इस काल-चक्र (अवसर्पिणी) के 24 तीर्थंकर क्रम से हैं: ऋषभदेव (आदिनाथ), अजितनाथ, संभवनाथ, अभिनंदननाथ, सुमतिनाथ, पद्मप्रभ, सुपार्श्वनाथ, चंद्रप्रभ, सुविधिनाथ (पुष्पदंत), शीतलनाथ, श्रेयांसनाथ, वासुपूज्य, विमलनाथ, अनंतनाथ, धर्मनाथ, शांतिनाथ, कुंथुनाथ, अरनाथ, मल्लिनाथ, मुनिसुव्रत, नमिनाथ, नेमिनाथ (अरिष्टनेमि), पार्श्वनाथ और महावीर (वर्धमान)। बीस तीर्थंकरों का निर्वाण सम्मेद शिखर पर हुआ; ऋषभदेव का अष्टापद (कैलास) पर, वासुपूज्य का चंपा में, नेमिनाथ का गिरनार पर और महावीर का पावा में। दोनों परंपराओं में चार तीर्थंकरों के चिह्न अलग हैं, और श्वेतांबर परंपरा उन्नीसवें तीर्थंकर मल्ली को स्त्री मानती है।
| # | नाम | लांछन (चिह्न) | जन्मस्थान | निर्वाण स्थान | स्रोत |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | ऋषभदेवआदिनाथ, वृषभनाथ | वृषभ (बैल) | अयोध्या (विनीता); कल्पसूत्र में “कोसलीय”, इक्ष्वाकु-भूमि में | श्वे.: अष्टापद; दिग.: कैलास | कल्पसूत्र §§ 204–227; हेम. 1.2, 1.6; ति.प. 4.526, 4.1185 |
| 2 | अजितनाथ | गज (हाथी) | अयोध्या (दिग.: साकेत) | सम्मेद शिखर | हेम. 1.6, 2.2, 2.6; ति.प. 4.527, 4.1186 |
| 3 | संभवनाथ | अश्व (घोड़ा) | श्रावस्ती | सम्मेद शिखर | हेम. 1.6, 3.1; ति.प. 4.528, 4.1187 |
| 4 | अभिनंदननाथ | वानर (बंदर) | अयोध्या (विनीता; दिग.: साकेत) | सम्मेद शिखर | हेम. 1.6, 3.2; ति.प. 4.529, 4.1188 |
| 5 | सुमतिनाथ | श्वे.: क्रौंच; दिग.: कोक (चकवा) | अयोध्या (विनीता; दिग.: साकेत) | सम्मेद शिखर | हेम. 1.6, 3.3; ति.प. 4.530, 4.1189 |
| 6 | पद्मप्रभ | लाल कमल (पद्म) | कौशांबी | सम्मेद शिखर | हेम. 1.6, 3.4; ति.प. 4.531, 4.1190 |
| 7 | सुपार्श्वनाथ | श्वे.: स्वस्तिक; दिग. (ति.प.): नंद्यावर्त | वाराणसी | सम्मेद शिखर | हेम. 1.6, 3.5; ति.प. 4.532, 4.1191 |
| 8 | चंद्रप्रभ | श्वे.: चंद्रमा; दिग.: अर्धचंद्र | श्वे.: चंद्रानन; दिग.: चंद्रपुरी | सम्मेद शिखर | हेम. 1.6, 3.6; ति.प. 4.533, 4.1192 |
| 9 | सुविधिनाथपुष्पदंत | मकर | काकंदी | सम्मेद शिखर | कल्पसूत्र (अंतर-काल); हेम. 1.6, 3.7; ति.प. 4.534, 4.1193 |
| 10 | शीतलनाथ | श्वे.: श्रीवत्स; दिग. (ति.प.): स्वस्तिक; बाद की दिगंबर परंपरा: कल्पवृक्ष | श्वे.: भद्रिलपुर; दिग.: भद्दलपुर | सम्मेद शिखर | हेम. 1.6, 3.8; ति.प. 4.535, 4.1194 |
| 11 | श्रेयांसनाथ | खड्गी (गैंडा) | सिंहपुरी | सम्मेद शिखर | हेम. 1.6, 4.1; ति.प. 4.536, 4.1195 |
| 12 | वासुपूज्य | महिष (भैंसा) | चंपा (चंपापुरी) | चंपा | हेम. 1.6, 4.2; ति.प. 4.537, 4.1196 |
| 13 | विमलनाथ | सूकर (वराह) | कांपिल्य | सम्मेद शिखर | हेम. 1.6, 4.3; ति.प. 4.538, 4.1197 |
