शारदीय नवरात्रि 2026: 11 से 19 अक्टूबर। नीचे 13 श्लोक हैं जो नवरात्रि पर शुभकामना के साथ भेजे जा सकते हैं, पहला ‘सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके’ (दुर्गा सप्तशती (मार्कण्डेय पुराण), अध्याय 11, नारायणी स्तुति, श्लोक 10)। हर श्लोक के नीचे उसका स्रोत और हमारा लिखा सरल अर्थ है; ‘कार्ड बनाएँ’ से वही श्लोक आपके नाम के साथ फ़ोटो कार्ड बन जाता है।
नवरात्रि का शुभकामना कार्ड बनाएँ
1सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
स्रोत: दुर्गा सप्तशती (मार्कण्डेय पुराण), अध्याय 11, नारायणी स्तुति, श्लोक 10
अर्थ: हे नारायणी! तुम सब मंगलों का भी मंगल हो, कल्याण करने वाली शिवा हो, हर उचित प्रयोजन पूरा करती हो। तुम शरण देने वाली, तीन नेत्रों वाली गौरी हो; तुम्हें नमस्कार।
2सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि
सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि।गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते॥
स्रोत: दुर्गा सप्तशती (मार्कण्डेय पुराण), अध्याय 11, नारायणी स्तुति, श्लोक 11
अर्थ: हे सनातनी नारायणी! सृष्टि, पालन और संहार की शक्ति तुम ही हो। तीनों गुण तुम पर टिके हैं और तुम उन्हीं से बनी हो; तुम्हें नमस्कार।
4सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते
सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते।भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥
स्रोत: दुर्गा सप्तशती (मार्कण्डेय पुराण), अध्याय 11, नारायणी स्तुति, श्लोक 24
अर्थ: सब रूपों में तुम हो, सबकी स्वामिनी हो, हर शक्ति तुममें है। हे देवी दुर्गा! हमें भय से बचाओ; तुम्हें नमस्कार।
5रोगानशेषानपहंसि तुष्टा
रोगानशेषानपहंसि तुष्टारुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।त्वामाश्रितानां न विपन्नराणांत्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥
स्रोत: दुर्गा सप्तशती (मार्कण्डेय पुराण), अध्याय 11, नारायणी स्तुति, श्लोक 29
अर्थ: देवताओं की स्तुति में कहा गया है: प्रसन्न होकर तुम सब रोग दूर कर देती हो, और रुष्ट हो तो मनचाही वस्तुएँ छिन जाती हैं। जो तुम्हारी शरण में हैं उन पर विपत्ति नहीं आती; तुम्हारे आश्रित दूसरों के लिए आश्रय बन जाते हैं।
6सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि
सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि।एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम्॥
स्रोत: दुर्गा सप्तशती (मार्कण्डेय पुराण), अध्याय 11, नारायणी स्तुति, श्लोक 39
अर्थ: हे अखिलेश्वरी! तीनों लोकों की सब बाधाएँ इसी तरह शांत करती रहो और हमारे शत्रुओं का नाश करती रहो। (यह देवताओं की प्रार्थना है; परंपरा में शत्रु का अर्थ भीतर के काम-क्रोध आदि भी लिया जाता है।)
पाठभेद: गीता प्रेस की पाद-टिप्पणी में ‘सर्वबाधा’ पाठ भी है।
7दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः
दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोःस्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्यासर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता॥
स्रोत: दुर्गा सप्तशती, अध्याय 4 (शक्रादि स्तुति), श्लोक 17
अर्थ: हे दुर्गा! याद करते ही तुम सब प्राणियों का भय हर लेती हो, और शांत मन से याद करने वालों को बहुत शुभ बुद्धि देती हो। दरिद्रता, दुख और भय हरने वाली! सबका भला करने के लिए सदा दया से भरे मन वाली तुम्हारे सिवा और कौन है?
