कामाख्या शक्तिपीठ

कामाख्यानीलाचल पहाड़ी, असम

अन्य नाम: कामगिरि, कामरूप (पीठनिर्णय); नीलाचल

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 6 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ
कामाख्या शक्तिपीठ: 51 शक्तिपीठ 17/51, कामाख्या, नीलाचल पहाड़ी, असम
संक्षेप में

कामाख्या मंदिर असम में गुवाहाटी की नीलाचल पहाड़ी पर है और पीठनिर्णय का कामगिरि (कामरूप) पीठ है। ग्रंथ के अनुसार यहाँ सती की योनि गिरी, देवी कामाख्या और भैरव उमानंद हैं; मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट भी यहाँ सती की योनि-मुद्रा गिरना बताती है। गर्भगृह में कोई मूर्ति नहीं, चट्टान का योनि-आकार पीठ पूजा जाता है।

देवता
कामाख्या
परंपरा
शाक्त
तीर्थ-सूची
51 शक्तिपीठ 17/51
स्थान
नीलाचल पहाड़ी, गुवाहाटी, कामरूप महानगर ज़िला
राज्य
असम
देश
भारत
आधिकारिक वेबसाइट
माँ कामाख्या देवालय (maakamakhya.org)
नक्शा
OpenStreetMap (26.1664, 91.7055)

दर्शन और आरती का समय

पीठस्थान का स्नानसुबह 5:30
नित्य पूजासुबह 6:00
भक्तों के लिए द्वार खुलते हैंसुबह 8:00
अन्न-भोग के लिए द्वार बंददोपहर 1:00 से 2:30 तक
रात के लिए द्वार बंदशाम 5:15
आरतीशाम 7:30

मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट का "Our Program" (सामान्य दिन)। विशेष दिनों (जैसे शारदीय दुर्गा पूजा) में द्वार सुबह 9 बजे खुलते हैं और सूर्यास्त पर बंद होते हैं; अंबुबाची में तीन दिन मंदिर बंद रहता है।

स्रोत: maakamakhya.orgजाँचा: समय बदल सकते हैं; जाने से पहले आधिकारिक स्रोत देख लें।

पीठ और पूजा

कामरूप महानगर ज़िले की वेबसाइट के अनुसार गर्भगृह में चट्टान में योनि-आकार की एक दरार है, जिसकी पूजा होती है, और पहले का मंदिर नष्ट होने के बाद 1565 में कोच वंश के चिलाराय ने इसे फिर से बनवाया। वाचस्पत्यम् में उद्धृत पीठनिर्णय कहता है कि देवी यहाँ लाल पत्थर के रूप में हैं और यहाँ भैरवी, बगला, कमला, भुवनेशी, मातंगी आदि महाविद्याओं का भी वास है।

मंदिर की वेबसाइट के अनुसार मंदिर का प्रबंध बड़देउरी समाज (चार वंशानुगत परिवार) अपने चुने हुए दोलोइयों के द्वारा करता है।

अंबुबाची

मंदिर की वेबसाइट के अनुसार आषाढ़ में, लगभग 21-22 जून को, धरती माता के रूप में पूजी जाने वाली देवी अपने वार्षिक रजस्वला काल में मानी जाती हैं; इसे अंबुबाची कहते हैं और तीन दिन मंदिर के द्वार भक्तों के लिए बंद रहते हैं। असम पर्यटन के अनुसार हर जून यहाँ सप्ताह भर का अंबुबाची मेला लगता है।

मंदिर की 2026 की सूचना के अनुसार अंबुबाची की प्रवृत्ति 22 जून 2026 को रात 9:26 बजे हुई, मंदिर 23 से 25 जून तक बंद रहा, और निवृत्ति 26 जून की सुबह स्नान और नित्य पूजा के बाद हुई।

उमानंद

पीठनिर्णय यहाँ के भैरव का नाम उमानंद देता है। ब्रह्मपुत्र के बीच मयूर द्वीप (पीकॉक आइलैंड) पर शिव का उमानंद मंदिर है, जिसे कामरूप महानगर ज़िले के अनुसार 1694 ई. में राजा गदाधर सिंह के समय बनवाया गया; वहाँ केवल नाव से पहुँचते हैं। सरकारी पृष्ठ उस मंदिर को कामाख्या का भैरव नहीं कहते।

कामाख्या कैसे पहुँचें

  • मंदिर की वेबसाइट के अनुसार निकटतम रेलवे स्टेशन कामाख्या है और मुख्य स्टेशन गुवाहाटी; लोकप्रिय गोपीनाथ बरदलै अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा शहर के केंद्र से लगभग 20 किमी पश्चिम है। असम पर्यटन के अनुसार मंदिर गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से लगभग 8 किमी है।

