मणिवेदिक पीठनिर्णय के 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहाँ ग्रंथ के अनुसार सती के मणिबंध (कलाइयाँ) गिरे; यहाँ की देवी गायत्री और भैरव सर्वानंद हैं। इसका स्थान ज्ञात नहीं है: इतिहासकार डी. सी. सरकार के अनुसार "मणिबंध" किसी जगह का नाम नहीं, ग्रंथ के बिगड़े पाठ से बना नाम है।
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- देवता
- गायत्री
- परंपरा
- शाक्त
- तीर्थ-सूची
- 51 शक्तिपीठ 26/51
- स्थान
- अज्ञात
- राज्य
- अज्ञात
- देश
- भारत
मत-भेद: स्रोतों में अंतर
- वाचस्पत्यम् में उद्धृत पाठ "मणिवेदिक देश" कहता है और उसी पंक्ति में मणिबंध (कलाई) का नाम लेता है; सरकार इस जगह के पाठ को गड़बड़ मानते हैं।
- आज की कुछ लोकप्रिय सूचियाँ इस पीठ को किसी मंदिर से जोड़ती हैं, पर इसके लिए हमें कोई आधिकारिक या विद्वत स्रोत नहीं मिला; इसलिए यहाँ न कोई मंदिर बताया गया है, न मानचित्र।
- पीठों की गिनती ग्रंथ के अनुसार अलग है: पीठनिर्णय 51 गिनाता है, बंगाल की कुछ सूचियाँ 52, देवी भागवत (7.30) 108 स्थान देवी के नामों के साथ देता है, और पुराने तंत्र केवल चार पीठ गिनाते हैं (सरकार)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मणिवेदिक शक्तिपीठ कहाँ है?
पीठनिर्णय इसका नाम देता है, स्थान नहीं; डी. सी. सरकार भी इसकी कोई पहचान नहीं देते। ग्रंथ के अनुसार यहाँ सती की कलाइयाँ गिरीं और देवी गायत्री हैं।
मणिवेदिक शक्तिपीठ किन तीर्थ-सूचियों में है?
51 शक्तिपीठ (सूची में 51 में से 26वाँ)।
स्रोत
- डी. सी. सरकार, द शाक्त पीठ्स (जर्नल ऑफ़ द रॉयल एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल 1948; मोतीलाल बनारसीदास, 1973): पीठनिर्णय की तालिका पृ. 35-37, इस पीठ पर टिप्पणी पृ. 37, 51 (archive.org)
- वाचस्पत्यम् (तारानाथ तर्कवाचस्पति), "पीठ": तंत्रचूडामणि से उद्धृत पीठ-सूची (कोलोन डिजिटल संस्कृत कोश, sanskrit-lexicon.uni-koeln.de)
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