8या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
स्रोत: दुर्गा सप्तशती, अध्याय 5 (अपराजिता स्तुति), श्लोक 32–34
अर्थ: जो देवी सब प्राणियों में शक्ति के रूप में रहती हैं, उन्हें नमस्कार, नमस्कार, बार-बार नमस्कार।
इस स्तुति में यही पंक्ति चेतना, बुद्धि, शांति, लक्ष्मी, माता आदि इक्कीस रूपों के साथ दोहराई गई है।
9या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
स्रोत: दुर्गा सप्तशती, अध्याय 5 (अपराजिता स्तुति), श्लोक 71–73
अर्थ: जो देवी सब प्राणियों में माता के रूप में रहती हैं, उन्हें नमस्कार, नमस्कार, बार-बार नमस्कार।
10या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता
या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
स्रोत: दुर्गा सप्तशती, अध्याय 5 (अपराजिता स्तुति), श्लोक 47–49
अर्थ: जो देवी सब प्राणियों में शांति के रूप में रहती हैं, उन्हें नमस्कार, नमस्कार, बार-बार नमस्कार।
11जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी
जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी।दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥
स्रोत: अर्गला स्तोत्र (दुर्गा सप्तशती के पाठ से पहले पढ़ा जाने वाला अंग), पहला श्लोक
अर्थ: जयन्ती (सबसे ऊपर विजयी), मंगला, काली, भद्रकाली, कपालिनी, दुर्गा, क्षमा, शिवा, धात्री (सबको धारण करने वाली), स्वाहा और स्वधा: इन नामों वाली देवी, तुम्हें नमस्कार।
पाठभेद: sanskritdocuments.org के पाठ में ‘दुर्गा शिवा क्षमा धात्री’ (नामों का क्रम अलग) है और यह दूसरा श्लोक गिना गया है। हमने गीता प्रेस का पाठ लिया है।
12देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्
देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥
स्रोत: अर्गला स्तोत्र (दुर्गा सप्तशती के पाठ से पहले पढ़ा जाने वाला अंग), श्लोक 12
अर्थ: मुझे सौभाग्य और आरोग्य दो, परम सुख दो। रूप दो, जय दो, यश दो और शत्रुओं को दूर करो। (गीता प्रेस का अनुवाद शत्रु का अर्थ काम-क्रोध आदि भी बताता है।)
पाठभेद: sanskritdocuments.org के पाठ में ‘देहि देवि परं सुखम्’ है और यह श्लोक 13 गिना गया है।
इन श्लोकों के बारे में
हर पाठ कम से कम दो अलग प्रकाशनों से शब्द-शब्द मिलाया गया है। जहाँ प्रकाशनों में अंतर है, वह ‘पाठभेद’ में लिखा है। श्लोक संख्या उसी प्रकाशन की है जिसका नाम स्रोत में है; दूसरे प्रकाशनों में संख्या कुछ आगे-पीछे हो सकती है। अर्थ हमने सरल भाषा में ख़ुद लिखे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नवरात्रि पर कौन सा संस्कृत श्लोक भेजें?
सबसे अधिक ‘सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके’ भेजा जाता है। यह दुर्गा सप्तशती के 11वें अध्याय की नारायणी स्तुति का दसवाँ श्लोक है, जिसमें देवी को सब मंगलों का मंगल कहा गया है।
‘या देवी सर्वभूतेषु’ किस ग्रंथ में है?
दुर्गा सप्तशती के पाँचवें अध्याय में देवताओं की स्तुति (अपराजिता स्तुति) में। इसमें यही पंक्ति चेतना, बुद्धि, शक्ति, शांति, माता आदि इक्कीस रूपों के साथ आती है।
नवरात्रि 2026 कब से है?
शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर, रविवार से 19 अक्टूबर तक है; दशहरा 20 अक्टूबर को। घटस्थापना का मुहूर्त अपने शहर के लिए नवरात्रि के पन्ने पर देखें।
स्रोत
- गीता प्रेस, गोरखपुर: श्रीदुर्गासप्तशती, हिंदी अनुवाद सहित (archive.org: shri-durga-saptashati-hindi)
- sanskritdocuments.org: Devi Mahatmyam / Durga Saptashati (durga700) और अर्गला स्तोत्र (argalaastotra)
- देवी कवच के स्रोत: हमारे दुर्गा कवच पन्ने की जाँच (गीता प्रेस, sanskritdocuments.org, विकिस्रोत)
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