श्री जगन्नाथ मंदिर ओडिशा के पुरी नगर में जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और सुदर्शन का मंदिर है, जहाँ देवताओं की मूर्तियाँ लकड़ी की हैं। यह भारत के चार धामों में पूर्व का धाम है, और यहाँ की रथयात्रा (2026 में 16 जुलाई) सबसे प्रसिद्ध है। मंदिर में केवल हिंदुओं को प्रवेश मिलता है।
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- देवता
- जगन्नाथ, साथ में बलभद्र, सुभद्रा और सुदर्शन
- तीर्थ-सूची
- चार धाम 3/4
- स्थान
- पुरी, पुरी ज़िला
- राज्य
- ओडिशा
- देश
- भारत
- आधिकारिक वेबसाइट
- श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन, पुरी (shreejagannatha.in)
- नक्शा
- OpenStreetMap (19.8047, 85.8183)
दर्शन और आरती का समय
| द्वार खुलना (द्वारफिटा) | सुबह लगभग 5:30 (नियम से 4:30 तक) |
|---|---|
| मंगला आलती के बाद | जगमोहन तक दर्शन, बेश पूरा होने तक (लगभग 7:30-8 बजे) |
| गोपाल वल्लभ पूजा के बाद | नाट मंदिर से दर्शन, सकाल धूप पूरी होने तक (लगभग 11 बजे) |
| सकाल धूप के बाद | जगमोहन तक दर्शन, भोग मंडप पूजा तक (लगभग 1 बजे) |
| दोपहर के दर्शन | दोपहर 2 से शाम 5:30 |
| रात के दर्शन | लगभग रात 8 से 9 (संध्या धूप के बाद चंदन लागी तक) |
ये लगभग-समय मंदिर प्रशासन के दर्शन-सुविधा पृष्ठ से हैं। प्रशासन स्वयं लिखता है कि नीतियाँ प्रायः तय समय पर नहीं हो पातीं और त्योहारों पर बदलती हैं; उस दिन के वास्तविक समय वह "आज मंदिर में" पृष्ठ पर देता है (5 अक्टूबर 2026 को द्वारफिटा सुबह 6:15 और मंगला आरती 7 बजे थी)।
स्रोत: shreejagannatha.inजाँचा: समय बदल सकते हैं; जाने से पहले आधिकारिक स्रोत देख लें।
देवता
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के अनुसार रत्नसिंहासन पर जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र, बहन सुभद्रा और चक्र सुदर्शन विराजते हैं; साथ में भूदेवी, श्रीदेवी और माधव की मूर्तियाँ हैं। प्रशासन लिखता है कि अलग-अलग परंपराएँ इन्हें अपने ढंग से देखती हैं: कृष्ण-भक्तों के लिए जगन्नाथ कृष्ण, बलभद्र बलराम और सुभद्रा कृष्ण की बहन हैं; राम-भक्तों के लिए जगन्नाथ राम, बलभद्र लक्ष्मण और सुभद्रा सीता; और रामानुजाचार्य की पांचरात्र परंपरा में बलभद्र शिव, सुभद्रा एकानंशा दुर्गा और सुदर्शन नृसिंह के रूप में पूजे जाते हैं।
कथा (पुराणों के अनुसार)
मंदिर प्रशासन बताता है कि पुरी की कथा ब्रह्म पुराण, नारद पुराण और स्कंद पुराण के उत्कल खंड (पुरुषोत्तम माहात्म्य) में है। उसके अनुसार मालव के राजा इंद्रद्युम्न ने विद्यापति को भेजा, जिन्होंने शबर विश्वावसु के यहाँ पूजे जा रहे नीलमाधव को पाया। राजा के यज्ञ के अंत में समुद्र तट पर एक दिव्य लकड़ी (दारु) आई, और स्वयं विष्णु ने बढ़ई का वेश धरकर उससे मूर्तियाँ बनाईं।
नवकलेवर में पुरानी लकड़ी की मूर्तियों के स्थान पर नई बनती हैं। प्रशासन के अनुसार यह 8, 11, 12 या 19 वर्ष के अंतर पर होता है, नीम के चार पवित्र वृक्षों की लकड़ी से, और नई मूर्तियाँ कोइली बैकुंठ में बनती हैं।
