ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के खंडवा ज़िले में नर्मदा नदी के मांधाता द्वीप पर है और द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में चौथा है। स्तोत्र "ओंकारममलेश्वरम्" कहता है, इसलिए नदी के दक्षिण तट के ममलेश्वर (अमलेश्वर) मंदिर को भी इसी ज्योतिर्लिंग से जोड़ा जाता है; किसे ज्योतिर्लिंग मानें, इस पर स्रोतों के मत नीचे दिए हैं।
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- देवता
- शिव (ओंकारेश्वर)
- परंपरा
- शैव
- तीर्थ-सूची
- द्वादश ज्योतिर्लिंग 4/12
- स्थान
- मांधाता द्वीप, नर्मदा नदी, खंडवा ज़िला
- राज्य
- मध्य प्रदेश
- देश
- भारत
- आधिकारिक वेबसाइट
- श्री ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट (shriomkareshwar.org)
- नक्शा
- OpenStreetMap (22.2456, 76.1511)
दर्शन और आरती का समय
| मंगल आरती और नैवेद्य भोग | सुबह 4:30–5:00 |
|---|---|
| मंगल दर्शन | सुबह 5:00 से दोपहर 12:20 तक |
| मध्याह्न भोग | दोपहर 12:20–1:15 |
| मध्याह्न दर्शन | दोपहर 1:15 से शाम 4:00 तक |
| सायंकालीन श्रृंगार | शाम 4:00–4:15 |
| श्रृंगार दर्शन | शाम 4:15 से रात 9:30 तक |
| शयन श्रृंगार और आरती | रात 9:30–10:00 |
| शयन श्रृंगार दर्शन | रात 10:00–10:30 |
ट्रस्ट के अनुसार सुबह 5 से पहले, रात 10:30 के बाद और आरती-श्रृंगार के समय दर्शन बंद रहते हैं, और त्योहारों पर समय बदल सकता है। उसी पन्ने की दूसरी तालिका शाम का श्रृंगार 4:00–4:30 और श्रृंगार दर्शन 4:30 से बताती है।
स्रोत: shriomkareshwar.orgजाँचा: समय बदल सकते हैं; जाने से पहले आधिकारिक स्रोत देख लें।
ओंकारेश्वर की कथा: विंध्य पर्वत का तप
शिव पुराण (कोटिरुद्र संहिता, अध्याय 18) के अनुसार विंध्य पर्वत को अपने पर गर्व था; नारद ने कहा कि मेरु उससे ऊँचा है। तब विंध्य ने ओंकार क्षेत्र में पार्थिव शिव-मूर्ति बनाकर छह महीने पूजा की, और शिव ने प्रकट होकर उसे वर दिया।
देवताओं और ऋषियों की प्रार्थना पर शिव वहीं रह गए। पुराण कहता है कि यहाँ लिंग दो रूपों में है: प्रणव (ॐ) में सदाशिव ओंकार कहलाए, और पार्थिव मूर्ति से जो प्रकट हुआ वह परमेश्वर कहलाया। ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट इसे ऐसे कहता है कि एक ओंकारेश्वर बना और दूसरा ममलेश्वर (अमरेश्वर); ट्रस्ट एक और कथा भी देता है जिसमें इक्ष्वाकु वंश के राजा मांधाता ने यहाँ तप किया।
मंदिर के बारे में
श्री ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट के अनुसार मंदिर पाँच तलों का है (ओंकारेश्वर, महाकालेश्वर, सिद्धनाथ, गुप्तेश्वर और ध्वजा के देवता), और यहाँ रोज़ तीन पूजाएँ होती हैं: ट्रस्ट की, सिंधिया राजघराने के पुजारियों की और होल्कर राजघराने के पुजारियों की। मंदिर किसने और कब बनाया, इसका प्रामाणिक लेख ट्रस्ट को नहीं मिला; 1959 में यह मध्य प्रदेश लोक न्यास अधिनियम के तहत सार्वजनिक न्यास घोषित हुआ।
ट्रस्ट के अनुसार नदी के दक्षिण तट पर ममलेश्वर मंदिर का असली नाम अमरेश्वर है; इसकी दीवारों पर 1063 ईस्वी के महिम्न स्तोत्र खुदे हैं, यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से संरक्षित है और अहिल्याबाई खासगी ट्रस्ट इसकी देखभाल करता है।
ओंकारेश्वर कैसे पहुँचें
- हवाई अड्डा: इंदौर का देवी अहिल्याबाई होल्कर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, 77 किमी (मंदिर ट्रस्ट)।
- रेल: सनावद स्टेशन 12 किमी, खंडवा जंक्शन 72 किमी (मंदिर ट्रस्ट)।
- बस: मोरटक्का बस स्टैंड 12 किमी (मंदिर ट्रस्ट)।
प्रमुख त्योहार
मत-भेद: स्रोतों में अंतर
- कौन-सा लिंग ज्योतिर्लिंग है: (1) ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट के अनुसार ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर में है और ममलेश्वर में पार्थिव लिंग; (2) खंडवा ज़िले की सरकारी साइट दोनों मंदिरों को बराबर दर्जे का और दोनों लिंगों को ज्योतिर्लिंग मानती है; (3) मध्य प्रदेश पर्यटन ममलेश्वर को भी ज्योतिर्लिंग कहता है और दोनों को एक ही के दो रूप; (4) शिव पुराण (अध्याय 18) लिंग को दो रूपों वाला कहता है, ओंकार और परमेश्वर, और उसकी सूची (1.21) "ओंकार में परमेश्वर" कहती है; (5) द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र "ओंकारममलेश्वरम्" कहता है।
- उत्पत्ति: शिव पुराण और ट्रस्ट विंध्य के तप की कथा देते हैं; ट्रस्ट "दूसरे मत" के रूप में राजा मांधाता के तप की कथा भी देता है।
- दूरी: इंदौर हवाई अड्डे की दूरी ट्रस्ट 77 किमी, मध्य प्रदेश पर्यटन लगभग 87 किमी और खंडवा ज़िला लगभग 84 किमी बताता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ओंकारेश्वर और ममलेश्वर में क्या अंतर है?
