सोमनाथ ज्योतिर्लिंग

शिव (सोमनाथ)प्रभास पाटन, गुजरात

अन्य नाम: सोमेश्वर, श्री सोमनाथ महादेव, प्रभास तीर्थ

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 7 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग: द्वादश ज्योतिर्लिंग 1/12, शिव (सोमनाथ), प्रभास पाटन, गुजरात
संक्षेप में

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग गुजरात के गिर सोमनाथ ज़िले में प्रभास पाटन में है, और द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र तथा शिव पुराण की सूची, दोनों में इसका नाम सबसे पहले आता है। शिव पुराण की कथा के अनुसार यहाँ चंद्रमा (सोम) ने शिव की आराधना की थी। आज का मंदिर आज़ादी के बाद फिर बना; इसकी प्राण-प्रतिष्ठा 11 मई 1951 को हुई।

देवता
शिव (सोमनाथ)
परंपरा
शैव
तीर्थ-सूची
द्वादश ज्योतिर्लिंग 1/12
स्थान
प्रभास पाटन (वेरावल के पास), गिर सोमनाथ ज़िला
राज्य
गुजरात
देश
भारत
आधिकारिक वेबसाइट
श्री सोमनाथ ट्रस्ट (somnath.org)
नक्शा
OpenStreetMap (20.8880, 70.4014)

दर्शन और आरती का समय

दर्शनसुबह 6:00 से रात 10:00 बजे तक
आरतीसुबह 7:00, दोपहर 12:00 और शाम 7:00 बजे

ट्रस्ट के अलग-अलग पन्ने शाम के लाइट एंड साउंड शो का अलग समय देते हैं (7:45 बजे, या 8 से 9 बजे, वर्षा ऋतु छोड़कर), इसलिए शो का समय यहाँ नहीं दिया।

स्रोत: somnath.orgजाँचा: समय बदल सकते हैं; जाने से पहले आधिकारिक स्रोत देख लें।

सोमनाथ की कथा: चंद्रमा और दक्ष का शाप

शिव पुराण (कोटिरुद्र संहिता, अध्याय 14) के अनुसार दक्ष प्रजापति ने अपनी सत्ताईस पुत्रियों का विवाह चंद्रमा से किया। चंद्रमा केवल रोहिणी से प्रेम करते थे; बाकी पत्नियों ने पिता से शिकायत की। दक्ष के बार-बार समझाने पर भी चंद्रमा नहीं बदले, तो दक्ष ने उन्हें क्षय रोग का शाप दे दिया और उनकी कलाएँ घटने लगीं।

ब्रह्मा की सलाह पर देवता चंद्रमा को प्रभास क्षेत्र ले गए। वहाँ चंद्रमा ने पार्थिव (मिट्टी के) लिंग की छह महीने पूजा की और महामृत्युंजय मंत्र का जप किया। प्रसन्न होकर शिव ने वर दिया कि एक पक्ष में उनकी कलाएँ घटेंगी और दूसरे में बढ़ेंगी; यही चंद्रमा के घटने-बढ़ने का कारण बताया गया है।

देवताओं की प्रार्थना पर शिव उमा के साथ वहीं सोमेश्वर नाम से रहने लगे। पुराण यहाँ देवताओं के बनाए एक कुंड (चंद्रकुंड) का भी उल्लेख करता है।

मंदिर का इतिहास

श्री सोमनाथ ट्रस्ट परंपरा बताता है कि मंदिर चार बार बना: सोने का सोम ने, चाँदी का रवि ने, लकड़ी का श्रीकृष्ण ने और पत्थर का राजा भीमदेव ने। ट्रस्ट के अनुसार मंदिर को बार-बार तोड़ा गया; गुजरात पर्यटन महमूद ग़ज़नवी का आक्रमण 1025-26 में और बाद के विनाश 1297, 1394 और 1706 में बताता है।

ट्रस्ट के अनुसार सरदार वल्लभभाई पटेल 13 नवंबर 1947 को मंदिर के खंडहर देखने आए और फिर से बनाने का संकल्प हुआ। आज का मंदिर "कैलाश महामेरु प्रासाद" शैली में बना है; राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 11 मई 1951 को इसकी प्राण-प्रतिष्ठा की। ट्रस्ट के अनुसार शिखर 155 फ़ुट ऊँचा है। पास ही रानी अहिल्याबाई होल्कर का 1782 में बनवाया मंदिर भी है।

