ग्रंथ

चार वेदों के नाम

संक्षेप में

वेद चार हैं: ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। विष्णु पुराण (3.4.7-9) के अनुसार वेदव्यास ने एक वेद को चार भागों में बाँटा और पैल को ऋग्वेद, वैशम्पायन को यजुर्वेद, जैमिनि को सामवेद और सुमन्तु को अथर्ववेद सौंपा। यजुर्वेद की दो धाराएँ हैं: शुक्ल और कृष्ण।

#नामक्या हैउपवेदब्राह्मण ग्रंथमुख्य उपनिषद्
1ऋग्वेददेवताओं की स्तुति की ऋचाएँ, 10 मंडलों में; यज्ञ में होता इन्हीं से काम करता हैआयुर्वेदऐतरेय, कौषीतकि (शांखायन)ऐतरेय, कौषीतकि
2यजुर्वेदशुक्ल (वाजसनेयी) और कृष्ण (तैत्तिरीय आदि)यज्ञ के मंत्र (यजुस्) और विधि; अध्वर्यु का वेदधनुर्वेदशतपथ (शुक्ल); तैत्तिरीय (कृष्ण)बृहदारण्यक, ईश (शुक्ल); तैत्तिरीय, कठ, श्वेताश्वतर (कृष्ण)
3सामवेदगाए जाने वाले साम; अधिकतर ऋचाएँ ऋग्वेद से ली गई हैं; उद्गाता इन्हें गाता हैगान्धर्ववेद (संगीत)ताण्ड्य (पंचविंश), षड्विंश, जैमिनीय, छान्दोग्यछान्दोग्य, केन
4अथर्ववेदरोग-निवारण, रक्षा, घर-गृहस्थी और राजकाज के मंत्र; यज्ञ में ब्रह्मा पुरोहित का वेदअर्थशास्त्र (अन्य सूचियों में शस्त्रशास्त्र, स्थापत्यवेद या शिल्पशास्त्र)गोपथमुण्डक, माण्डूक्य, प्रश्न

एक वेद, चार भाग

विष्णु पुराण (3.4.2) कहता है कि वेद पहले एक था, जिसे इस द्वापर में व्यास ने चार भागों में बाँटा। यज्ञ के चार पुरोहितों के अनुसार यह बँटवारा हुआ: यजुस् से अध्वर्यु का काम, ऋचाओं से होता का, साम से उद्गाता का और अथर्व से ब्रह्मा का (3.4.11-12)। व्यास ने इतिहास और पुराण सूत रोमहर्षण को सौंपे (3.4.10)।

हर वेद के चार स्तर माने जाते हैं: संहिता (मंत्र), ब्राह्मण (यज्ञ की व्याख्या), आरण्यक और उपनिषद्।

शुक्ल और कृष्ण यजुर्वेद

विष्णु पुराण (3.5) की कथा के अनुसार वैशम्पायन के शिष्य याज्ञवल्क्य ने गुरु से सीखा यजुर्वेद लौटा दिया; दूसरे शिष्यों ने तीतर (तित्तिर) बनकर उसे ग्रहण किया, इसलिए वह तैत्तिरीय कहलाया। फिर याज्ञवल्क्य ने सूर्य की स्तुति की और अश्व-रूप सूर्य से नए यजुस् पाए, जिन्हें पढ़ने वाले ‘वाजी’ कहलाए (3.5.12-30)। परंपरा में ये क्रमशः कृष्ण और शुक्ल यजुर्वेद हैं।

पाठ में अंतर यह है कि शुक्ल यजुर्वेद में मंत्र (संहिता) और व्याख्या (शतपथ ब्राह्मण) अलग हैं, जबकि कृष्ण यजुर्वेद की संहिताओं में गद्य व्याख्या मंत्रों के बीच मिली हुई है।

