आज का चौघड़िया: पणजी

दिन और रात के 16 चौघड़िया, शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त से, राहु काल और वार वेला के साथ।

बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 · पणजी

सूर्योदय
6:25 AM
सूर्यास्त
6:20 PM
राहु काल
12:22–1:52 PM
अभिजित मुहूर्त
11:59 AM–12:46 PM

दिन का चौघड़िया 6:25 AM–6:20 PM

  1. लाभलाभदायक6:25–7:55 AM
  2. अमृतसर्वश्रेष्ठ7:55–9:24 AM
  3. कालअशुभ · काल वेला9:24–10:53 AM
  4. शुभशुभ10:53 AM–12:22 PM
  5. रोगअशुभ · राहु काल, वार वेला12:22–1:52 PM
  6. उद्वेगअशुभ1:52–3:21 PM
  7. चरसामान्य, यात्रा के लिए अच्छा3:21–4:50 PM
  8. लाभलाभदायक4:50–6:20 PM

रात का चौघड़िया 6:20 PM–6:25 AM

  1. उद्वेगअशुभ6:20–7:50 PM
  2. शुभशुभ7:50–9:21 PM
  3. अमृतसर्वश्रेष्ठ9:21–10:52 PM
  4. चरसामान्य, यात्रा के लिए अच्छा10:52 PM–12:23 AM (8 अक्टू॰)
  5. रोगअशुभ12:23–1:53 AM (8 अक्टू॰)
  6. कालअशुभ1:53–3:24 AM (8 अक्टू॰)
  7. लाभलाभदायक · काल रात्रि3:24–4:55 AM (8 अक्टू॰)
  8. उद्वेगअशुभ4:55–6:25 AM (8 अक्टू॰)

हरे नाम शुभ और लाल अशुभ चौघड़िया हैं। समय भारतीय मानक समय में; Drik Panchang से मिलान, एक मिनट तक का अंतर संभव। पणजी का पूरा पंचांग · आज का राहु काल पणजी: यमगंड और गुलिक काल के साथ

संक्षेप में

बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को पणजी में दिन के शुभ चौघड़िया हैं: लाभ 6:25–7:55 AM, अमृत 7:55–9:24 AM, शुभ 10:53 AM–12:22 PM, चर 3:21–4:50 PM और लाभ 4:50–6:20 PM। रात में शुभ 7:50–9:21 PM, अमृत 9:21–10:52 PM, चर 10:52 PM–12:23 AM और लाभ 3:24–4:55 AM (काल रात्रि)। राहु काल, वार वेला, काल वेला और काल रात्रि वाले समय में पंचांग शुभ काम शुरू न करने की सलाह देते हैं।

कल का चौघड़िया: पणजी

गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 · सूर्योदय 6:25 AM, सूर्यास्त 6:19 PM, राहु काल 1:51–3:21 PM

कल का दिन का चौघड़िया 6:25 AM–6:19 PM
  1. शुभ6:25–7:55 AM
  2. रोग7:55–9:24 AM
  3. उद्वेग9:24–10:53 AM
  4. चर10:53 AM–12:22 PM
  5. लाभ12:22–1:51 PM
  6. अमृतराहु काल1:51–3:21 PM
  7. कालकाल वेला3:21–4:50 PM
  8. शुभवार वेला4:50–6:19 PM
कल का रात का चौघड़िया 6:19 PM–6:26 AM
  1. अमृत6:19–7:50 PM
  2. चर7:50–9:21 PM
  3. रोग9:21–10:51 PM
  4. काल10:51 PM–12:22 AM (9 अक्टू॰)
  5. लाभकाल रात्रि12:22–1:53 AM (9 अक्टू॰)
  6. उद्वेग1:53–3:24 AM (9 अक्टू॰)
  7. शुभ3:24–4:55 AM (9 अक्टू॰)
  8. अमृत4:55–6:26 AM (9 अक्टू॰)

