विष्णु के दस अवतार ये हैं: मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध और कल्कि। यह क्रम वराह पुराण (4.2) के श्लोक में है। जयदेव के गीतगोविंद की दशावतार स्तुति आठवें स्थान पर बलराम को रखती है और कृष्ण को दसों रूप धरने वाला कहती है।
| # | नाम | युग (परंपरा से) | रूप | कथा |
|---|---|---|---|---|
| 1 | मत्स्य | सत्य युग | मछली | प्रलय के जल में पृथ्वी को नाव बनाकर मनु की रक्षा की (भागवत 1.3.15); जयदेव के अनुसार वेदों को बचाया |
| 2 | कूर्म | सत्य युग | कछुआ | समुद्र-मंथन में मंदराचल पर्वत को अपनी पीठ पर उठाया (भागवत 1.3.16) |
| 3 | वराह | सत्य युग | वराह (सूअर) | रसातल में डूबी पृथ्वी को ऊपर उठाया (भागवत 1.3.7) |
| 4 | नरसिंह | सत्य युग | आधा मनुष्य, आधा सिंह | प्रह्लाद के पिता, दैत्यराज हिरण्यकशिपु को नखों से चीर दिया (भागवत 1.3.18) |
| 5 | वामन | त्रेता युग | बौने ब्राह्मण बालक | राजा बलि के यज्ञ में तीन पग भूमि माँगकर तीनों लोक लौटाए (भागवत 1.3.19) |
| 6 | परशुरामभृगुपति, जामदग्न्य | त्रेता युग | फरसाधारी ब्राह्मण | जमदग्नि और रेणुका के पुत्र; ब्राह्मण-द्रोही राजाओं से इक्कीस बार पृथ्वी खाली की (भागवत 1.3.20, 9.15) |
| 7 | रामदाशरथि राम | त्रेता युग | अयोध्या के राजकुमार | रावण का वध और धर्म के अनुसार राज्य; उनके राज्य में त्रेता सत्य युग जैसा हो गया (भागवत 9.10.52) |
| 8 | कृष्णगीतगोविंद में इस स्थान पर बलराम | द्वापर युग | यदुवंशी, वासुदेव-देवकी के पुत्र | कंस का वध, कुरुक्षेत्र में अर्जुन को गीता का उपदेश; भागवत (1.3.28) उन्हें स्वयं भगवान कहता है |
| 9 | बुद्धकुछ परंपराओं में इस स्थान पर बलराम | कलि युग | उपदेशक | कलियुग आरंभ होने पर कीकट देश में अंजन के पुत्र के रूप में (भागवत 1.3.24); जयदेव के अनुसार करुणा से यज्ञ में पशु-हिंसा की निंदा की |
| 10 | कल्कि | कलियुग के अंत में | घोड़े पर सवार, हाथ में तलवार | शम्भल गाँव में विष्णुयश के घर जन्म लेकर देवदत्त घोड़े पर अधर्मी शासकों का अंत करेंगे (भागवत 1.3.25, 12.2.18-20) |
दशावतार की सूची कहाँ है
वराह पुराण (4.2) में पृथ्वी के प्रश्न पर वराह भगवान दस मूर्तियाँ गिनाते हैं: मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, राम, राम, कृष्ण, बुद्ध और कल्कि। श्लोक में दो बार ‘राम’ है; क्रम से पहला परशुराम और दूसरा दशरथ-पुत्र राम है।
जयदेव के गीतगोविंद (सर्ग 1, पहली अष्टपदी ‘प्रलय पयोधि जले’) में हर पद ‘केशव धृत … जय जगदीश हरे’ से समाप्त होता है। इसके दस रूप हैं: मीन, कच्छप, शूकर, नरहरि, वामन, भृगुपति (परशुराम), राम, हलधर (बलराम), बुद्ध और कल्कि। अगला श्लोक दसों रूप धरने वाले कृष्ण को नमस्कार करता है।