वेदांग, उपवेद और 18 विद्याएँ

मधुसूदन सरस्वती का प्रस्थानभेद छह वेदांग गिनाता है: शिक्षा, व्याकरण, निरुक्त, छंद, ज्योतिष और कल्प। चार वेदों के क्रम से चार उपवेद हैं: आयुर्वेद, धनुर्वेद, गान्धर्ववेद और अर्थशास्त्र। चार वेद, छह वेदांग, पुराण, न्याय, मीमांसा और धर्मशास्त्र मिलकर 14 विद्याएँ, और उपवेद जोड़कर 18; विष्णु पुराण (3.6.27-28) भी यही 18 विद्याएँ गिनाता है।

हर वेद का शांति पाठ

मुक्तिकोपनिषद् हर वेद के उपनिषदों के साथ पढ़ा जाने वाला शांति पाठ बताता है: ऋग्वेद का ‘वाङ् मे मनसि’, शुक्ल यजुर्वेद का ‘पूर्णमदः पूर्णमिदम्’, कृष्ण यजुर्वेद का ‘सह नाववतु’, सामवेद का ‘आप्यायन्तु’ और अथर्ववेद का ‘भद्रं कर्णेभिः’।

स्रोतों में अंतर

  • आयुर्वेद: प्रस्थानभेद उसे ऋग्वेद का उपवेद कहता है, पर सुश्रुत संहिता (सूत्रस्थान 1) आयुर्वेद को अथर्ववेद का अंग बताती है।
  • अथर्ववेद का उपवेद: प्रस्थानभेद में अर्थशास्त्र है; मोनियर-विलियम्स चरणव्यूह के नाम से शस्त्र-शास्त्र देता है और लिखता है कि कुछ लोग स्थापत्यवेद या शिल्पशास्त्र को चौथा उपवेद गिनते हैं।
  • उपनिषदों का वेद: मुक्तिकोपनिषद् मैत्रायणी उपनिषद् को सामवेद में गिनता है, जबकि वह नाम कृष्ण यजुर्वेद की मैत्रायणी शाखा का है।
संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 6 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चार वेदों के नाम क्या हैं?

ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। यजुर्वेद की शुक्ल और कृष्ण दो धाराएँ हैं।

वेदों को चार भागों में किसने बाँटा?

विष्णु पुराण (3.4) के अनुसार कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास ने, और चारों वेद अपने चार शिष्यों पैल, वैशम्पायन, जैमिनि और सुमन्तु को सौंपे।

चारों वेदों के उपवेद कौन से हैं?

उपवेद चार हैं। प्रस्थानभेद के क्रम से ऋग्वेद का उपवेद आयुर्वेद, यजुर्वेद का धनुर्वेद, सामवेद का गान्धर्ववेद और अथर्ववेद का अर्थशास्त्र है। अथर्ववेद के उपवेद के रूप में कुछ सूचियाँ शस्त्र-शास्त्र और कुछ स्थापत्यवेद या शिल्पशास्त्र गिनाती हैं (मोनियर-विलियम्स, ‘उपवेद’), और सुश्रुत संहिता आयुर्वेद को अथर्ववेद का अंग कहती है।

गायत्री मंत्र किस वेद में है?

ऋग्वेद में, तीसरे मंडल के 62वें सूक्त का दसवाँ मंत्र (3.62.10)।

वेदांग कितने हैं?

छह: शिक्षा, व्याकरण, निरुक्त, छंद, ज्योतिष और कल्प।

स्रोत

  1. विष्णु पुराण 3.4, 3.5 और 3.6.27-28 (संस्कृत पाठ, GRETIL)
  2. मधुसूदन सरस्वती, प्रस्थानभेद: वेद, वेदांग, उपवेद (संस्कृत पाठ, archive.org)
  3. मुक्तिकोपनिषद्, अध्याय 1: उपनिषद् और शांति पाठ वेद के अनुसार (sanskritdocuments.org)
  4. सुश्रुत संहिता, सूत्रस्थान 1 (कविराज कुंजलाल भिषग्रत्न का अनुवाद, wisdomlib.org)
  5. मोनियर-विलियम्स संस्कृत-अंग्रेज़ी कोश, ‘उपवेद’ (wisdomlib.org)
  6. ब्राह्मण ग्रंथ, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद पर विकिपीडिया के लेख (शाखाएँ और ग्रंथ)

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