कन्याश्रम पीठनिर्णय के 51 शक्तिपीठों में से एक है; ग्रंथ के अनुसार यहाँ सती की पीठ (पृष्ठ भाग) गिरी, देवी सर्वाणी और भैरव निमिष हैं। इसका स्थान तय नहीं: इतिहासकार डी. सी. सरकार इसे चटगाँव क्षेत्र (आज बांग्लादेश) का कुमारीकुंड मानने का सुझाव भर देते हैं।
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- देवता
- सर्वाणी
- परंपरा
- शाक्त
- तीर्थ-सूची
- 51 शक्तिपीठ 24/51
- स्थान
- अनिश्चित; एक सुझाव: कुमारीकुंड, चटगाँव क्षेत्र
- राज्य
- चट्टोग्राम संभाग (संभावित)
- देश
- बांग्लादेश
मत-भेद: स्रोतों में अंतर
- सरकार के अनुसार मूल पीठनिर्णय में वाराणसी (पिछला पीठ) और कन्याश्रम में से शायद एक ही था।
- बांग्लापीडिया के अनुसार चटगाँव के एक उपनगर का "कन्याश्रम" मंदिर इस पीठ के रूप में माना जाता है और उसकी तालिका कुमारीकुंड में पीठ (पृष्ठ) गिरना बताती है, पर यह मत मुख्यतः स्थानीय लोगों का है; बेणीमाधव शील की फुल पंजिका यह नाम राजस्थान के एक गाँव से जोड़ती है। इसलिए यहाँ मानचित्र नहीं दिया गया।
- पीठों की गिनती ग्रंथ के अनुसार अलग है: पीठनिर्णय 51 गिनाता है, बंगाल की कुछ सूचियाँ 52, देवी भागवत (7.30) 108 स्थान देवी के नामों के साथ देता है, और पुराने तंत्र केवल चार पीठ गिनाते हैं (सरकार)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कन्याश्रम शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
पीठनिर्णय के अनुसार पीठ (पृष्ठ भाग); देवी सर्वाणी और भैरव निमिष हैं। स्थान तय नहीं है।
कन्याश्रम शक्तिपीठ कहाँ है?
कन्याश्रम शक्तिपीठ अनिश्चित; एक सुझाव: कुमारीकुंड, चटगाँव क्षेत्र, चट्टोग्राम संभाग (संभावित) (बांग्लादेश) में है।
कन्याश्रम शक्तिपीठ किन तीर्थ-सूचियों में है?
51 शक्तिपीठ (सूची में 51 में से 24वाँ)।
स्रोत
- डी. सी. सरकार, द शाक्त पीठ्स (जर्नल ऑफ़ द रॉयल एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल 1948; मोतीलाल बनारसीदास, 1973): पीठनिर्णय की तालिका पृ. 35-37, इस पीठ पर टिप्पणी पृ. 51 (archive.org)
- वाचस्पत्यम् (तारानाथ तर्कवाचस्पति), "पीठ": तंत्रचूडामणि से उद्धृत पीठ-सूची (कोलोन डिजिटल संस्कृत कोश, sanskrit-lexicon.uni-koeln.de)
- बांग्लापीडिया (एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बांग्लादेश), "शाक्त-पीठ" (मासाहिको तोगावा): बांग्लादेश के पीठों की तालिका
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