तंत्रचूडामणि के अंश माने जाने वाले "पीठनिर्णय" के 51 शक्तिपीठ ये हैं: हिंगुला, करवीर, सुगंधा, काश्मीर, ज्वालामुखी, जालंधर, वैद्यनाथ, नेपाल, मानस, विरजा, गंडकी, बहुला, उज्जयिनी, चट्टल, त्रिपुरा, त्रिस्रोता, कामगिरि (कामाख्या), युगाद्या, कालीपीठ, प्रयाग, जयंती, किरीट, वाराणसी, कन्याश्रम, कुरुक्षेत्र, मणिवेदिक, श्रीशैल, कांची, कालमाधव, शोण, रामगिरि, वृंदावन, शुचि, पंचसागर, करतोया तट, श्रीपर्वत, विभाष, प्रभास, भैरव पर्वत, जनस्थान, गोदावरी तीर, रत्नावली, मिथिला, नलहाटी, कालीघाट, वक्रेश्वर, यशोर, अट्टहास, नंदीपुर, लंका और विराट।
| # | नाम | अंग (ग्रंथ के अनुसार) | स्थान और पहचान | आज का राज्य / देश |
|---|---|---|---|---|
| 1 | हिंगुलाहिंगुलाट · देवी कोट्टरी, भैरव भीमलोचन | ब्रह्मरंध्र (सिर का ऊपरी भाग) | हिंगलाज, बलूचिस्तान | पाकिस्तान |
| 2 | करवीरशर्करार · देवी महिषमर्दिनी, भैरव क्रोधीश | त्रिनेत्र (नेत्र) | विवादित: प्रायः कोल्हापुर (करवीर) माना जाता है; कुछ इसे शर्करार, यानी सिंध का सुक्कुर मानते हैं | महाराष्ट्र (भारत) या सिंध (पाकिस्तान) |
| 3 | सुगंधादेवी सुनंदा, भैरव त्र्यंबक | नासिका (नाक) | शिकारपुर, बरिसाल के पास, सुगंधा (सोंधा) नदी के तट पर | बांग्लादेश |
| 4 | काश्मीरदेवी महामाया, भैरव त्रिसंध्येश्वर | कंठ (गला) | कश्मीर; ग्रंथ कोई मंदिर नहीं बताता (शारदा या अमरनाथ का भी नाम नहीं), और सरकार इस वर्णन में कल्पना का अंश देखते हैं | कश्मीर (सटीक स्थान अनिश्चित) |
| 5 | ज्वालामुखीदेवी सिद्धिदा (अंबिका), भैरव उन्मत्त | जिह्वा (जीभ) | ज्वालामुखी, काँगड़ा ज़िला | हिमाचल प्रदेश |
| 6 | जालंधरदेवी त्रिपुरमालिनी, भैरव भीषण | स्तन | विवादित: नाम पंजाब के जालंधर नगर का है, पर सरकार के अनुसार पीठ ज्वालामुखी के पास माना जाता है | पंजाब या हिमाचल प्रदेश |
| 7 | वैद्यनाथदेवी जयदुर्गा, भैरव वैद्यनाथ | हृदय | देवघर (बैद्यनाथ धाम) | झारखंड |
| 8 | नेपालदेवी महामाया, भैरव कपाली | जानु (घुटने) | नेपाल, संभवतः काठमांडू; ग्रंथ कोई मंदिर नहीं बताता (पशुपतिनाथ का भी नाम नहीं) | नेपाल |
| 9 | मानसपाठ-भेद: मालव · देवी दाक्षायणी, भैरव हर (अमर) | दाहिना हाथ | विवादित: "मानस" पढ़ें तो मानसरोवर झील, "मालव" पढ़ें तो मालवा; सरकार "मानस" को अधिक संभव मानते हैं | तिब्बत (चीन) या मध्य प्रदेश |
| 10 | विरजा (उत्कल)विरजा क्षेत्र · देवी विमला, भैरव जगन्नाथ | नाभि | जाजपुर | ओडिशा |
| 11 | गंडकीदेवी गंडकी चंडी, भैरव चक्रपाणि | गंड (गाल) | शालग्राम, गंडकी नदी के उद्गम के क्षेत्र में | नेपाल |