मंदिर और महाप्रसाद
मंदिर प्रशासन के अनुसार शिलालेखों से सिद्ध है कि आज का मंदिर अनंतवर्मन चोडगंग देव (1112-1148) ने बनवाया; एक परंपरा इसे अनंगभीम देव से जोड़ती है। मंदिर सड़क से लगभग 214 फ़ुट 8 इंच ऊँचा है और दो परकोटों से घिरा है, बाहर का मेघनाद प्राचीर और भीतर का कूर्म प्राचीर; चार द्वार हैं, सिंह, अश्व, व्याघ्र और हस्ति। मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की केंद्रीय संरक्षित स्मारकों की सूची में है।
महाप्रसाद (सूखी मिठाइयाँ, भात, दाल, सब्ज़ी) मंदिर परिसर के उत्तर-पूर्वी कोने में "आनंद बाज़ार" में मिलता है (मंदिर प्रशासन)। मंदिर का प्रबंध श्री जगन्नाथ मंदिर अधिनियम, 1954 के अंतर्गत बनी प्रबंध समिति करती है, जिसके अध्यक्ष पुरी के राजा होते हैं।
जगन्नाथ पुरी कैसे पहुँचें
- रेल: पुरी ईस्ट कोस्ट रेलवे का अंतिम स्टेशन है, मंदिर से 3 किमी; खुर्दा रोड जंक्शन 44 किमी (पुरी ज़िला)।
- हवाई: निकटतम हवाई अड्डा भुवनेश्वर का बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, 60 किमी (पुरी ज़िला)।
- मंदिर में जूते-चप्पल, चमड़े की वस्तुएँ, छाता, कैमरा और मोबाइल फ़ोन नहीं ले जा सकते; प्रशासन ने इनके लिए निःशुल्क स्टैंड बनाए हैं। 1 जनवरी 2024 से मंदिर में वस्त्र-नियम लागू है (द हिंदू)।
प्रमुख त्योहार
मत-भेद: स्रोतों में अंतर
- निर्माता: मंदिर प्रशासन शिलालेखों के आधार पर चोडगंग देव (1112-1148) को निर्माता मानता है; उसी के दूसरे पृष्ठ के अनुसार अनंगभीम देव तृतीय ने मंदिर 1230 में पूरा कराया, और एक परंपरा पूरा निर्माण अनंगभीम देव का मानती है।
- गोवर्धन मठ के पहले आचार्य: मंदिर प्रशासन पद्मपाद लिखता है; शृंगेरी शारदा पीठ गोवर्धन मठ के आचार्य हस्तामलक और द्वारका मठ के पद्मपाद बताता है।
- रथयात्रा में देवता गुंडिचा मंदिर में कितने दिन रहते हैं: प्रशासन के उत्सव-पृष्ठ सात दिन लिखते हैं, उसके प्रश्नोत्तर पृष्ठ नौ दिन। प्रवेश: प्रशासन का दर्शन-पृष्ठ अब भी लिखता है कि केवल सिंह द्वार से प्रवेश है, पर 13 जून 2024 से चारों द्वार खोल दिए गए (आकाशवाणी)।
- "मंदिर की परछाईं नहीं पड़ती" या "ध्वजा हवा के उल्टी दिशा में लहराती है" जैसे दावे मंदिर प्रशासन या सरकार के किसी पृष्ठ पर नहीं मिले, इसलिए यहाँ नहीं दिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जगन्नाथ पुरी रथयात्रा 2026 कब थी?
श्रीगुंडिचा (रथ) यात्रा 16 जुलाई 2026, गुरुवार को थी (श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन का 2026-27 का पर्व-पंचांग; द हिंदू)।
क्या जगन्नाथ मंदिर में सबको प्रवेश मिलता है?
नहीं। मंदिर प्रशासन के अनुसार मंदिर में केवल हिंदुओं को प्रवेश मिलता है।
जगन्नाथ पुरी कहाँ है?
जगन्नाथ पुरी पुरी, पुरी ज़िला, ओडिशा में है।
जगन्नाथ पुरी में दर्शन का समय क्या है?