भागवत के 22 अवतार
भागवत पुराण (1.3.6-25) बाईस अवतार गिनाता है: सनकादि कुमार, वराह, नारद, नर-नारायण, कपिल, दत्तात्रेय, यज्ञ, ऋषभ, पृथु, मत्स्य, कूर्म, धन्वंतरि, मोहिनी, नरसिंह, वामन, परशुराम, व्यास, राम, बलराम, कृष्ण, बुद्ध और कल्कि। फिर कहता है कि हरि के अवतार असंख्य हैं (1.3.26) और कृष्ण स्वयं भगवान हैं (1.3.28)।
अवतार और युग
युग वाला स्तंभ परंपरा की सामान्य मान्यता है: पहले चार सत्य युग में, वामन, परशुराम और राम त्रेता में, कृष्ण द्वापर में, और बुद्ध व कल्कि कलियुग में। भागवत इनमें से कुछ को स्वयं बताता है: राम के राज्य में त्रेता (9.10.52), कृष्ण के जाने के दिन कलियुग का आरंभ (12.2.33), बुद्ध कलियुग आरंभ होने पर (1.3.24) और कल्कि युग-संधि पर (1.3.25)।
स्रोतों में अंतर
- आठवाँ और नौवाँ स्थान: वराह पुराण (4.2) में कृष्ण और बुद्ध हैं, जो उत्तर भारत में सबसे प्रचलित है; गीतगोविंद में बलराम और बुद्ध (कृष्ण को सबका मूल मानकर); दक्षिण भारत की कई परंपराओं में बलराम और कृष्ण, बुद्ध के बिना।
- क्षेत्रीय परंपराएँ: महाराष्ट्र के वारकरी संप्रदाय में नौवें स्थान पर विठोबा, और ओडिशा के कुछ ग्रंथों में जगन्नाथ माने गए हैं।
- संख्या: दस की सूची सबसे प्रचलित है, पर भागवत (1.3) बाईस अवतार गिनाकर उन्हें असंख्य कहता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विष्णु के दस अवतारों के नाम क्रम से क्या हैं?
मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध और कल्कि (वराह पुराण 4.2)।
क्या बुद्ध विष्णु के अवतार हैं?
भागवत (1.3.24), वराह पुराण (4.2) और गीतगोविंद बुद्ध को अवतार गिनते हैं। कुछ परंपराएँ उनकी जगह बलराम को रखती हैं।
कल्कि अवतार कब होगा?
भागवत (1.3.25) के अनुसार कलियुग के अंत में, युग-संधि पर। भागवत इसके लिए कोई कैलेंडर तिथि नहीं देता।
विष्णु के कुल कितने अवतार हैं?
दस प्रमुख अवतार सबसे प्रचलित गिनती है। भागवत पुराण बाईस अवतारों के नाम लेकर कहता है कि उनके अवतार असंख्य हैं (1.3.26)।
दशावतार में कृष्ण किस स्थान पर हैं?
वराह पुराण की सूची में आठवें। गीतगोविंद में आठवें स्थान पर बलराम हैं और कृष्ण को दसों अवतारों का मूल कहा गया है।
स्रोत
- वराह पुराण 4.2 (संस्कृत पाठ, संस्कृत विकिस्रोत से लिप्यंतरित, archive.org)
- जयदेव, गीतगोविंद, सर्ग 1, दशावतार अष्टपदी (संस्कृत पाठ, GRETIL)
- भागवत पुराण 1.3.6-28, 9.10.52, 9.15.11-14, 12.2.18-20 और 12.2.33 (संस्कृत पाठ, GRETIL); नरसिंह-प्रह्लाद कथा स्कंध 7 में, कृष्ण-कथा स्कंध 10 में
- दशावतार पर विकिपीडिया का लेख: क्षेत्रीय सूचियाँ और युगों का क्रम
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