बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 · ग्वालियर
- सूर्योदय
- 6:12 AM
- सूर्यास्त
- 5:58 PM
- राहु काल
- 12:05–1:33 PM
- अभिजित मुहूर्त
- 11:41 AM–12:28 PM
दिन का चौघड़िया 6:12 AM–5:58 PM
- लाभलाभदायक6:12–7:40 AM
- अमृतसर्वश्रेष्ठ7:40–9:09 AM
- कालअशुभ · काल वेला9:09–10:37 AM
- शुभशुभ10:37 AM–12:05 PM
- रोगअशुभ · राहु काल, वार वेला12:05–1:33 PM
- उद्वेगअशुभ1:33–3:01 PM
- चरसामान्य, यात्रा के लिए अच्छा3:01–4:30 PM
- लाभलाभदायक4:30–5:58 PM
रात का चौघड़िया 5:58 PM–6:13 AM
- उद्वेगअशुभ5:58–7:30 PM
- शुभशुभ7:30–9:01 PM
- अमृतसर्वश्रेष्ठ9:01–10:33 PM
- चरसामान्य, यात्रा के लिए अच्छा10:33 PM–12:05 AM (8 अक्टू॰)
- रोगअशुभ12:05–1:37 AM (8 अक्टू॰)
- कालअशुभ1:37–3:09 AM (8 अक्टू॰)
- लाभलाभदायक · काल रात्रि3:09–4:41 AM (8 अक्टू॰)
- उद्वेगअशुभ4:41–6:13 AM (8 अक्टू॰)
हरे नाम शुभ और लाल अशुभ चौघड़िया हैं। समय भारतीय मानक समय में; Drik Panchang से मिलान, एक मिनट तक का अंतर संभव। ग्वालियर का पूरा पंचांग · आज का राहु काल ग्वालियर: यमगंड और गुलिक काल के साथ
बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को ग्वालियर में दिन के शुभ चौघड़िया हैं: लाभ 6:12–7:40 AM, अमृत 7:40–9:09 AM, शुभ 10:37 AM–12:05 PM, चर 3:01–4:30 PM और लाभ 4:30–5:58 PM। रात में शुभ 7:30–9:01 PM, अमृत 9:01–10:33 PM, चर 10:33 PM–12:05 AM और लाभ 3:09–4:41 AM (काल रात्रि)। राहु काल, वार वेला, काल वेला और काल रात्रि वाले समय में पंचांग शुभ काम शुरू न करने की सलाह देते हैं।
कल का चौघड़िया: ग्वालियर
गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 · सूर्योदय 6:13 AM, सूर्यास्त 5:57 PM, राहु काल 1:33–3:01 PM
कल का दिन का चौघड़िया 6:13 AM–5:57 PM
- शुभ6:13–7:41 AM
- रोग7:41–9:09 AM
- उद्वेग9:09–10:37 AM
- चर10:37 AM–12:05 PM
- लाभ12:05–1:33 PM
- अमृतराहु काल1:33–3:01 PM
- कालकाल वेला3:01–4:29 PM
- शुभवार वेला4:29–5:57 PM
कल का रात का चौघड़िया 5:57 PM–6:13 AM
- अमृत5:57–7:29 PM
- चर7:29–9:01 PM
- रोग9:01–10:33 PM
- काल10:33 PM–12:05 AM (9 अक्टू॰)
- लाभकाल रात्रि12:05–1:37 AM (9 अक्टू॰)
- उद्वेग1:37–3:09 AM (9 अक्टू॰)
- शुभ3:09–4:41 AM (9 अक्टू॰)
- अमृत4:41–6:13 AM (9 अक्टू॰)
सात चौघड़िया: स्वामी ग्रह और उपयोग
हर चौघड़िया का एक स्वामी ग्रह है। चंद्रमा, बृहस्पति, बुध और शुक्र के समय को शुभ, और सूर्य, शनि और मंगल के समय को अशुभ माना जाता है। परंपरा में किस चौघड़िया को किस काम के लिए लिया जाता है, यह नीचे है (Drik Panchang के अनुसार)।
| चौघड़िया | स्वामी | किस काम के लिए |
|---|---|---|
| अमृत | चंद्रमा | हर तरह का शुभ काम |
| शुभ | बृहस्पति | पूजा, संस्कार, विवाह जैसे मंगल काम |
| लाभ | बुध | पढ़ाई शुरू करना, नया काम सीखना |
