तुंगनाथ उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग ज़िले में चंद्रनाथ पर्वत पर शिव का मंदिर है, जिसे बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति लगभग 3,680 मीटर पर शिव का सबसे ऊँचा मंदिर बताती है। यह पंच केदार में है, और परंपरा के अनुसार यहाँ शिव की भुजाएँ पूजी जाती हैं। मंदिर तक चोपता से लगभग 3 किमी पैदल चढ़ाई है।
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- देवता
- शिव, तुंगनाथ रूप में
- परंपरा
- शैव
- तीर्थ-सूची
- पंच केदार 2/5
- स्थान
- चंद्रनाथ पर्वत, चोपता के ऊपर, रुद्रप्रयाग ज़िला
- राज्य
- उत्तराखंड
- देश
- भारत
- आधिकारिक वेबसाइट
- श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (badrinath-kedarnath.gov.in)
- नक्शा
- OpenStreetMap (30.4889, 79.2172)
कपाट कब खुलते हैं
2026 में कपाट 22 अप्रैल को खुले; यह तिथि बैसाखी पर तय हुई थी। बंद होने की तिथि विजयादशमी (2026 में 20 अक्टूबर) पर पंचांग देखकर निकाली जाती है; 5 अक्टूबर 2026 तक वह घोषित नहीं हुई थी। 2025 में कपाट 6 नवंबर को बंद हुए थे।
स्रोत: amarujala.comजाँचा:
पंच केदार की कथा (परंपरा के अनुसार)
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति और उत्तराखंड पर्यटन यह कथा देते हैं: महाभारत युद्ध के बाद पांडव अपने ही बंधुओं के वध के प्रायश्चित के लिए शिव का आशीर्वाद चाहते थे। शिव उनसे बचते रहे और भैंसे का रूप लेकर केदार क्षेत्र में छिप गए। भीम ने उन्हें पहचान लिया, तब वे धरती में समा गए और उनके अंग पाँच स्थानों पर प्रकट हुए: कूबड़ केदारनाथ में, भुजाएँ तुंगनाथ में, मुख रुद्रनाथ में, नाभि मध्यमहेश्वर में और जटा कल्पेश्वर में। तुंगनाथ में भुजाओं की पूजा होती है। स्थानीय परंपरा और समाचारों में तुंगनाथ को "तृतीय केदार" कहा जाता है।
हमें यह कथा किसी पुराण के अध्याय और श्लोक के साथ नहीं मिली, इसलिए इसे परंपरा की कथा के रूप में दिया है। स्रोतों में छोटे अंतर हैं, जो इस पृष्ठ पर आगे दिए हैं।
पूजा और शीतकालीन गद्दी
पूजा मक्कू गाँव के हक-हकूकधारी ब्राह्मण करते हैं; 2026 में कपाट मठाधीश राम प्रसाद मैठाणी ने खोले (अमर उजाला)। मंदिर समिति के अनुसार सर्दियों में तुंगनाथ की पूजा मक्कूमठ में होती है, जो ऊखीमठ से 45 किमी है। कपाट बंद होने के बाद बाबा की डोली चोपता और भनकुन होकर मक्कू पहुँचती है, जहाँ तुंगनाथ महोत्सव होता है (अमर उजाला, 2025)।
तुंगनाथ कैसे पहुँचें
- सड़क चोपता तक जाती है, जो मंदिर समिति के अनुसार ऋषिकेश से चमोली-गोपेश्वर होकर लगभग 212 किमी है; चोपता से मंदिर तक लगभग 3 किमी पैदल रास्ता है।
- निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश (मंदिर समिति के अनुसार 205 किमी) और हवाई अड्डा देहरादून का जॉली ग्रांट (223 किमी) है।
मत-भेद: स्रोतों में अंतर
- शिव का रूप: मंदिर समिति और उत्तराखंड पर्यटन का पंच केदार पृष्ठ भैंसा कहते हैं; उत्तराखंड पर्यटन के केदारनाथ और मध्यमहेश्वर पृष्ठ बैल।
- चोपता से दूरी: मंदिर समिति लगभग 3 किमी लिखती है, उत्तराखंड पर्यटन का चोपता पृष्ठ लगभग 3.5 किमी।
- पाँचों केदारों की गिनती: समाचारों में मदमहेश्वर "द्वितीय", तुंगनाथ "तृतीय" और रुद्रनाथ "चतुर्थ" केदार कहलाते हैं, जबकि मंदिर समिति के पृष्ठ पर मदमहेश्वर को परिक्रमा का चौथा मंदिर लिखा है। इसलिए यहाँ कोई एक क्रम नहीं दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तुंगनाथ कितनी ऊँचाई पर है?
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अनुसार लगभग 3,680 मीटर; समिति इसे शिव का सबसे ऊँचा मंदिर बताती है।
सर्दियों में तुंगनाथ की पूजा कहाँ होती है?
मक्कूमठ (मक्कू गाँव) में, जो ऊखीमठ से 45 किमी है।
तुंगनाथ किन तीर्थ-सूचियों में है?
पंच केदार (सूची में 5 में से 2वाँ)।
तुंगनाथ कैसे पहुँचें?
सड़क चोपता तक जाती है, जो मंदिर समिति के अनुसार ऋषिकेश से चमोली-गोपेश्वर होकर लगभग 212 किमी है; चोपता से मंदिर तक लगभग 3 किमी पैदल रास्ता है। निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश (मंदिर समिति के अनुसार 205 किमी) और हवाई अड्डा देहरादून का जॉली ग्रांट (223 किमी) है।
तुंगनाथ के कपाट कब खुलते हैं?
2026 में कपाट 22 अप्रैल को खुले; यह तिथि बैसाखी पर तय हुई थी। बंद होने की तिथि विजयादशमी (2026 में 20 अक्टूबर) पर पंचांग देखकर निकाली जाती है; 5 अक्टूबर 2026 तक वह घोषित नहीं हुई थी। 2025 में कपाट 6 नवंबर को बंद हुए थे।
स्रोत
- बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति: श्री केदारनाथ धाम (पंच केदार की कथा): https://badrinath-kedarnath.gov.in/AboutUs/shri-kedarnath.aspx
- उत्तराखंड पर्यटन: पंच केदार: https://uttarakhandtourism.gov.in/experiences/panch-kedar
- बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति: अन्य मंदिर: https://badrinath-kedarnath.gov.in/other-temples/Other-Temples.aspx
- उत्तराखंड पर्यटन: चोपता: https://uttarakhandtourism.gov.in/destination/chopta
- अमर उजाला, 22 अप्रैल 2026: तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट खुले: https://www.amarujala.com/dehradun/third-kedar-tungnath-dham-portals-opened-temple-adorned-with-eight-quintals-of-flowers-uttarakhand-news-2026-04-22
- ईटीवी भारत, 14 अप्रैल 2026: तुंगनाथ 22 अप्रैल और मदमहेश्वर 21 मई को खुलेंगे: https://www.etvbharat.com/hi/state/portals-of-baba-tungnath-will-open-on-april-22-and-madmaheshwar-dham-on-may-21-uttarakhand-news-uts26041402937
- अमर उजाला, 2 अक्टूबर 2025: विजयदशमी पर बंद होने की तिथियाँ तय (तुंगनाथ 6 नवंबर): https://www.amarujala.com/dehradun/badrinath-dham-doors-will-be-closed-for-winter-season-on-25-november-second-kedar-will-be-closed-on-nov-18-2025-10-02
- स्थान के निर्देशांक: Wikidata (Q123987347), CC0
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