व्रत और पर्व

काली पूजा 2026 कब है: 8 नवंबर

रविवार, 8 नवंबर 2026

कार्तिक अमावस्या की रात, निशीथ काल में

18 दिन बाद
दीपान्विता अमावस्या की रात: घर के द्वार पर जलते दीयों की कतार, रंगोली, गेंदे की मालाएँ और कलश
चित्र: AI से बनाया गया

काली पूजा मुहूर्त

निशीथ काल (काली पूजा)8 नवंबर की रात का आठवाँ मुहूर्त
11:39 PM–12:31 AM (9 नव॰)
सूर्यास्त
5:31 PM
अमावस्या तिथि
11:29 AM से 12:33 PM (9 नव॰) तक

निशीथ काल आधी रात के बाद 9 नव॰ में जाता है, पर पूजा 8 नवंबर की रात की ही है।

पंडालों और मंदिरों में पूजा का समय पूजा समिति या पुरोहित तय करते हैं, और पूजा प्रायः देर रात तक चलती है।

रविवार, 8 नवंबर 2026 के लिए, भारतीय मानक समय में, चुने हुए शहर के सूर्योदय, सूर्यास्त और ग्रह-स्थिति से। अलग-अलग पंचांगों में 1–2 मिनट का अंतर सामान्य है। गणना कैसे होती है

संक्षेप में

काली पूजा 2026 में 8 नवंबर, रविवार की रात है। Drik Panchang के अनुसार काली पूजा आधी रात के निशीथ काल में होती है, जब अमावस्या तिथि हो। अमावस्या 8 नवंबर को 11:29 AM से 9 नवंबर को 12:33 PM तक है, इसलिए हर शहर में पूजा 8 नवंबर की रात है, उसी दिन जब बाकी भारत में दीपावली की लक्ष्मी पूजा होती है। कोलकाता में निशीथ काल 10:55 से 11:46 PM तक है; नई दिल्ली में यह 11:39 PM से आधी रात के बाद 12:31 AM तक है, और यह भी 8 नवंबर की ही रात है। अपने शहर का समय नीचे देखें।

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 7 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ

शहर-वार समय: निशीथ काल

अपने शहर पर क्लिक करके उसका पूरा मुहूर्त, पास के शहर और प्रश्न देखें।

शहरनिशीथ काल
नई दिल्ली11:39 PM–12:31 AM (9 नव॰)
कोलकाता10:55–11:46 PM
पटना11:07–11:59 PM
गुवाहाटी10:41–11:33 PM
भागलपुर11:00–11:52 PM
दरभंगा11:04–11:56 PM
रांची11:07–11:58 PM
जमशेदपुर11:03–11:55 PM
धनबाद11:02–11:54 PM
भुवनेश्वर11:05–11:56 PM
पुरी11:05–11:56 PM
सिलीगुड़ी10:54–11:46 PM

एक नज़र में

तिथि
कार्तिक अमावस्या (पूर्णिमांत); अमांत पंचांग में आश्विन अमावस्या
2026 में
रविवार, 8 नवंबर की रात; दीपावली की लक्ष्मी पूजा भी इसी दिन
पूजा का समय
निशीथ काल (आधी रात के आसपास), जब अमावस्या हो
आराध्य
देवी काली (श्यामा)
अन्य नाम
श्यामा पूजा; दीपान्विता काली पूजा
कहाँ
पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम (Drik Panchang); बिहार का अंग क्षेत्र (भागलपुर), झारखंड, त्रिपुरा और बांग्लादेश में भी (विकिपीडिया)
प्रसिद्ध मंदिर
कोलकाता का कालीघाट और दक्षिणेश्वर
इसके बाद
भाई फोंटा (भाई दूज), बुधवार 11 नवंबर

काली पूजा 2026: 8 नवंबर की रात क्यों

Drik Panchang के अनुसार काली पूजा के लिए वह आधी रात उपयुक्त मानी जाती है जब अमावस्या तिथि हो, जबकि लक्ष्मी पूजा के लिए प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का समय), जब अमावस्या हो। इस वर्ष Drik में अमावस्या 8 नवंबर को 11:27 AM से 9 नवंबर को 12:31 PM तक है (हमारी गणना में 11:29 AM से 12:33 PM, लगभग 2 मिनट बाद)। 8 नवंबर की आधी रात अमावस्या में है और 9 नवंबर की रात तक अमावस्या समाप्त हो चुकी है, इसलिए काली पूजा 8 नवंबर की रात है, और लक्ष्मी पूजा भी उसी शाम। Drik Panchang बताता है कि अधिकतर वर्षों में दोनों एक ही दिन होती हैं, पर कुछ वर्षों में काली पूजा दीवाली पूजा से एक दिन पहले पड़ जाती है। निशीथ काल रात्रि (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक) का आठवाँ मुहूर्त है, इसलिए यह हर शहर में अलग है: कोलकाता में 10:55 से 11:46 PM, गुवाहाटी में 10:41 से 11:33 PM, पटना में 11:07 से 11:59 PM; नई दिल्ली में यह 11:39 PM से शुरू होकर आधी रात के बाद 12:31 AM तक चलता है, फिर भी पूजा 8 नवंबर की रात की ही है। ये सब समय Drik Panchang से मिनट तक मिलते हैं।

