केदारनाथ ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग ज़िले में हिमालय पर, मंदाकिनी नदी के पास लगभग 3,584 मीटर की ऊँचाई पर है; द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में यह ग्यारहवाँ है, और छोटा चार धाम व पंच केदार में भी गिना जाता है। मंदिर गर्मियों में ही खुलता है: 2026 में कपाट 22 अप्रैल को खुले, और सर्दियों में केदारनाथ की पूजा ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में होती है।
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- देवता
- शिव (केदारनाथ)
- परंपरा
- शैव
- स्थान
- केदारनाथ, मंदाकिनी नदी के पास, रुद्रप्रयाग ज़िला
- राज्य
- उत्तराखंड
- देश
- भारत
- आधिकारिक वेबसाइट
- श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (badrinath-kedarnath.gov.in)
- नक्शा
- OpenStreetMap (30.7333, 79.0667)
कपाट कब खुलते हैं
2026 में कपाट 22 अप्रैल को सुबह 8 बजे खुले; यह तिथि महाशिवरात्रि पर ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में घोषित हुई थी। 2026 में कपाट बंद होने की तिथि 5 अक्टूबर 2026 तक घोषित नहीं हुई है। परंपरा यह है कि तिथि विजयादशमी पर घोषित होती है और कपाट भाई दूज (यम द्वितीया) पर बंद होते हैं: 2024 में 3 नवंबर और 2025 में 23 अक्टूबर को ऐसा ही हुआ। 2026 में विजयादशमी 20 अक्टूबर और भाई दूज 11 नवंबर को है, पर बंद होने की तिथि घोषणा के बाद ही पक्की मानें। मंदिर समिति के अनुसार सर्दियों में केदारनाथ की पूजा ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में होती है।
स्रोत: newsonair.gov.inजाँचा:
केदारनाथ की कथा: नर-नारायण और पांडव
शिव पुराण (कोटिरुद्र संहिता, अध्याय 19) के अनुसार बदरिकाश्रम में नर और नारायण पार्थिव लिंग की पूजा करते थे। उनकी प्रार्थना पर शिव हिमालय पर केदार में ज्योतिर्लिंग रूप में रहने लगे और केदारेश्वर कहलाए।
उसी अध्याय के अनुसार पांडवों को देखकर शिव महिष (भैंसे) का रूप लेकर भागे; पांडवों ने उनकी पूँछ पकड़ ली, और वे मुँह नीचे किए खड़े रह गए। उनका सिर वाला भाग "नयपाल" में स्थिर हुआ, और केदार में उसी रूप की पूजा होती है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति इसी कथा को पंच केदार से जोड़ती है: कूबड़ केदारनाथ में, भुजाएँ तुंगनाथ में, मुख रुद्रनाथ में, नाभि मध्यमहेश्वर में और जटा कल्पेश्वर में।
मंदिर, दर्शन और आदि शंकराचार्य
मंदिर समिति के अनुसार मंदिर मूल रूप से आठवीं सदी में आदि शंकराचार्य ने बनवाया, पांडवों के बनाए और भी पुराने मंदिर की जगह के पास। गर्भगृह में शंकु के आकार की शिला सदाशिव रूप में पूजी जाती है। पत्र सूचना कार्यालय के अनुसार 2013 की बाढ़ में नष्ट हुई आदि शंकराचार्य की समाधि फिर से बनी, जिसका उद्घाटन 5 नवंबर 2021 को हुआ।
मंदिर समिति रोज़ के दर्शन की पूरी समय-सारणी नहीं देती; वह इतना लिखती है कि गर्मियों में शाम की आरती लगभग 6 बजे होती है और सुबह के अभिषेक का समय एक दिन पहले पूजा काउंटर से लेना होता है। उत्तराखंड सरकार का यात्रा पंजीकरण पोर्टल (registrationandtouristcare.uk.gov.in) मंदिर खुलने-बंद होने और आरती का समय "जल्द घोषित" बताता है, और यात्रा के लिए पंजीकरण वहीं होता है।
केदारनाथ कैसे पहुँचें
- सड़क से गौरीकुंड तक, फिर गौरीकुंड से लगभग 16 किमी पैदल; रास्ते में सीतापुर, सोनप्रयाग और गुप्तकाशी में ठहरने की जगह (मंदिर समिति)।
- हवाई अड्डा: देहरादून का जॉलीग्रांट, लगभग 235 किमी; रेल: ऋषिकेश, गौरीकुंड से लगभग 243 किमी पहले (मंदिर समिति)।
- हेलिकॉप्टर की बुकिंग मंदिर समिति के अनुसार केवल heliyatra.irctc.co.in पर होती है।
प्रमुख त्योहार
मत-भेद: स्रोतों में अंतर
- ऊँचाई: मंदिर समिति 3,584 मीटर (उसी पन्ने पर आगे 3,581 मीटर), रुद्रप्रयाग ज़िला 3,586 मीटर, और उत्तराखंड पर्यटन व Incredible India 3,580 मीटर लिखते हैं।
- पैदल रास्ता: गौरीकुंड से 16 किमी (मंदिर समिति, उत्तराखंड पर्यटन), 17 किमी (रुद्रप्रयाग ज़िला) या 14 किमी (उत्तराखंड पर्यटन का एक और वाक्य)।
- मंदिर किसने बनाया: मंदिर समिति आदि शंकराचार्य (आठवीं सदी, पांडवों के मंदिर के पास) बताती है; उत्तराखंड का यात्रा पोर्टल लिखता है कि पांडवों ने बनाया और शंकराचार्य ने जीर्णोद्धार किया।
- कथा: शिव पुराण और मंदिर समिति महिष (भैंसा) कहते हैं, उत्तराखंड पर्यटन बैल; शिव पुराण सिर वाला भाग "नयपाल" में बताता है, मंदिर समिति जटा और सिर कल्पेश्वर में।
- क्रम: द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में केदारनाथ 11वाँ है (इस साइट की सूची इसी क्रम में है); शिव पुराण की सूची (कोटिरुद्र संहिता 1.21–23) में क्रम अलग है और वहाँ यह 5वाँ है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2026 में केदारनाथ के कपाट कब बंद होंगे?
