दशहरा शुभकामना श्लोक

दशहरे पर भेजने के लिए शमी पूजन का मंत्र, रामरक्षा स्तोत्र, रामचरितमानस, भगवद्गीता और मुण्डक उपनिषद् से श्लोक और चौपाइयाँ, हर एक के साथ स्रोत और सरल अर्थ। हर पाठ हमने दो अलग-अलग प्रकाशनों से शब्द-शब्द मिलाया है।

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 5 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ
दशहरा: विजयादशमी 2026: 20 अक्टूबर, मंगलवार
चित्र: AI से बनाया गया
संक्षेप में

विजयादशमी 2026: 20 अक्टूबर, मंगलवार। नीचे 11 श्लोक हैं जो दशहरा पर शुभकामना के साथ भेजे जा सकते हैं, पहला ‘शमी शमयते पापं शमी लोहितकण्टका’ (शमी पूजन का मंत्र: निर्णयसिन्धु, विजयादशमी का प्रकरण, जहाँ इसे भविष्य पुराण से उद्धृत किया गया है)। हर श्लोक के नीचे उसका स्रोत और हमारा लिखा सरल अर्थ है; ‘कार्ड बनाएँ’ से वही श्लोक आपके नाम के साथ फ़ोटो कार्ड बन जाता है।

दशहरा का शुभकामना कार्ड बनाएँ

  1. 1शमी शमयते पापं शमी लोहितकण्टका

    शमी शमयते पापं शमी लोहितकण्टका।धारिण्यर्जुनबाणानां रामस्य प्रियवादिनी॥करिष्यमाणयात्रायां यथाकालं सुखं मया।तत्र निर्विघ्नकर्त्री त्वं भव श्रीरामपूजिते॥

    स्रोत: शमी पूजन का मंत्र: निर्णयसिन्धु, विजयादशमी का प्रकरण, जहाँ इसे भविष्य पुराण से उद्धृत किया गया है

    अर्थ: शमी पाप को शांत करती है; शमी के काँटे लाल हैं। तुमने अर्जुन के बाण धारण किए थे और राम से प्रिय वचन कहे थे। हे श्रीराम से पूजित शमी! जो यात्रा मैं करने जा रहा हूँ, उसमें समय पर सुख से और बिना विघ्न के पूरी कराना।

    निर्णयसिन्धु के अनुसार दशहरे पर शमी वृक्ष की पूजा में यह मंत्र पढ़ा जाता है। कथा के अनुसार पांडवों ने अज्ञातवास में अपने शस्त्र शमी पर रखे थे।

    पाठभेद: कार्डों और वेबसाइटों पर अक्सर दूसरा रूप मिलता है: ‘शमी शमयते पापं शमी शत्रुविनाशिनी। अर्जुनस्य धनुर्धारी रामस्य प्रियदर्शिनी॥’ हमें यह किसी ग्रंथ में नहीं मिला, इसलिए हमने निर्णयसिन्धु का पाठ लिया है।

  2. 2रामो राजमणिः सदा विजयते रामं रमेशं भजे

    रामो राजमणिः सदा विजयते रामं रमेशं भजेरामेणाभिहता निशाचरचमू रामाय तस्मै नमः।रामान्नास्ति परायणं परतरं रामस्य दासोऽस्म्यहंरामे चित्तलयः सदा भवतु मे भो राम मामुद्धर॥

    स्रोत: श्रीरामरक्षा स्तोत्र (बुधकौशिक ऋषि), श्लोक 37

    अर्थ: राजाओं में मणि जैसे राम सदा विजयी हैं; मैं लक्ष्मीपति राम को भजता हूँ। राम ने राक्षसों की सेना का नाश किया; उन राम को नमस्कार। राम से बढ़कर कोई सहारा नहीं; मैं राम का दास हूँ। मेरा मन सदा राम में लगा रहे; हे राम, मेरा उद्धार करो।

  3. 3रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे

    रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे।रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः॥

    स्रोत: श्रीरामरक्षा स्तोत्र (बुधकौशिक ऋषि), श्लोक 27

    अर्थ: राम, रामभद्र, रामचन्द्र, सबके विधाता, रघुकुल के नाथ, सबके स्वामी और सीता के पति को नमस्कार।

  4. 4लोकाभिरामं रणरङ्गधीरं

    लोकाभिरामं रणरङ्गधीरंराजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्।कारुण्यरूपं करुणाकरं तंश्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये॥

    स्रोत: श्रीरामरक्षा स्तोत्र (बुधकौशिक ऋषि), श्लोक 32

    अर्थ: जो सब लोगों को आनंद देते हैं, युद्ध में धीर रहते हैं, कमल जैसे नेत्रों वाले हैं, रघुवंश के स्वामी हैं, करुणा का रूप और करुणा के भंडार हैं, उन श्रीरामचन्द्र की मैं शरण लेता हूँ।

  5. 5आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम्

    आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम्।लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम्॥

    स्रोत: श्रीरामरक्षा स्तोत्र (बुधकौशिक ऋषि), श्लोक 35

    अर्थ: जो विपत्तियाँ हरते हैं और हर तरह की संपदा देते हैं, सब लोगों को आनंद देने वाले उन श्रीराम को मैं बार-बार नमस्कार करता हूँ।

  6. 6सौरज धीरज तेहि रथ चाका। सत्य सील दृढ़ ध्वजा पताका

    सौरज धीरज तेहि रथ चाका। सत्य सील दृढ़ ध्वजा पताका॥बल बिबेक दम परहित घोरे। छमा कृपा समता रजु जोरे॥

    स्रोत: श्रीरामचरितमानस (गोस्वामी तुलसीदास), लंकाकाण्ड, दोहा 79 के बाद की तीसरी चौपाई

