दीपावली 2026 में 8 नवंबर, रविवार को है। यह कार्तिक अमावस्या को मनाई जाती है। मुख्य लक्ष्मी पूजा शाम को प्रदोष काल में, स्थिर (वृषभ) लग्न रहते और अमावस्या तिथि में की जाती है। अपने शहर का मुहूर्त नीचे देखें। दीपोत्सव धनतेरस से भाई दूज तक पाँच दिन चलता है।
एक नज़र में
- तिथि
- कार्तिक अमावस्या
- मुख्य पूजा
- लक्ष्मी-गणेश पूजा
- पूजा का समय
- प्रदोष काल में स्थिर (वृषभ) लग्न, अमावस्या रहते
- रात्रि
- निशीथ काल में महालक्ष्मी और काली पूजा (कई परंपराओं में)
- पाँच दिन
- धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज
- कथाएँ
- समुद्र मंथन से लक्ष्मी का प्राकट्य; श्रीराम का अयोध्या लौटना
लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त कैसे तय होता है
सूर्यास्त के बाद रात्रि के पहले पाँचवें भाग को प्रदोष काल कहते हैं। इस दौरान जब वृषभ लग्न उदय हो रहा हो, वह स्थिर लग्न है; मान्यता है कि स्थिर लग्न में की गई पूजा से लक्ष्मी घर में स्थिर रहती हैं। मुहूर्त वह समय है जब प्रदोष काल, वृषभ लग्न और अमावस्या तिथि तीनों साथ हों। लग्न हर शहर में अलग समय पर उदय होता है, इसलिए ऊपर अपना शहर चुनें।
पाँच दिन का दीपोत्सव
धनतेरस
कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी: धन्वंतरि, लक्ष्मी और कुबेर की पूजा, यम दीपदान।
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)
कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी: श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध की स्मृति; सुबह अभ्यंग स्नान।
भागवत पुराण 10.59दीपावली
कार्तिक अमावस्या: लक्ष्मी-गणेश पूजा और दीप जलाना।
गोवर्धन पूजा
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा: श्रीकृष्ण के गोवर्धन पर्वत उठाने की स्मृति; अन्नकूट।
भागवत पुराण 10.24–25भाई दूज
कार्तिक शुक्ल द्वितीया (यम द्वितीया): भाई-बहन का पर्व।
लोक परंपराक्यों मनाते हैं
लक्ष्मी का प्राकट्य
भागवत पुराण के अनुसार समुद्र मंथन से लक्ष्मी प्रकट हुईं और उन्होंने भगवान विष्णु का वरण किया। दीपावली पर लक्ष्मी की पूजा समृद्धि की कामना से होती है।
भागवत पुराण 8.8श्रीराम का अयोध्या लौटना
उत्तर भारत की परंपरा में दीपावली को रावण-वध के बाद श्रीराम के अयोध्या लौटने के उत्सव के रूप में मनाया जाता है, जब नगरवासियों ने दीप जलाए।
लोक परंपरापूजा विधि
- चरण 1
तैयारी
घर की सफ़ाई, रंगोली, द्वार पर तोरण और दीपक।
- चरण 2
पूजा स्थान
चौकी पर लक्ष्मी और गणेश की प्रतिमा या चित्र, जल से भरा कलश और दीपक।
- चरण 3
मुहूर्त में पूजा
संकल्प के बाद पहले गणेश, फिर लक्ष्मी की पूजा; श्रीसूक्त या लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ।
- चरण 4
बही-खाता पूजन
व्यापारी परिवारों में नए बही-खाते और तिजोरी की पूजा।
- चरण 5
दीपदान
पूजा के बाद पूरे घर, आँगन और द्वार पर दीप जलाएँ।

समुद्र मंथन से लक्ष्मी
देवताओं और असुरों ने अमृत के लिए मंदराचल पर्वत को मथानी और वासुकि नाग को रस्सी बनाकर क्षीरसागर को मथा। मंथन से अनेक रत्न निकले, जिनमें कमल पर विराजमान लक्ष्मी भी थीं। सब देवताओं को देखकर लक्ष्मी ने भगवान विष्णु के गले में वरमाला डाली, और विष्णु ने उन्हें अपने वक्षस्थल पर स्थान दिया।
भागवत पुराण 8.7–8.8श्लोक
हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥ज्ञान-ग्राफ़ में दीपावली
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दिवाली 2026 कब है?
8 नवंबर, रविवार को।
लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
जब प्रदोष काल, वृषभ लग्न और अमावस्या तिथि तीनों साथ हों। ऊपर अपने शहर का समय देखें।
निशीथ काल की पूजा क्या है?
रात्रि को 15 मुहूर्तों में बाँटने पर आठवाँ मुहूर्त निशीथ काल है। कई परंपराओं में, विशेषकर बंगाल में, इस समय महालक्ष्मी और काली पूजा होती है।
दिवाली कितने दिन की होती है?
पाँच दिन: धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज।
स्रोत
- भागवत पुराण 8.7–8.8 (समुद्र मंथन और लक्ष्मी)
- भागवत पुराण 10.59 (नरकासुर वध) और 10.24–25 (गोवर्धन)
- श्रीसूक्त (ऋग्वेद खिल सूक्त)
- लोक परंपरा
- मुहूर्त और चंद्रोदय: SanatanBodh पंचांग गणना, Drik Panchang (नई दिल्ली, 2026–27) से मिलान
कुछ गलत लगा? गलती बताएँ