ओंकारेश्वर मंदिर नर्मदा के मांधाता द्वीप पर है और ममलेश्वर (अमलेश्वर) नदी के दक्षिण तट पर। ट्रस्ट ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर में मानता है, जबकि खंडवा ज़िला और मध्य प्रदेश पर्यटन दोनों को ज्योतिर्लिंग कहते हैं; स्तोत्र दोनों नाम साथ लेता है ("ओंकारममलेश्वरम्")।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग कहाँ है?
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मांधाता द्वीप, नर्मदा नदी, खंडवा ज़िला, मध्य प्रदेश में है।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में दर्शन का समय क्या है?
मंगल आरती और नैवेद्य भोग: सुबह 4:30–5:00; मंगल दर्शन: सुबह 5:00 से दोपहर 12:20 तक; मध्याह्न भोग: दोपहर 12:20–1:15; मध्याह्न दर्शन: दोपहर 1:15 से शाम 4:00 तक; सायंकालीन श्रृंगार: शाम 4:00–4:15; श्रृंगार दर्शन: शाम 4:15 से रात 9:30 तक; शयन श्रृंगार और आरती: रात 9:30–10:00; शयन श्रृंगार दर्शन: रात 10:00–10:30। स्रोत: shriomkareshwar.org, जाँचा 5 अक्टूबर 2026; जाने से पहले आधिकारिक स्रोत पर देख लें।
ओंकारेश्वर किन तीर्थ-सूचियों में है?
द्वादश ज्योतिर्लिंग (सूची में 12 में से 4वाँ)।
ओंकारेश्वर कैसे पहुँचें?
हवाई अड्डा: इंदौर का देवी अहिल्याबाई होल्कर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, 77 किमी (मंदिर ट्रस्ट)। रेल: सनावद स्टेशन 12 किमी, खंडवा जंक्शन 72 किमी (मंदिर ट्रस्ट)।
स्रोत
- श्री ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट (आधिकारिक साइट): दर्शन-पूजा का समय, shriomkareshwar.org/Schedules.aspx; मुख्य मंदिर, /MainTemple.aspx; अन्य मंदिर, /OtherTemples.aspx; कैसे पहुँचें, /HowToReach.aspx; पर्व पंचांग, /ParvaPanchang.aspx; ट्रस्ट, /AboutTrust.aspx
- खंडवा ज़िला (मध्य प्रदेश सरकार): ओंकारेश्वर, khandwa.nic.in/en/tourist-place/omkareshwar; मध्य प्रदेश पर्यटन: ओंकारेश्वर, mptourism.com/destination-omkareshwar.php
- शिव पुराण, कोटिरुद्र संहिता, अध्याय 18 (जे. एल. शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद, wisdomlib.org/hinduism/book/shiva-purana-english/d/doc226519.html; अध्याय-संख्या sa.wikisource के संस्कृत पाठ जैसी, गीता प्रेस के "संक्षिप्त शिवपुराण" में अलग)
- शिव पुराण, कोटिरुद्र संहिता 1.21–23 (बारह ज्योतिर्लिंगों की सूची), संस्कृत पाठ: sa.wikisource.org (शिवपुराणम्, संहिता ४, अध्यायः १)
- द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र ("सौराष्ट्रे सोमनाथं च …"), पाठ: sanskritdocuments.org/doc_shiva/jyotirling.html
- Wikidata Q1093334 (निर्देशांक, CC0)
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