सात चौघड़िया: स्वामी ग्रह और उपयोग

हर चौघड़िया का एक स्वामी ग्रह है। चंद्रमा, बृहस्पति, बुध और शुक्र के समय को शुभ, और सूर्य, शनि और मंगल के समय को अशुभ माना जाता है। परंपरा में किस चौघड़िया को किस काम के लिए लिया जाता है, यह नीचे है (Drik Panchang के अनुसार)।

चौघड़ियास्वामीकिस काम के लिए
अमृतचंद्रमाहर तरह का शुभ काम
शुभबृहस्पतिपूजा, संस्कार, विवाह जैसे मंगल काम
लाभबुधपढ़ाई शुरू करना, नया काम सीखना
चरशुक्रयात्रा
उद्वेगसूर्यशुभ काम नहीं; सरकारी काम के लिए ठीक माना जाता है
कालशनिशुभ काम नहीं; धन जोड़ने वाले कामों के लिए कहा गया है
रोगमंगलशुभ काम नहीं; विवाद या मुकाबले के काम के लिए कहा गया है

चौघड़िया कैसे निकलता है

मंदिर के आँगन में सुबह की धूप: पानी भरे पीतल के पात्र में तैरता, धीरे-धीरे भरता ताँबे का कटोरा (घटी यंत्र), पास में जलता दीया और गेंदे के फूल
घटी यंत्र: छेद वाला कटोरा पानी में लगभग एक घटी में भरकर डूबता था। चित्र: AI से बनाया गया

पुराने भारतीय समय-माप में सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन को 30 घटी (घड़ी) माना जाता है; 12 घंटे के दिन में एक घटी 24 मिनट की होती है। चौघड़िया में दिन को 8 बराबर भागों में बाँटा जाता है, तो हर भाग लगभग 4 घटी का होता है। इसी से नाम बना: चौ (चार) + घड़िया। इसे चतुष्टिका मुहूर्त भी कहते हैं। रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) के भी इसी तरह 8 भाग होते हैं।

दिन का पहला चौघड़िया वार के स्वामी ग्रह का होता है, और फिर क्रम चलता है: सूर्य (उद्वेग), शुक्र (चर), बुध (लाभ), चंद्रमा (अमृत), शनि (काल), बृहस्पति (शुभ), मंगल (रोग)। दिन का आठवाँ चौघड़िया फिर वार के स्वामी का होता है। रात के चौघड़िया का क्रम अलग नियम से चलता है; हर वार का पहला चौघड़िया नीचे है।

वारदिन का पहलावार वेलाकाल वेलाकाल रात्रि
रविवारउद्वेग (सूर्य)दिन का 4दिन का 5रात का 6
सोमवारअमृत (चंद्रमा)दिन का 7दिन का 2रात का 4
मंगलवाररोग (मंगल)दिन का 2दिन का 6रात का 2
बुधवारलाभ (बुध)दिन का 5दिन का 3रात का 7
गुरुवारशुभ (बृहस्पति)दिन का 8दिन का 7रात का 5
शुक्रवारचर (शुक्र)दिन का 3दिन का 4रात का 3
शनिवारकाल (शनि)दिन का 6दिन का 1 और 8रात का 1 और 8

अंक बताते हैं कि दिन या रात का कौन सा चौघड़िया (1 से 8)। स्रोत: Drik Panchang; सातों वार के लिए हमारी गणना से मिलान किया गया।

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 2 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ

चौघड़िया: सवाल-जवाब

आज पणजी में शुभ चौघड़िया कब है?

बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को पणजी में दिन के शुभ चौघड़िया हैं: लाभ 6:25–7:55 AM, अमृत 7:55–9:24 AM, शुभ 10:53 AM–12:22 PM, चर 3:21–4:50 PM और लाभ 4:50–6:20 PM। रात में शुभ 7:50–9:21 PM, अमृत 9:21–10:52 PM, चर 10:52 PM–12:23 AM और लाभ 3:24–4:55 AM (काल रात्रि)। राहु काल, वार वेला, काल वेला और काल रात्रि वाले समय में पंचांग शुभ काम शुरू न करने की सलाह देते हैं।

सबसे शुभ चौघड़िया कौन सा है?