5 अक्टूबर 2026 तक तिथि घोषित नहीं हुई है। परंपरा से तिथि विजयादशमी (20 अक्टूबर 2026) को घोषित होती है और कपाट भाई दूज पर बंद होते हैं, जो 2026 में 11 नवंबर को है; घोषणा होने पर ही पक्का मानें।
सर्दियों में केदारनाथ की पूजा कहाँ होती है?
ऊखीमठ (रुद्रप्रयाग ज़िला) के ओंकारेश्वर मंदिर में, लगभग छह महीने (मंदिर समिति, आकाशवाणी समाचार)।
केदारनाथ किन तीर्थ-सूचियों में है?
द्वादश ज्योतिर्लिंग (सूची में 12 में से 11वाँ), उत्तराखंड के छोटा चार धाम (सूची में 4 में से 3वाँ), पंच केदार (सूची में 5 में से 1वाँ)।
केदारनाथ कैसे पहुँचें?
सड़क से गौरीकुंड तक, फिर गौरीकुंड से लगभग 16 किमी पैदल; रास्ते में सीतापुर, सोनप्रयाग और गुप्तकाशी में ठहरने की जगह (मंदिर समिति)। हवाई अड्डा: देहरादून का जॉलीग्रांट, लगभग 235 किमी; रेल: ऋषिकेश, गौरीकुंड से लगभग 243 किमी पहले (मंदिर समिति)।
स्रोत
- श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (आधिकारिक साइट): श्री केदारनाथ धाम, badrinath-kedarnath.gov.in/AboutUs/shri-kedarnath.aspx; अन्य मंदिर (ऊखीमठ), badrinath-kedarnath.gov.in/other-temples/Other-Temples.aspx
- आकाशवाणी समाचार (newsonair.gov.in): 15 फ़रवरी 2026, कपाट 22 अप्रैल को खुलेंगे; 21 और 22 अप्रैल 2026; 2025 में बंद होने की तिथियों की घोषणा और भाई दूज पर कपाट बंद; 3 नवंबर 2024 को कपाट बंद
- उत्तराखंड सरकार: यात्रा पंजीकरण पोर्टल, registrationandtouristcare.uk.gov.in; उत्तराखंड पर्यटन: केदारनाथ, uttarakhandtourism.gov.in/destination/kedarnath; रुद्रप्रयाग ज़िला: केदारनाथ यात्रा, rudraprayag.gov.in
- पत्र सूचना कार्यालय, 4 और 5 नवंबर 2021: आदि शंकराचार्य समाधि, pib.gov.in (PRID 1769206, 1769605)
- Drik Panchang: विजयादशमी 2026 (20 अक्टूबर) और भाई दूज 2026 (11 नवंबर), drikpanchang.com
- शिव पुराण, कोटिरुद्र संहिता, अध्याय 19 (जे. एल. शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद, wisdomlib.org/hinduism/book/shiva-purana-english/d/doc226520.html; अध्याय-संख्या sa.wikisource के संस्कृत पाठ जैसी, गीता प्रेस के "संक्षिप्त शिवपुराण" में अलग)
- शिव पुराण, कोटिरुद्र संहिता 1.21–23 (बारह ज्योतिर्लिंगों की सूची), संस्कृत पाठ: sa.wikisource.org (शिवपुराणम्, संहिता ४, अध्यायः १)
- द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र ("सौराष्ट्रे सोमनाथं च …"), पाठ: sanskritdocuments.org/doc_shiva/jyotirling.html
- Wikidata Q866014 (निर्देशांक, CC0)
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