रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु के रामनाथपुरम ज़िले में रामेश्वरम द्वीप पर अरुल्मिगु रामनाथस्वामी मंदिर में है; द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में यह सातवाँ है और भारत के चार धामों में दक्षिण का धाम भी। शिव पुराण के अनुसार श्रीराम ने लंका जाने से पहले यहाँ शिव की पूजा की थी, और मंदिर की परंपरा के अनुसार यहाँ का लिंग सीता ने रेत से बनाया था।
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- परंपरा
- शैव
- तीर्थ-सूची
- द्वादश ज्योतिर्लिंग 7/12चार धाम 4/4
- स्थान
- रामेश्वरम द्वीप, रामनाथपुरम ज़िला
- राज्य
- तमिलनाडु
- देश
- भारत
- आधिकारिक वेबसाइट
- अरुल्मिगु रामनाथस्वामी मंदिर (तमिलनाडु HR&CE) (rameswaramramanathar.hrce.tn.gov.in)
- नक्शा
- OpenStreetMap (9.2881, 79.3173)
दर्शन और आरती का समय
| मंदिर खुला | सुबह 4:00–दोपहर 1:00, दोपहर 3:00–रात 8:00 |
|---|---|
| स्फटिक लिंग दर्शन | सुबह 5:00–6:00 |
| मूलस्थान (गर्भगृह) दर्शन | सुबह 6:00–दोपहर 1:00, दोपहर 3:15–रात 8:00 |
| उच्चिकाल पूजा | दोपहर 12:00–12:15 |
| सायरक्षा पूजा (शाम) | शाम 6:00–6:15 |
| अर्धजाम पूजा | रात 8:30–8:45 |
| 22 तीर्थों में स्नान | सुबह 5:30–दोपहर 12:30, दोपहर 3:00–शाम 7:00 |
विभाग के अनुसार मंदिर सुबह 4 बजे खुलता है, भक्तों का प्रवेश 5 बजे तक होता है, और रोज़ रात 9 बजे तक मंदिर बंद हो जाता है। सुबह की तिरुवनंदल (6:00), विला (7:00) और कालसंधि (10:00) पूजा भी वहाँ दी है।
स्रोत: rameswaramramanathar.hrce.tn.gov.inजाँचा: समय बदल सकते हैं; जाने से पहले आधिकारिक स्रोत देख लें।
रामेश्वर की कथा: दो रूप
शिव पुराण (कोटिरुद्र संहिता, अध्याय 31) के अनुसार दक्षिण समुद्र के तट पर, लंका जाने से पहले, श्रीराम को याद आया कि उन्होंने अभी शिव की पूजा नहीं की। उन्होंने पार्थिव लिंग बनाकर विधि से पूजा की और रावण पर विजय का वर माँगा। शिव ने वर दिया और राम की प्रार्थना पर रामेश्वर नाम से वहीं रह गए; पुराण इस लिंग के गंगाजल से अभिषेक की महिमा कहता है।
मंदिर की अपनी परंपरा (तमिलनाडु हिंदू धर्मार्थ एवं धर्मस्व विभाग का पन्ना) कथा युद्ध के बाद रखती है: ऋषि अगस्त्य की सलाह पर राम रावण-वध के ब्रह्महत्या दोष के प्रायश्चित के लिए सीता और लक्ष्मण के साथ यहाँ आए। उन्होंने हनुमान को कैलास से लिंग लाने भेजा; हनुमान को देर हुई, तो सीता ने रेत का लिंग बनाया और पूजा हो गई। हनुमान का लाया विश्वलिंगम भी पास में स्थापित हुआ, और परंपरा से पहले उसी की पूजा होती है।
मंदिर के बारे में
मंदिर तमिलनाडु के हिंदू धर्मार्थ एवं धर्मस्व विभाग (HR&CE) के अधीन है। विभाग के तमिल इतिहास पन्ने के अनुसार इसकी स्तुति शैव संत अप्पर और संबंदर ने गाई; गर्भगृह बारहवीं सदी में श्रीलंका के राजा पराक्रमबाहु ने बनवाया; और पूर्व का नौ तल का, 126 फ़ुट ऊँचा राजगोपुरम 1897 से 1904 के बीच पूरा हुआ। मंदिर के 22 तीर्थों (कुंडों) में स्नान की परंपरा है।
रामेश्वरम कैसे पहुँचें
- रेल: रामेश्वरम रेलवे स्टेशन मंदिर से लगभग 1 किमी; बस अड्डा लगभग 2 किमी (तमिलनाडु पर्यटन)।
- हवाई अड्डा: मदुरै अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, लगभग 175–180 किमी (रामनाथपुरम ज़िला और HR&CE)।
प्रमुख त्योहार
मत-भेद: स्रोतों में अंतर
- कथा का समय: शिव पुराण में राम युद्ध से पहले विजय के लिए पूजा करते हैं; मंदिर की परंपरा में युद्ध के बाद रावण-वध के प्रायश्चित के लिए, सीता के बनाए रेत के लिंग और हनुमान के लाए विश्वलिंगम के साथ। तमिलनाडु पर्यटन का एक वाक्य हनुमान को काशी और दूसरा कैलास भेजता है।
- क्रम: द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में रामेश्वरम 7वाँ है (इस साइट की सूची इसी क्रम में है); शिव पुराण की सूची (कोटिरुद्र संहिता 1.21–23) में क्रम अलग है और वहाँ यह 11वाँ है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रामेश्वरम में पहले किस लिंग की पूजा होती है?