| 14 | अनंतनाथअनंतजित् | श्वे.: श्येन (बाज); दिग. (ति.प.): सेही (साही) | अयोध्या | सम्मेद शिखर | हेम. 1.6, 4.4; ति.प. 4.539, 4.1198 |
| 15 | धर्मनाथ | वज्र | रत्नपुर | सम्मेद शिखर | हेम. 1.6, 4.5; ति.प. 4.540, 4.1199 |
| 16 | शांतिनाथ | मृग (हिरण) | हस्तिनापुर (श्वे.: गजपुर) | सम्मेद शिखर | हेम. 1.6, 5.5; ति.प. 4.541, 4.1200 |
| 17 | कुंथुनाथ | छाग (बकरा) | हस्तिनापुर (श्वे.: गजपुर) | सम्मेद शिखर | हेम. 1.6, 6.1; ति.प. 4.542, 4.1201 |
| 18 | अरनाथ | श्वे.: नंद्यावर्त; दिग. (ति.प.): तगर पुष्प, जिसे संपादक मत्स्य (मछली) पढ़ते हैं | हस्तिनापुर (श्वे.: गजपुर) | सम्मेद शिखर | हेम. 1.6, 6.2; ति.प. 4.543, 4.1202 |
| 19 | मल्लिनाथश्वेतांबर परंपरा में मल्ली, एक स्त्री | कलश (घट) | मिथिला | सम्मेद शिखर | हेम. 1.6, 6.6; ति.प. 4.544, 4.1203 |
| 20 | मुनिसुव्रतसुव्रत | कूर्म (कछुआ) | राजगृह | सम्मेद शिखर | हेम. 1.6, 6.7; ति.प. 4.545, 4.1204 |
| 21 | नमिनाथ | नीलकमल (नीलोत्पल) | मिथिला | सम्मेद शिखर | हेम. 1.6, 7.11; ति.प. 4.546, 4.1205 |
| 22 | नेमिनाथअरिष्टनेमि | शंख | शौरिपुर | गिरनार (ऊर्जयंत, रैवतक) | कल्पसूत्र §§ 170–183; हेम. 1.6, 8.5, 8.12; ति.प. 4.547, 4.1206 |
| 23 | पार्श्वनाथ | सर्प (फणी) | वाराणसी | सम्मेद शिखर | कल्पसूत्र §§ 149–169; हेम. 1.6, 9.3, 9.4; ति.प. 4.548, 4.1207 |
| 24 | महावीरवर्धमान, वीर | सिंह | श्वे.: कुंडग्राम; दिग.: कुंडलपुर | पावा | कल्पसूत्र §§ 2, 21, 122–123, 147; हेम. 1.6, 10.2, 10.13; ति.प. 4.549, 4.1208 |
यह सूची किन ग्रंथों से है
श्वे. = श्वेतांबर, दिग. = दिगंबर। चिह्न: श्वेतांबर, हेमचंद्र के अभिधानचिंतामणि (1.47–48) और उनके त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित्र (“हेम.”, पर्व.सर्ग, हेलेन जॉनसन का अनुवाद) के जन्म-प्रसंगों से, जहाँ हर तीर्थंकर “चिह्न से अंकित” जन्म लेते हैं; दिगंबर, यतिवृषभ की तिलोयपण्णत्ती (“ति.प.”) 4.604–605 से। जन्मस्थान: त्रिषष्टि पर्व 1, सर्ग 6, जहाँ ऋषभदेव बाद के तेईस जिनों के नगर और माता-पिता बताते हैं, और ति.प. 4.526–549। निर्वाण: हर चरित्र का मोक्ष-प्रसंग और ति.प. 4.1185–1208। ऋषभदेव, नेमिनाथ, पार्श्वनाथ और महावीर के लिए कल्पसूत्र (याकोबी का अनुवाद) भी।
मल्लिनाथ: दो परंपराएँ
श्वेतांबर परंपरा में उन्नीसवें तीर्थंकर मल्ली एक स्त्री थीं। हेमचंद्र (पर्व 6, सर्ग 6) के अनुसार रानी ने पिछले जन्म के कर्म के कारण पुत्री को जन्म दिया, “कलश से अंकित, अद्भुत उन्नीसवें अर्हत्”; जैनी के अनुसार इसका आगमिक स्रोत ज्ञाताधर्मकथा (नायाधम्मकहाओ) का आठवाँ अध्ययन है। दिगंबर परंपरा, जिसके अनुसार स्त्री को मोक्ष के लिए पुरुष रूप में जन्म लेना होता है, मल्लिनाथ को अन्य तीर्थंकरों की तरह पुरुष मानती है; जैनी इसके लिए गुणभद्र के उत्तरपुराण (पर्व 66) का हवाला देते हैं।