| 12 | बहुलादेवी बहुला, भैरव भीरुक | बायाँ हाथ (वाम बाहु) | केतुग्राम, कटवा के पास (बर्धमान क्षेत्र) | पश्चिम बंगाल |
| 13 | उज्जयिनीउजानी · देवी मंगलचंडी, भैरव कपिलांबर | कूर्पर (कोहनी) | विवादित: भरतचंद्र का बांग्ला अन्नदामंगल इसे बर्धमान क्षेत्र का उजानी (कोग्राम) बताता है; पुरानी सूचियों की उज्जयिनी आज का उज्जैन है | पश्चिम बंगाल या मध्य प्रदेश |
| 14 | चट्टलचंद्रशेखर · देवी भवानी, भैरव चंद्रशेखर | दाहिनी बाँह | सीताकुंड, चंद्रनाथ पहाड़ी, चटगाँव | बांग्लादेश |
| 15 | त्रिपुरादेवी त्रिपुरसुंदरी, भैरव त्रिपुरेश | दाहिना पैर | राधाकिशोरपुर (उदयपुर); सरकार के अनुसार देवी का मंदिर राजा धर्ममाणिक्य ने 1501 ई. में बनवाया | त्रिपुरा |
| 16 | त्रिस्रोतादेवी भ्रामरी, भैरव ईश्वर (अंबर) | बायाँ पैर | शालबाड़ी, जलपाईगुड़ी ज़िला; त्रिस्रोता यानी तीस्ता नदी | पश्चिम बंगाल |
| 17 | कामगिरि (कामरूप)कामाख्या · देवी कामाख्या, भैरव उमानंद | योनि (महामुद्रा) | कामाख्या, गुवाहाटी के पास; ग्रंथ यहाँ दस महाविद्याओं का वास भी बताता है | असम |
| 18 | युगाद्याक्षीरग्राम · देवी युगाद्या (भूतधात्री), भैरव क्षीरकंटक | दाहिने पैर का अँगूठा | खीरग्राम, कटवा के पास (बर्धमान क्षेत्र) | पश्चिम बंगाल |
| 19 | कालीपीठकालीघाट · देवी काली, भैरव नकुलीश | दाहिने पैर की उँगलियाँ | कालीघाट, कोलकाता | पश्चिम बंगाल |
| 20 | प्रयागदेवी ललिता, भैरव भव | हाथ की उँगलियाँ | प्रयागराज | उत्तर प्रदेश |
| 21 | जयंतीदेवी जयंती, भैरव क्रमदीश्वर | बायीं जंघा | कालाजोर-बाउरभोग, सिलहट क्षेत्र | बांग्लादेश |
| 22 | किरीटकिरीटकोणा · देवी भुवनेशी (विमला), भैरव संवर्त | किरीट (मुकुट) | वटनगर, लालबाग के पास, मुर्शिदाबाद ज़िला | पश्चिम बंगाल |
| 23 | वाराणसी (मणिकर्णिका)देवी विशालाक्षी, भैरव काल | कुंडल (कान का आभूषण) | मणिकर्णिका, वाराणसी | उत्तर प्रदेश |
| 24 | कन्याश्रमदेवी सर्वाणी, भैरव निमिष | पृष्ठ (पीठ) | अनिश्चित: सरकार इसे चटगाँव क्षेत्र का कुमारीकुंड मानने का सुझाव देते हैं | बांग्लादेश (संभावित) |
| 25 | कुरुक्षेत्रदेवी सावित्री, भैरव स्थाणु | गुल्फ (टखना) | कुरुक्षेत्र, थानेसर (स्थाण्वीश्वर) के पास | हरियाणा |
| 26 | मणिवेदिकमणिबंध · देवी गायत्री, भैरव सर्वानंद | मणिबंध (कलाइयाँ) | अज्ञात; सरकार के अनुसार "मणिबंध" पाठ की गड़बड़ी से बना नाम है, किसी स्थान का नहीं | अज्ञात |
