ग्रंथ

रामायण के 7 कांड

संक्षेप में

वाल्मीकि रामायण के सात कांड हैं: बालकांड, अयोध्याकांड, अरण्यकांड, किष्किंधाकांड, सुंदरकांड, युद्धकांड और उत्तरकांड। तुलसीदास के रामचरितमानस में भी सात कांड हैं, जिन्हें वे सोपान (सीढ़ियाँ) कहते हैं; वहाँ छठे कांड का नाम लंकाकांड है।

#नामसर्ग (समीक्षित / दक्षिणी)कथा
1बालकांड76 / 77राम और भाइयों का जन्म, विश्वामित्र के साथ यात्रा, अहल्या का उद्धार, शिव-धनुष भंग और सीता से विवाह
2अयोध्याकांड111 / 119राज्याभिषेक की तैयारी, कैकेयी के दो वर, राम, सीता और लक्ष्मण का वनवास, दशरथ का देहांत, भरत का चित्रकूट जाकर पादुका लेकर लौटना
3अरण्यकांड71 / 75दंडक वन और पंचवटी, शूर्पणखा, स्वर्णमृग बना मारीच, सीता-हरण और जटायु
4किष्किंधाकांड66 / 67हनुमान और सुग्रीव से भेंट, वाली-वध, सुग्रीव का राज्य, सीता की खोज में वानरों का चारों दिशाओं में जाना
5सुंदरकांड66 / 68हनुमान का समुद्र लांघना, अशोक वाटिका में सीता से भेंट, लंका-दहन और लौटकर राम को समाचार
6युद्धकांड116 / 128सेतु-बंधन, लंका का युद्ध, रावण-वध, सीता की अग्नि-परीक्षा, अयोध्या लौटकर राम का राज्याभिषेक
7उत्तरकांड100 / संस्करण के अनुसाररावण और राक्षस-वंश की पूर्वकथा, राम का राज्य, सीता का वन जाना, लव-कुश का जन्म, अश्वमेध और राम का परमधाम जाना

सर्ग संख्या के बारे में

पहली संख्या बड़ौदा के समीक्षित संस्करण (Critical Edition) की है, जो पांडुलिपियों की तुलना से बना और जिसमें कुल 606 सर्ग हैं। दूसरी संख्या दक्षिण भारत में प्रचलित पाठ की है। प्रचलित पाठ (1.4.2) स्वयं कहता है कि ऋषि ने 24,000 श्लोक, 500 सर्ग, छह कांड और ‘उत्तर’ कहे; समीक्षित संस्करण यह श्लोक मूल पाठ में नहीं रखता। उत्तरकांड के सर्ग अलग-अलग संस्करणों में अलग गिने गए हैं, कुछ में प्रक्षिप्त सर्ग अलग छपे हैं।

रामचरितमानस के सात कांड

गोस्वामी तुलसीदास ने अवधी में रामचरितमानस संवत 1631 (1574 ई.) की रामनवमी को आरंभ किया। इसके सात कांड हैं: बालकांड, अयोध्याकांड, अरण्यकांड, किष्किंधाकांड, सुंदरकांड, लंकाकांड और उत्तरकांड। बालकांड में वे मानस को सरोवर कहकर सात कांडों को उसकी सुंदर सीढ़ियाँ बताते हैं: ‘सप्त प्रबंध सुभग सोपाना’। वाल्मीकि का युद्धकांड यहाँ लंकाकांड है।

स्रोतों में अंतर

  • उत्तरकांड पर दो मत: परंपरा उसे वाल्मीकि का सातवाँ कांड मानती है, और प्रचलित पाठ (1.4.2) छह कांडों के साथ ‘उत्तर’ का नाम लेता है। हरमन याकोबी, रॉबर्ट गोल्डमन जैसे कई विद्वान भाषा, शैली और कथा के अंतर के आधार पर बालकांड और उत्तरकांड को बाद में जुड़ा मानते हैं।
  • छठे कांड का नाम: वाल्मीकि रामायण में युद्धकांड, रामचरितमानस में लंकाकांड।
  • सर्ग संख्या संस्करण के अनुसार बदलती है, जैसे सुंदरकांड समीक्षित संस्करण में 66 सर्ग का है और दक्षिणी पाठ में 68 का।
संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 4 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामायण के 7 कांड के नाम क्या हैं?

सात कांड (कई लोग इन्हें सात खंड भी कहते हैं): बालकांड, अयोध्याकांड, अरण्यकांड, किष्किंधाकांड, सुंदरकांड, युद्धकांड और उत्तरकांड।

रामायण का सबसे बड़ा कांड कौन सा है?

सर्गों की गिनती से युद्धकांड: समीक्षित संस्करण में 116 और दक्षिणी पाठ में 128 सर्ग।

वाल्मीकि रामायण में कितने श्लोक हैं?

प्रचलित पाठ (1.4.2) के अनुसार 24,000 श्लोक। छपे संस्करणों की वास्तविक गिनती इससे कुछ अलग हो सकती है।

रामचरितमानस के कांड रामायण से कैसे अलग हैं?

दोनों में सात कांड हैं और नाम लगभग वही हैं; बस छठे का नाम मानस में लंकाकांड है। मानस अवधी में तुलसीदास की अपनी रचना है, वाल्मीकि रामायण संस्कृत में।

क्या उत्तरकांड वाल्मीकि की रचना है?

परंपरा उसे वाल्मीकि का मानती है। कई आधुनिक विद्वान बालकांड और उत्तरकांड को बाद का जोड़ मानते हैं। यह पृष्ठ दोनों मत बताता है, निर्णय नहीं देता।

स्रोत

  1. वाल्मीकि रामायण, बड़ौदा समीक्षित संस्करण (संस्कृत पाठ, GRETIL; मुनेओ तोकुनागा और जॉन स्मिथ): सर्गों की गिनती
  2. वाल्मीकि रामायण, दक्षिणी पाठ, कांडों की सूची और बालकांड 1.4.2 (valmikiramayan.net)
  3. रामचरितमानस, बालकांड: ‘सप्त प्रबंध सुभग सोपाना’ (भारतकोश)
  4. रामचरितमानस और उत्तरकांड पर विकिपीडिया के लेख (रचना-काल, कांडों के नाम, विद्वानों के मत)

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