बद्रीनाथ मंदिर

विष्णु, बद्रीनारायण रूप मेंबद्रीनाथ, उत्तराखंड

अन्य नाम: बदरीनाथ, बद्रीनारायण, बदरी विशाल

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 11 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ
बद्रीनाथ मंदिर: चार धाम 1/4, विष्णु, बद्रीनारायण रूप में, बद्रीनाथ, उत्तराखंड
संक्षेप में

बद्रीनाथ उत्तराखंड के चमोली ज़िले में अलकनंदा नदी के किनारे विष्णु का मंदिर है, जहाँ वे बद्रीनारायण रूप में ध्यान-मुद्रा में पूजे जाते हैं। यह भारत के चार धामों में उत्तर का धाम है और उत्तराखंड की छोटा चार धाम यात्रा का अंतिम पड़ाव भी। कपाट सर्दियों में बंद रहते हैं; 2026 में वे 23 अप्रैल को खुले।

देवता
विष्णु, बद्रीनारायण रूप में
परंपरा
वैष्णव
तीर्थ-सूची
चार धाम 1/4उत्तराखंड के छोटा चार धाम 4/4
स्थान
बद्रीनाथ, अलकनंदा के दाहिने तट पर, चमोली ज़िला
राज्य
उत्तराखंड
देश
भारत
आधिकारिक वेबसाइट
श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (badrinath-kedarnath.gov.in)
नक्शा
OpenStreetMap (30.7447, 79.4912)

दर्शन और आरती का समय

अभिषेक पूजासुबह 4:30 से 6:30
वेद पाठ, गीता पाठसुबह 7:30 से दोपहर 12; दोपहर 3 से शाम 6
शाम की आरतियाँ और पाठशाम 6 से 7:45 (कपूर, चांदी और स्वर्ण आरती, अष्टोत्तरी पूजा, विष्णुसहस्रनाम पाठ)
शयन आरती (गीत गोविंद पाठ के साथ)समय तय नहीं; सब यात्रियों के दर्शन हो जाने के बाद

ये समय मंदिर समिति की ऑनलाइन पूजा-बुकिंग तालिका से हैं। उसी पृष्ठ की शर्तों में अभिषेक सुबह 4 बजे से और गर्मियों में शाम की आरतियाँ लगभग 6 से 8:30 बजे तक लिखी हैं। शयन आरती तब शुरू होती है जब कतार के सब यात्री धर्म-दर्शन कर चुके हों। सूर्य और चंद्र ग्रहण के समय मंदिर बंद रहता है।

स्रोत: badrinath-kedarnath.gov.inजाँचा: समय बदल सकते हैं; जाने से पहले आधिकारिक स्रोत देख लें।

कपाट कब खुलते हैं

कपाट हर साल अप्रैल-मई में खुलते हैं और नवंबर में बंद होते हैं। 2026 में वे 23 अप्रैल को सुबह 6:15 बजे खुले; यह तिथि वसंत पंचमी पर नरेंद्रनगर राजदरबार में तय हुई थी। बंद होने की तिथि विजयादशमी (2026 में 20 अक्टूबर) पर घोषित होती है; 5 अक्टूबर 2026 तक वह घोषित नहीं हुई थी। 2025 में कपाट 25 नवंबर को बंद हुए थे।

स्रोत: newsonair.gov.inजाँचा:

कथा (परंपरा के अनुसार)

बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति यह कथा देती है: विष्णु धर्म के पुत्र होकर, दक्ष प्रजापति की पुत्री मूर्ति के गर्भ से, नर-नारायण रूप में प्रकट हुए और जगत के कल्याण के लिए यहाँ तप किया। तप के समय लक्ष्मी बदरी (बेर) का वृक्ष बनकर उनकी रक्षा करती रहीं; बेर के इसी वृक्ष "बदरी" से स्थान का नाम बद्रीनाथ पड़ा।

समिति के अनुसार यह क्षेत्र सत्ययुग में मुक्तिप्रदा, त्रेता में योगसिद्धिदा, द्वापर में विशाला और कलियुग में बदरिकाश्रम कहलाया। समिति यह भी लिखती है कि वामन पुराण में नर और नारायण के यहाँ तप करने का उल्लेख है; हमने वह अध्याय स्वयं नहीं देखा।

