छठ पूजा शुभकामना श्लोक

छठ पर भेजने के लिए सूर्य और षष्ठी देवी के श्लोक: ऋग्वेद और यजुर्वेद के मंत्र, वाल्मीकि रामायण का आदित्यहृदय, नवग्रह स्तोत्र, सूर्याष्टक, सूर्य को अर्घ्य का एक मंत्र और ब्रह्मवैवर्त पुराण की षष्ठी देवी स्तुति, हर एक के साथ स्रोत और सरल अर्थ। हर पाठ हमने दो अलग-अलग प्रकाशनों से शब्द-शब्द मिलाया है।

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 5 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ
छठ पूजा: छठ पूजा 2026: संध्या अर्घ्य 15 नवंबर, रविवार; उषा अर्घ्य 16 नवंबर, सोमवार
चित्र: AI से बनाया गया
संक्षेप में

छठ पूजा 2026: संध्या अर्घ्य 15 नवंबर, रविवार; उषा अर्घ्य 16 नवंबर, सोमवार। नीचे 9 श्लोक हैं जो छठ पूजा पर शुभकामना के साथ भेजे जा सकते हैं, पहला ‘तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि’ (ऋग्वेद 3.62.10 (गायत्री मंत्र, ऋषि विश्वामित्र, देवता सविता))। हर श्लोक के नीचे उसका स्रोत और हमारा लिखा सरल अर्थ है; ‘कार्ड बनाएँ’ से वही श्लोक आपके नाम के साथ फ़ोटो कार्ड बन जाता है।

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  1. 1तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि

    तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि।धियो यो नः प्रचोदयात्॥

    स्रोत: ऋग्वेद 3.62.10 (गायत्री मंत्र, ऋषि विश्वामित्र, देवता सविता)

    अर्थ: हम सविता देव के उस वरणीय तेज का ध्यान करते हैं; वे हमारी बुद्धि को (सही दिशा में) प्रेरित करें।

    ऋग्वेद में मंत्र ‘तत्सवितुः’ से आरंभ होता है; ‘ॐ भूर्भुवः स्वः’ जप की परंपरा में आगे जुड़ता है।

    गायत्री मंत्र अर्थ सहित

  2. 2चित्रं देवानामुदगादनीकं चक्षुर्मित्रस्य वरुणस्याग्नेः

    चित्रं देवानामुदगादनीकं चक्षुर्मित्रस्य वरुणस्याग्नेः।आप्रा द्यावापृथिवी अन्तरिक्षं सूर्य आत्मा जगतस्तस्थुषश्च॥

    स्रोत: ऋग्वेद 1.115.1 (ऋषि कुत्स आंगिरस, देवता सूर्य)

    अर्थ: देवताओं का अद्भुत तेज-पुंज उदित हुआ है, जो मित्र, वरुण और अग्नि का नेत्र है। उसने आकाश, पृथ्वी और अंतरिक्ष को भर दिया है। सूर्य चलने वाले और ठहरे हुए, पूरे जगत की आत्मा हैं।

  3. 3तच्चक्षुर्देवहितं पुरस्ताच्छुक्रमुच्चरत्

    तच्चक्षुर्देवहितं पुरस्ताच्छुक्रमुच्चरत्।पश्येम शरदः शतं जीवेम शरदः शतं शृणुयाम शरदः शतंप्रब्रवाम शरदः शतमदीनाः स्याम शरदः शतं भूयश्च शरदः शतात्॥

    स्रोत: शुक्ल यजुर्वेद (वाजसनेयि माध्यन्दिन संहिता) 36.24

    अर्थ: देवताओं का प्रिय वह उज्ज्वल नेत्र, सूर्य, पूर्व में उदित हो रहा है। (उसकी कृपा से) हम सौ वर्ष देखें, सौ वर्ष जिएँ, सौ वर्ष सुनें, सौ वर्ष बोलें, सौ वर्ष किसी के आगे दीन न हों, और सौ वर्ष के बाद भी ऐसे ही रहें।

    महीधर के भाष्य के अनुसार इस मंत्र के देवता सूर्य हैं। रुद्राष्टाध्यायी के शान्ति-अध्याय और शुक्ल यजुर्वेदीय संध्या में भी यह मंत्र आता है।

