सिद्धांत

चार युग के नाम और अवधि

संक्षेप में

चार युग हैं: सत्ययुग (ग्रंथों में कृतयुग), त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग। मनुस्मृति (1.69-71) और विष्णु पुराण (1.3.12) के अनुसार इनकी अवधि क्रम से 4,000, 3,000, 2,000 और 1,000 दिव्य वर्ष है, और हर युग के पहले और बाद में उतने ही सौ वर्षों की संध्या और संध्यांश; इस तरह चारों मिलकर 12,000 दिव्य वर्ष। एक दिव्य वर्ष 360 मानव वर्षों का है (विष्णु पुराण 6.3.10), इसलिए चारों युग 43,20,000 मानव वर्ष के होते हैं (सूर्य सिद्धांत 1.15)।

#नामदिव्य वर्ष (संध्या सहित)मानव वर्षधर्म (मनुस्मृति 1.81-82)प्रधान साधना (मनुस्मृति 1.86)
1सत्ययुगकृतयुग4,800 (4,000 + संध्या 400 + संध्यांश 400)17,28,000चारों पाद पूरे; सत्य भी पूरातप
2त्रेतायुग3,600 (3,000 + 300 + 300)12,96,000तीन पादज्ञान
3द्वापरयुग2,400 (2,000 + 200 + 200)8,64,000दो पादयज्ञ
4कलियुग1,200 (1,000 + 100 + 100)4,32,000एक पाददान

दिव्य वर्ष क्या है

मनुस्मृति (1.67) के अनुसार मनुष्यों का एक वर्ष देवताओं का एक दिन-रात है: उत्तरायण उनका दिन और दक्षिणायन उनकी रात; विष्णु पुराण (1.3.10) भी यही कहता है। ऐसे 360 दिन-रात देवताओं का एक वर्ष हैं (विष्णु पुराण 6.3.10, सूर्य सिद्धांत 1.14), और 12,000 दिव्य वर्षों का एक चतुर्युग, जिसे सूर्य सिद्धांत (1.15) 43,20,000 सौर वर्ष बताता है।

संध्या और संध्यांश

हर युग के पहले उसकी संध्या आती है और बाद में संध्यांश, और दोनों उतने सौ वर्ष के होते हैं जितने हज़ार वर्ष का युग है (मनुस्मृति 1.69-70; विष्णु पुराण 1.3.13)। संध्या और संध्यांश के बीच का समय ही युग कहलाता है (विष्णु पुराण 1.3.14)। भागवत (3.11.18-20) भी यही गिनती देता है: चतुर्युग 12,000 दिव्य वर्ष, युग क्रम से 4, 3, 2 और 1 हज़ार, और संध्याओं के उसके दुगुने सौ वर्ष।

युग से बड़ी गिनतियाँ: मन्वंतर और कल्प

एक हज़ार चतुर्युग ब्रह्मा का एक दिन है और उतनी ही उनकी रात (मनुस्मृति 1.72; विष्णु पुराण 1.3.15; भागवत 3.11.22)। मनुस्मृति (1.79) के अनुसार 71 चतुर्युग का एक मन्वंतर होता है, और विष्णु पुराण (1.3.16) कहता है कि ब्रह्मा के एक दिन में चौदह मनु होते हैं।

कलियुग का आरंभ

विष्णु पुराण (4.24.113) और भागवत (12.2.33) दोनों कहते हैं कि जिस दिन श्रीकृष्ण इस लोक से गए, उसी दिन कलियुग आरंभ हुआ। दोनों यह भी कहते हैं कि कलियुग के बाद फिर कृतयुग आता है (विष्णु पुराण 4.24.115; भागवत 12.2.34)।