| चर | शुक्र | यात्रा |
| उद्वेग | सूर्य | शुभ काम नहीं; सरकारी काम के लिए ठीक माना जाता है |
| काल | शनि | शुभ काम नहीं; धन जोड़ने वाले कामों के लिए कहा गया है |
| रोग | मंगल | शुभ काम नहीं; विवाद या मुकाबले के काम के लिए कहा गया है |
चौघड़िया कैसे निकलता है

पुराने भारतीय समय-माप में सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन को 30 घटी (घड़ी) माना जाता है; 12 घंटे के दिन में एक घटी 24 मिनट की होती है। चौघड़िया में दिन को 8 बराबर भागों में बाँटा जाता है, तो हर भाग लगभग 4 घटी का होता है। इसी से नाम बना: चौ (चार) + घड़िया। इसे चतुष्टिका मुहूर्त भी कहते हैं। रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) के भी इसी तरह 8 भाग होते हैं।
दिन का पहला चौघड़िया वार के स्वामी ग्रह का होता है, और फिर क्रम चलता है: सूर्य (उद्वेग), शुक्र (चर), बुध (लाभ), चंद्रमा (अमृत), शनि (काल), बृहस्पति (शुभ), मंगल (रोग)। दिन का आठवाँ चौघड़िया फिर वार के स्वामी का होता है। रात के चौघड़िया का क्रम अलग नियम से चलता है; हर वार का पहला चौघड़िया नीचे है।
| वार | दिन का पहला | वार वेला | काल वेला | काल रात्रि |
|---|---|---|---|---|
| रविवार | उद्वेग (सूर्य) | दिन का 4 | दिन का 5 | रात का 6 |
| सोमवार | अमृत (चंद्रमा) | दिन का 7 | दिन का 2 | रात का 4 |
| मंगलवार | रोग (मंगल) | दिन का 2 | दिन का 6 | रात का 2 |
| बुधवार | लाभ (बुध) | दिन का 5 | दिन का 3 | रात का 7 |
| गुरुवार | शुभ (बृहस्पति) | दिन का 8 | दिन का 7 | रात का 5 |
| शुक्रवार | चर (शुक्र) | दिन का 3 | दिन का 4 | रात का 3 |
| शनिवार | काल (शनि) | दिन का 6 | दिन का 1 और 8 | रात का 1 और 8 |
अंक बताते हैं कि दिन या रात का कौन सा चौघड़िया (1 से 8)। स्रोत: Drik Panchang; सातों वार के लिए हमारी गणना से मिलान किया गया।
चौघड़िया: सवाल-जवाब
आज ग्वालियर में शुभ चौघड़िया कब है?
बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को ग्वालियर में दिन के शुभ चौघड़िया हैं: लाभ 6:12–7:40 AM, अमृत 7:40–9:09 AM, शुभ 10:37 AM–12:05 PM, चर 3:01–4:30 PM और लाभ 4:30–5:58 PM। रात में शुभ 7:30–9:01 PM, अमृत 9:01–10:33 PM, चर 10:33 PM–12:05 AM और लाभ 3:09–4:41 AM (काल रात्रि)। राहु काल, वार वेला, काल वेला और काल रात्रि वाले समय में पंचांग शुभ काम शुरू न करने की सलाह देते हैं।
सबसे शुभ चौघड़िया कौन सा है?
अमृत चौघड़िया (स्वामी चंद्रमा) को सबसे अच्छा माना जाता है और यह हर तरह के शुभ काम के लिए लिया जाता है। शुभ (बृहस्पति) पूजा, संस्कार और विवाह जैसे मंगल कामों के लिए, लाभ (बुध) पढ़ाई और नया काम सीखने के लिए, और चर (शुक्र) यात्रा के लिए अच्छा माना जाता है। शुभ चौघड़िया भी राहु काल, वार वेला या काल वेला के साथ पड़े तो पंचांग उसे छोड़ने की सलाह देते हैं।
एक चौघड़िया कितने समय का होता है?
दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) का आठवाँ भाग दिन का एक चौघड़िया है, और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग रात का। बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को ग्वालियर में दिन का चौघड़िया लगभग 88 मिनट और रात का लगभग 92 मिनट का है। दिल्ली में सर्दियों (21 दिसंबर) में दिन का चौघड़िया लगभग 77 मिनट और गर्मियों (21 जून) में लगभग 105 मिनट का होता है।
क्या चौघड़िया हर शहर में अलग होता है?
हाँ। चौघड़िया सूर्योदय और सूर्यास्त से गिना जाता है, और ये हर शहर में अलग समय पर होते हैं। जैसे बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को ग्वालियर में पहला चौघड़िया 6:12 AM पर और मुंबई में 6:30 AM पर शुरू होता है। चौघड़िया के नाम और क्रम वार से तय होते हैं, इसलिए वे हर शहर में एक जैसे रहते हैं।
रात का चौघड़िया कैसे देखें?
रात का चौघड़िया सूर्यास्त से अगले दिन के सूर्योदय तक चलता है। ऊपर “रात का चौघड़िया” सूची में आधी रात के बाद वाले समय के साथ अगली तारीख लिखी है। सूर्योदय से पहले का समय (जैसे सुबह 4 बजे) पिछली तारीख की रात का हिस्सा होता है।
वार वेला, काल वेला और काल रात्रि क्या हैं?
हर वार के लिए दिन का एक चौघड़िया वार वेला और एक काल वेला कहलाता है, और रात का एक काल रात्रि (शनिवार को काल वेला और काल रात्रि दो-दो)। पंचांगों में माना जाता है कि इन समयों में शुरू किए मांगलिक काम मनचाहा फल नहीं देते, इसलिए इनसे मिलने वाला शुभ चौघड़िया भी छोड़ दिया जाता है। ऊपर की सूची में ये अलग से लिखे हैं।
राहु काल और चौघड़िया में क्या अंतर है?
दोनों दिन को सूर्योदय से सूर्यास्त तक आठ बराबर भागों में बाँटते हैं। चौघड़िया हर भाग को अमृत, शुभ, लाभ जैसा नाम देता है, जबकि राहु काल हर वार का एक तय भाग है (जैसे सोमवार को दूसरा और मंगलवार को सातवाँ)। इसलिए राहु काल हमेशा दिन के किसी एक चौघड़िया के साथ पड़ता है। Drik Panchang के अनुसार ऐसा शुभ चौघड़िया छोड़ देना बेहतर है।
स्रोत
- Drik Panchang, चौघड़िया (drikpanchang.com/muhurat/choghadiya.html): चौघड़िया के स्वामी ग्रह, उपयोग, वार वेला, काल वेला और काल रात्रि। 27 सितंबर से 3 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली के सभी समय से मिलान, 1 मिनट के भीतर।
- SanatanBodh पंचांग गणना (astronomy-engine से सूर्योदय-सूर्यास्त); विधि: sanatanbodh.in/panchang/ganana-vidhi/
कुछ गलत लगा? गलती बताएँ
शहर के अनुसार आज का चौघड़िया
- नई दिल्ली
- वाराणसी
- मुंबई
- कोलकाता
- चेन्नई
- बेंगलुरु
- हैदराबाद
- अहमदाबाद
- जयपुर
- लखनऊ
- पटना
- भोपाल
- उज्जैन
- हरिद्वार
- पुणे
- गुवाहाटी
- नोएडा
- गुरुग्राम
- गाज़ियाबाद
- फरीदाबाद
- चंडीगढ़
- लुधियाना
- अमृतसर
- जम्मू
- देहरादून
- ऋषिकेश
- शिमला
- आगरा
- मथुरा
- प्रयागराज
- कानपुर
- अयोध्या
- गोरखपुर
- मेरठ
- बरेली
- जोधपुर
- उदयपुर
- कोटा
- अजमेर
- इंदौर
- ग्वालियर
- जबलपुर
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- गया
- मुज़फ़्फ़रपुर
- भागलपुर
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- जमशेदपुर
- धनबाद
- भुवनेश्वर
- पुरी
- सिलीगुड़ी
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