| 27 | श्रीशैलपाठ-भेद: श्रीहट्ट · देवी महालक्ष्मी, भैरव संवरानंद | ग्रीवा (गर्दन) | विवादित: सरकार इसे श्रीहट्ट (सिलहट) के पास गोटाटिकर-जैनपुर मानते हैं, क्योंकि श्रीशैल जैसा श्रीपर्वत सूची में अलग आता है | बांग्लादेश या आंध्र प्रदेश |
| 28 | कांचीदेवी देवगर्भा, भैरव रुरु | कंकाल (अस्थियाँ) | विवादित: पीठ प्रायः बोलपुर के पास कोपाई नदी के तट पर माना जाता है; पुरानी सूचियों की कांची तमिलनाडु का कांचीपुरम है | पश्चिम बंगाल या तमिलनाडु |
| 29 | कालमाधवदेवी काली, भैरव असितांग | नितंब | अज्ञात; सरकार कोई पहचान नहीं देते | अज्ञात |
| 30 | शोणपाठ-भेद: नर्मदा · देवी नर्मदा (शोणा), भैरव भद्रसेन | नितंब | अनिश्चित: सरकार के अनुसार यह तय नहीं कि पीठ सोन नदी पर है या नर्मदा पर | अनिश्चित |
| 31 | रामगिरिदेवी शिवानी, भैरव चंड | स्तन (कुछ पाठों में नासा या नला) | विवादित: नागपुर के पास रामटेक, या एक परंपरा के अनुसार बुंदेलखंड का चित्रकूट | महाराष्ट्र या उत्तर प्रदेश |
| 32 | वृंदावनउमावन · देवी उमा, भैरव भूतेश | केश (बाल) | विवादित: प्रचलित पाठ मथुरा के पास वृंदावन का है; सरकार के अनुसार मूल पाठ "उमावन" (देवीकोट) रहा होगा | उत्तर प्रदेश, या अनिश्चित |
| 33 | शुचिपाठ-भेद: अनल · देवी नारायणी, भैरव संहार | ऊपर के दाँत | अज्ञात; सरकार कोई पहचान नहीं देते | अज्ञात |
| 34 | पंचसागरदेवी वाराही, भैरव महारुद्र | नीचे के दाँत | अनिश्चित: सरकार के अनुसार शायद समुद्रों की ओर संकेत, या हरिद्वार के पास के पाँच कुंड | अनिश्चित |
| 35 | करतोया तटदेवी अपर्णा, भैरव वामन | बायाँ कान (कुछ पाठों में "तल्प") | भवानीपुर, करतोया नदी के पास, बोगरा ज़िला | बांग्लादेश |
| 36 | श्रीपर्वतदेवी सुंदरी, भैरव सुंदरानंद | दाहिना टखना (कुछ पाठों में दाहिना कान) | अनिश्चित: सरकार के अनुसार श्रीपर्वत वही श्रीशैल है (कृष्णा के दक्षिण, नल्लमला पहाड़ियाँ), पर वे इस वर्णन को कल्पित मानते हैं | आंध्र प्रदेश (अनिश्चित) |
| 37 | विभाषदेवी भीमरूपा (कपालिनी), भैरव कपाली | बायाँ टखना | तमलुक के पास, मेदिनीपुर क्षेत्र | पश्चिम बंगाल |
| 38 | प्रभासदेवी चंद्रभागा, भैरव वक्रतुंड | उदर (पेट; कुछ पाठों में अधर) | प्रभास (सोमनाथ), सौराष्ट्र | गुजरात |
| 39 | भैरव पर्वतदेवी अवंती, भैरव लंबकर्ण | ऊपर का होंठ | अनिश्चित: देवी के नाम (अवंती) से सरकार इसे पश्चिम मालवा (उज्जैन का क्षेत्र) में मानते हैं | मध्य प्रदेश (संभावित) |
| 40 | जनस्थानपाठ-भेद: जलस्थल · देवी भ्रामरी, भैरव विकृताक्ष | चिबुक (ठोड़ी) | रामायण का जनस्थान: ऊपरी गोदावरी घाटी, नासिक क्षेत्र | महाराष्ट्र |
