महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के उज्जैन में है और द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में तीसरा है। मंदिर समिति इसे एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग बताती है, और यहाँ हर दिन भोर में 4 बजे भस्म आरती होती है।
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- देवता
- शिव (महाकाल)
- परंपरा
- शैव
- तीर्थ-सूची
- द्वादश ज्योतिर्लिंग 3/12
- स्थान
- उज्जैन (प्राचीन अवंती, उज्जयिनी), उज्जैन ज़िला
- राज्य
- मध्य प्रदेश
- देश
- भारत
- आधिकारिक वेबसाइट
- श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति, उज्जैन (shrimahakaleshwar.mp.gov.in)
- नक्शा
- OpenStreetMap (23.1828, 75.7683)
दर्शन और आरती का समय
| भस्म आरती | सुबह 4:00–6:00 (पूरे वर्ष) |
|---|---|
| दद्योदक आरती (बाल भोग) | सुबह 7:00–7:45 (चैत्र–आश्विन), 7:30–8:15 (कार्तिक–फाल्गुन) |
| भोग आरती | सुबह 10:00–10:45 (चैत्र–आश्विन), 10:30–11:15 (कार्तिक–फाल्गुन) |
| संध्या आरती | शाम 7:00–7:45 (चैत्र–आश्विन), 6:30–7:15 (कार्तिक–फाल्गुन) |
| शयन आरती | रात 10:30–11:00 (पूरे वर्ष) |
समिति साल के दो हिस्सों का अलग समय देती है: चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से आश्विन पूर्णिमा तक, और कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से फाल्गुन पूर्णिमा तक। समिति आरतियों का समय देती है, दर्शन खुलने-बंद होने का अलग समय नहीं। भस्म आरती में शामिल होने की बुकिंग पहले से होती है।
स्रोत: shrimahakaleshwar.mp.gov.inजाँचा: समय बदल सकते हैं; जाने से पहले आधिकारिक स्रोत देख लें।
महाकाल की कथा: दूषण असुर और अवंती के ब्राह्मण
शिव पुराण (कोटिरुद्र संहिता, अध्याय 16) के अनुसार अवंती नगरी में वेदप्रिय नाम के शिवभक्त ब्राह्मण अपने चार पुत्रों के साथ रहते थे। ब्रह्मा से वर पाकर रत्नमाल पर्वत का असुर दूषण वैदिक कर्म रोकने लगा और अवंती को घेर लिया।
ब्राह्मण-पुत्र पार्थिव लिंग की पूजा में ध्यान लगाए बैठे रहे। तब लिंग के पास की धरती फटी और शिव महाकाल रूप में प्रकट हुए; उन्होंने "हुं" की ध्वनि से दूषण और उसकी सेना को भस्म कर दिया। ब्राह्मणों की प्रार्थना पर वे वहीं महाकालेश्वर नाम से रह गए। अगले अध्याय (17) में राजा चंद्रसेन और ग्वाल-बालक श्रीकर की कथा है।
मंदिर के बारे में
मंदिर समिति के अनुसार मंदिर तीन तलों में है: नीचे महाकालेश्वर, उसके ऊपर ओंकारेश्वर शिवलिंग और सबसे ऊपर नागचंद्रेश्वर, जिनके कपाट साल में केवल नाग पंचमी को खुलते हैं। समिति भस्म आरती को इस मंदिर की विशेष पहचान बताती है।
समिति के इतिहास पन्ने के अनुसार 1235 ईस्वी में सुल्तान इल्तुतमिश ने उज्जैन पर आक्रमण कर मंदिर तोड़ा; अठारहवीं सदी के चौथे दशक में राणोजी शिंदे के दीवान रामचंद्र बाबा शेणवी ने इसे फिर बनवाया।
महाकालेश्वर कैसे पहुँचें
- हवाई अड्डा: इंदौर का देवी अहिल्याबाई होल्कर हवाई अड्डा, लगभग 58 किमी (मंदिर समिति)।
- रेल: उज्जैन जंक्शन, जो इंदौर, भोपाल, दिल्ली, मुंबई आदि से जुड़ा है (मंदिर समिति)।
- सड़क: इंदौर से लगभग 53 किमी (मंदिर समिति)।
प्रमुख त्योहार
मत-भेद: स्रोतों में अंतर
- आज के मंदिर की आयु: समिति का इतिहास पन्ना पुनर्निर्माण अठारहवीं सदी के चौथे दशक में बताता है, जबकि उसी साइट का मंदिर पन्ना "लगभग 150 साल पहले" लिखता है।
- संध्या आरती: समिति के मुख्य पन्ने पर "लगभग 6 से 7 बजे" लिखा है; समय-सारणी का पन्ना ऊपर दिए दो मौसमी समय देता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
महाकाल की भस्म आरती कब होती है?
मंदिर समिति के अनुसार हर दिन सुबह 4 से 6 बजे, पूरे वर्ष। इसमें शामिल होने की बुकिंग पहले से होती है।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग कहाँ है?
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग उज्जैन (प्राचीन अवंती, उज्जयिनी), उज्जैन ज़िला, मध्य प्रदेश में है।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में दर्शन का समय क्या है?
भस्म आरती: सुबह 4:00–6:00 (पूरे वर्ष); दद्योदक आरती (बाल भोग): सुबह 7:00–7:45 (चैत्र–आश्विन), 7:30–8:15 (कार्तिक–फाल्गुन); भोग आरती: सुबह 10:00–10:45 (चैत्र–आश्विन), 10:30–11:15 (कार्तिक–फाल्गुन); संध्या आरती: शाम 7:00–7:45 (चैत्र–आश्विन), 6:30–7:15 (कार्तिक–फाल्गुन); शयन आरती: रात 10:30–11:00 (पूरे वर्ष)। स्रोत: shrimahakaleshwar.mp.gov.in, जाँचा 5 अक्टूबर 2026; जाने से पहले आधिकारिक स्रोत पर देख लें।
महाकालेश्वर किन तीर्थ-सूचियों में है?
द्वादश ज्योतिर्लिंग (सूची में 12 में से 3वाँ)।
महाकालेश्वर कैसे पहुँचें?
हवाई अड्डा: इंदौर का देवी अहिल्याबाई होल्कर हवाई अड्डा, लगभग 58 किमी (मंदिर समिति)। रेल: उज्जैन जंक्शन, जो इंदौर, भोपाल, दिल्ली, मुंबई आदि से जुड़ा है (मंदिर समिति)।
स्रोत
- श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति (आधिकारिक साइट): आरती का समय, shrimahakaleshwar.mp.gov.in/timing; मंदिर और त्योहार, /temple; इतिहास, /history; उज्जैन कैसे पहुँचें, /about-ujjain; महत्वपूर्ण दिन, /important-days
- शिव पुराण, कोटिरुद्र संहिता, अध्याय 16 और 17 (जे. एल. शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद, wisdomlib.org/hinduism/book/shiva-purana-english/d/doc226517.html; अध्याय-संख्या sa.wikisource के संस्कृत पाठ जैसी, गीता प्रेस के "संक्षिप्त शिवपुराण" में अलग)
- शिव पुराण, कोटिरुद्र संहिता 1.21–23 (बारह ज्योतिर्लिंगों की सूची), संस्कृत पाठ: sa.wikisource.org (शिवपुराणम्, संहिता ४, अध्यायः १)
- द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र ("सौराष्ट्रे सोमनाथं च …"), पाठ: sanskritdocuments.org/doc_shiva/jyotirling.html
- Wikidata Q2721992 (निर्देशांक, CC0)
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