भाई दूज शुभकामना श्लोक

भाई दूज (यम द्वितीया) पर भेजने के लिए यम और यमुना के श्लोक: निर्णयसिन्धु में उद्धृत यम द्वितीया के वचन, बहन के भोजन परोसने का मंत्र, यम को अर्घ्य का मंत्र और श्री रूप गोस्वामी का यमुनाष्टक, हर एक के साथ स्रोत और सरल अर्थ। हर पाठ हमने दो अलग-अलग प्रकाशनों से शब्द-शब्द मिलाया है।

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 2 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ
भाई दूज: भाई दूज 2026: 11 नवंबर, बुधवार
चित्र: AI से बनाया गया
संक्षेप में

भाई दूज 2026: 11 नवंबर, बुधवार। नीचे 7 श्लोक हैं जो भाई दूज पर शुभकामना के साथ भेजे जा सकते हैं, पहला ‘कार्तिके शुक्लपक्षस्य द्वितीयायां युधिष्ठिर’ (निर्णयसिन्धु (कमलाकर भट्ट), यम द्वितीया (कार्तिक शुक्ल द्वितीया) का प्रसंग, ‘भविष्य’ (भविष्य पुराण) के नाम से उद्धृत)। हर श्लोक के नीचे उसका स्रोत और हमारा लिखा सरल अर्थ है; ‘कार्ड बनाएँ’ से वही श्लोक आपके नाम के साथ फ़ोटो कार्ड बन जाता है।

भाई दूज का शुभकामना कार्ड बनाएँ

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  1. 1कार्तिके शुक्लपक्षस्य द्वितीयायां युधिष्ठिर

    कार्तिके शुक्लपक्षस्य द्वितीयायां युधिष्ठिर।यमो यमुनया पूर्वं भोजितः स्वगृहेऽर्चितः॥अतो यमद्वितीयेयं त्रिषु लोकेषु विश्रुता॥

    स्रोत: निर्णयसिन्धु (कमलाकर भट्ट), यम द्वितीया (कार्तिक शुक्ल द्वितीया) का प्रसंग, ‘भविष्य’ (भविष्य पुराण) के नाम से उद्धृत

    अर्थ: हे युधिष्ठिर! कार्तिक शुक्ल द्वितीया को पहले यमुना ने यम का अपने घर में सत्कार किया और उन्हें भोजन कराया था। इसी से यह तिथि तीनों लोकों में ‘यम द्वितीया’ के नाम से प्रसिद्ध है।

  2. 2स्नेहेन भगिनीहस्ताद्भोक्तव्यं पुष्टिवर्धनम्

    स्नेहेन भगिनीहस्ताद्भोक्तव्यं पुष्टिवर्धनम्।दानानि च प्रदेयानि भगिनीभ्यो विधानतः॥

    स्रोत: निर्णयसिन्धु (कमलाकर भट्ट), यम द्वितीया (कार्तिक शुक्ल द्वितीया) का प्रसंग, उसी उद्धरण में

    अर्थ: इस दिन बहन के हाथ से प्रेमपूर्वक भोजन करना चाहिए, जो बल और पुष्टि बढ़ाता है; और विधि के अनुसार बहनों को उपहार देने चाहिए।

    इससे ठीक पहले वहाँ कहा गया है कि इस दिन अपने घर भोजन न करें; आगे सोने के गहने, वस्त्र और भोजन से सब बहनों के सत्कार की बात है।

  3. 3यस्यां तिथौ यमुनया यमराजदेवः

    यस्यां तिथौ यमुनया यमराजदेवःसंभोजितः प्रतिजगत्स्वसृसौहृदेन।तस्यां स्वसुः करतलादिह यो भुनक्तिप्राप्नोति रत्नसुखधान्यमनुत्तमं सः॥

    स्रोत: निर्णयसिन्धु (कमलाकर भट्ट), यम द्वितीया (कार्तिक शुक्ल द्वितीया) का प्रसंग, उसी प्रसंग में उद्धृत

    अर्थ: जिस तिथि को यमुना ने बहन के स्नेह से यमराज को भोजन कराया था, उस दिन जो अपनी बहन के हाथ से भोजन करता है, श्लोक कहता है कि उसे रत्न, सुख और अन्न का उत्तम फल मिलता है।

  4. 4एह्येहि मार्तण्डज पाशहस्त यमान्तकालोकधरामरेश

    एह्येहि मार्तण्डज पाशहस्त यमान्तकालोकधरामरेश।भ्रातृद्वितीयाकृतदेवपूजां गृहाण चार्घ्यं भगवन्नमस्ते॥

    स्रोत: निर्णयसिन्धु (कमलाकर भट्ट), यम द्वितीया (कार्तिक शुक्ल द्वितीया) का प्रसंग: गौड़ (बंगाल के) निबंधकारों का यम को अर्घ्य देने का मंत्र

    अर्थ: आइए, आइए, हे सूर्यपुत्र, हाथ में पाश लिए हे यम, हे अंतक, लोकों को धारण करने वाले देवेश्वर! भ्रातृ द्वितीया पर की गई यह पूजा और यह अर्घ्य स्वीकार कीजिए; हे भगवन्, आपको नमस्कार।