काली पूजा या श्यामा पूजा क्या है

काली पूजा देवी काली की पूजा है, जो दीपावली की अमावस्या की रात होती है; इसे श्यामा पूजा भी कहते हैं (Drik Panchang)। Drik Panchang के अनुसार जब भारत के अधिकतर भागों में इस अमावस्या पर लक्ष्मी की पूजा होती है, तब पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम में लोग काली की पूजा करते हैं; इन क्षेत्रों में लक्ष्मी पूजा का सबसे बड़ा दिन आश्विन पूर्णिमा की कोजागर पूजा है। विकिपीडिया इसे बिहार के अंग क्षेत्र (भागलपुर), झारखंड, त्रिपुरा और बांग्लादेश में भी बड़ा पर्व बताता है, और कार्तिक की इस पूजा को दीपान्विता काली पूजा कहता है, ताकि वर्ष की दूसरी काली पूजाओं से अलग पहचानी जाए: माघ कृष्ण चतुर्दशी की रटंती काली पूजा, ज्येष्ठ अमावस्या की फलहारिणी काली पूजा और कौशिकी अमावस्या की पूजा। काली का प्राकट्य दुर्गा सप्तशती (मार्कण्डेय पुराण) के सातवें अध्याय में है: चंड और मुंड से युद्ध के समय क्रोध से अंबिका का मुख काला पड़ गया और उनके ललाट से काली प्रकट हुईं, जिन्होंने चंड-मुंड का वध किया और इसी से चामुंडा कहलाईं (नीचे श्लोक देखें)।

बंगाल की काली पूजा: परंपरा

नीचे की बातें परंपरा और रीति हैं, ग्रंथ का विधान नहीं; वे विकिपीडिया के "Kali Puja" लेख और उसमें उद्धृत पुस्तकों से हैं, जिनके नाम हर बात के साथ दिए हैं। रीति परिवार, पंडाल और पुरोहित के अनुसार बदलती है।

घर और पंडाल

काली की मिट्टी की प्रतिमा घरों में और पंडालों में स्थापित होती है, और पूजा रात को होती है। चढ़ावे में लाल जवा (गुड़हल) के फूल, मिठाई, चावल और दाल बताए गए हैं, और विधान है कि उपासक भोर तक ध्यान करे।

जून मैकडैनियल (2004), विकिपीडिया के अनुसार

दो रीतियाँ

कई घरों और पंडालों में पूजा ब्राह्मण (गैर-तांत्रिक) रीति से होती है, जिसमें देवी आद्याशक्ति काली के रूप में सजाई जाती हैं और बलि नहीं होती; कुछ परंपराएँ तांत्रिक विधि से पूजा करती हैं, और तांत्रिक परंपरा में बलि की प्रथा भी रही है।

जून मैकडैनियल (2004); रेचल फ़ेल मैकडरमॉट और जेफ़री क्रिपाल (2003), विकिपीडिया के अनुसार

कालीघाट

कोलकाता के कालीघाट मंदिर में इस दिन काली की पूजा लक्ष्मी के रूप में होती है, और हज़ारों भक्त दर्शन और भेंट के लिए आते हैं। कालीघाट पीठनिर्णय का कालीपीठ है (हमारा कालीघाट पन्ना देखें)।

मैकडरमॉट और क्रिपाल (2003); सी. जे. फ़ुलर (2004), विकिपीडिया के अनुसार

दक्षिणेश्वर

हुगली के पूर्वी तट पर दक्षिणेश्वर काली मंदिर की देवी भवतारिणी (काली) हैं। मंदिर 1855 में रानी रासमणि ने बनवाया, और यह रामकृष्ण और शारदा देवी से जुड़ा है; रामकृष्ण यहीं पूजा करते थे।