| 41 | गोदावरी तीरदेवी विश्वेशी (राकिणी), भैरव दंडपाणि (वत्सनाभ) | बायाँ गाल | गोदावरी नदी का तट; ग्रंथ कोई निश्चित स्थान नहीं बताता | अनिश्चित |
| 42 | रत्नावलीदेवी कुमारी, भैरव शिव | दाहिना कंधा | अनिश्चित: सरकार के अनुसार संभवतः हुगली ज़िले का खानाकुल-कृष्णनगर | पश्चिम बंगाल (संभावित) |
| 43 | मिथिलादेवी उमा (महादेवी), भैरव महोदर | बायाँ कंधा | जनकपुर, नेपाल की तराई | नेपाल |
| 44 | नलहाटीदेवी काली, भैरव योगीश | नला (लंबी हड्डी) | नलहाटी, बीरभूम ज़िला | पश्चिम बंगाल |
| 45 | कालीघाटपाठ-भेद: कर्णाट · देवी जयदुर्गा, भैरव क्रोधीश (अभीरु) | मुंड (सिर); "कर्णाट" पाठ में कान | विवादित: सरकार के अनुसार यह काली पीठ कटवा के पास जुरानपुर में है (कोलकाता का कालीघाट ऊपर 19वाँ है); कुछ पांडुलिपियाँ यहाँ "कर्णाट" पढ़ती हैं | पश्चिम बंगाल; "कर्णाट" पाठ में अज्ञात |
| 46 | वक्रेश्वरदेवी महिषमर्दिनी, भैरव वक्रनाथ | मन | बक्रेश्वर, दुबराजपुर के पास, बीरभूम ज़िला | पश्चिम बंगाल |
| 47 | यशोरदेवी यशोरेश्वरी, भैरव चंड | पाणि (हाथ) | ईश्वरीपुर, खुलना क्षेत्र; नाम जेस्सोर (यशोर) का है, पर पीठ जेस्सोर नगर में नहीं | बांग्लादेश |
| 48 | अट्टहासदेवी फुल्लरा, भैरव विश्वेश | ओष्ठ (होंठ) | लाभपुर के पास, बीरभूम ज़िला | पश्चिम बंगाल |
| 49 | नंदीपुरदेवी नंदिनी, भैरव नंदिकेश्वर | हार (गले का हार) | सैंथिया के पास, बीरभूम ज़िला | पश्चिम बंगाल |
| 50 | लंकादेवी इंद्राक्षी, भैरव राक्षसेश्वर | नूपुर (पायल) | अनिश्चित: भैरव के नाम से सरकार इसे श्रीलंका मानते हैं, पर "लंका" का अर्थ कोई भी द्वीप हो सकता है और ग्रंथ कोई मंदिर नहीं बताता | श्रीलंका (संभावित) |
| 51 | विराटदेवी अंबिका, भैरव अमृत | पैर की उँगलियाँ | विवादित: प्राचीन विराट (मत्स्य) देश जयपुर-अलवर-भरतपुर क्षेत्र में था, पर बाद के लेखक उत्तर बंगाल में भी एक विराट देश मानते थे | राजस्थान या पश्चिम बंगाल |
इन तीर्थों को नक्शे पर देखेंहर नाम पर उसका अपना पन्ना है: स्थान, देवता, कथा और स्रोत
यह सूची कहाँ से है
यह सूची "पीठनिर्णय" (महापीठनिरूपण) नाम के छोटे ग्रंथ की है। पांडुलिपियाँ इसे तंत्रचूडामणि का अंश बताती हैं। आरंभ में ही देवी कहती हैं कि सती के अंग-प्रत्यंग गिरने और विष्णु के चक्र से कटने से 51 पीठ बने, हर एक में एक देवी और एक भैरव।
