मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश में श्रीशैलम पर्वत पर है और द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में दूसरा है। यहाँ शिव मल्लिकार्जुन और देवी भ्रमरांबा के रूप में पूजे जाते हैं; मंदिर का देवस्थानम इसे ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ, दोनों एक ही परिसर में बताता है।
हर सुबह तिथि, राहु काल और आने वाले व्रत-त्योहार, WhatsApp पर एक छोटे संदेश में।चैनल फ़ॉलो करें
- परंपरा
- शैव
- तीर्थ-सूची
- द्वादश ज्योतिर्लिंग 2/12
- स्थान
- श्रीशैलम, नंद्याल ज़िला
- राज्य
- आंध्र प्रदेश
- देश
- भारत
- आधिकारिक वेबसाइट
- श्रीशैल देवस्थानम (srisailadevasthanam.org)
- नक्शा
- OpenStreetMap (16.0741, 78.8681)
दर्शन और आरती का समय
| मंगल वाद्य | सुबह 4:30–4:45 |
|---|---|
| सुप्रभातम | सुबह 5:00–5:30 |
| स्वामी की मंगल आरती | सुबह 6:00–6:30 |
| दर्शन (सुबह से दोपहर) | सुबह 6:00 से दोपहर 3:30 तक |
| मंदिर बंद | दोपहर 3:30–4:30 |
| स्वामी की महामंगल आरती (शाम) | शाम 5:20–6:00 |
| दर्शन (शाम) | शाम 6:00 से रात 10:00 तक |
यह आंध्र प्रदेश बंदोबस्ती विभाग के मंदिर पोर्टल की "नियमित" दिनों की सूची से है (सभी पंक्तियाँ नहीं दीं; अम्मावारु की आरती और अभिषेक के समय भी वहाँ हैं)। उस दिन देवस्थानम की मुख्य वेबसाइट रखरखाव के लिए बंद थी। आंध्र प्रदेश पर्यटन अलग समय देता है (सुबह 5:30–1:00, शाम 6:00–10:00)।
स्रोत: tms.ap.gov.inजाँचा: समय बदल सकते हैं; जाने से पहले आधिकारिक स्रोत देख लें।
मल्लिकार्जुन की कथा: कार्तिकेय और क्रौंच पर्वत
शिव पुराण (कोटिरुद्र संहिता, अध्याय 15) के अनुसार नारद से गणेश के विवाह की बात सुनकर कुमार कार्तिकेय माता-पिता के मना करने पर भी क्रौंच पर्वत चले गए। शिव के भेजे देवता और ऋषि उन्हें लौटा न सके। जब शिव और पार्वती स्वयं गए, तो कुमार और आगे चले गए।
तब शिव और पार्वती वहीं ज्योति-रूप में ठहर गए। पुराण कहता है कि अमावस्या को शिव और पूर्णिमा को पार्वती अपने पुत्र से मिलने जाते हैं, और यह लिंग मल्लिकार्जुन नाम से प्रसिद्ध हुआ। पुराण का यह अध्याय स्थान का नाम क्रौंच पर्वत लेता है; पुराण की बारह ज्योतिर्लिंगों की सूची (कोटिरुद्र संहिता 1.21) मल्लिकार्जुन को श्रीशैल पर बताती है।
मंदिर की परंपराएँ और इतिहास
आंध्र प्रदेश बंदोबस्ती (एंडोमेंट्स) विभाग का पन्ना मंदिर की अपनी कथाएँ देता है: राजकुमारी चंद्रावती ने एक गाय को स्वयंभू लिंग पर दूध बहाते देखा और उस पर चमेली (मल्लिका) के फूल चढ़ाए, जिससे नाम मल्लिकार्जुन पड़ा; और आदिशक्ति ने भ्रमर (भौंरे) का रूप लेकर अरुणासुर का वध किया और यहाँ भ्रमरांबा बनकर रहीं।
उसी विभाग के अनुसार इस पर्वत का सबसे पुराना उल्लेख दूसरी सदी ईस्वी के पुलुमावी के नासिक शिलालेख में है; रेड्डी राजाओं (1325–1448) का समय मंदिर का स्वर्ण युग माना जाता है, विजयनगर के कृष्णदेवराय 1516 में यहाँ आए, और 1949 से मंदिर बंदोबस्ती विभाग के अधीन है।
मल्लिकार्जुन कैसे पहुँचें
- रेल: सबसे पास मरकापुर स्टेशन (गुंटूर-हुबली लाइन), 91 किमी (श्रीशैल देवस्थानम)।
- हवाई अड्डा: हैदराबाद का राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, 230 किमी (श्रीशैल देवस्थानम)।
- सड़क: कुर्नूल से 180 किमी, हैदराबाद से 220 किमी, विजयवाड़ा से 272 किमी। रास्ते के वन-द्वार (दोरनाला, शिखरम, मन्ननूर, डोमलपेंटा) रोज़ रात 9 से सुबह 6 बजे तक बंद रहते हैं (श्रीशैल देवस्थानम)।
