अष्टविनायक महाराष्ट्र के आठ गणपति मंदिर हैं, जिनकी यात्रा इस क्रम में होती है: मोरगाँव के मोरेश्वर, सिद्धटेक के सिद्धिविनायक, पाली के बल्लालेश्वर, महड के वरदविनायक, थेऊर के चिंतामणि, लेण्याद्री के गिरिजात्मज, ओझर के विघ्नेश्वर और रांजणगाँव के महागणपति; यात्रा फिर मोरगाँव लौटकर पूरी होती है।
| # | नाम | स्थान | ज़िला |
|---|---|---|---|
| 1 | मोरेश्वरमयूरेश्वर, मोर पर सवार गणपति | मोरगाँव | पुणे |
| 2 | सिद्धिविनायक | सिद्धटेक, भीमा नदी के तट पर | अहिल्यानगर (पहले अहमदनगर) |
| 3 | बल्लालेश्वरभक्त बल्लाल के नाम पर | पाली | रायगड |
| 4 | वरदविनायक | महड, खोपोली के पास | रायगड |
| 5 | चिंतामणि | थेऊर | पुणे |
| 6 | गिरिजात्मजप्राचीन बौद्ध शैल-गुफाओं में | लेण्याद्री, जुन्नर के पास | पुणे |
| 7 | विघ्नेश्वर | ओझर | पुणे |
| 8 | महागणपति | रांजणगाँव | पुणे |
इन तीर्थों को नक्शे पर देखेंहर नाम पर उसका अपना पन्ना है: स्थान, देवता, कथा और स्रोत
यात्रा का क्रम
महाराष्ट्र पर्यटन के अनुसार अष्टविनायक यात्रा मोरगाँव से शुरू होकर मोरगाँव पर ही पूरी होती है। सिद्धटेक दूसरा पड़ाव है, पाली तीसरा, महड चौथा, थेऊर पाँचवाँ और लेण्याद्री छठा; रांजणगाँव यात्रा का अंतिम मंदिर है, जिसके बाद यात्री मोरगाँव लौटते हैं।
आठ में से पाँच मंदिर पुणे ज़िले में हैं, दो रायगड में और एक अहिल्यानगर में। महाराष्ट्र सरकार के 10 अक्टूबर 2024 के शासन निर्णय (अष्टविनायक मंदिरों के जीर्णोद्धार का विकास आराखडा) में भी मंदिर इन्हीं ज़िलों में गिनाए गए हैं।
स्वयंभू मूर्तियाँ
महाराष्ट्र पर्यटन के पत्रक के अनुसार परंपरा आठों मंदिरों की मूर्तियों को स्वयंभू मानती है, यानी प्राकृतिक रूप में मिलीं, गढ़ी नहीं गईं। लेण्याद्री का मंदिर एक प्राचीन बौद्ध शैल-गुफा समूह के भीतर है, और पाली का बल्लालेश्वर अकेला ऐसा अष्टविनायक है जिसका नाम एक भक्त (बल्लाल) के नाम पर है।
स्रोतों में अंतर
- मोरगाँव के मोरेश्वर के साथ की देवियाँ: महाराष्ट्र पर्यटन का वेबपेज ऋद्धि और सिद्धि लिखता है, जबकि उसी विभाग का पत्रक सिद्धि और बुद्धि।
- सिद्धटेक का ज़िला: महाराष्ट्र पर्यटन के पृष्ठ पुराना नाम अहमदनगर लिखते हैं; 2024 का शासन निर्णय नया नाम अहिल्यानगर।
- वरदविनायक का महड गाँव खोपोली के पास है (महाराष्ट्र पर्यटन के पत्रक में निकटतम स्टेशन खोपोली, लगभग 7 किमी); इसे रायगड ज़िले के महाड नगर से न मिलाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अष्टविनायक के 8 नाम क्या हैं?
मोरेश्वर (मोरगाँव), सिद्धिविनायक (सिद्धटेक), बल्लालेश्वर (पाली), वरदविनायक (महड), चिंतामणि (थेऊर), गिरिजात्मज (लेण्याद्री), विघ्नेश्वर (ओझर) और महागणपति (रांजणगाँव)।
अष्टविनायक यात्रा कहाँ से शुरू होती है?
मोरगाँव (पुणे ज़िला) के मोरेश्वर मंदिर से; यात्रा वहीं लौटकर पूरी होती है (महाराष्ट्र पर्यटन)।
क्या मुंबई का सिद्धिविनायक मंदिर अष्टविनायक में है?
नहीं। अष्टविनायक का सिद्धिविनायक अहिल्यानगर ज़िले के सिद्धटेक में, भीमा नदी के तट पर है।
अष्टविनायक मंदिर किन ज़िलों में हैं?
पुणे में पाँच (मोरगाँव, थेऊर, लेण्याद्री, ओझर, रांजणगाँव), रायगड में दो (पाली, महड) और अहिल्यानगर में एक (सिद्धटेक)।
स्रोत
- महाराष्ट्र पर्यटन विभाग (maharashtratourism.gov.in): अष्टविनायक के मंदिर-पृष्ठ और "Ashtavinayak pilgrimage in Maharashtra" पत्रक
- महाराष्ट्र शासन, नियोजन विभाग, शासन निर्णय 10 अक्टूबर 2024: अष्टविनायक गणपती मंदिरांचा जीर्णोद्धार विकास आराखडा (archive.org प्रति)
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