    निर्णयसिन्धु के अनुसार गौड़ परंपरा में इस दिन यम, चित्रगुप्त और यमदूतों की पूजा होती है और भाई-बहन मिलकर यम को अर्घ्य देते हैं।

  5. 5भ्रातस्तवानुजाताहं भुङ्क्ष्व भक्तमिदं शुभम्

    भ्रातस्तवानुजाताहं भुङ्क्ष्व भक्तमिदं शुभम्।प्रीतये यमराजस्य यमुनायां विशेषतः॥

    स्रोत: निर्णयसिन्धु (कमलाकर भट्ट), यम द्वितीया (कार्तिक शुक्ल द्वितीया) का प्रसंग: भोजन परोसते समय बहन का वचन

    अर्थ: भैया, मैं तुम्हारी छोटी बहन हूँ। यमराज की, और विशेष रूप से यमुना जी की प्रसन्नता के लिए यह शुभ भोजन ग्रहण करो।

    निर्णयसिन्धु के अनुसार स्मार्त कहते हैं कि बड़ी बहन ‘अनुजाताहं’ (मैं छोटी हूँ) की जगह ‘अग्रजाताहं’ (मैं बड़ी हूँ) कहे।

  6. 6ऊर्जे शुक्ले द्वितीयायां पूजितस्तर्पितो यमः

    ऊर्जे शुक्ले द्वितीयायां पूजितस्तर्पितो यमः।वेष्टितः किन्नरैर्हृष्टैस्तस्मै यच्छति वाञ्छितम्॥

    स्रोत: निर्णयसिन्धु (कमलाकर भट्ट), यम द्वितीया (कार्तिक शुक्ल द्वितीया) का प्रसंग, हेमाद्रि द्वारा स्कन्द पुराण से उद्धृत

    अर्थ: श्लोक कहता है: कार्तिक (ऊर्ज) मास की शुक्ल द्वितीया को पूजा और तर्पण से प्रसन्न यम, प्रसन्न किन्नरों से घिरे हुए, पूजा करने वाले को मनचाहा फल देते हैं।

  7. 7भ्रातुरन्तकस्य पत्तनेऽभिपत्तिहारिणी

    भ्रातुरन्तकस्य पत्तनेऽभिपत्तिहारिणीप्रेक्षयातिपापिनोऽपि पापसिन्धुतारिणी।नीरमाधुरीभिरप्यशेषचित्तबन्धिनीमां पुनातु सर्वदारविन्दबन्धुनन्दिनी॥

    स्रोत: श्रीयमुनाष्टक, श्लोक 1 (श्री रूप गोस्वामी की स्तवमाला से)

    अर्थ: जो अपने भाई अंतक (यम) के नगर में पहुँचने से बचाती हैं, जो दर्शन मात्र से बड़े पापी को भी पापों के सागर से पार कर देती हैं, जिनके जल की मधुरता सबका मन बाँध लेती है, कमलों के मित्र सूर्य की वे पुत्री यमुना मुझे सदा पवित्र करें।

    जीव गोस्वामी की टीका में ‘भ्रातुरन्तकस्य’ का अर्थ है: यमुना के बड़े भाई धर्मराज यम।

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इन श्लोकों के बारे में

हर पाठ कम से कम दो अलग प्रकाशनों से शब्द-शब्द मिलाया गया है। जहाँ प्रकाशनों में अंतर है, वह ‘पाठभेद’ में लिखा है। श्लोक संख्या उसी प्रकाशन की है जिसका नाम स्रोत में है; दूसरे प्रकाशनों में संख्या कुछ आगे-पीछे हो सकती है। अर्थ हमने सरल भाषा में ख़ुद लिखे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भाई दूज को यम द्वितीया क्यों कहते हैं?

निर्णयसिन्धु भविष्य पुराण के नाम से कहता है कि कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमुना ने अपने भाई यम का अपने घर सत्कार करके उन्हें भोजन कराया था, इसलिए यह तिथि यम द्वितीया कहलाती है। पूरा श्लोक अर्थ सहित ऊपर है।

भाई दूज पर भोजन कराते समय बहन क्या कहती है?

निर्णयसिन्धु यह वचन देता है: ‘भ्रातस्तवानुजाताहं भुङ्क्ष्व भक्तमिदं शुभम्। प्रीतये यमराजस्य यमुनायां विशेषतः॥’ (भैया, मैं तुम्हारी छोटी बहन हूँ, यह शुभ भोजन ग्रहण करो)। बड़ी बहन ‘अनुजाताहं’ की जगह ‘अग्रजाताहं’ कहती है।

भाई दूज 2026 कब है?

भाई दूज 11 नवंबर 2026, बुधवार को है। नई दिल्ली में अपराह्न काल (तिलक का समय) 1:09 PM से 3:19 PM तक है; अपने शहर का समय भाई दूज के पन्ने पर या कार्ड बनाते समय देखें।

स्रोत

  1. निर्णयसिन्धु (कमलाकर भट्ट): निर्णयसागर प्रेस, मुंबई 1901 और खेमराज श्रीकृष्णदास, मुंबई 1927 (archive.org)
  2. स्तवमाला (श्री रूप गोस्वामी), जीव गोस्वामी की टीका सहित, काव्यमाला, निर्णयसागर प्रेस (archive.org) और sanskritdocuments.org: yamunAShTakam10

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