मंदिर की परंपरा (तमिलनाडु HR&CE) के अनुसार हनुमान के लाए विश्वलिंगम (विश्वनाथ) की, क्योंकि श्रीराम ने ऐसा ही आदेश दिया था।
रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग कहाँ है?
रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग रामेश्वरम द्वीप, रामनाथपुरम ज़िला, तमिलनाडु में है।
रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग में दर्शन का समय क्या है?
मंदिर खुला: सुबह 4:00–दोपहर 1:00, दोपहर 3:00–रात 8:00; स्फटिक लिंग दर्शन: सुबह 5:00–6:00; मूलस्थान (गर्भगृह) दर्शन: सुबह 6:00–दोपहर 1:00, दोपहर 3:15–रात 8:00; उच्चिकाल पूजा: दोपहर 12:00–12:15; सायरक्षा पूजा (शाम): शाम 6:00–6:15; अर्धजाम पूजा: रात 8:30–8:45; 22 तीर्थों में स्नान: सुबह 5:30–दोपहर 12:30, दोपहर 3:00–शाम 7:00। स्रोत: rameswaramramanathar.hrce.tn.gov.in, जाँचा 5 अक्टूबर 2026; जाने से पहले आधिकारिक स्रोत पर देख लें।
रामेश्वरम किन तीर्थ-सूचियों में है?
द्वादश ज्योतिर्लिंग (सूची में 12 में से 7वाँ), चार धाम (सूची में 4 में से 4वाँ)।
रामेश्वरम कैसे पहुँचें?
रेल: रामेश्वरम रेलवे स्टेशन मंदिर से लगभग 1 किमी; बस अड्डा लगभग 2 किमी (तमिलनाडु पर्यटन)। हवाई अड्डा: मदुरै अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, लगभग 175–180 किमी (रामनाथपुरम ज़िला और HR&CE)।
स्रोत
- तमिलनाडु हिंदू धर्मार्थ एवं धर्मस्व विभाग (HR&CE): अरुल्मिगु रामनाथस्वामी मंदिर, rameswaramramanathar.hrce.tn.gov.in (मुखपृष्ठ, पूजा का समय, इतिहास, आसपास के स्थान)
- तमिलनाडु पर्यटन: रामेश्वरम मंदिर, tamilnadutourism.tn.gov.in/destinations/rameswaram-temple; रामनाथपुरम ज़िला, ramanathapuram.nic.in; रामेश्वरम नगरपालिका: उत्सव, tnurbantree.tn.gov.in/rameswaram/events-and-festivals
- शिव पुराण, कोटिरुद्र संहिता, अध्याय 31 (जे. एल. शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद, wisdomlib.org/hinduism/book/shiva-purana-english/d/doc226532.html; अध्याय-संख्या sa.wikisource के संस्कृत पाठ जैसी, गीता प्रेस के "संक्षिप्त शिवपुराण" में अलग)
- शिव पुराण, कोटिरुद्र संहिता 1.21–23 (बारह ज्योतिर्लिंगों की सूची), संस्कृत पाठ: sa.wikisource.org (शिवपुराणम्, संहिता ४, अध्यायः १)
- द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र ("सौराष्ट्रे सोमनाथं च …"), पाठ: sanskritdocuments.org/doc_shiva/jyotirling.html
- Wikidata Q14565670 (निर्देशांक, CC0)
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