सोमनाथ कैसे पहुँचें

  • रेल: सोमनाथ रेलवे स्टेशन मंदिर से लगभग आधा किलोमीटर और वेरावल स्टेशन 7 किमी दूर है (श्री सोमनाथ ट्रस्ट)।
  • हवाई अड्डा: ट्रस्ट दीव (85 किमी), राजकोट (200 किमी) और अहमदाबाद (390 किमी) बताता है; गुजरात पर्यटन पोरबंदर हवाई अड्डा (120 किमी) भी बताता है।
  • सड़क: जूनागढ़ से 82 किमी, पोरबंदर से 120 किमी (गुजरात पर्यटन)।

प्रमुख त्योहार

महाशिवरात्रिश्रावण मास (सावन)कार्तिक पूर्णिमा मेला (पाँच दिन)सोमनाथ स्थापना दिवस (11 मई)गोलोकधाम उत्सव

मत-भेद: स्रोतों में अंतर

  • दर्शन का समय: ट्रस्ट सुबह 6 से रात 10 बजे बताता है, जबकि गुजरात पर्यटन का पन्ना सुबह 6:30 से रात 9 बजे लिखता है। यहाँ ट्रस्ट का समय दिया है।
  • चाँदी का मंदिर बनाने वाले का नाम ट्रस्ट के एक पन्ने पर "रवि" और दूसरे पर (और गुजरात पर्यटन पर) "रावण" है।
  • नवंबर 1947: ट्रस्ट के अनुसार सरदार पटेल 13 नवंबर को खंडहर देखने आए; गुजरात पर्यटन 12 नवंबर को शिलान्यास लिखता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोमनाथ को पहला ज्योतिर्लिंग क्यों कहते हैं?

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र ("सौराष्ट्रे सोमनाथं च …") और शिव पुराण की सूची (कोटिरुद्र संहिता 1.21) दोनों सोमनाथ से शुरू होते हैं, और पुराण का अध्याय 14 इसे पहला ज्योतिर्लिंग कहता है।

आज का सोमनाथ मंदिर कब बना?

आज़ादी के बाद। श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अनुसार राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 11 मई 1951 को इसकी प्राण-प्रतिष्ठा की।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग कहाँ है?

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग प्रभास पाटन (वेरावल के पास), गिर सोमनाथ ज़िला, गुजरात में है।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग में दर्शन का समय क्या है?

दर्शन: सुबह 6:00 से रात 10:00 बजे तक; आरती: सुबह 7:00, दोपहर 12:00 और शाम 7:00 बजे। स्रोत: somnath.org, जाँचा 5 अक्टूबर 2026; जाने से पहले आधिकारिक स्रोत पर देख लें।

सोमनाथ किन तीर्थ-सूचियों में है?

द्वादश ज्योतिर्लिंग (सूची में 12 में से 1वाँ)।

सोमनाथ कैसे पहुँचें?

रेल: सोमनाथ रेलवे स्टेशन मंदिर से लगभग आधा किलोमीटर और वेरावल स्टेशन 7 किमी दूर है (श्री सोमनाथ ट्रस्ट)। हवाई अड्डा: ट्रस्ट दीव (85 किमी), राजकोट (200 किमी) और अहमदाबाद (390 किमी) बताता है; गुजरात पर्यटन पोरबंदर हवाई अड्डा (120 किमी) भी बताता है।

स्रोत

  1. श्री सोमनाथ ट्रस्ट (आधिकारिक साइट): दर्शन-आरती का समय और कैसे पहुँचें, somnath.org/faq; यात्री सुविधाएँ, somnath.org/pilgrim-facilities; त्योहार, somnath.org/festivals
  2. श्री सोमनाथ ट्रस्ट: इतिहास, somnath.org/jay-somnath और somnath.org/somnath-darshan
  3. गुजरात पर्यटन (गुजरात सरकार): सोमनाथ मंदिर, gujarattourism.com/saurashtra/gir-somnath/somnath-temple.html
  4. शिव पुराण, कोटिरुद्र संहिता, अध्याय 14 (जे. एल. शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद, wisdomlib.org/hinduism/book/shiva-purana-english/d/doc226515.html; अध्याय-संख्या sa.wikisource के संस्कृत पाठ जैसी, गीता प्रेस के "संक्षिप्त शिवपुराण" में अलग)
  5. शिव पुराण, कोटिरुद्र संहिता 1.21–23 (बारह ज्योतिर्लिंगों की सूची), संस्कृत पाठ: sa.wikisource.org (शिवपुराणम्, संहिता ४, अध्यायः १)
  6. द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र ("सौराष्ट्रे सोमनाथं च …"), पाठ: sanskritdocuments.org/doc_shiva/jyotirling.html
  7. Wikidata Q1143887 (निर्देशांक, CC0)

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