ज्वालामुखी मंदिर हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा ज़िले में है और पीठनिर्णय का ज्वालामुखी पीठ है। ग्रंथ के अनुसार यहाँ सती की जिह्वा (जीभ) गिरी, देवी सिद्धिदा (अंबिका) और भैरव उन्मत्त हैं; काँगड़ा ज़िले की सरकारी वेबसाइट भी यहाँ जीभ गिरना बताती है। यहाँ कोई मूर्ति नहीं, चट्टान से निकलती ज्योतियाँ ही देवी के रूप में पूजी जाती हैं।
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- परंपरा
- शाक्त
- तीर्थ-सूची
- 51 शक्तिपीठ 5/51
- स्थान
- ज्वालामुखी नगर, काँगड़ा ज़िला
- राज्य
- हिमाचल प्रदेश
- देश
- भारत
- नक्शा
- OpenStreetMap (31.8756, 76.3244)
ज्योतियाँ
काँगड़ा ज़िले की वेबसाइट के अनुसार देवी यहाँ मूर्ति के रूप में नहीं, लगातार जलती प्राकृतिक ज्योतियों के रूप में प्रकट मानी जाती हैं; गर्भगृह में खोखली चट्टान से निकलती ज्योति देवी का रूप है, और सामान्यतः नौ ज्योतियाँ देवी के अलग-अलग रूप मानी जाती हैं।
काँगड़ा ज़िले के अनुसार यहाँ हर वर्ष मार्च-अप्रैल और सितंबर-अक्टूबर की नवरात्रि में मेले लगते हैं।
ज्वालामुखी कैसे पहुँचें
- काँगड़ा ज़िले की वेबसाइट के अनुसार: काँगड़ा से लगभग 30 किमी, धर्मशाला से लगभग 56 किमी, पठानकोट से लगभग 140 किमी और गग्गल हवाई अड्डे से लगभग 46-50 किमी।
प्रमुख त्योहार
मत-भेद: स्रोतों में अंतर
- सरकारी पृष्ठों पर आरती और दर्शन के समय आपस में नहीं मिलते (काँगड़ा ज़िले की वेबसाइट और प्रदेश के मंदिर पोर्टल के समय अलग हैं), इसलिए यहाँ समय नहीं दिया गया।
- पीठों की गिनती ग्रंथ के अनुसार अलग है: पीठनिर्णय 51 गिनाता है, बंगाल की कुछ सूचियाँ 52, देवी भागवत (7.30) 108 स्थान देवी के नामों के साथ देता है, और पुराने तंत्र केवल चार पीठ गिनाते हैं (सरकार)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ज्वालामुखी शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
पीठनिर्णय और काँगड़ा ज़िले की वेबसाइट, दोनों के अनुसार जिह्वा (जीभ)। देवी सिद्धिदा (अंबिका) और भैरव उन्मत्त हैं।
ज्वालामुखी मंदिर में मूर्ति क्यों नहीं है?
यहाँ देवी को चट्टान से निकलती ज्योतियों के रूप में पूजा जाता है; काँगड़ा ज़िले की वेबसाइट के अनुसार यही देवी का रूप माना जाता है।
ज्वालामुखी शक्तिपीठ कहाँ है?
ज्वालामुखी शक्तिपीठ ज्वालामुखी नगर, काँगड़ा ज़िला, हिमाचल प्रदेश में है।
ज्वालामुखी किन तीर्थ-सूचियों में है?
51 शक्तिपीठ (सूची में 51 में से 5वाँ)।
ज्वालामुखी कैसे पहुँचें?
काँगड़ा ज़िले की वेबसाइट के अनुसार: काँगड़ा से लगभग 30 किमी, धर्मशाला से लगभग 56 किमी, पठानकोट से लगभग 140 किमी और गग्गल हवाई अड्डे से लगभग 46-50 किमी।
स्रोत
- डी. सी. सरकार, द शाक्त पीठ्स (जर्नल ऑफ़ द रॉयल एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल 1948; मोतीलाल बनारसीदास, 1973): पीठनिर्णय की तालिका पृ. 35-37, इस पीठ पर टिप्पणी पृ. 44 (archive.org)
- वाचस्पत्यम् (तारानाथ तर्कवाचस्पति), "पीठ": तंत्रचूडामणि से उद्धृत पीठ-सूची (कोलोन डिजिटल संस्कृत कोश, sanskrit-lexicon.uni-koeln.de)
- काँगड़ा ज़िला (hpkangra.nic.in): Shri Jawalamukhi Mata Temple; Kangra Pilgrimage
- विकिडेटा Q124213960 (Jwala Ji Kangra): मानचित्र के निर्देशांक
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