द्वार खुलना (द्वारफिटा): सुबह लगभग 5:30 (नियम से 4:30 तक); मंगला आलती के बाद: जगमोहन तक दर्शन, बेश पूरा होने तक (लगभग 7:30-8 बजे); गोपाल वल्लभ पूजा के बाद: नाट मंदिर से दर्शन, सकाल धूप पूरी होने तक (लगभग 11 बजे); सकाल धूप के बाद: जगमोहन तक दर्शन, भोग मंडप पूजा तक (लगभग 1 बजे); दोपहर के दर्शन: दोपहर 2 से शाम 5:30; रात के दर्शन: लगभग रात 8 से 9 (संध्या धूप के बाद चंदन लागी तक)। स्रोत: shreejagannatha.in, जाँचा 5 अक्टूबर 2026; जाने से पहले आधिकारिक स्रोत पर देख लें।
जगन्नाथ पुरी किन तीर्थ-सूचियों में है?
चार धाम (सूची में 4 में से 3वाँ)।
जगन्नाथ पुरी कैसे पहुँचें?
रेल: पुरी ईस्ट कोस्ट रेलवे का अंतिम स्टेशन है, मंदिर से 3 किमी; खुर्दा रोड जंक्शन 44 किमी (पुरी ज़िला)। हवाई: निकटतम हवाई अड्डा भुवनेश्वर का बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, 60 किमी (पुरी ज़िला)।
स्रोत
- श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन: दर्शन सुविधाएँ; दैनिक नीति; आज मंदिर में: https://www.shreejagannatha.in/darsan-facilities/ ; https://www.shreejagannatha.in/daily-rituals/ ; https://www.shreejagannatha.in/today-in-the-temple/
- श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन: महाप्रभु श्री जगन्नाथ; प्राचीन काल; मध्यकाल; मुख्य मंदिर परिसर; नवकलेवर: https://www.shreejagannatha.in/mahaprabhu-shree-jagannatha/ ; https://www.shreejagannatha.in/ancient-period/ ; https://www.shreejagannatha.in/medieval-period/ ; https://www.shreejagannatha.in/main-temple-complex/ ; https://www.shreejagannatha.in/nabakalebara/
- श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन: प्रश्नोत्तर; क्या करें, क्या न करें; प्रशासन; पर्व-पंचांग 2026-27; रथयात्रा; श्रीक्षेत्र: https://www.shreejagannatha.in/faqs/ ; https://www.shreejagannatha.in/dos-donts/ ; https://www.shreejagannatha.in/about-shree-jagannath-temple-administration/ ; https://www.shreejagannatha.in/calendar-of-festive-occasion-2026-2027/ ; https://www.shreejagannatha.in/ratha-yatra/ ; https://www.shreejagannatha.in/shreekhetra/
- ज़िला पुरी: कैसे पहुँचें; श्री जगन्नाथ मंदिर: https://puri.odisha.gov.in/en/tourism/how-to-reach ; https://puri.odisha.gov.in/en/tourism/tourist-places/shree-jagannath-temple
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण: केंद्रीय संरक्षित स्मारकों की सूची (ओडिशा, पुरी मंडल): https://asi.nic.in/pdf/CPM_List.pdf
- श्री शृंगेरी शारदा पीठ: चार आम्नाय पीठ: https://www.sringeri.net/history/amnaya-peethams
- द हिंदू, जुलाई 2026: पुरी रथयात्रा 16 जुलाई 2026: https://www.thehindu.com/news/national/odisha/puri-rath-yatra-crowds-surge-at-singhadwara/article71230034.ece
- द हिंदू: पुरी जगन्नाथ मंदिर में वस्त्र-नियम अनिवार्य (1 जनवरी 2024 से): https://www.thehindu.com/news/national/other-states/puri-jagannath-temple-makes-dress-code-mandatory-for-devotees/article67695275.ece
- आकाशवाणी समाचार, 13 जून 2024: जगन्नाथ मंदिर के चारों द्वार खुले: https://newsonair.gov.in/all-four-gates-of-puri-jagannath-temple-reopened-for-devotees/
- स्थान के निर्देशांक: Wikidata (Q1678260), CC0
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