शारदीय नवरात्रि 2026 में 11 अक्टूबर, रविवार से 19 अक्टूबर, सोमवार तक है। आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को घटस्थापना के साथ नौ दिनों तक देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है, और उसके बाद दशमी को विजयादशमी (दशहरा) मनाई जाती है। घटस्थापना का मुहूर्त अपने शहर के सूर्योदय से नीचे देखें।
एक नज़र में
- तिथि
- आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी
- अवधि
- नौ रातें; दसवें दिन विजयादशमी
- आराध्य
- देवी दुर्गा के नौ रूप (नवदुर्गा)
- पहला दिन
- घटस्थापना (कलश स्थापना)
- मुख्य पाठ
- दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य)
- अष्टमी-नवमी
- कन्या पूजन, संधि पूजा
- साल में
- चार नवरात्रि; शारदीय सबसे अधिक मनाई जाती है
नवदुर्गा: नौ दिन, नौ रूप
देवी कवच में नौ रूपों का यही क्रम दिया गया है, और नवरात्रि में हर दिन एक रूप की पूजा होती है। रूपों का वर्णन परंपरागत ध्यान-श्लोकों के अनुसार है।
पहला दिन: शैलपुत्री
पर्वतराज हिमालय की पुत्री। वृषभ पर सवार, हाथों में त्रिशूल और कमल।
दूसरा दिन: ब्रह्मचारिणी
तपस्या करती देवी। हाथों में जप-माला और कमंडल।
तीसरा दिन: चंद्रघंटा
मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र। सिंह पर सवार, युद्ध के लिए तैयार रूप।
चौथा दिन: कूष्मांडा
परंपरा के अनुसार जिनकी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना हुई।
पाँचवाँ दिन: स्कंदमाता
स्कंद (कार्तिकेय) की माता; गोद में बाल स्कंद।
छठा दिन: कात्यायनी
परंपरा के अनुसार ऋषि कात्यायन के आश्रम में प्रकट हुईं; महिषासुर-मर्दिनी रूप में पूजित।
सातवाँ दिन: कालरात्रि
अंधकार जैसा श्याम वर्ण, भयंकर रूप; भक्तों के भय का नाश करने वाली।
आठवाँ दिन: महागौरी
अत्यंत गौर वर्ण, श्वेत वस्त्र; वृषभ पर सवार।
नौवाँ दिन: सिद्धिदात्री
सब सिद्धियाँ देने वाली; कमल पर विराजमान।
घटस्थापना कब और कैसे
नवरात्रि के पहले दिन मिट्टी में जौ बोकर उस पर जल से भरा कलश स्थापित किया जाता है और उसमें देवी का आवाहन होता है। निर्णय-ग्रंथों के अनुसार घटस्थापना प्रतिपदा तिथि में, सूर्योदय के बाद दिन के पहले तिहाई भाग में करनी चाहिए; यह संभव न हो तो दोपहर के अभिजित मुहूर्त में। चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग को टालने की सलाह दी जाती है, पर इनमें घटस्थापना वर्जित नहीं मानी जाती।
दुर्गा सप्तशती
मार्कण्डेय पुराण के अध्याय 81 से 93 तक के 700 श्लोक दुर्गा सप्तशती कहलाते हैं; इसे देवी माहात्म्य और चंडी पाठ भी कहते हैं। इसके तीन चरित्रों में देवी मधु-कैटभ, महिषासुर और शुम्भ-निशुम्भ का संहार करती हैं। नवरात्रि में इसका पाठ विशेष रूप से किया जाता है।
पूजा विधि
- चरण 1
स्नान और संकल्प
प्रतिपदा को स्नान के बाद नौ दिन की पूजा या व्रत का संकल्प लें।
- चरण 2
जौ बोना और कलश स्थापना
मिट्टी के पात्र में जौ बोएँ। उस पर जल, सुपारी और सिक्का डालकर कलश रखें, मुख पर आम के पत्ते और ऊपर नारियल।
- चरण 3
दीपक
कई परिवारों में नौ दिन तक अखंड दीपक जलाया जाता है; अपनी परंपरा के अनुसार।
- चरण 4
रोज़ की पूजा
उस दिन के देवी रूप की पूजा, और दुर्गा सप्तशती या देवी कवच का पाठ।
- चरण 5
कन्या पूजन
अष्टमी या नवमी को, कुल-परंपरा के अनुसार, कन्याओं को भोजन कराकर दक्षिणा दें।
- चरण 6
पारण और विसर्जन
नवमी या दशमी को, परंपरा के अनुसार, व्रत का पारण करें और कलश का विसर्जन करें।

महिषासुर मर्दिनी
दुर्गा सप्तशती के मध्यम चरित्र के अनुसार महिषासुर ने देवताओं को हराकर स्वर्ग छीन लिया था। तब ब्रह्मा, विष्णु, शिव और सभी देवताओं के तेज से एक देवी प्रकट हुईं। देवताओं ने उन्हें अपने-अपने अस्त्र दिए। देवी ने महिषासुर की सेना और अंत में स्वयं महिषासुर का वध किया, इसी से वे महिषासुरमर्दिनी कहलाईं।
दुर्गा सप्तशती, अध्याय 2–3श्लोक
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्॥पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्॥
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः॥या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ज्ञान-ग्राफ़ में शारदीय नवरात्रि
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शारदीय नवरात्रि 2026 कब से कब तक है?
11 अक्टूबर, रविवार से 19 अक्टूबर, सोमवार तक। इसके बाद दशमी को विजयादशमी (दशहरा) मनाई जाती है।
घटस्थापना का सबसे अच्छा समय क्या है?
प्रतिपदा तिथि रहते, सूर्योदय के बाद दिन का पहला तिहाई भाग। यह न मिले तो अभिजित मुहूर्त। ऊपर अपने शहर का समय देखें।
नवदुर्गा के नौ रूप कौन से हैं?
शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री।
कन्या पूजन अष्टमी को करें या नवमी को?
दोनों प्रचलित हैं। अपनी कुल-परंपरा के अनुसार करें।
साल में कितनी नवरात्रि होती हैं?
चार: चैत्र और आश्विन (शारदीय) की नवरात्रि, और माघ व आषाढ़ की गुप्त नवरात्रि। इनमें शारदीय नवरात्रि सबसे अधिक मनाई जाती है।
स्रोत
- मार्कण्डेय पुराण, अध्याय 81–93 (दुर्गा सप्तशती)
- देवी कवच
- देवी भागवत पुराण, स्कंध 3 (नवरात्र व्रत)
- धर्मसिन्धु और निर्णयसिन्धु (घटस्थापना के नियम)
- मुहूर्त और चंद्रोदय: SanatanBodh पंचांग गणना, Drik Panchang (नई दिल्ली, 2026–27) से मिलान
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