कोलकाता का कालीघाट काली मंदिर पीठनिर्णय का कालीपीठ है, जहाँ ग्रंथ के अनुसार सती के दाहिने पैर की उँगलियाँ गिरीं; देवी काली और भैरव नकुलीश हैं। भारत सरकार का पर्यटन पोर्टल इनक्रेडिबल इंडिया भी इसे 51 शक्तिपीठों में गिनता है और यहाँ के भैरव को नकुलेश्वर कहता है।
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- देवता
- काली
- परंपरा
- शाक्त
- तीर्थ-सूची
- 51 शक्तिपीठ 19/51
- स्थान
- कालीघाट, दक्षिण कोलकाता; आदि गंगा के तट पर
- राज्य
- पश्चिम बंगाल
- देश
- भारत
- नक्शा
- OpenStreetMap (22.5203, 88.3421)
दर्शन और आरती का समय
| सुबह | 5:00 से दोपहर 2:00 बजे तक |
|---|---|
| शाम | 5:00 से रात 10:30 बजे तक |
इनक्रेडिबल इंडिया (भारत सरकार, पर्यटन मंत्रालय) में दिया समय; मंदिर की अपनी कोई आधिकारिक वेबसाइट नहीं मिली। पर्व के दिनों में समय बदल सकता है।
स्रोत: incredibleindia.gov.inजाँचा: समय बदल सकते हैं; जाने से पहले आधिकारिक स्रोत देख लें।
मूर्ति और मंदिर
इनक्रेडिबल इंडिया के अनुसार देवी की मूर्ति बलुआ पत्थर की है, जिसे आत्माराम गिरि और ब्रह्मानंद गिरि नाम के संतों ने बनाया; मूर्ति की तीन आँखें, चार हाथ और सोने की निकली हुई जीभ है। आज का मंदिर लगभग 1809 में बड़िशा के सावर्ण रायचौधुरी परिवार के संरक्षण में बना, और सामने का नाटमंदिर 1835 में ज़मींदार काशीनाथ राय ने बनवाया।
पश्चिम बंगाल पर्यटन के अनुसार परिसर में नकुलेश्वर भैरव का शिवलिंग, राधा-कृष्ण का मंदिर और कुंडुपुकुर नाम का तालाब भी है।
कालीघाट कैसे पहुँचें
- पश्चिम बंगाल पर्यटन के अनुसार: निकटतम मेट्रो स्टेशन जतिन दास पार्क और कालीघाट; बड़े रेलवे स्टेशन हावड़ा और सियालदह; श्यामाप्रसाद मुखर्जी रोड पर कालीघाट स्टॉप से काली टेंपल रोड पर पैदल। हवाई अड्डा: नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, कोलकाता।
प्रमुख त्योहार
मत-भेद: स्रोतों में अंतर
- मंदिर के इतिहास पर सरकारी पृष्ठ अलग बातें कहते हैं: पश्चिम बंगाल पर्यटन मूल मंदिर का श्रेय राजा बसंत राय (प्रतापादित्य के चाचा) को देता है, जबकि इनक्रेडिबल इंडिया पहले की कुटिया जैसी देवस्थली का श्रेय राजा मानसिंह को और आज के मंदिर का सावर्ण रायचौधुरी परिवार को।
- पीठनिर्णय की सूची में "कालीघाट" नाम 45वें पीठ के लिए फिर आता है, जिसे इतिहासकार डी. सी. सरकार कटवा के पास जुरानपुर में रखते हैं; कोलकाता का कालीघाट यही 19वाँ कालीपीठ है।
- पश्चिम बंगाल पर्यटन का एक पृष्ठ 52 शक्तिपीठ गिनता है और दूसरा 51।
- पीठों की गिनती ग्रंथ के अनुसार अलग है: पीठनिर्णय 51 गिनाता है, बंगाल की कुछ सूचियाँ 52, देवी भागवत (7.30) 108 स्थान देवी के नामों के साथ देता है, और पुराने तंत्र केवल चार पीठ गिनाते हैं (सरकार)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कालीघाट शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
पीठनिर्णय के अनुसार दाहिने पैर की उँगलियाँ; देवी काली और भैरव नकुलीश (नकुलेश्वर) हैं।
कालीघाट मंदिर कितने बजे खुलता है?
इनक्रेडिबल इंडिया के अनुसार सुबह 5 बजे से दोपहर 2 बजे तक और शाम 5 बजे से रात 10:30 बजे तक। पर्व के दिनों में समय बदल सकता है।
कालीघाट शक्तिपीठ कहाँ है?
कालीघाट शक्तिपीठ कालीघाट, दक्षिण कोलकाता; आदि गंगा के तट पर, पश्चिम बंगाल में है।
कालीघाट शक्तिपीठ में दर्शन का समय क्या है?
सुबह: 5:00 से दोपहर 2:00 बजे तक; शाम: 5:00 से रात 10:30 बजे तक। स्रोत: incredibleindia.gov.in, जाँचा 5 अक्टूबर 2026; जाने से पहले आधिकारिक स्रोत पर देख लें।
कालीघाट किन तीर्थ-सूचियों में है?
51 शक्तिपीठ (सूची में 51 में से 19वाँ)।
कालीघाट कैसे पहुँचें?
पश्चिम बंगाल पर्यटन के अनुसार: निकटतम मेट्रो स्टेशन जतिन दास पार्क और कालीघाट; बड़े रेलवे स्टेशन हावड़ा और सियालदह; श्यामाप्रसाद मुखर्जी रोड पर कालीघाट स्टॉप से काली टेंपल रोड पर पैदल। हवाई अड्डा: नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, कोलकाता।
स्रोत
- डी. सी. सरकार, द शाक्त पीठ्स (जर्नल ऑफ़ द रॉयल एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल 1948; मोतीलाल बनारसीदास, 1973): पीठनिर्णय की तालिका पृ. 35-37, इस पीठ पर टिप्पणी पृ. 50 (archive.org)
- वाचस्पत्यम् (तारानाथ तर्कवाचस्पति), "पीठ": तंत्रचूडामणि से उद्धृत पीठ-सूची (कोलोन डिजिटल संस्कृत कोश, sanskrit-lexicon.uni-koeln.de)
- इनक्रेडिबल इंडिया (पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार): Kalighat Temple, incredibleindia.gov.in/en/west-bengal/kolkata/kalighat-temple (समय, 5 अक्टूबर 2026 को पढ़ा)
- पश्चिम बंगाल पर्यटन (wbtourism.gov.in): Kalighat Temple (हेरिटेज टूरिज़्म पृष्ठ), और पुराने शक्तिपीठ खंड का Kalighat पृष्ठ (26 नवंबर 2022 की वेब आर्काइव प्रति)
- विकिडेटा Q535970 (Kalighat Kali Temple): मानचित्र के निर्देशांक
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