प्रमुख त्योहार
मत-भेद: स्रोतों में अंतर
- कथा: शिव पुराण यहाँ कार्तिकेय और क्रौंच पर्वत की कथा कहता है, जबकि मंदिर की अपनी परंपरा (आंध्र प्रदेश बंदोबस्ती विभाग का पन्ना) चंद्रावती और चमेली, भ्रमरांबा और अरुणासुर, और चेंचू मल्लय्या की कथाएँ कहती है।
- शक्तिपीठ: देवस्थानम और बंदोबस्ती विभाग देवी भ्रमरांबा के मंदिर को 18 महाशक्तिपीठों में गिनते हैं। पीठनिर्णय की 51 शक्तिपीठों की सूची में "श्रीशैल" और "श्रीपर्वत" दो अलग नाम हैं; डी. सी. सरकार श्रीपर्वत को यही श्रीशैल मानते हैं, पर "श्रीशैल" पीठ को सिलहट (बांग्लादेश) के पास रखते हैं (देखें 51 शक्तिपीठ)।
- ज़िला: देवस्थानम का पता अब भी "कुर्नूल ज़िला" लिखता है, जबकि नंद्याल ज़िले की सरकारी साइट श्रीशैलम मंडल को अपने ज़िले में गिनती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मल्लिकार्जुन नाम कैसे पड़ा?
शिव पुराण का अध्याय नाम का अर्थ नहीं बताता। मंदिर की परंपरा (आंध्र प्रदेश बंदोबस्ती विभाग) के अनुसार राजकुमारी चंद्रावती ने लिंग पर चमेली (मल्लिका) के फूल चढ़ाए थे, इसी से यह नाम पड़ा।
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग कहाँ है?
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग श्रीशैलम, नंद्याल ज़िला, आंध्र प्रदेश में है।
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग में दर्शन का समय क्या है?
मंगल वाद्य: सुबह 4:30–4:45; सुप्रभातम: सुबह 5:00–5:30; स्वामी की मंगल आरती: सुबह 6:00–6:30; दर्शन (सुबह से दोपहर): सुबह 6:00 से दोपहर 3:30 तक; मंदिर बंद: दोपहर 3:30–4:30; स्वामी की महामंगल आरती (शाम): शाम 5:20–6:00; दर्शन (शाम): शाम 6:00 से रात 10:00 तक। स्रोत: tms.ap.gov.in, जाँचा 5 अक्टूबर 2026; जाने से पहले आधिकारिक स्रोत पर देख लें।
मल्लिकार्जुन किन तीर्थ-सूचियों में है?
द्वादश ज्योतिर्लिंग (सूची में 12 में से 2वाँ)।
मल्लिकार्जुन कैसे पहुँचें?
रेल: सबसे पास मरकापुर स्टेशन (गुंटूर-हुबली लाइन), 91 किमी (श्रीशैल देवस्थानम)। हवाई अड्डा: हैदराबाद का राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, 230 किमी (श्रीशैल देवस्थानम)।
स्रोत
- आंध्र प्रदेश बंदोबस्ती विभाग, मंदिर पोर्टल: श्री भ्रमरांबा मल्लिकार्जुन स्वामी देवस्थानम (समय, इतिहास, यातायात), tms.ap.gov.in/#/temple-details/SSLBMS
- श्रीशैल देवस्थानम (आधिकारिक साइट): कैसे पहुँचें, मंदिर, शिव दीक्षा, v1.srisailadevasthanam.org
- आंध्र प्रदेश पर्यटन: श्रीशैलम, aptourism.gov.in/destinations/50/srisailam; नंद्याल ज़िला: nandyal.ap.gov.in
- आकाशवाणी समाचार, 13 फ़रवरी 2026: श्रीशैलम में शिवरात्रि ब्रह्मोत्सव, newsonair.gov.in
- शिव पुराण, कोटिरुद्र संहिता, अध्याय 15 (जे. एल. शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद, wisdomlib.org/hinduism/book/shiva-purana-english/d/doc226516.html; अध्याय-संख्या sa.wikisource के संस्कृत पाठ जैसी, गीता प्रेस के "संक्षिप्त शिवपुराण" में अलग)
- शिव पुराण, कोटिरुद्र संहिता 1.21–23 (बारह ज्योतिर्लिंगों की सूची), संस्कृत पाठ: sa.wikisource.org (शिवपुराणम्, संहिता ४, अध्यायः १)
- द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र ("सौराष्ट्रे सोमनाथं च …"), पाठ: sanskritdocuments.org/doc_shiva/jyotirling.html
- Wikidata Q2767976 (निर्देशांक, CC0)
कुछ गलत लगा? गलती बताएँ