    अर्थ: रावण रथ पर है और राम बिना रथ के, यह देखकर विभीषण चिंतित होते हैं। तब राम जिस रथ से जीत होती है उसे बताते हैं: शौर्य और धैर्य उसके पहिए हैं, सत्य और शील उसकी मज़बूत ध्वजा-पताका हैं; बल, विवेक, इंद्रियों का संयम और दूसरों का हित उसके घोड़े हैं, जो क्षमा, दया और समता की रस्सी से जुते हैं।

    यह ‘धर्मरथ’ का प्रसंग है। आगे राम कहते हैं कि ऐसा धर्ममय रथ जिसके पास हो, उसके लिए जीतने को कहीं कोई शत्रु नहीं, और दोहा 80 (क) के अनुसार वह संसार जैसे अजेय शत्रु को भी जीत सकता है।

  7. 7मंगल भवन अमंगल हारी

    मंगल भवन अमंगल हारी।द्रवउ सो दसरथ अजिर बिहारी॥

    स्रोत: श्रीरामचरितमानस, बालकाण्ड, दोहा 111 के बाद की दूसरी चौपाई (उत्तरार्ध)

    अर्थ: जो मंगल के धाम हैं और अमंगल को हरते हैं, दशरथ जी के आँगन में खेलने वाले वे (बालरूप) श्रीराम मुझ पर कृपा करें।

    पाठभेद: गीता प्रेस में ‘द्रवउ’ है, विजया टीका (विजयानंद त्रिपाठी) में ‘द्रवौ’।

  8. 8यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत

    यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥

    स्रोत: श्रीमद्भगवद्गीता 4.7

    अर्थ: श्रीकृष्ण कहते हैं: हे भारत (अर्जुन)! जब-जब धर्म घटता है और अधर्म बढ़ता है, तब-तब मैं स्वयं को प्रकट करता हूँ।

  9. 9परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्

    परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे॥

    स्रोत: श्रीमद्भगवद्गीता 4.8

    अर्थ: सज्जनों की रक्षा, बुरे कर्म करने वालों के नाश और धर्म को फिर से स्थापित करने के लिए मैं युग-युग में प्रकट होता हूँ।

  10. 10यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः

    यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः।तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम॥

    स्रोत: श्रीमद्भगवद्गीता 18.78 (गीता का अंतिम श्लोक, संजय के वचन)

    अर्थ: संजय कहते हैं: जहाँ योगेश्वर कृष्ण हैं और जहाँ धनुर्धारी अर्जुन हैं, वहीं श्री, विजय, उन्नति और अटल नीति है; ऐसा मेरा मत है।

  11. 11सत्यमेव जयते नानृतं

    सत्यमेव जयते नानृतंसत्येन पन्था विततो देवयानः।येनाक्रमन्त्यृषयो ह्याप्तकामायत्र तत्सत्यस्य परमं निधानम्॥

    स्रोत: मुण्डक उपनिषद् 3.1.6 (तीसरा मुण्डक, पहला खण्ड, मंत्र 6)

    अर्थ: सत्य की ही जीत होती है, असत्य की नहीं। सत्य से ही देवयान का मार्ग बिछा है, जिस पर इच्छाएँ पूरी कर चुके ऋषि वहाँ पहुँचते हैं जहाँ सत्य का परम भंडार है।

    ‘सत्यमेव जयते’ भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य है।

    पाठभेद: sanskritdocuments.org पहली पंक्ति में ‘जयते’ के साथ ‘जयति’ पाठ भी देता है।

इन श्लोकों के बारे में

हर पाठ कम से कम दो अलग प्रकाशनों से शब्द-शब्द मिलाया गया है। जहाँ प्रकाशनों में अंतर है, वह ‘पाठभेद’ में लिखा है। श्लोक संख्या उसी प्रकाशन की है जिसका नाम स्रोत में है; दूसरे प्रकाशनों में संख्या कुछ आगे-पीछे हो सकती है। अर्थ हमने सरल भाषा में ख़ुद लिखे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दशहरे पर शमी पूजन का मंत्र क्या है?

निर्णयसिन्धु भविष्य पुराण से यह मंत्र देता है: ‘शमी शमयते पापं शमी लोहितकण्टका। धारिण्यर्जुनबाणानां रामस्य प्रियवादिनी॥’ और आगे यात्रा निर्विघ्न होने की प्रार्थना। पूरा मंत्र अर्थ सहित ऊपर है।

‘सत्यमेव जयते’ किस ग्रंथ से है?

मुण्डक उपनिषद् के तीसरे मुण्डक के पहले खण्ड के छठे मंत्र (3.1.6) से। यही भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य है।

दशहरा 2026 कब है?

विजयादशमी 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को है। विजय मुहूर्त अपने शहर के लिए दशहरा के पन्ने पर या कार्ड बनाते समय देखें।

स्रोत

  1. निर्णयसिन्धु (कमलाकर भट्ट): निर्णयसागर प्रेस, मुंबई 1901 और खेमराज श्रीकृष्णदास, मुंबई 1927 (archive.org)
  2. गीता प्रेस: स्तोत्ररत्नावली (श्रीरामरक्षा स्तोत्र) और sanskritdocuments.org: rraksha
  3. गीता प्रेस: श्रीरामचरितमानस, और विजया टीका (विजयानंद त्रिपाठी) (archive.org)
  4. गीता प्रेस: श्रीमद्भगवद्गीता, और sanskritdocuments.org: bhagvadnew
  5. sanskritdocuments.org: मुण्डकोपनिषत्; विकिपीडिया: Satyameva Jayate (मुण्डक 3.1.6)

कुछ गलत लगा? गलती बताएँ