हिंगलाज माता का मंदिर पाकिस्तान के बलूचिस्तान में, लसबेला ज़िले के हिंगोल राष्ट्रीय उद्यान में हिंगोल नदी के किनारे है। पीठनिर्णय की सूची का पहला पीठ हिंगुला यही माना जाता है: ग्रंथ के अनुसार यहाँ सती का ब्रह्मरंध्र (सिर का ऊपरी भाग) गिरा, देवी कोट्टरी और भैरव भीमलोचन हैं।
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- परंपरा
- शाक्त
- तीर्थ-सूची
- 51 शक्तिपीठ 1/51
- स्थान
- हिंगोल नदी का तट, हिंगोल राष्ट्रीय उद्यान, लसबेला ज़िला
- राज्य
- बलूचिस्तान
- देश
- पाकिस्तान
- नक्शा
- OpenStreetMap (25.5139, 65.5153)
वार्षिक यात्रा
पाकिस्तान के समाचारपत्र डॉन के अनुसार हर वर्ष वसंत में (हाल के वर्षों में अप्रैल में) यहाँ तीन-चार दिन का मेला और तीर्थ-यात्रा होती है, जिसमें सिंध के थारपारकर, उमरकोट और सांघड़ से बहुत से लोग पैदल भी आते हैं। 2026 में यह 17 अप्रैल से तीन दिन चला। यात्री हिंगोल नदी में स्नान करते हैं, रास्ते के चंद्रगुप नाम के मिट्टी के ज्वालामुखी पर चढ़ावा चढ़ाते हैं और फिर गुफा-मंदिर में दर्शन करते हैं।
डॉन इसे "हिंगलाज नानी" का मंदिर भी कहता है। जर्गन शाफ़्लेख़नर की पुस्तक "हिंगलाज देवी" (ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, 2018) के परिचय के अनुसार यह वार्षिक मेला पिछले लगभग तीन दशकों में बड़ा हुआ है, आंशिक रूप से मकरान तटीय राजमार्ग बनने के कारण।
हिंगलाज माता कैसे पहुँचें
- कराची से मकरान तटीय राजमार्ग से; डॉन (2019) के अनुसार दूरी लगभग 250 किमी, यानी लगभग चार घंटे की गाड़ी।
प्रमुख त्योहार
मत-भेद: स्रोतों में अंतर
- मेले की तिथि हर वर्ष अलग रही है (2022 में मार्च के अंत में, 2024 में 26-28 अप्रैल, 2026 में 17 अप्रैल से); किसी विश्वसनीय स्रोत में इसका पंचांग-नियम नहीं मिला।
- मंदिर-समिति का नाम डॉन में दो तरह से छपा है: "हिंगलाज माता वेलफ़ेयर एंड डेवलपमेंट सोसाइटी" और "श्री हिंगलाज माता वेलफ़ेयर मंडली"। मंदिर की कोई आधिकारिक वेबसाइट नहीं मिली।
- पीठों की गिनती ग्रंथ के अनुसार अलग है: पीठनिर्णय 51 गिनाता है, बंगाल की कुछ सूचियाँ 52, देवी भागवत (7.30) 108 स्थान देवी के नामों के साथ देता है, और पुराने तंत्र केवल चार पीठ गिनाते हैं (सरकार)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हिंगलाज शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
पीठनिर्णय के अनुसार ब्रह्मरंध्र, यानी सिर का ऊपरी भाग; डॉन की रिपोर्ट भी यहाँ सती का सिर गिरने की मान्यता बताती है।
हिंगलाज यात्रा कब होती है?
हर वर्ष वसंत में, हाल के वर्षों में अप्रैल में, तीन-चार दिन के लिए; 2026 में 17 अप्रैल से तीन दिन (डॉन)।
हिंगलाज माता शक्तिपीठ कहाँ है?
हिंगलाज माता शक्तिपीठ हिंगोल नदी का तट, हिंगोल राष्ट्रीय उद्यान, लसबेला ज़िला, बलूचिस्तान (पाकिस्तान) में है।
हिंगलाज माता किन तीर्थ-सूचियों में है?
51 शक्तिपीठ (सूची में 51 में से 1वाँ)।
हिंगलाज माता कैसे पहुँचें?
कराची से मकरान तटीय राजमार्ग से; डॉन (2019) के अनुसार दूरी लगभग 250 किमी, यानी लगभग चार घंटे की गाड़ी।
स्रोत
- डी. सी. सरकार, द शाक्त पीठ्स (जर्नल ऑफ़ द रॉयल एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल 1948; मोतीलाल बनारसीदास, 1973): पीठनिर्णय की तालिका पृ. 35-37, इस पीठ पर टिप्पणी पृ. 43 (archive.org)
- वाचस्पत्यम् (तारानाथ तर्कवाचस्पति), "पीठ": तंत्रचूडामणि से उद्धृत पीठ-सूची (कोलोन डिजिटल संस्कृत कोश, sanskrit-lexicon.uni-koeln.de)
- डॉन (dawn.com), 26 अगस्त 2019: हिंगोल राष्ट्रीय उद्यान में मंदिर, कराची से दूरी, अप्रैल की तीर्थ-यात्रा
- डॉन, 26 मार्च 2022 ("हिंगलाज नानी" मंदिर का मेला); 5 मई 2025 (स्नान, चंद्रगुप, समिति); 20 अप्रैल 2026 (17 अप्रैल 2026 से तीन दिन का मेला)
- अल जज़ीरा, 28 अप्रैल 2024: हिंगलाज यात्रा (फ़ोटो रिपोर्ट)
- जर्गन शाफ़्लेख़नर, हिंगलाज देवी (ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, 2018): प्रकाशक का पुस्तक-परिचय
- विकिडेटा Q2722882 (Hinglaj Mata): मानचित्र के निर्देशांक
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