चिह्नों में अंतर
एम. एन. पी. तिवारी के अनुसार चिह्नों की सूची लगभग आठवीं-नौवीं सदी तक तय हो गई, और दोनों परंपराएँ केवल चार तीर्थंकरों के चिह्नों में अलग हैं: सुपार्श्वनाथ, शीतलनाथ, अनंतनाथ और अरनाथ। सुमतिनाथ और चंद्रप्रभ के चिह्नों में शब्दों का छोटा अंतर भी है।
| तीर्थंकर | श्वेतांबर (हेमचंद्र) | दिगंबर (तिलोयपण्णत्ती) | बाद की दिगंबर परंपरा |
|---|---|---|---|
| 7 सुपार्श्वनाथ | स्वस्तिक | नंद्यावर्त | स्वस्तिक (जैन कला एवं स्थापत्य) |
| 10 शीतलनाथ | श्रीवत्स | स्वस्तिक | कल्पवृक्ष (जैन कला एवं स्थापत्य); पीपल (ग्लाज़ेनाप) |
| 14 अनंतनाथ | श्येन (बाज) | सेही (साही) | भालू (ग्लाज़ेनाप, जैनी) |
| 18 अरनाथ | नंद्यावर्त | तगर पुष्प (संपादक: मत्स्य) | मत्स्य (मछली) |
पाँच निर्वाण-भूमियाँ
दोनों परंपराओं के ग्रंथ निर्वाण स्थानों पर एकमत हैं। जैनी के अनुसार सम्मेद शिखर बिहार का पारसनाथ पहाड़ी क्षेत्र है, जहाँ पार्श्वनाथ और उन्नीस अन्य जिन मुक्त हुए; बाकी चार निर्वाण-भूमियाँ हिमालय का कैलास, बिहार की चंपापुरी, सौराष्ट्र का गिरनार और आज के पटना के पास पावापुरी हैं। (पारसनाथ पहाड़ी आज झारखंड के गिरिडीह ज़िले में है।)
अयोध्या पाँच तीर्थंकरों की जन्मभूमि है: ऋषभदेव, अजितनाथ, अभिनंदननाथ, सुमतिनाथ और अनंतनाथ (हेमचंद्र; ति.प., जो इसे साकेत और अयोध्यापुरी भी कहती है)। हस्तिनापुर (गजपुर) में शांतिनाथ, कुंथुनाथ और अरनाथ, और मिथिला में मल्लिनाथ और नमिनाथ जन्मे।
परंपराओं और स्रोतों में अंतर
- मल्लिनाथ: श्वेतांबर परंपरा में स्त्री (मल्ली), दिगंबर परंपरा में पुरुष।
- चिह्न: सुपार्श्वनाथ, शीतलनाथ, अनंतनाथ और अरनाथ के चिह्न दोनों परंपराओं में अलग (ऊपर की तालिका)।
- कुल: अभिधानचिंतामणि (1.35) के अनुसार 22 तीर्थंकर इक्ष्वाकु कुल के और मुनिसुव्रत तथा नेमिनाथ हरिवंश के; तिलोयपण्णत्ती (4.550) धर्मनाथ, कुंथुनाथ और अरनाथ को कुरु वंश, महावीर को नाथ वंश और पार्श्वनाथ को उग्र वंश में रखती है।
- महावीर का विवाह: श्वेतांबर आचारांग (2.15.15) के अनुसार यशोदा से विवाह और पुत्री प्रियदर्शना; दिगंबर परंपरा में वे अविवाहित रहे (जैनी)।
- नामों के रूप: ऋषभदेव का निर्वाण अष्टापद (श्वे.) / कैलास (दिग.), महावीर का जन्म कुंडग्राम (श्वे.) / कुंडलपुर (दिग.), चंद्रप्रभ का चंद्रानन (श्वे.) / चंद्रपुरी (दिग.)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
24 तीर्थंकरों के नाम क्या हैं?
