नक्षत्र पृष्ठ
  5. चंद्रमा का नक्षत्र में आना-जाना: SanatanBodh पंचांग गणना (astronomy-engine, लाहिड़ी अयनांश); Drik Panchang की 2026 और 2027 की नक्षत्र सूचियों (नई दिल्ली) से मिलान, सभी समय 2 मिनट के भीतर (4 अक्टूबर 2026)

कुछ गलत लगा? गलती बताएँ