पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र के चार चरणों के नाम अक्षर हैं: पहले चरण का से, दूसरे का सो, तीसरे का दा और चौथे का दी। चरण 1–3 कुंभ राशि में और चरण 4 मीन राशि में हैं, इसलिए नाम राशि अक्षर के चरण से तय होती है: से, सो, दा से कुंभ; दी से मीन। पूर्वा भाद्रपद राशिचक्र में कुंभ 20° से मीन 3°20′ तक है; विंशोत्तरी दशा के क्रम में इसका स्वामी ग्रह गुरु (बृहस्पति) है और इसके देवता अज एकपाद हैं।
पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र के 4 चरण, नाम अक्षर और राशि
| चरण | नाम अक्षर | राशि | राशि में अंश |
|---|---|---|---|
| 1 | सेSe | कुंभ | 20°–23°20′ |
| 2 | सोSo | कुंभ | 23°20′–26°40′ |
| 3 | दाDa | कुंभ | 26°40′–30° |
| 4 | दीDi | मीन | 0°–3°20′ |
हर नक्षत्र 13°20′ का है और उसके चार चरण 3°20′ के। नाम राशि जानने के लिए किसी भी नाम का पहला अक्षर देखें: नाम से राशि
पिछला नक्षत्र: शतभिषाअगला नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपदसभी 27 नक्षत्र
- क्रम
- 27 में 25वाँ (25)
- राशिचक्र में
- कुंभ 20° से मीन 3°20′ तकमेष के आरंभ से 320°–333°20′
- राशि
- कुंभ: चरण 1–3; मीन: चरण 4
- देवता
- अज एकपाद
चंद्रमा अगली बार पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में
- गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026, 8:50 PM से शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026, 9:04 PM तक
- गुरुवार, 19 नवंबर 2026, 6:11 AM से शुक्रवार, 20 नवंबर 2026, 6:57 AM तक
- बुधवार, 16 दिसंबर 2026, 2:03 PM से गुरुवार, 17 दिसंबर 2026, 3:31 PM तक
- मंगलवार, 12 जनवरी 2027, 8:14 PM से बुधवार, 13 जनवरी 2027, 10:05 PM तक
- मंगलवार, 9 फ़रवरी 2027, 1:57 AM से बुधवार, 10 फ़रवरी 2027, 3:41 AM तक
- सोमवार, 8 मार्च 2027, 8:35 AM से मंगलवार, 9 मार्च 2027, 9:59 AM तक
समय भारतीय मानक समय में; चंद्रमा का नक्षत्र में आना-जाना पूरे भारत में एक ही क्षण पर होता है। Drik Panchang से 2 मिनट के भीतर मिलता है। आज का पंचांग
सूचियों में अंतर
- देवता: बृहत्संहिता में अजैकपात्; Drik Panchang की नक्षत्र सूची में अजचरण।
- पुस्तकों और सूचियों में कई अक्षरों की मात्रा छोटी-बड़ी लिखी मिलती है (जैसे वू/वु, चू/चु)। अवकहड़ा चक्र में अ-आ, इ-ई, उ-ऊ, ए-ऐ और ओ-औ एक ही माने जाते हैं, इसलिए चरण वही रहता है।
पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र: सवाल-जवाब
पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में किस अक्षर से नाम रखें?
परंपरा में जन्म के समय चंद्रमा पूर्वा भाद्रपद के जिस चरण में हो, उसी चरण का अक्षर नाम के आरंभ के लिए लिया जाता है: पहले चरण में से, दूसरे में सो, तीसरे में दा और चौथे में दी। चरण जन्म की तारीख, समय और स्थान से निकलता है; इसके लिए SanatanBodh का जन्म पंचांग देखें।
पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र के 4 चरण कौन से हैं?
