देवता

माँ दुर्गा

अन्य नाम:अम्बाभवानीमहिषासुरमर्दिनी
समीक्षक: Aditi Tripathiअंतिम समीक्षा: 5 स्रोतगलती बताएँ
संक्षेप में

दुर्गा आदिशक्ति का रूप हैं, जिन्हें शाक्त परंपरा में परम शक्ति माना जाता है। दुर्गा सप्तशती (मार्कण्डेय पुराण) के अनुसार वे देवताओं के सम्मिलित तेज से प्रकट हुईं और महिषासुर का वध किया। उनका वाहन सिंह है, और नवरात्रि में उनके नौ रूपों की पूजा होती है।

रिश्ते

असुर, जिसका वध कियाकथा-ग्रंथपर्वपर्व (नवरात्रि का समापन)महिषासुरदुर्गा सप्तशतीशारदीय नवरात्रिविजयादशमीदुर्गा

दुर्गा सप्तशती के तीन चरित्र

मार्कण्डेय पुराण के 13 अध्याय (लगभग 700 श्लोक) दुर्गा सप्तशती या देवी माहात्म्य कहलाते हैं। इसकी कथा तीन भागों में है:

प्रथम चरित्र (अध्याय 1)

महाकाली का प्रसंग: विष्णु की योगनिद्रा से मधु और कैटभ असुरों का वध।

दुर्गा सप्तशती, अध्याय 1

मध्यम चरित्र (अध्याय 2–4)

महालक्ष्मी का प्रसंग: देवताओं के तेज से प्रकट होकर महिषासुर का वध।

दुर्गा सप्तशती, अध्याय 2–4

उत्तम चरित्र (अध्याय 5–13)

महासरस्वती का प्रसंग: धूम्रलोचन, चंड-मुंड, रक्तबीज और शुम्भ-निशुम्भ का वध।

दुर्गा सप्तशती, अध्याय 5–13

महिषासुर वध

महिषासुर ने देवताओं को हराकर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। तब ब्रह्मा, विष्णु, शिव और अन्य देवताओं के क्रोध से निकला तेज एक देवी के रूप में प्रकट हुआ। देवताओं ने उन्हें अपने अस्त्र दिए: शिव ने त्रिशूल, विष्णु ने चक्र, इंद्र ने वज्र, और हिमालय ने वाहन के रूप में सिंह। भयंकर युद्ध में देवी ने महिषासुर का वध किया (दुर्गा सप्तशती, अध्याय 2–3)।

नवदुर्गा: नवरात्रि के नौ रूप

नवरात्रि के नौ दिनों में क्रम से इन रूपों की पूजा होती है। यह क्रम देवी कवच के श्लोक "प्रथमं शैलपुत्री च" से लिया जाता है।

1. शैलपुत्री

पर्वतराज हिमालय की पुत्री।

2. ब्रह्मचारिणी

तप और संयम का रूप।

3. चंद्रघंटा

मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र।

4. कूष्माण्डा

परंपरा में ब्रह्मांड की रचना करने वाली।

5. स्कंदमाता

स्कंद (कार्तिकेय) की माता।

6. कात्यायनी

ऋषि कात्यायन के आश्रम में प्रकट रूप।

7. कालरात्रि

अंधकार और भय का नाश करने वाला उग्र रूप।

8. महागौरी

गौर वर्ण का शांत रूप।

9. सिद्धिदात्री

सिद्धियाँ देने वाली।

शास्त्रों में दुर्गा

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥
जो देवी सब प्राणियों में शक्ति के रूप में स्थित हैं, उन्हें बार-बार नमस्कार।दुर्गा सप्तशती, अध्याय 5
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
सब मंगलों में मंगलमयी, कल्याणकारी, सब प्रयोजन सिद्ध करने वाली, शरण देने वाली, त्रिनेत्री गौरी नारायणी, तुम्हें नमस्कार।दुर्गा सप्तशती 11.10
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी ।
पहला रूप शैलपुत्री और दूसरा ब्रह्मचारिणी है (नवदुर्गा का क्रम)।देवी कवच

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा के नौ रूप कौन से हैं?

शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री (देवी कवच)।

दुर्गा ने महिषासुर का वध कैसे किया?

दुर्गा सप्तशती (अध्याय 2–3) के अनुसार देवताओं के तेज से प्रकट देवी ने, देवताओं से मिले अस्त्रों के साथ, युद्ध में महिषासुर का वध किया।

दुर्गा सप्तशती में कितने अध्याय हैं?

13 अध्याय और परंपरा के अनुसार 700 श्लोक, इसलिए इसका नाम "सप्तशती" है। ये मार्कण्डेय पुराण के अध्याय 81–93 हैं।

दुर्गा का वाहन क्या है?

सिंह। दुर्गा सप्तशती (अध्याय 2) के अनुसार हिमालय ने देवी को वाहन के रूप में सिंह दिया।

स्रोत

  1. मार्कण्डेय पुराण, अध्याय 81–93 (दुर्गा सप्तशती)
  2. दुर्गा सप्तशती, अध्याय 2–3
  3. दुर्गा सप्तशती, अध्याय 5 और 11
  4. देवी कवच
  5. देवी भागवत पुराण

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