मोरगाँव का मोरेश्वर (मयूरेश्वर) मंदिर महाराष्ट्र के पुणे ज़िले में गणेश का मंदिर है, और अष्टविनायक यात्रा यहीं से शुरू होकर यहीं पूरी होती है। परंपरा के अनुसार यहाँ गणेश ने मोर पर सवार होकर सिंधु असुर का वध किया, इसलिए वे मयूरेश्वर कहलाए। मंदिर का प्रबंध चिंचवड देवस्थान ट्रस्ट करता है।
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- तीर्थ-सूची
- अष्टविनायक 1/8
- स्थान
- मोरगाँव, कऱ्हा नदी के किनारे, बारामती तालुका, पुणे ज़िला
- राज्य
- महाराष्ट्र
- देश
- भारत
- आधिकारिक वेबसाइट
- चिंचवड देवस्थान ट्रस्ट: श्री क्षेत्र मोरगाँव (morgaon.chinchwaddeosthan.org)
- नक्शा
- OpenStreetMap (18.2761, 74.3214)
दर्शन और आरती का समय
| काकड़ आरती | सुबह 5 |
|---|---|
| प्रक्षाल पूजा | सुबह 5:30 |
| पंचोपचार पूजा, नैवेद्य, धूपारती | सुबह 7 |
| महापूजा, महानैवेद्य | दोपहर 12 |
| प्रक्षाल पूजा और पोशाक | दोपहर 3 |
| धूपारती, आवरण देवताओं की आरती | रात 8 |
| महा आरती, मंत्रपुष्प | रात 8:30 |
| शेजारती | रात 10:30 |
ट्रस्ट दैनिक पूजा का क्रम देता है, दर्शन की अलग समय-सीमा नहीं। ट्रस्ट के अनुसार दोपहर 12 से 2 बजे तक महाप्रसाद मिलता है।
स्रोत: morgaon.chinchwaddeosthan.orgजाँचा: समय बदल सकते हैं; जाने से पहले आधिकारिक स्रोत देख लें।
अष्टविनायक यात्रा में
अष्टविनायक महाराष्ट्र के आठ गणपति मंदिर हैं। महाराष्ट्र पर्यटन के अनुसार यात्रा मोरगाँव से शुरू होकर मोरगाँव पर ही पूरी होती है: मोरगाँव, सिद्धटेक, पाली, महड, थेऊर, लेण्याद्री, ओझर, रांजणगाँव और फिर मोरगाँव। मोरगाँव पहला पड़ाव है, और यात्रा यहीं लौटकर पूरी होती है। परंपरा आठों मूर्तियों को स्वयंभू मानती है, यानी प्राकृतिक रूप में मिलीं, गढ़ी नहीं गईं (महाराष्ट्र पर्यटन का पत्रक)।
कथा (परंपरा के अनुसार)
मंदिर ट्रस्ट यह कथा देता है: त्रेता युग में सिंधु और कमलासुर असुरों ने देवताओं को बंदी बना लिया था। कश्यप ऋषि की पत्नी के गर्भ से एक मोर जन्मा; उस पर सवार होकर गणेश ने सिंधु और कमलासुर का वध किया, और पाँच देवताओं (पंचदेव) ने उन्हें मयूरेश्वर नाम देकर भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को यहाँ स्थापित किया। ट्रस्ट के अनुसार मुद्गल पुराण में इस क्षेत्र का वर्णन है; हमने वह अध्याय स्वयं नहीं देखा।
ट्रस्ट के अनुसार आज की मूर्ति मूल मूर्ति नहीं है; परंपरा कहती है कि मूल मूर्ति उसके पीछे अदृश्य रूप में है।
मंदिर
ट्रस्ट के अनुसार मंदिर लगभग 50 फ़ुट ऊँचा है, चारों कोनों पर मीनार जैसे स्तंभ हैं, और गणेश के सामने नंदी बैठे हैं; मंदिर में मुद्गल पुराण के गणेश के आठ रूपों की मूर्तियाँ भी हैं। महाराष्ट्र पर्यटन के अनुसार मूर्ति पूर्वमुखी है, और पत्रक के अनुसार सूँड बाईं ओर है। ट्रस्ट की परंपरा है कि समर्थ रामदास ने "सुखकर्ता दुःखहर्ता" आरती मोरगाँव में रची।
मोरेश्वर कैसे पहुँचें
- महाराष्ट्र पर्यटन के अनुसार मोरगाँव पुणे से सड़क से लगभग 80 किमी है, और पुणे के स्वारगेट से बसें जाती हैं; निकटतम रेलवे स्टेशन जेजुरी लगभग 17 किमी और पुणे हवाई अड्डा लगभग 80 किमी है।
प्रमुख त्योहार
मत-भेद: स्रोतों में अंतर
- मोरेश्वर के साथ की देवियाँ: ट्रस्ट बाईं ओर सिद्धि और दाईं ओर बुद्धि लिखता है, महाराष्ट्र पर्यटन का पत्रक भी सिद्धि और बुद्धि, पर उसी विभाग का वेबपेज ऋद्धि और सिद्धि।
- पुणे से दूरी: महाराष्ट्र पर्यटन का वेबपेज लगभग 80 किमी देता है, उसका पत्रक सड़क से 66 किमी।
- यात्रा का क्रम: महाराष्ट्र पर्यटन मोरगाँव, सिद्धटेक, पाली, महड, थेऊर, लेण्याद्री, ओझर, रांजणगाँव और फिर मोरगाँव लिखता है। रांजणगाँव ट्रस्ट की पुरानी वेबसाइट (2019 की संग्रहीत प्रति) सिद्धटेक को अंत में रखती है: मोरगाँव, पाली, महड, थेऊर, लेण्याद्री, ओझर, रांजणगाँव, सिद्धटेक और फिर मोरगाँव।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अष्टविनायक यात्रा कहाँ से शुरू होती है?