पूर्वा भाद्रपद के चार चरण 3°20′ के हैं: पहला चरण कुंभ राशि में 20° से 23°20′ तक, अक्षर से; दूसरा चरण कुंभ राशि में 23°20′ से 26°40′ तक, अक्षर सो; तीसरा चरण कुंभ राशि में 26°40′ से 30° तक, अक्षर दा; चौथा चरण मीन राशि में 0° से 3°20′ तक, अक्षर दी।
पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र के बाद कौन सा नक्षत्र आता है?
27 नक्षत्रों के क्रम में पूर्वा भाद्रपद (25) के बाद उत्तरा भाद्रपद (26) आता है, और पूर्वा भाद्रपद से पहले शतभिषा (24) है। चंद्रमा इसी क्रम में एक के बाद एक नक्षत्र से गुजरता है।
पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र की राशि कौन सी है?
पूर्वा भाद्रपद राशिचक्र में कुंभ 20° से मीन 3°20′ तक है (मेष के आरंभ से गिनें तो 320°–333°20′)। चरण 1–3 कुंभ राशि में और चरण 4 मीन राशि में हैं, इसलिए नाम राशि अक्षर के चरण से तय होती है: से, सो, दा से कुंभ; दी से मीन। हर राशि में नौ नक्षत्र-चरण आते हैं: 27 नक्षत्रों के 108 चरण, 12 राशियों में।
पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र का स्वामी ग्रह और देवता कौन हैं?
विंशोत्तरी दशा के क्रम में पूर्वा भाद्रपद का स्वामी गुरु (बृहस्पति) है; यही ग्रह पुनर्वसु और विशाखा का भी स्वामी है (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 46)। बृहत्संहिता (अध्याय 98) में पूर्वा भाद्रपद के देवता अज एकपाद हैं। बृहत्संहिता में अजैकपात्; Drik Panchang की नक्षत्र सूची में अजचरण।
चंद्रमा पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में कितने समय रहता है?
लगभग एक दिन। चंद्रमा की चाल घटती-बढ़ती है, इसलिए 13°20′ पार करने में उसे लगभग 21 से 27 घंटे लगते हैं, और लगभग 27 दिन बाद वह फिर पूर्वा भाद्रपद में आता है (हमारी गणना, 2026–27)। यह समय पूरे भारत में एक ही है।
स्रोत
- नाम अक्षर: बृहदवकहडाचक्रम्, नक्षत्र प्रकरण, शतपदचक्र श्लोक 9–15 (archive.org); पं. सीताराम शर्मा, अति बृहत् अवकहड़ा चक्रम् (1932), पृ. 22–24; Drik Panchang, नक्षत्र पद स्वर सिद्धांत
- एक राशि में नौ नक्षत्र-चरण: पं. सीताराम शर्मा, अति बृहत् अवकहड़ा चक्रम् (1932), पृ. 26; हर नक्षत्र का विस्तार: Drik Panchang के नक्षत्र पृष्ठ (drikpanchang.com/tutorials/nakshatra/)
- स्वामी ग्रह: बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 46, श्लोक 12–14 (कृत्तिका से गिनती: सूर्य, चंद्र, मंगल, राहु, गुरु, शनि, बुध, केतु, शुक्र), R. Santhanam का अंग्रेज़ी अनुवाद, खंड 2, पृ. 507–508; Drik Panchang के नक्षत्र और नवग्रह पृष्ठ
- देवता: वराहमिहिर, बृहत्संहिता, अध्याय 98, श्लोक 4–5, V. Subrahmanya Sastri और M. Ramakrishna Bhat का अंग्रेज़ी अनुवाद (बंगलौर, 1946), पृ. 742; Drik Panchang की नक्षत्र सूचियाँ (स्वामी) और नक्षत्र पृष्ठ
- चंद्रमा का नक्षत्र में आना-जाना: SanatanBodh पंचांग गणना (astronomy-engine, लाहिड़ी अयनांश); Drik Panchang की 2026 और 2027 की नक्षत्र सूचियों (नई दिल्ली) से मिलान, सभी समय 2 मिनट के भीतर (4 अक्टूबर 2026)
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