मूर्ति और इतिहास

मंदिर समिति के अनुसार गर्भगृह में शालिग्राम पत्थर की लगभग एक मीटर ऊँची काली मूर्ति है, जो पद्मासन में ध्यान-मुद्रा में है; साथ में कुबेर, नारद, उद्धव और नर-नारायण की मूर्तियाँ हैं। समिति लिखती है कि स्कंद पुराण के अनुसार आदि शंकराचार्य ने यह मूर्ति नारद कुंड से निकालकर आठवीं सदी में फिर से स्थापित की, और सोलहवीं सदी में गढ़वाल के राजा ने मूर्ति आज के मंदिर में रखवाई।

पूजा मुख्य पुजारी "रावल" करते हैं; मंदिर समिति के अनुसार रावल दक्षिण भारत के मालाबार क्षेत्र के नंबूदरी ब्राह्मण होते हैं। मंदिर का प्रबंध श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति करती है।

आसपास के तीर्थ

मंदिर समिति के अनुसार मंदिर और अलकनंदा के बीच तप्त कुंड है, लगभग 45 डिग्री का गरम पानी का प्राकृतिक स्रोत; पास ही नारद कुंड है, जिसमें बहुत से यात्री दर्शन से पहले स्नान करते हैं। अलकनंदा के तट पर ब्रह्मकपाल घाट है, जहाँ पितरों का श्राद्ध किया जाता है। माणा गाँव के सामने नारायण की माता को समर्पित माता मूर्ति मंदिर है; परंपरा के अनुसार साल में एक बार, वामन द्वादशी को, नारायण माता मूर्ति से मिलने जाते हैं और रावल वहाँ पूजा करते हैं।

सर्दियों में, कपाट बंद होने के बाद, उद्धव जी और कुबेर जी की उत्सव मूर्तियाँ पांडुकेश्वर के योगध्यान बद्री मंदिर में रहती हैं और शंकराचार्य की गद्दी ज्योतिर्मठ के नरसिंह मंदिर जाती है, जहाँ बद्रीनाथ की शीतकालीन पूजा होती है (मंदिर समिति; आकाशवाणी, 25 नवंबर 2025)।

बद्रीनाथ कैसे पहुँचें

  • रेल: निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है, मंदिर समिति के अनुसार लगभग 295 किमी (उत्तराखंड पर्यटन 297 किमी)।
  • हवाई: निकटतम हवाई अड्डा देहरादून का जॉली ग्रांट है, मंदिर समिति के अनुसार 314 किमी (उत्तराखंड पर्यटन लगभग 317 किमी)।
  • सड़क: मंदिर तक सड़क जाती है; ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) से लगभग 45 किमी। यात्रा के लिए उत्तराखंड सरकार की वेबसाइट registrationandtouristcare.uk.gov.in पर पंजीकरण होता है।

प्रमुख त्योहार

दीपमालिका उत्सव (दीपावली)श्रीकृष्ण जन्माष्टमीमाता मूर्ति उत्सव (वामन द्वादशी)

मत-भेद: स्रोतों में अंतर

  • बद्रीनाथ दो सूचियों में है: भारत के चार धाम (बद्रीनाथ, द्वारका, पुरी, रामेश्वरम) और उत्तराखंड के छोटा चार धाम (यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ)।
  • ऊँचाई: मंदिर समिति 3,133 मीटर लिखती है, उत्तराखंड पर्यटन लगभग 3,100 मीटर।
  • मंदिर समिति के अपने पृष्ठ पर दो कथन हैं: एक में लक्ष्मी बेर का वृक्ष बनकर धूप से छाया करती हैं, दूसरे में ठंड, वर्षा और बर्फ़ से रक्षा करती हैं; मूर्ति की मुद्रा एक जगह अर्धपद्मासन लिखी है, दूसरी जगह पद्मासन।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बद्रीनाथ के कपाट 2026 में कब बंद होंगे?

