गोदावरी तीर पीठनिर्णय के 51 शक्तिपीठों में से एक है; ग्रंथ के अनुसार गोदावरी के तट पर सती का बायाँ गाल गिरा, देवी विश्वेशी (राकिणी) और भैरव दंडपाणि (वत्सनाभ) हैं। ग्रंथ नदी का नाम देता है, कोई गाँव या मंदिर नहीं, इसलिए पीठ का सटीक स्थान तय नहीं।
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- देवता
- विश्वेशी (राकिणी)
- परंपरा
- शाक्त
- तीर्थ-सूची
- 51 शक्तिपीठ 41/51
- स्थान
- गोदावरी नदी का तट; ग्रंथ कोई निश्चित स्थान नहीं बताता
- राज्य
- अनिश्चित
- देश
- भारत
मत-भेद: स्रोतों में अंतर
- वाचस्पत्यम् में उद्धृत पाठ इसे दो पीठ बना देता है: गोदावरी तट पर देवी विश्वेशी और भैरव दंडपाणि, फिर बाएँ गाल पर देवी राकिणी और भैरव वत्सनाभ। सरकार इसे एक ही पीठ मानते हैं, जिसका आधा भाग बाद में जोड़ा गया।
- देवी भागवत (7.30) गोदावरी पर देवी का नाम त्रिसंध्या बताता है।
- आज की कुछ लोकप्रिय सूचियाँ इस पीठ को किसी मंदिर से जोड़ती हैं, पर इसके लिए हमें कोई आधिकारिक या विद्वत स्रोत नहीं मिला; इसलिए यहाँ न कोई मंदिर बताया गया है, न मानचित्र।
- पीठों की गिनती ग्रंथ के अनुसार अलग है: पीठनिर्णय 51 गिनाता है, बंगाल की कुछ सूचियाँ 52, देवी भागवत (7.30) 108 स्थान देवी के नामों के साथ देता है, और पुराने तंत्र केवल चार पीठ गिनाते हैं (सरकार)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गोदावरी तीर शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
पीठनिर्णय के अनुसार बायाँ गाल; देवी विश्वेशी (राकिणी) और भैरव दंडपाणि (वत्सनाभ) हैं। ग्रंथ केवल गोदावरी का तट बताता है।
गोदावरी तीर शक्तिपीठ कहाँ है?
गोदावरी तीर शक्तिपीठ गोदावरी नदी का तट; ग्रंथ कोई निश्चित स्थान नहीं बताता, अनिश्चित में है।
गोदावरी तीर शक्तिपीठ किन तीर्थ-सूचियों में है?
51 शक्तिपीठ (सूची में 51 में से 41वाँ)।
स्रोत
- डी. सी. सरकार, द शाक्त पीठ्स (जर्नल ऑफ़ द रॉयल एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल 1948; मोतीलाल बनारसीदास, 1973): पीठनिर्णय की तालिका पृ. 35-37, इस पीठ पर टिप्पणी पृ. 56 (archive.org)
- वाचस्पत्यम् (तारानाथ तर्कवाचस्पति), "पीठ": तंत्रचूडामणि से उद्धृत पीठ-सूची (कोलोन डिजिटल संस्कृत कोश, sanskrit-lexicon.uni-koeln.de)
- देवी भागवत पुराण 7.30 (108 पीठों की सूची), स्वामी विज्ञानानंद का अंग्रेज़ी अनुवाद (wisdomlib.org)
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