सात चिरंजीवी हैं: अश्वत्थामा, राजा बलि, वेदव्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य और परशुराम। यह सूची पद्म पुराण (सृष्टि खंड 49.7) के श्लोक ‘अश्वत्थामा बलिर्व्यासो…’ में है, जहाँ ब्रह्मा सुबह उठकर इनका स्मरण करने को कहते हैं। प्रचलित पाठ में मार्कंडेय को आठवाँ जोड़ा जाता है। हर एक के लंबे जीवन की बात रामायण, महाभारत या भागवत पुराण में अलग से आती है।
| # | नाम | कौन | लंबे जीवन की बात ग्रंथ में |
|---|---|---|---|
| 1 | अश्वत्थामा | द्रोणाचार्य के पुत्र, महाभारत युद्ध में कौरव पक्ष के योद्धा | महाभारत (सौप्तिक पर्व 10.16.10-12): उत्तरा के गर्भ पर अस्त्र चलाने पर कृष्ण का शाप कि वह तीन हज़ार वर्ष अकेला और रोगी होकर पृथ्वी पर भटकेगा। भागवत (8.13.15-16) उसे आठवें मन्वंतर के सप्तर्षियों में गिनता है। |
| 2 | राजा बलिमहाबलि | विरोचन के पुत्र, दैत्यों के राजा (भागवत 8.13.12) | भागवत (8.22.31-33): वामन तीन पग भूमि लेकर उन्हें सुतल लोक भेजते हैं और सावर्णि मन्वंतर में इंद्र होने का वर देते हैं; भागवत (5.24.18) कहता है कि वे आज भी सुतल में हैं। |
| 3 | वेदव्यासकृष्ण द्वैपायन, बादरायण | परंपरा में महाभारत के रचयिता | भागवत (8.13.15-16): आठवें मन्वंतर के सप्तर्षियों में ‘भगवान बादरायण’, जो अभी अपने-अपने आश्रम में रहते हैं। |
| 4 | हनुमान | श्रीराम के भक्त, वानर | वाल्मीकि रामायण (7.39.16-19, बड़ौदा संस्करण): हनुमान माँगते हैं कि जब तक पृथ्वी पर राम-कथा सुनें, तब तक प्राण रहें, और राम कहते हैं कि जब तक लोक रहेंगे, कथा रहेगी, और तब तक तुम्हारे प्राण। 7.98.25 में राम फिर यही कहते हैं। |
| 5 | विभीषण | रावण के भाई, लंका के राजा | वाल्मीकि रामायण (7.98.22, बड़ौदा संस्करण): राम कहते हैं, जब तक प्रजा रहेगी, तुम लंका में रहकर जीवन धारण करोगे और धर्म से प्रजा की रक्षा करोगे। |
| 6 | कृपाचार्य | महाभारत युद्ध में कौरव पक्ष के आचार्य-योद्धा; सौप्तिक पर्व (10.8.5) में रात के आक्रमण के समय अश्वत्थामा के साथ | भागवत (8.13.15-16): आठवें मन्वंतर के सप्तर्षियों में, जो अभी अपने आश्रम में रहते हैं। |
| 7 | परशुराम | जमदग्नि के पुत्र, जिन्हें भागवत (9.15.14) वासुदेव का अंश कहता है | भागवत (9.16.25-26): वे आज भी महेंद्र पर्वत पर शांत मन से रहते हैं, और अगले मन्वंतर में वेद का प्रवर्तन करेंगे। |
सात चिरंजीवियों का श्लोक
अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः ।कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरजीविनः ॥आठवें चिरंजीवी: मार्कंडेय
प्रचलित पाठ में इस श्लोक के बाद मार्कंडेय को आठवाँ गिनकर स्मरण किया जाता है; पद्म पुराण के जिस पाठ को हमने पढ़ा, उसमें यह पंक्ति नहीं है। मार्कंडेय के लंबे जीवन की बात भागवत में है: शिव उन्हें कल्प के अंत तक यश, जरा और मृत्यु से मुक्ति और तीनों कालों का ज्ञान देते हैं (12.10.36-37), और भागवत कहता है कि वे आज भी विचरते हैं (12.10.39)। भागवत (12.8.2) में लोग उन्हें ‘चिरायु’ ऋषि कहते हैं।