  4. 4रश्मिमन्तं समुद्यन्तं देवासुरनमस्कृतम्

    रश्मिमन्तं समुद्यन्तं देवासुरनमस्कृतम्।पूजयस्व विवस्वन्तं भास्करं भुवनेश्वरम्॥

    स्रोत: आदित्यहृदय स्तोत्र, श्लोक 6 (वाल्मीकि रामायण, युद्धकाण्ड; गीता प्रेस संस्करण में सर्ग 105, दक्षिणी पाठ वाले संस्करणों में सर्ग 107)

    अर्थ: किरणों से भरे, उदय होते, देवताओं और असुरों दोनों से नमस्कृत, प्रकाश देने वाले, लोकों के स्वामी विवस्वान् सूर्य की पूजा करो।

    युद्ध से थके श्रीराम को अगस्त्य मुनि यह स्तोत्र सिखाते हैं।

  5. 5नमः पूर्वाय गिरये पश्चिमायाद्रये नमः

    नमः पूर्वाय गिरये पश्चिमायाद्रये नमः।ज्योतिर्गणानां पतये दिनाधिपतये नमः॥

    स्रोत: आदित्यहृदय स्तोत्र, श्लोक 16 (वाल्मीकि रामायण, युद्धकाण्ड; गीता प्रेस संस्करण में सर्ग 105, दक्षिणी पाठ वाले संस्करणों में सर्ग 107)

    अर्थ: पूर्व के पर्वत (जहाँ से आप उगते हैं) के रूप में आपको नमस्कार, पश्चिम के पर्वत (जहाँ आप डूबते हैं) के रूप में आपको नमस्कार; तारों-ग्रहों के समूह के स्वामी और दिन के अधिपति को नमस्कार।

    छठ में डूबते और उगते, दोनों सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है; यह श्लोक उदय और अस्त, दोनों के पर्वतों के रूप में सूर्य को नमस्कार करता है।

    पाठभेद: गोविन्दराज आदि की टीकाओं वाले संस्करण (सर्ग 107) में दूसरा चरण ‘पश्चिमे गिरये नमः’ है; गीता प्रेस और sanskritdocuments.org में ‘पश्चिमायाद्रये नमः’।

  6. 6जपाकुसुमसंकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम्

    जपाकुसुमसंकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम्।तमोऽरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम्॥

    स्रोत: नवग्रह स्तोत्र, श्लोक 1 (स्तोत्र स्वयं को ‘व्यासमुखोद्गीत’, यानी वेदव्यास का कहा हुआ बताता है)

    अर्थ: गुड़हल (जपा) के फूल जैसे लाल, कश्यप ऋषि के पुत्र, बड़ी आभा वाले, अँधेरे के शत्रु और सब पापों को मिटाने वाले दिवाकर (सूर्य) को मैं प्रणाम करता हूँ।

  7. 7आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर

    आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर।दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते॥

    स्रोत: सूर्याष्टक, श्लोक 1 (गीता प्रेस की स्तोत्ररत्नावली में ‘श्रीशिवप्रोक्त’; sanskritdocuments.org में वक्ता साम्ब)

    अर्थ: हे आदिदेव, आपको नमस्कार; हे भास्कर, मुझ पर प्रसन्न होइए। हे दिवाकर, आपको नमस्कार; हे प्रभाकर, आपको नमस्कार।

  8. 8एहि सूर्य सहस्रांशो तेजोराशे जगत्पते

    एहि सूर्य सहस्रांशो तेजोराशे जगत्पते।अनुकम्पय मां देव गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तु ते॥

    स्रोत: सूर्य को अर्घ्य का मंत्र: भविष्योत्तर पुराण का आदित्यहृदय (श्रीकृष्ण–अर्जुन संवाद), श्लोक 110, बृहत्स्तोत्ररत्नाकर (खेमराज) में

    अर्थ: हे सूर्य, हे हज़ारों किरणों वाले, हे तेज के भंडार, हे जगत के स्वामी! आइए, मुझ पर कृपा कीजिए, हे देव, यह अर्घ्य स्वीकार कीजिए; आपको नमस्कार।

    गीता प्रेस की ‘व्रत-परिचय’ पक्ष-व्रत में सूर्य को इसी मंत्र से तीन बार अर्घ्य देने को कहती है। छठ के किसी शास्त्रीय विधान में हमें यह मंत्र नहीं मिला।

