बल्लालेश्वर मंदिर

गणेश, बल्लालेश्वर रूप मेंपाली, महाराष्ट्र

अन्य नाम: बल्लाळेश्वर, बल्लाल विनायक, पाली के गणपति

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 6 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ
बल्लालेश्वर मंदिर: अष्टविनायक 3/8, गणेश, बल्लालेश्वर रूप में, पाली, महाराष्ट्र
संक्षेप में

पाली का बल्लालेश्वर मंदिर महाराष्ट्र के रायगड ज़िले में गणेश का मंदिर है, और अष्टविनायक यात्रा का तीसरा पड़ाव। आठों में यही एक है जिसका नाम एक भक्त, बालक बल्लाल, के नाम पर है। मंदिर सुबह 5 से रात 10:30 बजे तक खुला रहता है (मंदिर ट्रस्ट)।

देवता
गणेश, बल्लालेश्वर रूप में
तीर्थ-सूची
अष्टविनायक 3/8
स्थान
पाली, सुधागड तालुका, रायगड ज़िला
राज्य
महाराष्ट्र
देश
भारत
आधिकारिक वेबसाइट
श्री बल्लाळेश्वर देवस्थान, पाली (shreeballaleshwarpali.org)
नक्शा
OpenStreetMap (18.5356, 73.2241)

दर्शन और आरती का समय

दर्शन (बल्लालेश्वर और धुंडी विनायक)सुबह 5 से रात 10:30
आरतीरात 8 बजे
गर्भगृह में भक्तों की अपनी पूजा (पुजारी द्वारा)सुबह 5:30 से दोपहर 12
प्रसाद भोजनसुबह 11 से दोपहर 2:30

ट्रस्ट के अनुसार रात 10:30 के बाद मंदिर नहीं खोला जाता। हर चतुर्थी की शाम पंचामृत स्नान, पोशाक, नैवेद्य, आरती और पालकी होती है।

स्रोत: shreeballaleshwarpali.orgजाँचा: समय बदल सकते हैं; जाने से पहले आधिकारिक स्रोत देख लें।

अष्टविनायक यात्रा में

अष्टविनायक महाराष्ट्र के आठ गणपति मंदिर हैं। महाराष्ट्र पर्यटन के अनुसार यात्रा मोरगाँव से शुरू होकर मोरगाँव पर ही पूरी होती है: मोरगाँव, सिद्धटेक, पाली, महड, थेऊर, लेण्याद्री, ओझर, रांजणगाँव और फिर मोरगाँव। पाली तीसरा पड़ाव है। परंपरा आठों मूर्तियों को स्वयंभू मानती है, यानी प्राकृतिक रूप में मिलीं, गढ़ी नहीं गईं (महाराष्ट्र पर्यटन का पत्रक)।

बल्लाल की कथा (परंपरा के अनुसार)

मंदिर ट्रस्ट यह कथा देता है: पल्लीपुर के वणिक कल्याण सेठ और इंदुमती का पुत्र बल्लाल एक पत्थर को गणेश मानकर पूजता था। पिता ने उसकी पूजा तोड़ दी, उसे पीटा और पेड़ से बाँध दिया। गणेश ने उसे छुड़ाया और उसी शिला में "बल्लाल विनायक" होकर रह गए; यही बल्लालेश्वर हैं। पिता ने जो पत्थर फेंका था, वह धुंडी विनायक के रूप में पूजा जाता है, जो पश्चिममुखी है, और परंपरा है कि पहले धुंडी विनायक के दर्शन किए जाएँ।

ट्रस्ट इस कथा के लिए गणेश पुराण (उपासना खंड, अध्याय 22-23) और मुद्गल पुराण (खंड 8, अध्याय 37-40) का नाम देता है; हमने ये अध्याय स्वयं नहीं देखे।

इतिहास

मंदिर ट्रस्ट के अनुसार चिमाजी अप्पा और नानासाहेब पेशवा मई 1740 में पाली में ठहरे; पत्थर के मंदिर का काम 1751 से लगभग 1770 तक चला, जिसे नानासाहेब ने बाबूराव फडणीस को सौंपा और जिसे बाबूराव और उनके पुत्र मोरोबा ने पूरा किया। सभामंडप 1902 से 1908 में कृष्णाजी नारायण उर्फ़ भाऊ रिंगे ने बनवाया, और 1910-11 की आग के बाद 1929 से 1932 में मरम्मत हुई। रायगड ज़िले और कोलाबा गज़ेटियर के अनुसार मंदिर में वसई से लाया गया पुर्तगाली घंटा लगा है, जिसे चिमाजी अप्पा लाए थे।