विकिपीडिया: Dakshineswar Kali Temple

इतिहास

अठारहवीं सदी में संरक्षकों के सहारे काली पूजा फैली; नदिया के राजा कृष्णचंद्र ने भी इसे बढ़ावा दिया। उन्नीसवीं सदी में, जब बंगाल में रामकृष्ण की ख्याति बढ़ी, ज़मींदार परिवार इसे बड़े पैमाने पर करवाने लगे।

मैकडरमॉट (2001); मैकडरमॉट और क्रिपाल (2003), विकिपीडिया के अनुसार

पंडाल और रात

पंडालों में काली के साथ शिव, रामकृष्ण और बामाखेपा की प्रतिमाएँ और दस महाविद्याओं के दृश्य भी होते हैं; लोग रात भर पंडाल देखने जाते हैं, और आतिशबाज़ी, नाटक और जादू के खेल भी होते हैं।

मैकडैनियल (2004); किंसली (1997), विकिपीडिया के अनुसार

भागलपुर (बिहार)

अंग क्षेत्र में, विशेषकर भागलपुर में, सैकड़ों पंडाल बनते हैं, और पूजा के बाद प्रतिमाओं की बड़ी विसर्जन यात्रा निकलती है।

विकिपीडिया; दैनिक जागरण

एक दिन पहले: भूत चतुर्दशी

बंगाल में काली पूजा से पहले की चतुर्दशी को भूत चतुर्दशी कहते हैं; घर में चौदह दीपक जलाने और चौदह प्रकार के साग खाने की प्रथा है (हमारा नरक चतुर्दशी पन्ना देखें)।

लोक परंपरा

दिवाली, काली पूजा और भाई फोंटा

Drik Panchang के 2026 के दीवाली कैलेंडर में (कोलकाता के लिए भी) 8 नवंबर को लक्ष्मी पूजा, दीवाली और काली पूजा एक साथ हैं। इसलिए एक ही अमावस्या पर उत्तर भारत में शाम को प्रदोष काल में लक्ष्मी-गणेश की पूजा होती है और बंगाल, ओडिशा और असम में आधी रात को काली की। 9 नवंबर को दोपहर 12:31 PM तक अमावस्या रहती है (Drik), 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा है, और बुधवार 11 नवंबर को भाई दूज, जिसे बंगाल में भाई फोंटा कहते हैं: बहनें भाई के माथे पर फोंटा (तिलक) लगाती हैं। भाई फोंटा की रीति और कथा भाई दूज के पन्ने पर है।

पूजा विधि

  1. चरण 1

    तैयारी

    घर में पूजा-स्थान साफ़ करें और काली की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। यह अमावस्या की रात है, इसलिए घर और आँगन में दीये जलाए जाते हैं (परंपरा)।

  2. चरण 2

    समय

    पूजा परंपरा से रात को, निशीथ काल में होती है; अपने शहर का समय ऊपर देखें। पंडाल या मंदिर में पूजा का समय पूजा समिति या पुरोहित तय करते हैं।

  3. चरण 3

    फूल और नैवेद्य

    लाल जवा (गुड़हल) के फूल या उनकी माला, धूप, दीप, मिठाई और चावल-दाल से बना भोग चढ़ाया जाता है (मैकडैनियल के अनुसार बंगाल की रीति)।

  4. चरण 4

    पाठ

    कई परिवार इस रात काली चालीसा, देवी की स्तुतियाँ या दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं (परंपरा)।

  5. चरण 5

    आरती और प्रसाद

    आरती के बाद प्रसाद बाँटें; कई लोग रात भर जागकर देवी का ध्यान और भजन करते हैं।

  6. चरण 6

    पुरोहित की रीति

    विधि कुल, संप्रदाय और पुरोहित के अनुसार बदलती है। तांत्रिक विधि गुरु और दीक्षा से ही की जाती है; घर में पूजा अपने पुरोहित से पूछकर करें।

श्लोक

भ्रुकुटीकुटिलात्तस्या ललाटफलकाद्द्रुतम्।काली करालवदना विनिष्क्रान्तासिपाशिनी॥
भौंहें तनने से टेढ़े हुए उन (अंबिका) के ललाट से तुरंत भयानक मुख वाली काली प्रकट हुईं, जिनके हाथों में तलवार और पाश था।मार्कण्डेय पुराण 87.5 (दुर्गा सप्तशती 7.6, गीता प्रेस)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

काली पूजा 2026 कब है?

8 नवंबर, रविवार की रात (Drik Panchang)। काली पूजा निशीथ काल में होती है, जब अमावस्या हो; अमावस्या 8 नवंबर को 11:29 AM से 9 नवंबर को 12:33 PM तक है, इसलिए हर शहर में पूजा 8 नवंबर की रात है।

काली पूजा और दिवाली एक ही दिन हैं?