    पाठभेद: गीता प्रेस की ‘व्रत-परिचय’ में अंतिम चरण ‘गृहाणार्घ्यं दिवाकर’ है।

  9. 9वरदायै पुत्रदायै धनदायै नमो नमः

    वरदायै पुत्रदायै धनदायै नमो नमः।सुखदायै मोक्षदायै षष्ठीदेव्यै नमो नमः॥

    स्रोत: षष्ठी देवी स्तोत्र (राजा प्रियव्रत की स्तुति), ब्रह्मवैवर्त पुराण, प्रकृति खंड, अध्याय 43, श्लोक 58

    अर्थ: वर देने वाली, संतान देने वाली, धन देने वाली देवी को बार-बार नमस्कार; सुख और मोक्ष देने वाली षष्ठी देवी को बार-बार नमस्कार।

    लोक परंपरा में छठी मैया को षष्ठी देवी माना जाता है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार प्रियव्रत की इसी स्तुति के बाद उन्हें पुत्र मिला।

    पाठभेद: sanskritdocuments.org की एक प्रति में दूसरी पंक्ति ‘सुखदायै मोक्षदायै च’ है।

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इन श्लोकों के बारे में

हर पाठ कम से कम दो अलग प्रकाशनों से शब्द-शब्द मिलाया गया है। जहाँ प्रकाशनों में अंतर है, वह ‘पाठभेद’ में लिखा है। श्लोक संख्या उसी प्रकाशन की है जिसका नाम स्रोत में है; दूसरे प्रकाशनों में संख्या कुछ आगे-पीछे हो सकती है। अर्थ हमने सरल भाषा में ख़ुद लिखे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूर्य को अर्घ्य देने का मंत्र क्या है?

‘एहि सूर्य सहस्रांशो तेजोराशे जगत्पते’ से आरंभ होने वाला श्लोक, जो खेमराज के बृहत्स्तोत्ररत्नाकर में भविष्योत्तर पुराण के आदित्यहृदय में और गीता प्रेस की ‘व्रत-परिचय’ में मिलता है। इनमें से कोई ग्रंथ इसे छठ से नहीं जोड़ता; यह सूर्य-अर्घ्य का सामान्य मंत्र है।

आदित्य हृदय स्तोत्र किस ग्रंथ में है?

वाल्मीकि रामायण के युद्धकाण्ड में, जहाँ अगस्त्य मुनि युद्ध से पहले श्रीराम को यह स्तोत्र देते हैं। गीता प्रेस के संस्करण में यह सर्ग 105 है, दक्षिणी पाठ वाले संस्करणों में सर्ग 107।

छठ पूजा 2026 कब है?

संध्या अर्घ्य 15 नवंबर 2026, रविवार को और उषा अर्घ्य 16 नवंबर, सोमवार को। नई दिल्ली में सूर्यास्त 5:28 PM और अगली सुबह सूर्योदय 6:44 AM पर है (पटना में 5:01 PM और 6:07 AM); अपने शहर का समय छठ पूजा के पन्ने पर देखें।

स्रोत

  1. ऋग्वेद: sanskritdocuments.org (r01, r03; Aufrecht/van Nooten–Holland पाठ), सातवलेकर का संस्करण और वैदिक संशोधन मंडल, पुणे (सायण भाष्य, खंड 2, 1936) (archive.org)
  2. शुक्ल यजुर्वेद: वाजसनेयि संहिता, महीधर के वेददीप सहित (सं. अल्ब्रेख्त वेबर, चौखम्बा) और sanskritdocuments.org: रुद्राष्टाध्यायी
  3. वाल्मीकि रामायण: गीता प्रेस (संस्कृत-अंग्रेज़ी, युद्धकाण्ड सर्ग 105), गोविन्दराज आदि की टीकाओं वाला संस्करण (सर्ग 107) और sanskritdocuments.org: adityahriday
  4. बृहत्स्तोत्ररत्नाकर (खेमराज, वेंकटेश्वर प्रेस) और sanskritdocuments.org: navanew; गीता प्रेस: स्तोत्ररत्नावली (सूर्याष्टक) और sanskritdocuments.org: sUryAShTakam; गीता प्रेस: व्रत-परिचय
  5. ब्रह्मवैवर्त पुराण, खेमराज श्रीकृष्णदास, मुंबई 1931 और sanskritdocuments.org: priyavratakRRitaMShaShThIdevIstotram

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