महाराष्ट्र पर्यटन के अनुसार मंदिर पूर्वमुखी है और "श्री" अक्षर के आकार में बना है; मूर्ति की सूँड बाईं ओर है और आँखों और नाभि में हीरे जड़े हैं।

बल्लालेश्वर कैसे पहुँचें

  • महाराष्ट्र पर्यटन के अनुसार पाली मुंबई से लगभग 110 किमी (राष्ट्रीय राजमार्ग 66, नागोठणे होकर) और पुणे से लगभग 120 किमी (पौड-मुळशी होकर) है; निकटतम रेलवे स्टेशन रोहा लगभग 28 किमी है।

प्रमुख त्योहार

भाद्रपद शुक्ल प्रतिपदा से पंचमी (गणेश उत्सव)माघ शुक्ल प्रतिपदा से पंचमी (माघी उत्सव, सबसे बड़ा मेला)

मत-भेद: स्रोतों में अंतर

  • पत्थर का मंदिर किसने बनवाया: ट्रस्ट बाबूराव और मोरोबा फडणीस लिखता है; महाराष्ट्र पर्यटन का पत्रक नाना फडणवीस; उसका वेबपेज और रायगड ज़िला केवल "श्री फडणीस"। मूल मंदिर का समय: रायगड ज़िला और पत्रक 1640, वेबपेज लकड़ी का मंदिर ग्यारहवीं सदी।
  • कोलाबा गज़ेटियर (1964) लिखता है कि गणपति की मूर्ति मुरुड से पाली लाई गई थी, जबकि परंपरा मूर्ति को स्वयंभू मानती है। दूरी: महाराष्ट्र पर्यटन का वेबपेज मुंबई 110 और पुणे 120 किमी देता है, उसका पत्रक 68 और 89 किमी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किस अष्टविनायक का नाम एक भक्त के नाम पर है?

पाली के बल्लालेश्वर, जो बालक भक्त बल्लाल के नाम पर हैं।

पाली का बल्लालेश्वर मंदिर कब खुलता है?

मंदिर ट्रस्ट के अनुसार सुबह 5 से रात 10:30 बजे तक; आरती रात 8 बजे।

बल्लालेश्वर मंदिर कहाँ है?

बल्लालेश्वर मंदिर पाली, सुधागड तालुका, रायगड ज़िला, महाराष्ट्र में है।

बल्लालेश्वर मंदिर में दर्शन का समय क्या है?

दर्शन (बल्लालेश्वर और धुंडी विनायक): सुबह 5 से रात 10:30; आरती: रात 8 बजे; गर्भगृह में भक्तों की अपनी पूजा (पुजारी द्वारा): सुबह 5:30 से दोपहर 12; प्रसाद भोजन: सुबह 11 से दोपहर 2:30। स्रोत: shreeballaleshwarpali.org, जाँचा 5 अक्टूबर 2026; जाने से पहले आधिकारिक स्रोत पर देख लें।

बल्लालेश्वर किन तीर्थ-सूचियों में है?

अष्टविनायक (सूची में 8 में से 3वाँ)।

बल्लालेश्वर कैसे पहुँचें?

महाराष्ट्र पर्यटन के अनुसार पाली मुंबई से लगभग 110 किमी (राष्ट्रीय राजमार्ग 66, नागोठणे होकर) और पुणे से लगभग 120 किमी (पौड-मुळशी होकर) है; निकटतम रेलवे स्टेशन रोहा लगभग 28 किमी है।

स्रोत

  1. श्री बल्लाळेश्वर देवस्थान, पाली: मंदिर के उपक्रम; पौराणिक कथा; हमारा इतिहास; उत्सव: https://www.shreeballaleshwarpali.org/mr/temple-activities ; https://www.shreeballaleshwarpali.org/mr/mythical-story ; https://www.shreeballaleshwarpali.org/mr/our-history ; https://www.shreeballaleshwarpali.org/mr/festivals
  2. महाराष्ट्र पर्यटन: पाली: https://maharashtratourism.gov.in/ashtavinayak/pali/
  3. महाराष्ट्र पर्यटन विभाग, पत्रक "A divine journey: Ashtavinayak pilgrimage in Maharashtra": https://maharashtratourism.gov.in/wp-content/uploads/2024/07/MH-Leaflet-Ashta-Vinayak-Slides.pdf
  4. ज़िला रायगड: रायगड के धार्मिक स्थल: https://raigad.gov.in/en/tourist-place/religious-places-in-raigad/
  5. महाराष्ट्र राज्य गज़ेटियर, कोलाबा ज़िला, 1964: पाली: https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/KOLABA/places_Pali.html
  6. स्थान के निर्देशांक: Wikidata (Q13119166), CC0

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