तिथि विजयादशमी, 20 अक्टूबर 2026, को घोषित होगी; 5 अक्टूबर तक वह घोषित नहीं हुई थी। 2025 में कपाट 25 नवंबर को बंद हुए थे।

बद्रीनाथ चार धाम में है या छोटा चार धाम में?

दोनों में। भारत के चार धामों में यह उत्तर का धाम है, और उत्तराखंड की छोटा चार धाम यात्रा यहीं पूरी होती है।

बद्रीनाथ मंदिर कहाँ है?

बद्रीनाथ मंदिर बद्रीनाथ, अलकनंदा के दाहिने तट पर, चमोली ज़िला, उत्तराखंड में है।

बद्रीनाथ मंदिर में दर्शन का समय क्या है?

अभिषेक पूजा: सुबह 4:30 से 6:30; वेद पाठ, गीता पाठ: सुबह 7:30 से दोपहर 12; दोपहर 3 से शाम 6; शाम की आरतियाँ और पाठ: शाम 6 से 7:45 (कपूर, चांदी और स्वर्ण आरती, अष्टोत्तरी पूजा, विष्णुसहस्रनाम पाठ); शयन आरती (गीत गोविंद पाठ के साथ): समय तय नहीं; सब यात्रियों के दर्शन हो जाने के बाद। स्रोत: badrinath-kedarnath.gov.in, जाँचा 5 अक्टूबर 2026; जाने से पहले आधिकारिक स्रोत पर देख लें।

बद्रीनाथ किन तीर्थ-सूचियों में है?

चार धाम (सूची में 4 में से 1वाँ), उत्तराखंड के छोटा चार धाम (सूची में 4 में से 4वाँ)।

बद्रीनाथ कैसे पहुँचें?

रेल: निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है, मंदिर समिति के अनुसार लगभग 295 किमी (उत्तराखंड पर्यटन 297 किमी)। हवाई: निकटतम हवाई अड्डा देहरादून का जॉली ग्रांट है, मंदिर समिति के अनुसार 314 किमी (उत्तराखंड पर्यटन लगभग 317 किमी)।

स्रोत

  1. बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति: श्री बद्रीनाथ धाम: https://badrinath-kedarnath.gov.in/AboutUs/shri-badrinath.aspx
  2. बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति: ऑनलाइन पूजा बुकिंग (पूजा के समय): https://badrinath-kedarnath.gov.in/online-services/book-puja-online/Book_Pooja_Online.aspx
  3. बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति: हमारे बारे में: https://badrinath-kedarnath.gov.in/AboutUs/about_us.aspx
  4. बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति: अन्य मंदिर: https://badrinath-kedarnath.gov.in/other-temples/Other-Temples.aspx
  5. उत्तराखंड पर्यटन: बद्रीनाथ: https://uttarakhandtourism.gov.in/destination/badrinath
  6. उत्तराखंड सरकार, चार धाम पंजीकरण पोर्टल: बद्रीनाथ: https://registrationandtouristcare.uk.gov.in/dham_detail.php?dham=NA==
  7. आकाशवाणी समाचार, 23 अप्रैल 2026: बद्रीनाथ के कपाट सुबह 6:15 बजे खुले: https://newsonair.gov.in/uttarakhand-portals-of-badrinath-dham-to-open-for-devotees-today/
  8. ईटीवी भारत, 23 जनवरी 2026: वसंत पंचमी पर कपाट खुलने की तिथि तय: https://www.etvbharat.com/hi/bharat/badrinath-dham-gates-will-open-on-23-april-2026-hindi-news-utn26012303201
  9. आकाशवाणी समाचार, 2 अक्टूबर 2025 (विजयादशमी): केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट बंद होने की तिथियाँ घोषित: https://newsonair.gov.in/uttarakhand-announces-winter-closing-dates-for-kedarnath-badrinath-gangotri-and-yamunotri-temples/
  10. आकाशवाणी समाचार, 25 नवंबर 2025: बद्रीनाथ के कपाट सर्दियों के लिए बंद: https://www.newsonair.gov.in/portals-of-badrinath-dham-closed-for-winter/
  11. स्थान के निर्देशांक: Wikidata (Q799695), CC0

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