ज्ञान पंचमी कार्तिक शुक्ल पंचमी को श्वेतांबर जैनों का पर्व है, जिसमें ज्ञान और शास्त्रों की पूजा होती है; गुजरात में इसी दिन को सौभाग्य पंचमी और लाभ पंचमी भी कहते हैं। 2026 में यह शनिवार, 14 नवंबर को है: पंचमी तिथि 13 नवंबर रात 8:43 से 14 नवंबर रात 11:25 तक (नई दिल्ली, Drik Panchang से मिलाकर)। दिगंबर परंपरा की श्रुत पंचमी इससे अलग दिन, ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी को होती है, जब षट्खंडागम के लिखे जाने की स्मृति में शास्त्रों की पूजा होती है।
2026 में (नई दिल्ली)
- ज्ञान पंचमी
- शनिवार, 14 नवंबर 2026
- पंचमी तिथि
- 13 नवंबर रात 8:43 से 14 नवंबर रात 11:25 तक
- सूर्योदय
- 14 नवंबर सुबह 6:43
- श्रुत पंचमी (दिगंबर)
- ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी; 2026 में 19 जून को थी
तिथि के समय हमारे पंचांग से, Drik Panchang से मिलाकर (Drik: पंचमी 8:42 PM से 11:23 PM)। Drik Panchang इस दिन को लाभ पंचमी लिखता है और कहता है कि गुजरात में इसे ज्ञान पंचमी भी कहते हैं।
ज्ञान पंचमी कैसे मनाते हैं
जॉन कॉर्ट ने पाटन (उत्तर गुजरात) के श्वेतांबर जैनों में देखा कि इस दिन पहले ज्ञान-पूजा होती है और उसके बाद ही काम शुरू होता है; दीपावली के बाद दुकानों का असली खुलना भी इसी दिन होता है। बहुत से लोग आयंबिल या उपवास रखते हैं। पूजा पाँच स्थानों पर होती है, ज्ञान के पाँच प्रकारों के लिए: पुस्तकों को सीढ़ीनुमा सजाया जाता है, उन पर वासक्षेप डाला जाता है, चावल से स्वस्तिक बनते हैं और पाँच बाती की आरती होती है। प्रवचन ज्ञान पंचमी की कथाओं पर होते हैं, जो प्राकृत और संस्कृत में लगभग हज़ार वर्षों से लिखी जाती रही हैं।
पाँच प्रकार के ज्ञान तत्त्वार्थ सूत्र (1.9) गिनाता है: मति (इंद्रियों और मन से), श्रुत (शास्त्र से), अवधि, मनःपर्याय और केवल ज्ञान। जैना संस्था और लंदन के ओशवाल समाज के अनुसार इस दिन 51 खमासमणा और “ॐ ह्रीं नमो नाणस्स” का जाप भी परंपरा में है।
प्रचलित कथा: वरदत्त और गुणमंजरी
प्रचलित कथा के अनुसार सेठ की बेटी गुणमंजरी रोगी है और राजकुमार वरदत्त कुछ सीख नहीं पाता। आचार्य विजयसेन उनके पिछले जन्म बताते हैं: गुणमंजरी ने पुस्तकों का अनादर किया था, और वरदत्त ने आचार्य रहते हुए पढ़ाने से मना किया था। उपाय है ज्ञान पंचमी का व्रत, पाँच वर्ष पाँच महीने तक हर शुक्ल पंचमी को। दोनों ठीक होते हैं, दीक्षा लेते हैं और आगे मोक्ष पाते हैं।
यह रूपरेखा कॉर्ट (जो विजयलक्ष्मीसूरि के उपदेशप्रासाद, 1787, की कथा 215 को इसका स्रोत बताते हैं) और जैनसाइट पर मिलती है; कथाओं में छोटे अंतर हैं (जैनसाइट में गुणमंजरी गूँगी है और उसने अपने बच्चों की पुस्तकें नष्ट की थीं)। भंडारकर संस्थान की हस्तलिखित सूची में वरदत्त-गुणमंजरी की एक संस्कृत कथा “कार्तिक शुदि पंचमी के महातप” के विषय में दर्ज है।
दिगंबर परंपरा की श्रुत पंचमी