अमृत चौघड़िया (स्वामी चंद्रमा) को सबसे अच्छा माना जाता है और यह हर तरह के शुभ काम के लिए लिया जाता है। शुभ (बृहस्पति) पूजा, संस्कार और विवाह जैसे मंगल कामों के लिए, लाभ (बुध) पढ़ाई और नया काम सीखने के लिए, और चर (शुक्र) यात्रा के लिए अच्छा माना जाता है। शुभ चौघड़िया भी राहु काल, वार वेला या काल वेला के साथ पड़े तो पंचांग उसे छोड़ने की सलाह देते हैं।

एक चौघड़िया कितने समय का होता है?

दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) का आठवाँ भाग दिन का एक चौघड़िया है, और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग रात का। बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को पणजी में दिन का चौघड़िया लगभग 89 मिनट और रात का लगभग 91 मिनट का है। दिल्ली में सर्दियों (21 दिसंबर) में दिन का चौघड़िया लगभग 77 मिनट और गर्मियों (21 जून) में लगभग 105 मिनट का होता है।

क्या चौघड़िया हर शहर में अलग होता है?

हाँ। चौघड़िया सूर्योदय और सूर्यास्त से गिना जाता है, और ये हर शहर में अलग समय पर होते हैं। जैसे बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को पणजी में पहला चौघड़िया 6:25 AM पर और मुंबई में 6:30 AM पर शुरू होता है। चौघड़िया के नाम और क्रम वार से तय होते हैं, इसलिए वे हर शहर में एक जैसे रहते हैं।

रात का चौघड़िया कैसे देखें?

रात का चौघड़िया सूर्यास्त से अगले दिन के सूर्योदय तक चलता है। ऊपर “रात का चौघड़िया” सूची में आधी रात के बाद वाले समय के साथ अगली तारीख लिखी है। सूर्योदय से पहले का समय (जैसे सुबह 4 बजे) पिछली तारीख की रात का हिस्सा होता है।

वार वेला, काल वेला और काल रात्रि क्या हैं?

हर वार के लिए दिन का एक चौघड़िया वार वेला और एक काल वेला कहलाता है, और रात का एक काल रात्रि (शनिवार को काल वेला और काल रात्रि दो-दो)। पंचांगों में माना जाता है कि इन समयों में शुरू किए मांगलिक काम मनचाहा फल नहीं देते, इसलिए इनसे मिलने वाला शुभ चौघड़िया भी छोड़ दिया जाता है। ऊपर की सूची में ये अलग से लिखे हैं।

राहु काल और चौघड़िया में क्या अंतर है?

दोनों दिन को सूर्योदय से सूर्यास्त तक आठ बराबर भागों में बाँटते हैं। चौघड़िया हर भाग को अमृत, शुभ, लाभ जैसा नाम देता है, जबकि राहु काल हर वार का एक तय भाग है (जैसे सोमवार को दूसरा और मंगलवार को सातवाँ)। इसलिए राहु काल हमेशा दिन के किसी एक चौघड़िया के साथ पड़ता है। Drik Panchang के अनुसार ऐसा शुभ चौघड़िया छोड़ देना बेहतर है।

स्रोत

  1. Drik Panchang, चौघड़िया (drikpanchang.com/muhurat/choghadiya.html): चौघड़िया के स्वामी ग्रह, उपयोग, वार वेला, काल वेला और काल रात्रि। 27 सितंबर से 3 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली के सभी समय से मिलान, 1 मिनट के भीतर।
  2. SanatanBodh पंचांग गणना (astronomy-engine से सूर्योदय-सूर्यास्त); विधि: sanatanbodh.in/panchang/ganana-vidhi/

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शहर के अनुसार आज का चौघड़िया