मोरगाँव (पुणे ज़िला) के मोरेश्वर मंदिर से, और यात्रा यहीं लौटकर पूरी होती है (महाराष्ट्र पर्यटन)।
मोरगाँव के गणपति को मयूरेश्वर क्यों कहते हैं?
परंपरा के अनुसार गणेश ने यहाँ मोर (मयूर) पर सवार होकर सिंधु असुर का वध किया, इसलिए देवताओं ने उन्हें मयूरेश्वर कहा (मंदिर ट्रस्ट)।
मोरेश्वर मंदिर में दर्शन का समय क्या है?
काकड़ आरती: सुबह 5; प्रक्षाल पूजा: सुबह 5:30; पंचोपचार पूजा, नैवेद्य, धूपारती: सुबह 7; महापूजा, महानैवेद्य: दोपहर 12; प्रक्षाल पूजा और पोशाक: दोपहर 3; धूपारती, आवरण देवताओं की आरती: रात 8; महा आरती, मंत्रपुष्प: रात 8:30; शेजारती: रात 10:30। स्रोत: morgaon.chinchwaddeosthan.org, जाँचा 5 अक्टूबर 2026; जाने से पहले आधिकारिक स्रोत पर देख लें।
मोरेश्वर किन तीर्थ-सूचियों में है?
अष्टविनायक (सूची में 8 में से 1वाँ)।
मोरेश्वर कैसे पहुँचें?
महाराष्ट्र पर्यटन के अनुसार मोरगाँव पुणे से सड़क से लगभग 80 किमी है, और पुणे के स्वारगेट से बसें जाती हैं; निकटतम रेलवे स्टेशन जेजुरी लगभग 17 किमी और पुणे हवाई अड्डा लगभग 80 किमी है।
स्रोत
- चिंचवड देवस्थान ट्रस्ट, मोरगाँव: मुख्य पृष्ठ (दैनिक कार्यक्रम); श्री मयूरेश्वर; श्री क्षेत्र मोरगाँव; मंदिर के बारे में; उत्सव: https://morgaon.chinchwaddeosthan.org/morgaon/?lang=en ; https://morgaon.chinchwaddeosthan.org/sri-mayuresvara/?lang=en ; https://morgaon.chinchwaddeosthan.org/sri-k%e1%b9%a3etra-morgaon/?lang=en ; https://morgaon.chinchwaddeosthan.org/festivals/?lang=en
- चिंचवड देवस्थान ट्रस्ट (मोरगाँव, थेऊर और सिद्धटेक का प्रबंध): https://chinchwaddeosthan.org/trust/?lang=en
- महाराष्ट्र पर्यटन: मोरगाँव: https://maharashtratourism.gov.in/ashtavinayak/morgaon/
- महाराष्ट्र पर्यटन विभाग, पत्रक "A divine journey: Ashtavinayak pilgrimage in Maharashtra": https://maharashtratourism.gov.in/wp-content/uploads/2024/07/MH-Leaflet-Ashta-Vinayak-Slides.pdf
- बॉम्बे प्रेसिडेंसी गज़ेटियर, पूना, 1885: मोरगाँव: https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Poona%20District/places_m.html
- श्री क्षेत्र रांजणगाँव गणपति देवस्थान ट्रस्ट की पुरानी वेबसाइट, संग्रहीत प्रतियाँ (Wayback Machine): https://web.archive.org/web/20191016124413/http://ranjangaonmahaganpati.org/historicalBackground.aspx ; https://web.archive.org/web/20191016121318/http://ranjangaonmahaganpati.org/aboutTemple.aspx
- स्थान के निर्देशांक: Wikidata (Q6912006), CC0
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