इतिहासकार दिनेशचंद्र सरकार ने "द शाक्त पीठ्स" (1948; संशोधित संस्करण 1973) में कई पांडुलिपियों और छपे पाठों से इसका आलोचनात्मक पाठ बनाया और हर पीठ की पहचान पर टिप्पणी की। तालिका का क्रम, अंग, देवी और भैरव उनकी तालिका से हैं; स्थानों की पहचान उनकी टिप्पणियों से, आज के राज्य और देश के नाम के साथ। तारानाथ तर्कवाचस्पति के कोश वाचस्पत्यम् में "पीठ" शब्द के नीचे यही पाठ तंत्रचूडामणि से उद्धृत है, जिससे सूची का मिलान किया गया।
सरकार के अनुसार यह ग्रंथ 17वीं सदी के तंत्रसार के बाद और 1820 के प्राणतोषिणी तंत्र से पहले पूर्वी भारत में रचा गया या प्रचलित हुआ। इसीलिए इसके बहुत से पीठ बंगाल और आज के बांग्लादेश में हैं।
सती के अंगों की कथा
परंपरा के अनुसार दक्ष के यज्ञ में सती के देह-त्याग के बाद शिव उनका शरीर लेकर पृथ्वी पर घूमते रहे। देवी भागवत (7.30) और कालिका पुराण (अध्याय 18) जैसे बाद के ग्रंथों में कथा है कि जहाँ-जहाँ सती के शरीर के भाग गिरे, वहाँ पीठ बने। एक रूप में देवता योग से शरीर में प्रवेश कर उसे धीरे-धीरे अलग करते हैं; दूसरे रूप में विष्णु बाणों या चक्र से शरीर को काटते हैं (सरकार का सारांश)। देवी भागवत में बाण हैं, पीठनिर्णय में चक्र।
तालिका कैसे पढ़ें
कई पीठ आज भारत के बाहर हैं: पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, तिब्बत और श्रीलंका में। जहाँ पहचान पर मतभेद है, वहाँ पंक्ति में "विवादित" लिखा है; जहाँ सरकार कोई स्थान नहीं देते, वहाँ "अज्ञात"। सरकार ने 1948 के ज़िलों के नाम दिए थे; तालिका में उन जगहों का आज का राज्य या देश लिखा है। नाम के नीचे पाठ-भेद और उस पीठ की देवी और भैरव हैं।
स्रोतों में अंतर
- गिनती समय के साथ बदली। सरकार के अध्ययन के अनुसार पुराने तंत्र चार पीठ गिनते हैं, फिर 7, 10, 18, 42, 50, 51 और अंत में 108 तक सूचियाँ बनीं।
- चार पीठ: बौद्ध हेवज्र तंत्र चार पीठ गिनाता है: जालंधर, ओड्डियान (स्वात घाटी), पूर्णगिरि और कामरूप। कालिका पुराण (64.43-45) भी चार कहता है: ओड्र, जालशैल, पूर्ण (पूर्णगिरि) और कामरूप।
- 50 पीठ: ज्ञानार्णव तंत्र 50 पीठ गिनाता है। तंत्रसार भी 50 मानता है, पर एक नाम (मेरुगिरि) को दो में तोड़कर 51 बना देता है (सरकार)।
- 52 पीठ: बंगाल के कुछ हिस्सों में 52 पीठ माने जाते हैं। सरकार इसका स्रोत बृहन्नील तंत्र जैसी सूचियाँ और पांडुलिपियों की गड़बड़ी बताते हैं; उनकी एक पांडुलिपि (G) भी 52 गिनती है।
- 53 क्रमांक: वाचस्पत्यम् में उद्धृत पाठ 53 क्रमांक देता है (कर्णाट और मागध के साथ) और खुद लिखता है कि दो पीठ लिपिक की भूल से बढ़े हैं, पर कौन से, यह तय नहीं किया जा सकता। सरकार कर्णाट और मागध को बाद में जोड़ा गया मानते हैं।
