जनस्थान पीठनिर्णय के 51 शक्तिपीठों में से एक है; ग्रंथ के अनुसार यहाँ सती की चिबुक (ठोड़ी) गिरी, देवी भ्रामरी और भैरव विकृताक्ष हैं। इतिहासकार डी. सी. सरकार इसे रामायण का जनस्थान, यानी महाराष्ट्र में नासिक के आसपास की ऊपरी गोदावरी घाटी मानते हैं; ग्रंथ कोई मंदिर नहीं बताता।
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- देवता
- भ्रामरी
- परंपरा
- शाक्त
- तीर्थ-सूची
- 51 शक्तिपीठ 40/51
- स्थान
- रामायण का जनस्थान: ऊपरी गोदावरी घाटी, नासिक क्षेत्र
- राज्य
- महाराष्ट्र
- देश
- भारत
मत-भेद: स्रोतों में अंतर
- वाचस्पत्यम् में उद्धृत पाठ स्थान का नाम "जलस्थल" पढ़ता है।
- नासिक ज़िले का सप्तश्रृंगी गड (वणी) महाराष्ट्र की "साढ़े तीन शक्तिपीठों" की परंपरा में आधा पीठ गिना जाता है (नासिक ज़िले की वेबसाइट); वह परंपरा पीठनिर्णय की 51 की सूची से अलग है, और कोई आधिकारिक स्रोत जनस्थान पीठ को किसी मंदिर से नहीं जोड़ता। इसलिए यहाँ मानचित्र नहीं दिया गया।
- पीठों की गिनती ग्रंथ के अनुसार अलग है: पीठनिर्णय 51 गिनाता है, बंगाल की कुछ सूचियाँ 52, देवी भागवत (7.30) 108 स्थान देवी के नामों के साथ देता है, और पुराने तंत्र केवल चार पीठ गिनाते हैं (सरकार)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जनस्थान शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
पीठनिर्णय के अनुसार चिबुक (ठोड़ी); देवी भ्रामरी और भैरव विकृताक्ष हैं। स्थान नासिक का क्षेत्र माना जाता है।
जनस्थान शक्तिपीठ कहाँ है?
जनस्थान शक्तिपीठ रामायण का जनस्थान: ऊपरी गोदावरी घाटी, नासिक क्षेत्र, महाराष्ट्र में है।
जनस्थान शक्तिपीठ किन तीर्थ-सूचियों में है?
51 शक्तिपीठ (सूची में 51 में से 40वाँ)।
स्रोत
- डी. सी. सरकार, द शाक्त पीठ्स (जर्नल ऑफ़ द रॉयल एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल 1948; मोतीलाल बनारसीदास, 1973): पीठनिर्णय की तालिका पृ. 35-37, इस पीठ पर टिप्पणी पृ. 55 (archive.org)
- वाचस्पत्यम् (तारानाथ तर्कवाचस्पति), "पीठ": तंत्रचूडामणि से उद्धृत पीठ-सूची (कोलोन डिजिटल संस्कृत कोश, sanskrit-lexicon.uni-koeln.de)
- नासिक ज़िला (nashik.gov.in): Shree Saptshrungi Gad, Vani
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