ऋषभदेव, अजितनाथ, संभवनाथ, अभिनंदननाथ, सुमतिनाथ, पद्मप्रभ, सुपार्श्वनाथ, चंद्रप्रभ, सुविधिनाथ (पुष्पदंत), शीतलनाथ, श्रेयांसनाथ, वासुपूज्य, विमलनाथ, अनंतनाथ, धर्मनाथ, शांतिनाथ, कुंथुनाथ, अरनाथ, मल्लिनाथ, मुनिसुव्रत, नमिनाथ, नेमिनाथ, पार्श्वनाथ और महावीर।
पहले और अंतिम तीर्थंकर कौन हैं?
पहले ऋषभदेव (आदिनाथ), जिनका चिह्न बैल है, और अंतिम (चौबीसवें) महावीर (वर्धमान), जिनका चिह्न सिंह है।
कितने तीर्थंकरों का निर्वाण सम्मेद शिखर पर हुआ?
बीस। बाकी चार: ऋषभदेव अष्टापद (कैलास) पर, वासुपूज्य चंपा में, नेमिनाथ गिरनार पर और महावीर पावा में।
क्या मल्लिनाथ स्त्री थीं?
श्वेतांबर परंपरा के अनुसार हाँ, मल्ली स्त्री थीं (ज्ञाताधर्मकथा 8; हेमचंद्र)। दिगंबर परंपरा उन्हें पुरुष मानती है।
स्रोत
- हेमचंद्र, त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित्र, पर्व 1–10 (हेलेन एम. जॉनसन का अनुवाद, गायकवाड़ ओरिएंटल सीरीज़; wisdomlib.org)
- हेमचंद्र, अभिधानचिंतामणि, कांड 1, श्लोक 26–49
- यतिवृषभ, तिलोयपण्णत्ती, भाग 1, सं. ए. एन. उपाध्ये और हीरालाल जैन (जीवराज जैन ग्रंथमाला, शोलापुर), 4.526–550, 4.604–605, 4.1185–1208
- कल्पसूत्र, जिन-चरित्र (हरमन याकोबी का अनुवाद, Sacred Books of the East खंड 22, 1884); आचारांग सूत्र 2.15 (उसी खंड में)
- पद्मनाभ एस. जैनी, द जैन पाथ ऑफ़ प्योरिफ़िकेशन, पृ. 11, 39–40 और टिप्पणी 93, 166 टिप्पणी 19, 206
- हेल्मुथ फ़ॉन ग्लाज़ेनाप, डेर जैनिस्मुस (बर्लिन 1925), पृ. 266–290, 491–492
- जैन कला एवं स्थापत्य, खंड 1, सं. ए. घोष (भारतीय ज्ञानपीठ, 1975), पृ. 15–17
- एम. एन. पी. तिवारी, एलिमेंट्स ऑफ़ जैन आइकोनोग्राफ़ी (वाराणसी 1983), पृ. 6
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