कार्तिक पूर्णिमा 2026 मंगलवार, 24 नवंबर को है (पूर्णिमा 23 नवंबर रात 11:43 से 24 नवंबर रात 8:24 तक, नई दिल्ली)। श्वेतांबर जैनों के लिए चातुर्मास कार्तिक चौमासी चौदस (23 नवंबर) को पूरा होता है, और कार्तिक पूर्णिमा को पालिताणा (भावनगर ज़िला, गुजरात) का शत्रुंजय पर्वत यात्रियों के लिए “फिर खुलता” है; जॉन कॉर्ट के अनुसार चातुर्मास में चढ़ाई मना नहीं, पर तीर्थ का ट्रस्ट तब सुविधाएँ नहीं देता, क्योंकि माना जाता है कि वर्षा में उगने वाले जीवों को चढ़ाई से हानि होती है। परंपरा के अनुसार इसी दिन द्राविड़ और वारिखिल्ल ने करोड़ों मुनियों के साथ शत्रुंजय पर मोक्ष पाया।
2026 में (नई दिल्ली)
- कार्तिक चौमासी चौदस
- सोमवार, 23 नवंबर
- कार्तिक पूर्णिमा
- मंगलवार, 24 नवंबर
- पूर्णिमा तिथि
- 23 नवंबर रात 11:43 से 24 नवंबर रात 8:24 तक
- कार्तिक अष्टाह्निका का अंत, कार्तिक रथयात्रा
- 24 नवंबर (Drik Panchang की जैन सूची)
तिथि के समय हमारे पंचांग से, Drik Panchang से मिलाकर (Drik: पूर्णिमा 11:42 PM से 8:23 PM)। पालिताणा में यात्रा के नियम और समय तीर्थ का ट्रस्ट तय करता है; जाने से पहले वहीं से पूछ लें।
शत्रुंजय: पुंडरीक का पर्वत
डंडस के अनुसार लगभग ग्यारहवीं सदी का श्वेतांबर ग्रंथ सारावली कहता है कि ऋषभदेव के पौत्र, भरत के पुत्र पुंडरीक, ऋषभदेव से यह सुनकर कि उन्हें वहीं मोक्ष मिलेगा, इस पर्वत पर गए; इसी से पर्वत का नाम पुंडरीकगिरि भी है। उसी परंपरा में भरत ने यहाँ मंदिर बनवाया और ऋषभदेव स्वयं यहाँ आए; एक स्तवन के अनुसार ऋषभदेव यहाँ निन्यानवे बार आए (कॉर्ट)। डंडस के अनुसार पुंडरीक की सबसे पुरानी प्रतिमा 1006 ई. की है, और आज पर्वत की व्यवस्था आणंदजी कल्याणजी पेढ़ी करती है, जो लगभग 1730 में बनी।
द्राविड़ और वारिखिल्ल की कथा
कॉर्ट ने पाटन में कार्तिक पूर्णिमा के प्रवचन में यह कथा सुनी: ऋषभदेव के दो पौत्र, द्राविड़ और वारिखिल्ल (वालिखिल्ल), युद्ध के बाद मेल करके दीक्षा लेते हैं और इसी दिन शत्रुंजय के शिखर पर पाँच करोड़ साधुओं के साथ मोक्ष पाते हैं। जैना संस्था की सामग्री में साधुओं की संख्या दस करोड़ है, और वहाँ दोनों ऋषभदेव के पुत्र जान पड़ते हैं। शत्रुंजय माहात्म्य में यह प्रसंग हमने स्वयं नहीं पढ़ा।
कॉर्ट के अनुसार यह दिन आचार्य हेमचंद्र का जन्मदिन भी है, और जो लोग यात्रा पर नहीं जा पाते वे शत्रुंजय के कपड़े पर बने चित्र (पट) की पूजा करते हैं। भारत सरकार के पर्यटन पोर्टल इनक्रेडिबल इंडिया के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा पर पालिताणा में बहुत भीड़ होती है और शिखर तक 3,750 से अधिक सीढ़ियाँ हैं।
परंपराओं और स्रोतों में अंतर
- मोक्ष पाने वाले मुनि: पाँच करोड़ (कॉर्ट) या दस करोड़ (जैना)।
- द्राविड़ और वारिखिल्ल: ऋषभदेव के पौत्र (कॉर्ट) या पुत्र (जैना की शत्रुंजय शृंखला)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शत्रुंजय यात्रा 2026 में कब से शुरू होगी?
परंपरा के अनुसार चातुर्मास के बाद कार्तिक पूर्णिमा को, 2026 में मंगलवार 24 नवंबर को। यात्रा के समय और नियम पालिताणा में तीर्थ का ट्रस्ट तय करता है।
चातुर्मास में शत्रुंजय पर क्यों नहीं चढ़ते?
कॉर्ट के अनुसार चढ़ाई मना नहीं, पर ट्रस्ट तब सुविधाएँ नहीं देता; माना जाता है कि वर्षा के महीनों में उगने वाले पौधों और जीवों को चढ़ाई से हानि होती है।
कार्तिक पूर्णिमा जैन धर्म में क्यों खास है?
श्वेतांबर परंपरा में इस दिन शत्रुंजय की यात्रा फिर खुलती है, और प्रचलित कथा के अनुसार द्राविड़ और वारिखिल्ल ने इसी दिन वहाँ मोक्ष पाया। कॉर्ट के अनुसार यह आचार्य हेमचंद्र का जन्मदिन भी है।
स्रोत
- Drik Panchang, नई दिल्ली: दैनिक पंचांग 23 और 24 नवंबर 2026; जैन त्योहार 2026 (20 अक्टूबर 2026 को पढ़ा)
- जॉन ई. कॉर्ट, जैन्स इन द वर्ल्ड (ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, 2001), पृ. 175–178
- पॉल डंडस, द जैन्स, दूसरा संस्करण (रूटलेज, 2002), अध्याय 7, “शत्रुंजय पर्वत”
- जैना न्यूज़लेटर, 4 नवंबर 2017; जैना, शत्रुंजय शृंखला
- इनक्रेडिबल इंडिया (भारत सरकार, पर्यटन मंत्रालय): पालिताणा
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