दिगंबर परंपरा में शास्त्र-पूजा का दिन ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी है, जिसे श्रुत पंचमी कहते हैं। इंद्रनंदि के श्रुतावतार (श्लोक 142–144) के अनुसार आचार्य भूतबलि ने षट्खंडागम रचकर उसे पुस्तक में लिखा और ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी को चतुर्विध संघ के साथ उस पुस्तक की पूजा की; तब से यह तिथि श्रुत पंचमी कहलाई और जैन आज भी इस दिन श्रुत-पूजा करते हैं। डंडस के अनुसार आचार्य धरसेन ने गिरनार की चंद्र गुफा में पुष्पदंत और भूतबलि को पढ़ाया था, और श्रुत पंचमी पर पांडुलिपियाँ निकालकर साफ़ की जाती हैं, फिर से लिखी जाती हैं और पूजी जाती हैं। जैनी इसे संभवतः पहला लिखा गया शास्त्र कहते हैं।
परंपराओं और स्रोतों में अंतर
- दिन: श्वेतांबर ज्ञान पंचमी कार्तिक शुक्ल पंचमी को, दिगंबर श्रुत पंचमी ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी को। दोनों में शास्त्रों की पूजा होती है, पर कारण और दिन अलग हैं।
- कथा: गुणमंजरी रोगी (कॉर्ट) या गूँगी (जैनसाइट); उसका दोष पुस्तकों का अनादर (कॉर्ट) या बच्चों की पुस्तकें नष्ट करना (जैनसाइट)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ज्ञान पंचमी 2026 में कब है?
शनिवार, 14 नवंबर 2026 को, कार्तिक शुक्ल पंचमी। पंचमी तिथि 13 नवंबर रात 8:43 से 14 नवंबर रात 11:25 तक है (नई दिल्ली)।
ज्ञान पंचमी और श्रुत पंचमी में क्या अंतर है?
ज्ञान पंचमी कार्तिक शुक्ल पंचमी को श्वेतांबर परंपरा में मनती है; श्रुत पंचमी ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी को दिगंबर परंपरा में, षट्खंडागम के लिखे जाने की स्मृति में (इंद्रनंदि, श्रुतावतार 142–144)।
ज्ञान पंचमी को लाभ पंचमी क्यों कहते हैं?
गुजरात में यह एक ही दिन है: Drik Panchang के अनुसार इसे सौभाग्य पंचमी, ज्ञान पंचमी और लाभ पांचम कहते हैं, और कॉर्ट के अनुसार दीपावली के बाद दुकानें असल में इसी दिन खुलती हैं।
ज्ञान पंचमी पर क्या करते हैं?
ज्ञान के पाँच प्रकारों के लिए पाँच स्थानों पर पुस्तकों की पूजा, वासक्षेप, चावल के स्वस्तिक और पाँच बाती की आरती; बहुत से लोग आयंबिल या उपवास रखते हैं (कॉर्ट)।
स्रोत
- Drik Panchang, नई दिल्ली: लाभ पंचमी 2026 और दैनिक पंचांग 14 नवंबर 2026 (20 अक्टूबर 2026 को पढ़ा)
- जॉन ई. कॉर्ट, जैन्स इन द वर्ल्ड (ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, 2001), पृ. 172–175
- उमास्वाति, तत्त्वार्थ सूत्र 1.9 (नथमल टाटिया का अनुवाद, दैट विच इज़, 1994)
- इंद्रनंदि, श्रुतावतार, श्लोक 142–146 (भारतवर्षीय अनेकांत विद्वत परिषद, पृ. 95–97)
- पॉल डंडस, द जैन्स, दूसरा संस्करण (रूटलेज, 2002), अध्याय 3; पद्मनाभ एस. जैनी, द जैन पाथ ऑफ़ प्योरिफ़िकेशन, पृ. 50, 203–204
- जैनसाइट: ज्ञान पंचमी की कथा; जैना न्यूज़लेटर, 25 अक्टूबर 2017; ओशवाल एसोसिएशन ऑफ़ द यू.के.: ज्ञान पंचमी
- एच. आर. कापड़िया, भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट की जैन पांडुलिपियों की सूची (jainqq.org/explore/018043)
- जैन तिथि दर्पण, सोनगढ़ पर आधारित “2026 Jain Calendar Special Dates” (AtmaDharma.com, PDF)
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