‘चिरंजीवी’ का अर्थ
‘चिरंजीवी’ का अर्थ है ‘चिर काल तक जीने वाला’, यानी बहुत लंबे समय तक जीवित रहने वाला। ग्रंथ हर एक के लिए अवधि अलग बताते हैं: अश्वत्थामा के लिए महाभारत तीन हज़ार वर्ष कहता है (10.16.10), हनुमान के लिए रामायण ‘जब तक राम-कथा रहे’ (7.39.18-19), मार्कंडेय के लिए भागवत ‘कल्प के अंत तक’ (12.10.36), और बलि, व्यास, कृप, अश्वत्थामा और परशुराम को भागवत अगले (आठवें) मन्वंतर में भी पद देता है (8.13.12-16, 9.16.25)।
स्रोतों में अंतर
- मार्कंडेय: प्रचलित पाठ उन्हें आठवाँ जोड़ता है, पर पद्म पुराण (सृष्टि खंड 49.7) का श्लोक सात ही गिनता है।
- श्लोक के पाठ में छोटे अंतर: ‘हनूमांश्च’ और ‘हनुमांश्च’; विकिस्रोत के पद्म पुराण में ‘चीरजीविनः’ छपा है, वाचस्पत्यम् और अलंकारमणिहार के उद्धरण में ‘चिरजीविनः’।
- अश्वत्थामा: महाभारत (10.16.10) के शाप में अवधि तीन हज़ार वर्ष है; परंपरा उन्हें कलियुग में भी जीवित मानती है।
- रामायण के श्लोक-अंक बड़ौदा संस्करण के हैं; गीता प्रेस संस्करण में उत्तरकांड के सर्गों की संख्या अलग है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सात चिरंजीवी कौन हैं?
अश्वत्थामा, राजा बलि, वेदव्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य और परशुराम (पद्म पुराण, सृष्टि खंड 49.7)। प्रचलित पाठ में मार्कंडेय आठवें हैं।
चिरंजीवी श्लोक कौन सा है?
‘अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः। कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरजीविनः॥’ यह पद्म पुराण (सृष्टि खंड 49.7) में है, जहाँ ब्रह्मा नारद को सुबह के स्मरण बताते हैं।
हनुमान जी चिरंजीवी क्यों हैं?
वाल्मीकि रामायण (7.39.16-19, बड़ौदा संस्करण) में हनुमान श्रीराम से माँगते हैं कि जब तक पृथ्वी पर राम-कथा रहे, उनके प्राण रहें, और राम यह वर देते हैं।
क्या मार्कंडेय चिरंजीवी हैं?
प्रचलित पाठ उन्हें आठवाँ चिरंजीवी मानता है। भागवत (12.10.36) में शिव उन्हें कल्प के अंत तक जरा और मृत्यु से मुक्ति का वर देते हैं। पद्म पुराण का श्लोक सात ही नाम गिनता है।
स्रोत
- पद्म पुराण, सृष्टि खंड, अध्याय 49, श्लोक 6-9 (sa.wikisource.org)
- वाचस्पत्यम्, ‘कृप’ शब्द (sa.wikisource.org), और अलंकारमणिहार, भाग 3, उल्लासालंकार (sa.wikisource.org): श्लोक के उद्धरण
- महाभारत, सौप्तिक पर्व 10.8.5 और 10.16.8-12 (भंडारकर संस्करण, GRETIL)
- वाल्मीकि रामायण, उत्तरकांड 7.39.14-19 और 7.98.21-25 (बड़ौदा संस्करण, GRETIL)
- भागवत पुराण 5.24.18, 8.13.11-17, 8.22.31-33, 9.15.14, 9.16.25-26, 12.8.2, 12.10.35-39 (संस्कृत पाठ, GRETIL)
कुछ गलत लगा? गलती बताएँ