स्रोतों में अंतर

  • नाम: मनुस्मृति (1.69), विष्णु पुराण (1.3.15) और भागवत (3.11.18) पहले युग को कृत कहते हैं; सत्ययुग बोलचाल का नाम है। मनुस्मृति (1.81) कहती है कि कृतयुग में धर्म चारों पादों से पूरा होता है और सत्य भी।
  • मानव वर्ष: मनुस्मृति युगों की अवधि केवल दिव्य वर्षों में देती है। 360 का गुणा विष्णु पुराण (6.3.10) और सूर्य सिद्धांत (1.14) से है, और 43,20,000 की संख्या सूर्य सिद्धांत (1.15) में सीधे लिखी है।
  • कलियुग की लंबाई: विष्णु पुराण (4.24.114-115) कलियुग को 3,60,000 मानव वर्ष और 1,200 दिव्य वर्ष कहता है। 3,60,000 वर्ष संध्या और संध्यांश के बिना 1,000 दिव्य वर्षों के बराबर हैं; संध्याओं सहित 1,200 दिव्य वर्ष 4,32,000 मानव वर्ष होते हैं।
  • मन्वंतर: मनुस्मृति (1.79) 71 चतुर्युग कहती है, विष्णु पुराण (1.3.18) ‘इकहत्तर से कुछ अधिक’, और सूर्य सिद्धांत (1.18) हर मन्वंतर के अंत में कृतयुग जितनी लंबी संधि जोड़ता है।
संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 4 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चार युगों के नाम क्या हैं?

सत्ययुग (कृतयुग), त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग, इसी क्रम में (मनुस्मृति 1.86, विष्णु पुराण 1.3.15, भागवत 3.11.18)।

किस युग की अवधि कितनी है?

संध्याओं सहित सत्ययुग 4,800, त्रेता 3,600, द्वापर 2,400 और कलियुग 1,200 दिव्य वर्ष (मनुस्मृति 1.69-70)। एक दिव्य वर्ष 360 मानव वर्षों का गिनने पर ये क्रम से 17,28,000, 12,96,000, 8,64,000 और 4,32,000 मानव वर्ष होते हैं (सूर्य सिद्धांत 1.14-17)।

कलियुग कितने साल का होता है?

1,000 दिव्य वर्ष और 100-100 वर्ष की संध्या और संध्यांश, कुल 1,200 दिव्य वर्ष (मनुस्मृति 1.69-70)। मानव वर्षों में यह 4,32,000 वर्ष है। विष्णु पुराण (4.24.114) इसे 3,60,000 मानव वर्ष कहता है, जो संध्याओं के बिना 1,000 दिव्य वर्षों के बराबर है।

एक दिव्य वर्ष कितने मानव वर्षों का होता है?

360। मनुष्यों का एक वर्ष देवताओं का एक दिन-रात है (मनुस्मृति 1.67), और ऐसे 360 दिन-रात देवताओं का एक वर्ष (विष्णु पुराण 6.3.10, सूर्य सिद्धांत 1.14)।

चारों युग मिलकर कितने साल के होते हैं?

12,000 दिव्य वर्ष, जिसे चतुर्युग या देवताओं का युग कहते हैं (मनुस्मृति 1.71); मानव वर्षों में 43,20,000 (सूर्य सिद्धांत 1.15)। ऐसे एक हज़ार चतुर्युग ब्रह्मा का एक दिन हैं (मनुस्मृति 1.72)।

कलियुग कब शुरू हुआ?

विष्णु पुराण (4.24.113) और भागवत (12.2.33) के अनुसार उसी दिन, जिस दिन श्रीकृष्ण इस लोक से गए।

किस युग में कौन सा धर्म प्रधान है?

मनुस्मृति (1.86) के अनुसार सत्ययुग में तप, त्रेता में ज्ञान, द्वापर में यज्ञ और कलियुग में दान।

स्रोत

  1. मनुस्मृति 1.67-86 (संस्कृत पाठ, GRETIL)
  2. विष्णु पुराण 1.3.9-18, 4.24.107-115 और 6.3.9-11 (संस्कृत पाठ, GRETIL)
  3. भागवत पुराण 3.11.18-22 और 12.2.29-34 (संस्कृत पाठ, GRETIL)
  4. सूर्य सिद्धांत 1.13-19 (संस्कृत पाठ, GRETIL)

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