- मूल पाठ: सरकार के अनुसार मूल पीठनिर्णय में शायद 42 नाम थे, जिनमें दस पीठ कामरूप में गिने गए थे; अंतिम आठ (नलहाटी से विराट तक) बाद में जोड़े गए। भरतचंद्र का अन्नदामंगल (1752) "51" कहता है पर 42 ही गिनाता है। सरकार यह भी मानते हैं कि मूल में वाराणसी या कन्याश्रम में से एक ही था।
- 108 पीठ: देवी भागवत (7.30) 108 पीठ और उतनी ही देवियाँ गिनाता है; उसमें विष्णु सती के शरीर को बाणों से काटते हैं। मत्स्य पुराण (अध्याय 13) में देवी के 108 नाम स्थानों के साथ हैं, पर वहाँ उन्हें पीठ नहीं कहा गया (सरकार)।
- देवी और भैरव के नाम पांडुलिपियों में अलग-अलग मिलते हैं; तालिका में पहला नाम सरकार की तालिका का पहला पाठ है और कोष्ठक में दूसरा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
51 शक्तिपीठ किस ग्रंथ में गिनाए गए हैं?
"पीठनिर्णय" (महापीठनिरूपण) में, जिसे पांडुलिपियाँ तंत्रचूडामणि का अंश बताती हैं। इसका आलोचनात्मक पाठ डी. सी. सरकार ने "द शाक्त पीठ्स" में दिया है।
शक्तिपीठ 51 हैं, 52 हैं या 108?
ग्रंथ के अनुसार संख्या अलग है: पीठनिर्णय 51 कहता है, बंगाल की कुछ सूचियाँ 52, और देवी भागवत 108। पुराने तंत्र केवल चार पीठ गिनाते हैं।
भारत के बाहर कौन-कौन से शक्तिपीठ हैं?
इस सूची में पाकिस्तान में हिंगुला (हिंगलाज); बांग्लादेश में सुगंधा, चट्टल, जयंती, करतोया तट और यशोर; नेपाल में नेपाल, गंडकी और मिथिला। कन्याश्रम (बांग्लादेश), लंका (श्रीलंका) और मानस (तिब्बत) की पहचान अनिश्चित या विवादित है, और करवीर व श्रीशैल की एक पहचान भारत के बाहर जाती है।
कामाख्या शक्तिपीठ में कौन सा अंग माना जाता है?
पीठनिर्णय के अनुसार कामगिरि (कामरूप) में योनि गिरी; देवी कामाख्या और भैरव उमानंद हैं। यह गुवाहाटी (असम) के पास है।
कालीघाट शक्तिपीठ में कौन सा अंग गिरा माना जाता है?
पीठनिर्णय के अनुसार कालीपीठ (कालीघाट, कोलकाता) में दाहिने पैर की उँगलियाँ; देवी काली और भैरव नकुलीश।
स्रोत
- डी. सी. सरकार, द शाक्त पीठ्स (जर्नल ऑफ़ द रॉयल एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल, खंड 14, 1948; मोतीलाल बनारसीदास, 1973): पीठनिर्णय की तालिका पृ. 35-37, पाठ और टिप्पणियाँ पृ. 42-57, अनुक्रमणिका (archive.org)
- वाचस्पत्यम् (तारानाथ तर्कवाचस्पति), "पीठ": तंत्रचूडामणि से उद्धृत पीठ-सूची (कोलोन डिजिटल संस्कृत कोश)
- देवी भागवत पुराण 7.30, स्वामी विज्ञानानंद का अंग्रेज़ी अनुवाद (wisdomlib.org)
कुछ गलत लगा? गलती बताएँ