हाँ, 2026 में दोनों 8 नवंबर को हैं। लक्ष्मी पूजा शाम को प्रदोष काल में होती है और काली पूजा आधी रात को निशीथ काल में; दोनों के लिए उस समय अमावस्या चाहिए। Drik Panchang के अनुसार कुछ वर्षों में काली पूजा दीवाली पूजा से एक दिन पहले पड़ती है।

कोलकाता में काली पूजा का मुहूर्त क्या है?

कोलकाता में निशीथ काल 8 नवंबर को 10:55 से 11:46 PM तक है। गुवाहाटी में 10:41–11:33 PM, सिलीगुड़ी में 10:54–11:46 PM, भुवनेश्वर में 11:05–11:56 PM, पटना में 11:07–11:59 PM, रांची में 11:07–11:58 PM, और नई दिल्ली में 11:39 PM से 12:31 AM (9 नवंबर) तक। सब समय Drik Panchang से मिलते हैं।

दिल्ली में निशीथ काल 12 बजे के बाद तक है, तो पूजा किस तारीख की है?

8 नवंबर की रात की। पंचांग में दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक गिना जाता है, इसलिए आधी रात के बाद का 12:31 AM भी 8 नवंबर की रात में आता है; घड़ी की तारीख 9 नवंबर हो जाती है।

श्यामा पूजा क्या है?

काली पूजा का ही दूसरा नाम (Drik Panchang)। बंगाल में काली को श्यामा भी कहते हैं, और उनकी भक्ति के गीत श्यामा संगीत कहलाते हैं।

बंगाल में दिवाली पर लक्ष्मी पूजा क्यों नहीं होती?

Drik Panchang के अनुसार पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम में लक्ष्मी पूजा का सबसे बड़ा दिन आश्विन पूर्णिमा की कोजागर पूजा है (2026 में शरद पूर्णिमा, 25 अक्टूबर), और दीपावली की अमावस्या पर वहाँ काली की पूजा होती है। कोलकाता के कालीघाट में इस दिन काली की पूजा लक्ष्मी के रूप में होती है (मैकडरमॉट और क्रिपाल, विकिपीडिया के अनुसार)।

भाई फोंटा 2026 कब है?

बुधवार, 11 नवंबर को, कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन। यह बंगाल का भाई दूज है; Drik Panchang भाई दूज 11 नवंबर को देता है, कोलकाता के लिए भी।

काली पूजा में क्या चढ़ाते हैं?

बंगाल की रीति में लाल जवा (गुड़हल) के फूल, मिठाई, चावल और दाल (जून मैकडैनियल, विकिपीडिया के अनुसार)। चढ़ावा और विधि परिवार और पुरोहित के अनुसार बदलते हैं।

स्रोत

  1. Drik Panchang: बंगाल काली पूजा 2026 (नई दिल्ली, कोलकाता, गुवाहाटी, पटना, भुवनेश्वर, रांची, सिलीगुड़ी, पुरी, धनबाद, जमशेदपुर, भागलपुर, दरभंगा), दीवाली पूजा कैलेंडर 2026 (कोलकाता) और भाई दूज 2026 (कोलकाता)
  2. मार्कण्डेय पुराण, अध्याय 87 (दुर्गा सप्तशती, अध्याय 7: काली का प्राकट्य और चामुंडा नाम), sa.wikisource और गीता प्रेस
  3. विकिपीडिया (अंग्रेज़ी): "Kali Puja" और "Dakshineswar Kali Temple"
  4. जून मैकडैनियल, Offering Flowers, Feeding Skulls: Popular Goddess Worship in West Bengal (Oxford University Press, 2004); रेचल फ़ेल मैकडरमॉट, Mother of My Heart, Daughter of My Dreams (Oxford University Press, 2001); रेचल फ़ेल मैकडरमॉट और जेफ़री क्रिपाल (सं.), Encountering Kali (University of California Press, 2003); सी. जे. फ़ुलर, The Camphor Flame (Princeton University Press, 2004): विकिपीडिया के "Kali Puja" लेख के अनुसार
  5. भागलपुर की काली पूजा: विकिपीडिया और दैनिक जागरण
  6. भूत चतुर्दशी और भाई फोंटा: लोक परंपरा
  7. निशीथ काल और अमावस्या: SanatanBodh पंचांग गणना, Drik Panchang के बंगाल काली पूजा पृष्ठ (2026; नई दिल्ली, कोलकाता, गुवाहाटी, पटना और 8 और शहर) से मिलान

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