उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के चार चरणों के नाम अक्षर हैं: पहले चरण का दू, दूसरे का थ, तीसरे का झ और चौथे का ञ। चारों चरण मीन राशि में हैं, इसलिए इन अक्षरों से शुरू होने वाले नाम की नाम राशि मीन है। उत्तरा भाद्रपद राशिचक्र में मीन 3°20′ से 16°40′ तक है; विंशोत्तरी दशा के क्रम में इसका स्वामी ग्रह शनि है और इसके देवता अहिर्बुध्न्य हैं।
उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के 4 चरण, नाम अक्षर और राशि
| चरण | नाम अक्षर | राशि | राशि में अंश |
|---|---|---|---|
| 1 | दूDu | मीन | 3°20′–6°40′ |
| 2 | थTha | मीन | 6°40′–10° |
| 3 | झJha | मीन | 10°–13°20′ |
| 4 | ञNya | मीन | 13°20′–16°40′ |
हर नक्षत्र 13°20′ का है और उसके चार चरण 3°20′ के। नाम राशि जानने के लिए किसी भी नाम का पहला अक्षर देखें: नाम से राशि
पिछला नक्षत्र: पूर्वा भाद्रपदअगला नक्षत्र: रेवतीसभी 27 नक्षत्र
- क्रम
- 27 में 26वाँ (26)
- राशिचक्र में
- मीन 3°20′ से 16°40′ तकमेष के आरंभ से 333°20′–346°40′
- राशि
- मीन: चारों चरण
- देवता
- अहिर्बुध्न्य
चंद्रमा अगली बार उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में
- शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026, 9:04 PM से शनिवार, 24 अक्टूबर 2026, 8:33 PM तक
- शुक्रवार, 20 नवंबर 2026, 6:57 AM से शनिवार, 21 नवंबर 2026, 6:51 AM तक
- गुरुवार, 17 दिसंबर 2026, 3:31 PM से शुक्रवार, 18 दिसंबर 2026, 4:11 PM तक
- बुधवार, 13 जनवरी 2027, 10:05 PM से गुरुवार, 14 जनवरी 2027, 11:19 PM तक
- बुधवार, 10 फ़रवरी 2027, 3:41 AM से गुरुवार, 11 फ़रवरी 2027, 4:57 AM तक
- मंगलवार, 9 मार्च 2027, 9:59 AM से बुधवार, 10 मार्च 2027, 10:53 AM तक
समय भारतीय मानक समय में; चंद्रमा का नक्षत्र में आना-जाना पूरे भारत में एक ही क्षण पर होता है। Drik Panchang से 2 मिनट के भीतर मिलता है। आज का पंचांग
सूचियों में अंतर
- चौथा चरण का अक्षर ञ है, पर ञ से नाम शुरू नहीं होते। ‘बृहदवकहडाचक्रम्’ की टीका इस चरण के लिए ज से नाम रखने को कहती है; पं. सीताराम शर्मा (अति बृहत् अवकहड़ा चक्रम्, पृ. 24) इसे भ्रम मानते हैं, क्योंकि ज दूसरे नक्षत्र-चरण का अक्षर है, और ञ वाला जन्म-नाम रखकर पुकारने के लिए दूसरा नाम रखने को कहते हैं।
- पुस्तकों और सूचियों में कई अक्षरों की मात्रा छोटी-बड़ी लिखी मिलती है (जैसे वू/वु, चू/चु)। अवकहड़ा चक्र में अ-आ, इ-ई, उ-ऊ, ए-ऐ और ओ-औ एक ही माने जाते हैं, इसलिए चरण वही रहता है।
उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र: सवाल-जवाब
उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में किस अक्षर से नाम रखें?
परंपरा में जन्म के समय चंद्रमा उत्तरा भाद्रपद के जिस चरण में हो, उसी चरण का अक्षर नाम के आरंभ के लिए लिया जाता है: पहले चरण में दू, दूसरे में थ, तीसरे में झ और चौथे में ञ। ञ से नाम शुरू नहीं होते; कई परिवार इसकी जगह ज लेते हैं, जिसे कुछ पुस्तकें भ्रम मानती हैं। चरण जन्म की तारीख, समय और स्थान से निकलता है; इसके लिए SanatanBodh का जन्म पंचांग देखें।
उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के 4 चरण कौन से हैं?
