आज का पंचांग कार्ड: तिथि, राहु काल और आज का श्लोक
सुबह भेजने का ऐसा कार्ड जिसमें काम की बात हो: आज की तिथि, आज का व्रत-त्योहार, आपके शहर का सूर्योदय, सूर्यास्त और राहु काल, और गीता का आज का श्लोक। शहर और डिज़ाइन चुनें, नाम लिखें, फिर फ़ोटो सेव करें या WhatsApp पर भेजें।
- अपना शहर और डिज़ाइन चुनें
तारीख भारत के समय से अपने-आप - अपना नाम लिखें
नाम लिखना ज़रूरी नहीं - फ़ोटो सेव करें या WhatsApp पर भेजें
कार्ड आपके फ़ोन पर ही बनता है
1. डिज़ाइन चुनें
2. शहर और आपका नाम
इस त्योहार के कार्ड पर आपके शहर का समय आता है।
आज के कार्ड पर भारत की आज की तारीख, तिथि, व्रत-त्योहार, आपके शहर का सूर्योदय, सूर्यास्त और राहु काल, और गीता का आज का श्लोक आता है।
यह त्योहार इस वर्ष बीत चुका है; मुहूर्त 2026 का है।
फ़ोन पर “कार्ड शेयर करें” से WhatsApp चुनें। कंप्यूटर पर फ़ोटो सेव करके भेजें। कार्ड आपके फ़ोन पर ही बनता है; आपका नाम कहीं नहीं भेजा जाता।
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या त्योहार का शुभकामना कार्ड
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आज के कार्ड पर क्या होता है, और समय कहाँ से आते हैं?
आज की तारीख और वार; सूर्योदय के समय की तिथि (उदय तिथि) उसके पक्ष और मास के साथ, और वह कब तक है; साइट के व्रत-त्योहार कैलेंडर से आज का व्रत या त्योहार; आपके चुने शहर का सूर्योदय, सूर्यास्त और राहु काल; और भगवद्गीता के दूसरे अध्याय का आज का श्लोक, वही जो मुखपृष्ठ पर है। तारीख भारत के समय से ली जाती है और समय SanatanBodh के अपने पंचांग (astronomy-engine, लाहिड़ी अयनांश) से आपके फ़ोन पर ही निकलते हैं। नई दिल्ली के लिए इन्हें Drik Panchang से मिलाया गया: सूर्योदय, सूर्यास्त और राहु काल एक मिनट के भीतर, तिथि का अंत-समय लगभग एक-दो मिनट बाद।
कार्ड पर महीने का नाम कुछ पंचांगों से अलग क्यों हो सकता है?
कार्ड पर मास पूर्णिमांत है, जैसा उत्तर भारत के पंचांग लिखते हैं: महीना पूर्णिमा के बाद बदलता है। महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत के अमांत पंचांग में महीना अमावस्या के बाद बदलता है, इसलिए कृष्ण पक्ष में वहाँ एक महीना पहले का नाम आता है। तिथि और पक्ष दोनों में एक ही रहते हैं।
क्या मेरा नाम कहीं भेजा या सहेजा जाता है?
नहीं। कार्ड आपके ब्राउज़र में ही बनता है। नाम और चुना हुआ श्लोक हमारे सर्वर पर नहीं जाते।
कार्ड पर मुहूर्त किस आधार पर है?
वही गणना जो त्योहारों के पन्नों पर है: घटस्थापना Drik Panchang के नियम से (प्रतिपदा में दिन का पहला तिहाई, चित्रा और वैधृति से बचकर, द्विस्वभाव लग्न), विजय मुहूर्त दिन का ग्यारहवाँ मुहूर्त, करवा चौथ की पूजा सूर्यास्त के बाद और फिर चंद्रोदय, लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल, वृषभ लग्न और अमावस्या के एक साथ रहने तक, भाई दूज का तिलक अपराह्न काल (दिन का चौथा पाँचवाँ भाग) में, और छठ के अर्घ्य सूर्यास्त और सूर्योदय पर। नई दिल्ली के समय Drik Panchang से एक-दो मिनट के भीतर मिलते हैं।
कार्ड के श्लोक कहाँ से लिए गए हैं?
हर त्योहार के शुभकामना श्लोकों के पन्ने से, जहाँ हर श्लोक दो अलग-अलग प्रकाशनों से शब्द-शब्द मिलाया गया है और उसका स्रोत, अर्थ और पाठभेद लिखा है। कार्ड पर स्रोत का छोटा नाम आता है, पूरा स्रोत उस पन्ने पर।
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