प्रमुख त्योहार

अंबुबाची (आषाढ़, लगभग 22-26 जून)दुर्गा पूजा (पखुवा पूजा, आश्विन)मनसा पूजा (देवधनी, श्रावण)

मत-भेद: स्रोतों में अंतर

  • मंदिर की वेबसाइट के अनुसार यहाँ दुर्गा पूजा आश्विन कृष्ण नवमी से शुक्ल नवमी तक पंद्रह दिन चलती है ("पखुवा पूजा")।
  • इनक्रेडिबल इंडिया पर कामाख्या का समय (सुबह 6 से शाम 7) मंदिर की अपनी सूची से नहीं मिलता; यहाँ मंदिर की सूची दी गई है। अंबुबाची की अवधि भी एक सरकारी पृष्ठ पर चार दिन लिखी है, मंदिर तीन दिन बंद रहना बताता है।
  • कामरूप पुराने चार पीठों में भी है (हेवज्र तंत्र और कालिका पुराण), और सरकार के अनुसार मूल पीठनिर्णय कामरूप में दस पीठ गिनता था। मंदिर की वेबसाइट इसे कालिका पुराण के आधार पर "कुब्जिका पीठ" भी कहती है।
  • पीठों की गिनती ग्रंथ के अनुसार अलग है: पीठनिर्णय 51 गिनाता है, बंगाल की कुछ सूचियाँ 52, देवी भागवत (7.30) 108 स्थान देवी के नामों के साथ देता है, और पुराने तंत्र केवल चार पीठ गिनाते हैं (सरकार)।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कामाख्या शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?

पीठनिर्णय और मंदिर की वेबसाइट, दोनों के अनुसार योनि (योनि-मुद्रा)। देवी कामाख्या और भैरव उमानंद हैं।

कामाख्या मंदिर कितने बजे खुलता है?

मंदिर की वेबसाइट के अनुसार सामान्य दिनों में भक्तों के लिए द्वार सुबह 8 बजे खुलते हैं, दोपहर 1 से 2:30 बजे तक भोग के लिए बंद रहते हैं, और शाम 5:15 बजे रात के लिए बंद हो जाते हैं; आरती शाम 7:30 बजे होती है।

कामाख्या शक्तिपीठ कहाँ है?

कामाख्या शक्तिपीठ नीलाचल पहाड़ी, गुवाहाटी, कामरूप महानगर ज़िला, असम में है।

कामाख्या शक्तिपीठ में दर्शन का समय क्या है?

पीठस्थान का स्नान: सुबह 5:30; नित्य पूजा: सुबह 6:00; भक्तों के लिए द्वार खुलते हैं: सुबह 8:00; अन्न-भोग के लिए द्वार बंद: दोपहर 1:00 से 2:30 तक; रात के लिए द्वार बंद: शाम 5:15; आरती: शाम 7:30। स्रोत: maakamakhya.org, जाँचा 5 अक्टूबर 2026; जाने से पहले आधिकारिक स्रोत पर देख लें।

कामाख्या किन तीर्थ-सूचियों में है?

51 शक्तिपीठ (सूची में 51 में से 17वाँ)।

कामाख्या कैसे पहुँचें?

मंदिर की वेबसाइट के अनुसार निकटतम रेलवे स्टेशन कामाख्या है और मुख्य स्टेशन गुवाहाटी; लोकप्रिय गोपीनाथ बरदलै अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा शहर के केंद्र से लगभग 20 किमी पश्चिम है। असम पर्यटन के अनुसार मंदिर गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से लगभग 8 किमी है।

स्रोत

  1. डी. सी. सरकार, द शाक्त पीठ्स (जर्नल ऑफ़ द रॉयल एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल 1948; मोतीलाल बनारसीदास, 1973): पीठनिर्णय की तालिका पृ. 35-37, इस पीठ पर टिप्पणी पृ. 12, 48 (archive.org)
  2. वाचस्पत्यम् (तारानाथ तर्कवाचस्पति), "पीठ": तंत्रचूडामणि से उद्धृत पीठ-सूची (कोलोन डिजिटल संस्कृत कोश, sanskrit-lexicon.uni-koeln.de)
  3. माँ कामाख्या देवालय, आधिकारिक वेबसाइट (maakamakhya.org): मुखपृष्ठ (दैनिक कार्यक्रम, अंबुबाची 2026 की सूचना), मंदिर, उत्सव, प्रशासन, कैसे पहुँचें
  4. कामरूप महानगर ज़िला (kamrupmetro.assam.gov.in): कामाख्या मंदिर; उमानंद मंदिर
  5. असम पर्यटन (tourism.assam.gov.in; assamtourism.gov.in): मंदिर और तीर्थ, कामाख्या मंदिर
  6. विकिडेटा Q3629418 (Kamakhya Temple): मानचित्र के निर्देशांक

कुछ गलत लगा? गलती बताएँ