उत्तरा भाद्रपद के चार चरण 3°20′ के हैं: पहला चरण मीन राशि में 3°20′ से 6°40′ तक, अक्षर दू; दूसरा चरण मीन राशि में 6°40′ से 10° तक, अक्षर थ; तीसरा चरण मीन राशि में 10° से 13°20′ तक, अक्षर झ; चौथा चरण मीन राशि में 13°20′ से 16°40′ तक, अक्षर ञ।
उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के बाद कौन सा नक्षत्र आता है?
27 नक्षत्रों के क्रम में उत्तरा भाद्रपद (26) के बाद रेवती (27) आता है, और उत्तरा भाद्रपद से पहले पूर्वा भाद्रपद (25) है। चंद्रमा इसी क्रम में एक के बाद एक नक्षत्र से गुजरता है।
उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र की राशि कौन सी है?
उत्तरा भाद्रपद राशिचक्र में मीन 3°20′ से 16°40′ तक है (मेष के आरंभ से गिनें तो 333°20′–346°40′)। चारों चरण मीन राशि में हैं, इसलिए इन अक्षरों से शुरू होने वाले नाम की नाम राशि मीन है। हर राशि में नौ नक्षत्र-चरण आते हैं: 27 नक्षत्रों के 108 चरण, 12 राशियों में।
उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र का स्वामी ग्रह और देवता कौन हैं?
विंशोत्तरी दशा के क्रम में उत्तरा भाद्रपद का स्वामी शनि है; यही ग्रह पुष्य और अनुराधा का भी स्वामी है (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 46)। बृहत्संहिता (अध्याय 98) में उत्तरा भाद्रपद के देवता अहिर्बुध्न्य हैं।
चंद्रमा उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में कितने समय रहता है?
लगभग एक दिन। चंद्रमा की चाल घटती-बढ़ती है, इसलिए 13°20′ पार करने में उसे लगभग 21 से 27 घंटे लगते हैं, और लगभग 27 दिन बाद वह फिर उत्तरा भाद्रपद में आता है (हमारी गणना, 2026–27)। यह समय पूरे भारत में एक ही है।
स्रोत
- नाम अक्षर: बृहदवकहडाचक्रम्, नक्षत्र प्रकरण, शतपदचक्र श्लोक 9–15 (archive.org); पं. सीताराम शर्मा, अति बृहत् अवकहड़ा चक्रम् (1932), पृ. 22–24; Drik Panchang, नक्षत्र पद स्वर सिद्धांत
- एक राशि में नौ नक्षत्र-चरण: पं. सीताराम शर्मा, अति बृहत् अवकहड़ा चक्रम् (1932), पृ. 26; हर नक्षत्र का विस्तार: Drik Panchang के नक्षत्र पृष्ठ (drikpanchang.com/tutorials/nakshatra/)
- स्वामी ग्रह: बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 46, श्लोक 12–14 (कृत्तिका से गिनती: सूर्य, चंद्र, मंगल, राहु, गुरु, शनि, बुध, केतु, शुक्र), R. Santhanam का अंग्रेज़ी अनुवाद, खंड 2, पृ. 507–508; Drik Panchang के नक्षत्र और नवग्रह पृष्ठ
- देवता: वराहमिहिर, बृहत्संहिता, अध्याय 98, श्लोक 4–5, V. Subrahmanya Sastri और M. Ramakrishna Bhat का अंग्रेज़ी अनुवाद (बंगलौर, 1946), पृ. 742; Drik Panchang की नक्षत्र सूचियाँ (स्वामी) और नक्षत्र पृष्ठ
- चंद्रमा का नक्षत्र में आना-जाना: SanatanBodh पंचांग गणना (astronomy-engine, लाहिड़ी अयनांश); Drik Panchang की 2026 और 2027 की नक्षत्र सूचियों (नई दिल्ली) से मिलान, सभी समय 2 मिनट के भीतर (4 अक्टूबर 2026)
कुछ गलत लगा? गलती बताएँ